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अंकल के लंड को मिली कुंवारी चुत 1

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अंकल के लंड को मिली कुंवारी चुत 1 1

. यहां मैं बता दूं कि मेरा घर विराज खंड गोमती नगर के एक कोने में है.
अभी मेरे घर के आस-पास सिर्फ तीन मक़ान हैं … सो किसी के आने-जाने पर कोई ज्यादा ध्यान नहीं देता.
मीता- पर आप तो रहोगे ना! मैं- हां, पर मैं दूसरे कमरे में रहूंगा.
तुम रूम लॉक कर लेना.
मेरे रहने से तुम दोनों पर कोई शक भी नहीं करेगा और तुम सेफ भी रहोगी.
मीता- हम्म … पर … मैं- देखो … मुझे पता है कि तुम मेरे घर क्यों आ रही हो … और वहां क्या करोगी.
पर ये बात मेरे और तुम्हारे बीच रहेगी, सो तुम इस बात को लेकर हमेशा बेफिक्र रहना कि तुम्हारा राज हम दोनों का राज रहेगा.
मीता- आपको बुरा नहीं लगेगा.
मैं- मुझे बुरा क्यों लगेगा.
अब तुम मेरे जैसे अपने से दस साल बड़े इंसान के साथ तो वो सब करोगी नहीं … तुमको अपनी ही उम्र के साथ वाले के साथ करना है, सो मुझे कुछ बुरा नहीं लगेगा.
अब तक हम दोनों ही समझ चुके थे कि मैं उसको सेक्स की मौज मस्ती के लिए अपना घर उसको दे रहा हूं.
मीता- ओह्ह … बहुत देर हो गई.
… अब मैं चलती हूँ.
मैं- ये मेरा मोबाइल नंबर है … कोई बात हो, तो बात कर लेना.
ये कह कर मैंने उसको एक कागज पर मोबाइल नंबर दे दिया.
मीता के जाने के मैंने सोचा कि दाना तो डाल दिया है, अब इसको खिलाया कैसे जाए.
क्योंकि ये मुझे समझ ही गया था कि मीता की चूत बहुत गर्म हो रही है और ऐसी गर्म चूत को वो मरियल सा लड़का सम्भाल नहीं सकता … जल्दी ही ढेर हो जाएगा.
अगली सुबह मेरा परिवार मेरी ससुराल चला गया था.
अब मैं अकेला था.
तभी मीता का फ़ोन आया- आप कहां हो? मैं- मैं घर पर ही हूं, बाइक की चाभी नहीं मिल रही है … तो लेट हो गया.
मीता- ओह्ह … मैं आ जाऊं आपको लेने! मैं- आ जाओ, यदि तुमको कोई दिक्कत ना हो.
मीता- ओके … मैं बस आ रही हूं.
मैंने उसको घर की लोकेशन समझाई और उसका इंतज़ार करने लगा.
थोड़ी ही देर में मीता आ गई.
मैं- हैलो.
मीता- हैलो … चलें? मीता ने आज ब्लैक जींस और एक पीले रंग की टाइट सी शर्ट पहनी थी.
उसकी ब्रा की लाइन बाहर से ही साफ नजर आ रही थी.
टाईट जींस में उसकी गांड भी मस्त लग रही थी.
मैं- अरे अन्दर तो आओ.
… पहली बार आई हो, कुछ पी कर तो जाओ … बाहर बहुत धूप भी है.
मीता जब अन्दर आई, तो मैंने तेज डीओ की महक महसूस की.
मैंने उसको जूस दिया और अपना घर दिखाने लगा.
मैं उसको बच्चों का कमरा दिखा कर बोला- ये कमरा मैंने तुम्हारे लिए बुक कर दिया है.
तुम जब चाहो, आ सकती हो.
इस कमरे सब कुछ है.
… तुम जैसे चाहो एन्जॉय कर सकती हो.
तुम्हें कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा.
मीता- मैं अभी वर्जिन हूँ, आपको लगता है कि मुझे ये सब अभी इस उम्र में एन्जॉय करना चाहिए? मैं- देखो यदि तुमको लगता है कि तुमको सेक्स की जरूरत है, तो जरूर करो.
हां अगर कोई डर है तो अलग बात है.
मैंने आज जानबूझ कर मीता से बात कहते हुए सेक्स शब्द का इस्तेमाल किया था.
ये उसको ओपन करने के लिए मेरा सोच था.
मीता चौंक कर बोली- सेक्स..! फिर कुछ रुक कर वो बोली- मेरा तो मन करता है … पर डर लगता है कि कुछ गड़बड़ ना हो जाए.
एक बात जरूर समझ में आई कि मीता सेक्स की बात पर कहीं से शर्मा नहीं रही थी.
इस बात से ये तो मुझे समझ में आ रहा था कि उसको एक अदद लंड की कितनी जरूरत है.
मैं- देखो, वर्जिन गर्ल को पहली बार में तो दर्द होता है … पर बाद में सब ठीक हो जाता है.
