. आखिर चुदाई है क्या बला? - सेक्स स्टोरी हिंदी में फिर मैंने उसके दूध को दबाया | इतना कुछ चल रहा था तभी उस लड़की का छोटा भाई मेरे घर आया और उसको बुलाने के लिए छत की सीढ़ी पर चढ़ने लगा. | वह पल अगर हम अकेले तो वह ना केवल मेरे घर आ पाती इसके आलावा मेरे घर वाले भी मुझे डाटते भी नही | हमने उसके छोटे भाई के आने से पहेले ही एक दुसरे के ऊपर से उठ गए | वह उसके घर लौट गयी लेकिन कुछ देर बाद. फिर लौट आई | हम दोनों हसने लगे क्योकि वह घटना ही कुछ ऐसी थी | मैंने उसे कुछ खाने को दिया और उसने मुझे धन्यावाद दिया |हमने फिर से एक दुसरे से बात शुरु की | हम एक दुसरे से गिरने वाली घटना पर बात करने. लगे | फिर कल मिलने का वादा किया और वह आ गयी | मैंने उसे छत पर चलने का आग्रह किया | उसने भी मुझे कुछ देर बाद छत पर चलने का आश्वासन दिया और हम नीचे बैठे रहे | कुछ देर बाद वो अन्दर आई और घर पर सब लोग. होने के कारण मैंने कुछ देर तक उससे बात की और उसके बाद मैंने उसे घर लौटने को कहा | अगले दिन वो फिर घर आई और हम दोनों कुछ सीखने के बहाने ऊपर छत चले गए | सीखते हुए हम हसने लगे और हाथ भी मिलाया | हस्ते. हुए मैं उसका हाथ मरोड़ने लगा | धोके से मैंने उसे गले लगा लिया और उसे कसकर गले लगाया |लेकिन उसे छोड़ दिया और वह हसने लगी | मैंने कुछ देर बाद उसे फिर किसी घटना को सुनाया और हसाने लगा और उसे गले से लगा. लिया | गले लगाने के बाद मैंने उसके गाल को चूमा और दूध दबाने लगा | उसने भी मुझे गले लगाया और इसके बाद हम एक दुसरे के होंठो को चूमने लगे | पर मुझे याद आया कि अभी तक मैंने उसका नम्बर नहीं लिया था | मैंने. उसे अपना नम्बर दिया और बाद में उसने मुझे उसका नम्बर दिया | मैंने उसे मिलने के लिए एक स्थान तय किया उसके बाद एक गाडी में बैठकर हम सुनसान स्थान पर गए | मैंने उसे चूमा उसके गाल पर और बाद में उसके दूध को. दबाया | मैंने अपने सारे कपडे उतार दिए और उसके भी कपडे उतार दिए |उसे चोदने के बाद मैंने कपडे पहना और हमने कुछ खाने का योजना बनाया | मैंने एक पास के आलूबंडा वाले से कुछ आलूबंडा पैक करवाया और उस लड़की को. खाने के लिए दिया | आलूबंडा खाने के बाद मैंने उसे नये सुनसान वाला स्थान में ले गया | पर उस दिन चुदाई ढंग से हो नही पायी मेरी क्यूंकि किसी के आ जाने का दर सता रहा था |एक दिन मुझे अच्छा मौका मिल ही गया. और मैंने उसे अपने घर बुला लिया | मैंने केवल उसका पजामा उतारा ताकि कोई आये तो वह पजामा तुरन्त पहन सके | मैंने पहेले तो अपनी चड्डी उतारी और लंड उसकी चूत में घुसेड दिया | थोड़ी देर बाद मैंने उसकी चूत को. चूमा और फिर चुदाई चालु कर दी | मैंने चुदाई के साथ अपने हाथो से उसका चूत को रगडा | रगड़ने के बाद उसकी चूत से पानी निकला जिस को मैं चुदाई रोक के चाटने लगा | मेरे लंड ने बहुत बड़ा काम किया क्योकि लम्बा. होने की वजह से उसको बड़ा दर्द हो रहा था | पल भर की चुदाई करना मेरे लिए गवारा नहीं था | इसलिए मैं ने देर तक उसे चोदा और अपने घर में चोदा |सबसे बड़ी बात अगर