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अमेरिका में साली की चूत गांड चोद दी 1

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अमेरिका में साली की चूत गांड चोद दी 1 1

. उसने कहा कि कल वह हम लोगों को अन्य सामान की खरीदी भी करवा देगा.
उसने हमको गेस्ट हाउस ले जाकर छोड़ दिया.
कल फिर से मिलने का वादा करके वो चला गया.
उसके बाद हम लोग अंदर चले गये.
अब तक पहले वाले पैग का असर खत्म हो गया था और साली साहिबा को फिर से सर्दी ने घेर लिया था.
अंदर जाकर मैंने एक स्ट्रान्ग पैग बना दिया जिसे राखी ने तुरंत खाली कर दिया.
उसके बाद मैंने भी दो पैग लगाये और फिर फ्रिज से बर्गर निकाल कर ओवन में गर्म करने के लिए रख दिये.
गर्म करने के बाद हमने साथ में बर्गर खाये.
जब तक हम खाना खाकर फ्री हुए तो रात के 11 बज चुके थे.
अब सोने के लिए देखना था.
चूंकि बेड सिंगल ही था इसलिए मजबूरन दोनों को एक ही बेड पर सोना था.
मुझे तो अपनी साली के साथ सोने में कोई परेशानी नहीं थी क्योंकि मेरे अंदर तो बरसों की प्यास दबी हुई थी.
वो प्यास आज मुझे बुझती हुई नजर आ रही थी.
दोनों ही नशे में थे इसलिए सोचने और समझने की शक्ति दोनों की ही खत्म हो चुकी थी.
हम दोनों बेड पर लेट गये.
लेटते ही मेरे लौड़े ने सलामी दे दी.
लंड पैंट में तन कर खड़ा होने लगा.
मैंने एक टांग पर दूसरी टांग चढ़ा कर उसको छिपाने की कोशिश भी लेकिन ऐसा हो नहीं सका.
वासना बार-बार उभर कर आ रही थी.
मैंने साली की तरफ देखा और साली ने मेरी तरफ देखा.
दोनों ही एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे.
मैंने वासना वशीभूत होकर उसको अपनी तरफ हिम्मत करके खींच ही लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये.
चूंकि मौसम खराब था और सर्दी भी थी.
साथ ही वाइन का सुरूर भी था.
इसलिए साली ने भी ज्यादा कुछ नहीं सोचा और मेरा साथ देना शुरू कर दिया.
दोनों ही एक दूसरे के जिस्मों अपने में समाने की कोशिश करते हुए एक दूसरे से लिपटते हुए चूमा-चाटी में लग गये.
मेरी साली राखी ने मेरे लंड को पैंट के ऊपर से पकड़ कर उसको हाथ में लेकर मरोड़ना शुरू कर दिया.
उसके अंदर भी एक प्यास सी जाग गई थी.
मैंने भी फिर आव देखा न ताव और अपने सारे कपड़े जैसे फाड़ते हुए एकदम से नंगा हो गया.
नंगा होने के बाद जब मैं रजाई में घुसा तो साली ने लंड को हाथ में पकड़ कर कहा- अरे बाप रे! इतना बड़ा! इतना मोटा.
दोस्तो, मेरा लंड 8 इंच लंबा और 3 इंच चौड़ा है.
मेरी साली ने शायद अपने जीवन में पहली बार ऐसा लिंग हाथ में लिया था.
मेरी साली की उम्र भले ही 55 की है लेकिन वो देखने में 40 की लगती है.
उसका साइज 38-36-42 है.
मेरा लंड तो तनतना रहा था.
उसको इस वक्त एक छेद की जरूरत थी.
इसलिए मैंने सबसे पहले 69 की पोजीशन बनाने के बारे में सोचा.
मैंने उसके मुंह की तरफ लंड किया तो उसने लंड को मुंह में भरने में देर न की और उसको चूसने लगी.