अब ये सब तुम्हारे दोस्त पर निर्भर है कि वो तुम्हारे साथ कैसे सेक्स करता है.
हां कोई गड़बड़ न हो, इसके लिए सेक्स करते समय कंडोम जरूर यूज करना.
अब मैं खुल कर सब बात करने लगा था.
मेरी कोशिश थी कि वो मुझसे खुल जाए और मेरी कोशिश कामयाब भी रही.
मीता मुझसे सेक्स के विषय में बात करने लगी थी.
मीता- बहुत दर्द होता है क्या.
… वो लड़का मुझे धोखा तो नहीं देगा … या मेरे साथ बाद में ब्लैकमेल तो नहीं करेगा … या फिर मुझे अपने दोस्तों में या कॉलेज में बदनाम तो नहीं करेगा? जैसा कि लड़कों की आदत होती है, वो अपने दोस्तों में डींग मारते हुए सब खोल देता है.
मैं- हां दर्द तो होता है … पर सेक्स को आराम से किया जाए, तो दर्द बहुत कम होता है.
रही बात उस लड़के की कि धोखा देगा या नहीं … मुझे नहीं पता.
पर ब्लैकमेल नहीं कर पाएगा.
ये मैं कह सकता हूं.
क्या उसका भी पहली बार है? मीता- हां मैं- उसने कभी किस करते हुए तुम्हारी चूची दबाई है और तुमने उसका लंड पकड़ा है? मैंने जानबूझ कर एक कदम आगे जाकर लंड चूची जैसे शब्द बोले.
मुझे देखना था कि मीता कैसे रियेक्ट करती है.
मीता ये सब सुन कर मेरी तरफ से आंखें चुराने लगी.
उसका मुँह शर्म लाल हो गया था.
वो बहुत देर तक कुछ नहीं बोली.
फिर मैंने बोला- मीता बोलो न … क्या तुमने उसका लंड देखा है? या उसने तुम्हारी चूचियों को दबाया है? मीता फिर भी चुप रही.
फिर उसने मेरी तरफ देखा और शरमाते हुए बोली- हां उसने मेरे दबाए है, पर मैंने उसका न ही देखा है … न छुआ है.
मैं- जब उसने पहली बार तुम्हारी चूची छुई थी, तो तुमको कैसा लगा था? मीता- बहुत अजीब सा लगा था … पर अच्छा भी लगा था.
एक सिहरन सी हो रही थी.
कई दिन तक ऐसा लगता रहा था कि उसका हाथ मेरे उसको छू रहे हैं.
मैं- उसको किसको? मीता- अरे आप समझो न … क्यों आप परेशान कर रहे हो, जैसे आपको पता नहीं है.
मैं- देखो मीता ये सब शब्द सेक्स के आनन्द को दुगना कर देते हैं.
सो शरमाओगी तो दोस्त के साथ मज़ा कैसे लोगी.
हम दोनों को पता है कि तुम मेरे घर में क्या करना चाहती हो.
अब तो वैसे भी मैं तुम्हारा राज जानने वाला दोस्त बन गया हूं, सो अगर मुझसे फ्री हो कर बात नहीं करोगी, तो फिर सेक्स कैसे करोगी.
मीता फिर भी चुप रही.
मैंने उसका हाथ पकड़ कर पूछा- डर लग रहा है क्या? जैसे ही उसका हाथ पकड़ा … मेरे लंड में तीखा करेंट दौड़ गया.
मीता के बदन की सिरहन और कंपकंपाहट भी मुझे तुरंत महसूस हो गई.
मीता- हां.
मैं- किससे … दोस्त से या सेक्स से या मुझसे! मीता- दोस्त से … मुझे उस पर विश्वास नहीं हो रहा है.
मैं बहुत कंफ्यूज हूँ.
मैं- तो उसके साथ मत करो.
मीता- फिर किसके साथ करूं? मैं- हूँ … तुम मुझे एक बात बताओ कि क्या तुम्हारा मन सेक्स करने का है … और तुम कितना डिस्प्रेट (बेताब) हो सेक्स के लिए? मीता- मेरा सेक्स करने का बहुत मन है.
मैं रात भर सो नहीं पाती, पर किसके साथ करूं … मुझे ये समझ में नहीं आता.
मुझे कॉलेज के लड़कों पर भरोसा नहीं है.
मैं- एक बात बोलूं … तुम मेरे साथ सेक्स कर लो.
तुमको कभी भी किसी भी बात का डर नहीं रहेगा … और मैं तुमको कभी नुकसान भी नहीं पहुंचाऊंगा.
मीता- आपके साथ? मैंने सीधे सीधे उससे चुदाई की बात कह तो दी थी.
मगर मेरी गांड फट रही थी कि लौंडिया उखड़ न जाए.
अब कह तो दिया ही था, जो होना होगा सो देखा जाएगा.
उससे चुदाई की बात कहने के बाद क्या होता है, ये आप इस सेक्स कहानी के अगले भाग में जानेंगे.
आप मुझे मेल करने के लिए राहुल जी की मेल आईडी पर मेल कर सकते हैं.
[email protected] वर्जिन गर्ल की सेक्स कहानी जारी है.

स्रोत:इंटरनेट