आप किसी लड़की को चोदो या किसी लड़के या लड़की की. गांड मारो तो कंडोम अपने लंड को जरुर पहनाओ क्योकि यह एड्स से बचाता है | मैंने बिना कंडोम के उसे आज तक नही चोदा उस दिन भी कन्डोम लगाया था | मेरी सच पर आधारित इस कहानी से आप परिचित हो चुके हो | आज मैं ने. अपनी कहानी सुनाई है कल आप दूसरो के सामने आपकी कहानी सुनाना | लेकिन चोदने की एक कला होती है | मैंने उसे उठाकर चोदा है | इस तरह की चुदाई में दम लगता है | चोदने कि यह कला मेरे दोस्त ने मुझे बताई थी |. मैंने उसे विभिन अवस्थाओ में उसे चोदा है | घोड़े की तरह उस करके भी चोदा था | आपको चुदाई करना है तो यह दो अवस्थाए काफी दमदार होती है | चुदाई करने वालो को दमदार होना पडता है | रोज चिकन खाओ क्योकि चिकन दम. प्रदान करती है | दमदार लोग चिकन खाते है | पहलवान भी चिकन को प्रथमिकता देते है | चुदाई करना हो और दमदार चुदाई करना हो खासकर उठाकर तो चिकन खाओ | मैं पहले दुबला पतला था लेकिन चिकन ने कमाल कर दिया |कुछ. महीनो के बाद उसने मुझे पहलवान कि तरह मोटा कर दिया | चुदाई के लिए आपको पहलवान की तरह होना अवश्यक है क्योकि पहलवान ही देर तक चोद पाते है | यह कहानी आपके लिए एक प्रेरणा है क्योकि एक भी गर्लफ्रेंड नहीं. होना आपके लिए शर्मनाक है | उस लड़की को मैं ने एक बार अपने मामा के आफिस ले कर गया था | वो लड़की वहा पर उसके घरवालो से ये बहाने से आई थी कि उसे जॉब करना है | जब मुझे रूपए की आवस्यकता होने लगी थी तब मैं ने. अपने मामा के आफिस में कार्य किया | मैंने अपनी सहेली को राय दिया तुम भी मेरे मामा के ओफिस आया करो और रूपए कमाया करो | वो लड़की रोजाना आफिस आने लगी |मैं ने अब अपने मामा को फुसलाया और कहा आप को बाहर जाना. पडता है कृपया आप मुझे आफिस की देख रेख का कार्य सौप दो | मेरे मामा को मेरे प्रस्ताव पसन्द आया और उन्होंने मुझे आफिस की देख रेख का कार्य मुझे दे दिया | अब जब मामा आफिस के कार्य से बाहर चले जाते थे तो. मैं उस लड़की को अफिस के एकान्त वाले कमरे में ले जाता था और आफिस में चुदाई करता था | चुदाई करने के लिए मुझे लम्बा वक्त मिल जाता था क्योकि उस वक्त आफिस में कोई नहीं रहता था जो सारे आफिस में घूम सकता था. |मेरे आलावा किसी के पास अनुमति नहीं थी की कोई आफिस के हर कमरे में घुस सकता था | इसलिए मैं मेरे औदे का भुरपुर फायदा उठाता था | मेरे मामा भी लगभग एक महीने के लिए बाहर चले जाते थे | इसलिए आफिस की देख. रेख करना उसकी सफाई करवाना मेरे लिए सरल कार्य था | आफिस में अन्य लोग भी कार्य के लिए आते थे लेकिन मुझे कोई दिक्कत नहीं होता था | मैं सिर्फ अपने मामा से डरता था क्योकि वो ही सिर्फ उस आफिस के मालिक थे |. वो आफिस के सबसे बड़े थे और उनके बाद में आफिस के बड़े औदे में थे | भेले मेरी थानखा अन्य लोगो से कम थी लेकिन पूरी देख रेख मेरे ऊपर थी | दोस्तों यदि आप को मेरी पोस्ट “आखिर चुदाई है क्या बला? – सेक्स स्टोरी. हिंदी में” पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करना.
स्रोत:इंटरनेट