. हम दोनों करीब 15 मिनट तक एक दूसरे के होंठों को चूसते रहे.
फिर वो बोली- आप तो मुझे वापस नहीं जाने दोगे … एक तो मैं वैसे ही मेरा बहुत मन है, उस पर से ये आपका गर्म किस … उफ्फ … आप तो मुझसे ज्यादा बेक़रार हो.
तब मुझे लगा कि शायद मैंने कुछ जल्दीबाजी कर दी.
मैं बोला- मीता तुम आज इतनी खूबसूरत और सेक्सी लग रही हो कि मेरा मन डोल गया.
मीता बोली- मन तो मेरा भी आपके लिए डोल गया है, पर आप मुझे मानसिक रूप से और शारीरिक रूप से ऐसा गर्म कर दो कि मेरे दिल वो दिमाग में कोई अपराध बोध न रहे.
मैंने कहा- तुम बैठो … मैं कुछ पीने को लाता हूं.
ये कह कर मैं रूहअफजा, चिप्स, समोसा ले कर आया.
फिर हम दोनों वहीं सोफे पर बैठे बैठे खाने लगे.
साथ ही साथ मैं बीच में उसकी जांघ और पीठ सहला रहा था.
ब्रा की स्ट्रिप्स को खींच कर अचानक छोड़ देता, तो वो चट की आवाज के साथ उसकी पीठ को लाल कर देती थी.
मीता की दर्द और सिसकारी के आवाज निकल जाती ‘आआह्ह … उफ्फ … लगती है न!’ फिर मैं उसके गाल पर किस कर लेता.
इन सबका असर ये हुआ कि वो भी जल्दी गर्म होने लगी.
उसका हाथ मेरी जांघों पर आ गया.
इस बार पता नहीं मुझे क्या हुआ कि मैं उसे पागलों की तरह चूमने लगा.
उसके पटियाला सूट के ऊपर से उसकी चूची दबाने लगा.
उसके मुँह से मादक और कामुक सिसकारियां निकलने लगीं.
वो मुझसे कस कर चिपक गई.
अचानक मुझे ध्यान आया कि ये मैं क्या कर रहा हूं … मैंने तो कुछ और ही प्लान कर रखा था.
मैं तुरंत उससे दूर हो गया.
मीता मेरी तरफ आश्चर्य से ऐसे देख रही, जैसे पूछ रही हो कि क्या हुआ? मैं उठा और एक बड़ा सा रुमाल उठा लाया.
फिर मैंने उसको पकड़ कर उसकी आंखों पर वो रूमाल बांध दिया.
वो पूछना चाह रही थी कि ये हो क्या रहा है, पर मैंने उसके खुलते लबों को उंगली से चुप करा दिया.
फिर उसको बांहों में उठा कर मैं दूसरे रूम में ले चला.
दूसरे रूम में जाकर उसको वाशरूम के सामने खड़ा किया और बोला कि तुम अन्दर जाओ … और वहां एक ड्रेस रखी है.
तुम्हें वो पहन कर बाहर आना है.
जब तक मैं कहूँ … तब बाहर आना.
अन्दर जो ड्रेस रखी है उसे देख कर कुछ भी सोचना नहीं … बस पहन लेना.
वो अन्दर चली गई.
मैंने दरवाजा उड़काते हुए बंद कर दिया.
मैं ये भी जानता था कि ऐसी ड्रेस पहनने के लिए उसको टाइम लगेगा.
इस बीच मैंने कमरे में कैंडल जला दी.
कैंडल की पीली रोशनी से कमरा नहा गया … खिड़की पर लगे मोटे परदों ने पहले ही कमरे को दिन में अंधेरा … मतलब रात जैसा कर दिया था.
एसी के वजह से कमरा बहुत ही ठंडा था.
आप सब सोच सकते हो कि सुहागरात जैसा रोमांटिक माहौल था.
इस बीच मीता की आवाज आई कि ये मैं पहन नहीं सकती.
मैंने कहा- मीता यदि तुम आज के दिन को अपनी जिंदगी का सबसे यादगार दिन बनाना चाहती हो, तो कुछ पूछो मत … सोचो मत … बस जो मैं कह रहा हूं, वैसा करो.
और हां पहन कर अच्छे से रूमाल को आंखों में बांध लेना और कोई बदमाशी मत करना.
थोड़ी देर बाद उसने दरवाज़ा खटखटाया, तो मैं दरवाज़ा खोलने उठा.
मैंने दरवाजा बाहर से बंद कर दिया था … उसको खोला तो उसके गोरे रूप को काले रंग में देख कर मेरा तो होश उड़ गए.
मैंने किसी तरह अपने पर काबू करके उसका हाथ पकड़ कर फैन के नीचे ला कर खड़ा कर दिया.
फिर मैं स्विच के पास जाकर खड़ा हो गया और बोला- अब तुम आंख खोल सकती हो.
मीता ने पट्टी हटा दी.
कमरे का माहौल देख कर उसकी आंखें खुली रह गईं … मुँह भी खुला रह गया था.