इधर मेरा मुंह उसकी चूत में जा लगा और उसकी चूत में जीभ डाल कर मैं उसकी चूत को जैसे मुख चोदन का मजा देने लगा.
जैसे जैसे मेरी जीभ उसकी चूत में अंदर जा रही थी वैसे ही वो मेरे लंड पर दांत से काट लेती थी.
मस्त चुसाई कर रही थी मेरे लौड़े की.
फिर पांच-सात मिनट के बाद जब उससे बर्दाश्त न हुआ तो उसने लंड को मुंह से निकाल कर कहा- जीजाजी, आपके साढ़ू ने चुदाई से दस साल पहले ही रिटायरमेंट ले लिया था.
अब देरी मत करो और इस मूसल को मेरी चूत में डाल दो.
काफी बरसों से इसको ऐसा दमदार लंड नसीब नहीं हुआ है.
मैं उसकी चूत की तरफ आकर उसके क्लिट को हाथ से मसलने लगा.
मेरा इरादा पहली बार में ही सटीक निशाना लगाने का था.
धीरे-धीरे उसकी चूत के छेद को टटोल कर पहले मैंने उसकी चूत के छेद पर अपने लंड के सुपारे को सेट कर दिया.
उसके बाद बड़ी ही धीमी गति के साथ मैंने जोर लगाना शुरू किया.
चूत में चिकनाई भी पूरी थी और मेरे लंड ने कामरस निकाल निकाल कर उसके पूरा चिकना कर रखा था.
साथ ही साली के मुंह की लार भी लगी हुई थी.
इतनी चिकनाई होने के बाद भी जब लौड़ा उसकी चूत में घुसने लगा तो उसकी आंखों से पानी बह निकला.
जब लंड तीन इंच तक अंदर घुस गया तो मैंने एक जोर का धक्का मारा और उसके होंठों को मैंने अपने होंठों से जोर से दबा दिया.
आधा लंड मेरी साली की चूत में समा गया था.
वो बुरी तरह से कसमसाते हुए छुड़ाने की कोशिश करने लगी.
उसके बाद मैंने अपनी गांड को थोड़ा और ऊपर उठा कर एक और जोरदार धक्का लगाया और मेरी साली राखी ऐसे तड़पने लगी जैसे जल बिन मछली तड़पने लगती है.
ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरा लंड अंदर किसी दीवार के जाकर टकरा रहा था.
मैंने अब विराम दे दिया.
पांच मिनट तक शिथिल होकर उसके ऊपर पड़ा रहा.
वो कहती रही कि इतने मोटे लंड से मुझे नहीं करवाना है लेकिन मैंने उसकी बात नहीं मानी.
उसको समझाने लगा कि काफी सालों से उसकी चूत की चुदाई नहीं हुई है इसलिए थोड़ी तकलीफ हो रही है.
अगर तुमने मेरा साथ दिया तो तुम्हें मैं जवानी के दौर में फिर से वापस ले जाऊंगा.
भरोसा रखो मेरी जान.
मेरे इतना समझाने पर वो मान गयी और बोली कि ठीक है.
वो बोली- लेकिन इतनी जोर से नहीं करोगे.
मैंने कहा- जैसे तुम कहोगी बिल्कुल वैसे ही करूंगा.
बस तुम मेरा साथ दे दो.
दोनों की सहमति के बाद मैंने धीरे-धीरे उसकी चूत में लंड को हिलाना शुरू किया.
चूंकि लंड बहुत लंबा और मोटा था इसलिए मेरा लौड़ा उसकी चूत में फंस गया था.
दस मिनट लग गये लंड को अपनी गति में आने में.
अब मेरी साली भी अपनी गांड को उठाने लगी थी.
उसको चूत चुदवाते हुए मजा आने लगा था.
मैं तो था ही ठरकी इसलिए चूत चुदाई का पूरा आनंद ले रहा था.