उसके चेहरे की ख़ुशी देखते ही बन रही थी.
तभी मैंने फैन का स्विच ऑन कर दिया.
मीता पर लाल और सफ़ेद फूल की पखुड़ियों से बौछार होने लगी.
मीता ख़ुशी के मारे दोनों हाथ खोल कर गोल गोल घूमने लगी.
अब मेरे संयम की भी इन्तेहा हो गई थी.
मैंने धीरे से उसके पास आकर उसकी कमर में हाथ डाला और उसको अपने पास खींच लिया.
हम इतने पास आ गए थे कि हम दोनों एक दूसरे की गर्म सासों को महसूस कर सकते थे.
हमारी नजरें मिलीं और फिर हमारे होंठ जुड़ते चले गए.
उफ्फ कितने सॉफ्ट … रस से भरे गुलाबी होंठ … और तीव्र आवेश से भरा एक प्रगाढ़ चुम्बन! मेरे होंठों ने उसके होंठों को चूमना चूसना शुरू कर दिया था.
फिर मीता ने भी थोड़ा सा रेस्पॉन्स करना शुरू कर दिया.
उसके हाथ मेरे कंधों से होते हुए मेरे गले का हार बन गए.
अब हम दोनों के होंठों इस कदर जुड़े थे कि सांस भी नहीं ले सकते थे.
मीता जितनी बेसब्र थी, वहीं मैं बहुत कूल था.
क्योंकि मुझे बहुत आगे तक जाना था.
मैं वो सब उसको करने दे रहा था, जो कि वो चाहती थी.
मीता मुझे पागलों की तरह किस करने लगी थी.
हमने किस या एक लम्बा स्मूच किया.
कितने सॉफ्ट और रसीले होंठ थे मीता के … मैं भी कुछ पल के लिए मदहोश हो गया था … मगर मुझे खुद पर संयम रखना जरूरी था.
थोड़ी देर के लिए सांस लेने के बाद हमारे होंठ फिर जुड़ गए.
कभी वो मेरे नीचे होंठ को, तो कभी वो मेरा ऊपर के होंठ को चूसने लगती.
इसी बीच हम दोनों की जीभ भी आपस में मिल गई थीं.
हम दोनों एक दूसरे की सलाइवा को महसूस किया … वाओ … किता टेस्टी था.
हम दोनों कुछ सेकंड के लिए रुके, तो मीता की आंखें बंद थीं.
उसके मुँह से एक ही आवाज आ रही थी ‘आआहह … यस्स … आई लवव … इट … किस मी हार्ड! मीता की आंखें आनन्द में बंद हो गई थीं.
दिल तो मेरा भी जोर से धड़क रहा था … क्योंकि काफी सालों बाद मैं एक कमसिन जवानी को चखने वाला था.
मुझे पता था कि मीता को मेरे मोटे लम्बे लंड को लेने में बहुत चिल्लाएगी, रोएगी, पर ये तो हर लड़की को एक न एक दिन सहना ही पड़ता है.
ये बात उन सभी को पता होगी, जिन्होंने कुंवारी कन्या के साथ पहला सम्भोग किया होगा … या फिर उन लड़कियों को भी पता होगा, जब उन्होंने अपना कौमार्य खोया होगा.
आज का दिन मैं यादगार बना देना चाहता था.
मेरा मंसूबा मेरी नियत या उद्देश्य यही था.
मीता को देखा जाए, तो वो एक साधारण सी लड़की थी … पर सेक्स के लिए एक परफेक्ट पार्टनर थी.
वो करीब पांच फुट 6 इंच लम्बी थी.
उसकी स्लिम बॉडी, उम्र के हिसाब से 32D साइज की परफेक्ट चूचियां थीं.
पीछे 34 इंच की उठी हुई गांड … और गांड के ऊपर 30 इंच की एकदम मक्खन सी कमर.
इस हाहाकारी ड्रेस में उसकी चूचियां मुझे साफ दिख रही थीं.
उसे भोगने के लिए मेरे पास काफी टाइम था और मैं चाहता था कि मीता का पहला अनुभव यादगार हो … ताकि मैं उसको हमेशा पा सकूं … और जब चाहूं, तब तक उसको चोद सकूं.
यानि की अगले 3 या चार साल तक जब तक वो लखनऊ में रहे, तब तक सिर्फ मुझसे ही चुदवाए और मैं उसके साथ अपनी वो सब इच्छाएं भी पूरी कर सकूं, जो मैं अपनी पत्नी के साथ नहीं कर सकता था.
मेरी ये सब कामनाएं तब पूरी हो सकती थीं, जब उसे मेरा चुदाई का अंदाज पसंद आए और वो मेरे लंड की शैदाई बन जाए.
आगे की कहानी में मैं उसे चोदूंगा और आप मुठ मारेंगे.
ये मेरा दावा है.
आप इस सेक्स कहानी पर अपने विचार मुझे मेल कर सकते हैं.
मैं राहुल जी की मेल आईडी नीचे लिख रहा हूँ.
[email protected] कहानी जारी है.
स्रोत:इंटरनेट