दोनों के ही मुंह से कामुक सिसकारियां निकलने लगी थीं ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ जब मैं झटका देता तो साली जवाब देते हुए गांड को मेरी तरफ धकेलती.
दोनों की इस कुश्ती में सर्दी तो जैसे छूमंतर हो गयी थी.
हमें पता भी नहीं चला कि कब रजाई हमारे जिस्मों से सरक कर नीचे गिर गई.
रजाई के हटते ही उसका जिस्म कमरे की रोशनी में नहा गया.
कसम से क्या जिस्म था उसका.
पहली बार मैंने अपनी साली राखी को नंगी देखा था.
उसके बाद मैंने उसको डॉगी की पोजीशन में आने का इशारा किया.
वो उठ कर मेरे सामने झुक गई.
उसकी गांड को थाम कर पीछे से उसकी चूत में लंड को पेल दिया और उसकी चोटी के नीचे उसकी पीठ पर चुम्बन देना शुरू कर दिया मैंने.
साथ ही साथ मैं उसकी गांड में उंगली भी कर रहा था.
अपने शरीर का भार उसके बदन पर डाल कर चुदाई के मजे ले भी रहा था और उसको पूरा मजा देने की कोशिश कर रहा था.
उसकी पीठ पर दांत के निशान हो चले थे.
सोच रहा था कि एक बार इसको संतुष्ट कर दूं तो फिर आराम से चुदाई करूंगा.
उसके बाद मैंने अपनी गति बढ़ा दी और लगातार 60 से 70 धक्कों में हम दोनों पानी छूटने की कगार पर पहुंच गये.
मैंने उससे पूछा- कहां निकालूं अपने माल को? वो बोली- पूछना क्या है, अंदर ही गिरा दो ना … हाय … आह्ह … चार-पांच करारे धक्कों के साथ मेरी तोप ने उसकी चूत में गोले दागने शुरू कर दिये.
पिचकारी दर पिचकारी अपनी साली की चूत को अपने लावा से भर दिया मैंने.
वो भी पानी छोड़ चुकी थी और दोनों की ही धड़कनें कमरे को जैसे सिर पर उठाने को हो रही थीं.
बरसों बाद साली की चूत चुदाई करके मुझे आज परम सुख की अनुभूति हो रही थी.
इधर साली के चेहरे के भाव भी कुछ ऐसे ही थे.
वो भी परम आनंद में गोते लगा रही थी.
हम दोनों थक कर चूर हो गये थे और बिस्तर पर गिर पड़े थे.
उसके पांच मिनट बाद ही फोन की घंटी बजनी शुरू हो गई.
फोन उठा कर देखा तो हॉस्पिटल से कॉल आया था.
समय रात के तीन बजे का था.
पहली बार में पता लग गया कि कोई इमरजेंसी हो गई है.
वरना इतनी रात को फोन नहीं आता.
फोन उठा कर बात की तो उन्होंने वहां से बताया कि आपके मरीज की मृत्यु हो चुकी है.
कल दिन में आकर आप बॉडी ले जा सकते हैं.
ये सुनकर मेरी जीभ जैसे मुंह में ही जम गई.
साली ने पूछा- क्या हुआ, किसका फोन था? मैंने कह दिया- मेरे मित्र का मुंबई से फोन आया था.
मैं अभी साढ़ू की मौत को साली के सामने जाहिर नहीं होने देना चाहता था.
मैं अपनी साली को और अपने साढ़ू की बॉडी को सकुशल इंडिया लेकर आना चाहता था.
इसलिए मैंने फोन को ऑफ कर दिया.
उसके बाद मैंने दो पैग बनाये और सिगरेट जला ली.
मेरे हाथ में बोतल थी और मेरा सोया हुआ सांप मेरी टांगों के बीच में लटक रहा था.
मैं नंगे बदन ही बोतल लेकर बेड पर आकर बैठ गया.
कहानी अगले भाग में जारी रहेगी.
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स्रोत:इंटरनेट