. जैसे ही मेरा मोटा मजबूत गर्म, आकार में बड़ा लिंग पूरी तरह से गीली हो चुकी योनि में घुस गया, तो सारा आपा के बड़े बड़े स्तन ऊपर की ओर उठ गए और शरीर एंठन में आ गया.
लंड अन्दर और अन्दर चलता चला गया, चूत के होंठों को खुला रखते हुए क्लिटोरिस को छूता हुआ लंड पूरा का पूरा अन्दर तक चला गया था.
सारा आपा की योनि मेरे लिंग के सम्पूर्ण स्पर्श को पाकर व्याकुलता से पगला गयी थी.
उधर मेरे हिप्स भी कड़े होकर दबाव दे रहे थे और लिंग अन्दर जा चुका था.
पूरा लंड उसकी चूत में समा गया और उसकी चीख निकल गयी.
सारा की चीख इतनी बुलंद थी कि एक बार को तो मैं भी डर गया कि कोई पूछने ही न आ जाए … लेकिन तब भी मुझे सारा आपा की सील तोड़ने में बहुत मज़ा आया.
आपा भी दर्द के मारे चिल्लाने लगी … जो इर्द गिर्द गूँज उठी थी- आहहह आय मर गई … उउउइइ ओहह … बहुत दर्द हो रहा है … प्लीज इसे बाहर निकाल लो … मुझे नहीं चुदवाना तुमसे … तुम बहुत जालिम हो … यह क्या लोहे की गर्म रॉड घुसा डाली है तुमने मुझमें … निकालो इसे … नो प्लीज बहुत दर्द हो रहा है … मैं दर्द से मर जाऊंगी प्लीज निकालो इसे! सारा आपा की आँखों से आंसू की धारा बह निकली.
मैं उन आंसुओं को पी गया.
मैं बोला- मेरी रानी … बस इस बार बर्दाश्त कर लो … आगे मजा ही मजा है.
सारा आपा चुप हो गई.
कुछ ही देर की कोशिशों के बाद लंड सैट हो गया और दर्द भी काफूर सा होने लगा था.
अब सारा चीखने चिल्लाने लगी- हाआअ … राआआजा … आईसीईई और जोर से और जोर से चोदो.
आज मेरी चूत को फाड़ दो, आज कुछ भी हो जाए लेकिन मेरी चूत फाड़े बगैर मत झड़ना … आआह और ज़ोर से … उउउईईई अम्मी … आहह.. फिर तो झटकों का सिलसिला शुरू हो गया.
अब मैं उसके ऊपर लेट कर उसे किस भी कर रहा था और एक हाथ से उसके मम्मों को सहला भी रहा था.
कभी कभी 2 उंगलियों में उसकी निप्पल को भी ले कर मसलता और कभी बहुत ज़ोर से खींचता, उसके निप्पल तने हुए थे.
मैं भी मज़े से लंड को चूत के अन्दर बाहर कर रहा था.
दस मिनट में वो 2 बार छूटी, कमरे में मेरे झटकों की आवाज़ बहुत बुलंद थी.
अब मैं उसकी चिल्लपों से कतई नहीं डर रहा था और न ही उसके बोलने की आवाज़ आ रही थी.
खैर झटकों के एक लम्बे सिलसिले के बाद मैंने उससे बोला कि मैं झड़ने वाला हूँ.
तो उसने बोला- अन्दर ही डालो … मुझे तुमसे एक बच्चा चाहिए.
मैंने कहा- जो हुकम सारा बेगम! मैं ज़ोर ज़ोर से झटके मारने लगा.
अब सारा भी भरपूर साथ दे रही थी.
फिर एक दर्दनाक झटके के साथ मेरा लंड उसकी बच्चेदानी से जा टकराया और वहीं रुक कर पानी छोड़ने लगा.
मैंने महसूस किया कि वो भी फारिग हो गयी थी.
मैं सारा के ऊपर गिर गया.
मैं कुछ देर के लिए उसके ऊपर ही पड़ा रहा … कुछ देर के बाद वो भी शांत हो गई.
मैं ऐसे ही उसके ऊपर ही लेटा हांफता रहा और वो मेरी कमर और मेरे बालों को सहलाती रही.
इतना खुमार था कि मेरी आंखें मजे के कारण बन्द हो रही थीं, मगर दिल करता था कि मैं यूं ही इसी हालत में ही सो जाऊं.
लेकिन … अभी तो बहुत मज़े लेने थे.
कुछ देर बाद मैं उसके ऊपर से लुढ़क कर साइड पे बेड पे सीधा गिर गया और मेरा लंड भी बाहर आ गया.
मेरे लंड पे खून लगा हुआ था.
सारा की चूत से खून मेरा स्पर्म और उसका पानी बह रहा था.
चादर लाल हो गयी थी.
मैं साइड टेबल से सिगरेट का पैकेट उठा कर सिगरेट पीने ही लगा था कि उसने मुझे फ्लास्क से दूध निकाल कर गिलास को भर कर दिया … जो नीम गरम था.
उसने खुद भी एक गिलास दूध पिया.
दूध पीने के बाद हम दोनों वाशरूम में पहुंचे.
गर्म पानी का शावर लिया और फिर से बेड पर आ गए.
उसके बाद अगला राउंड शुरू हो गया.
मैंने कहा- सारा इस बार तुम ऊपर आओ.
मैं सीधा लेट गया और सारा मेरे ऊपर आ गयी और मुझे लिप किस करने लगी.
कुछ ही देर में सारा ने मेरा लंड अपनी चूत में डाल लिया और हम लिप किस करते हुए चुदाई करने लगे.
कुछ देर बाद सारा सीधी हो गयी और उसने अपने हाथ मेरी छाती पर रख दिए.
मैं उसके गोल सुडौल मम्मे चूसने दबाने लगा, तो वो खुद ब खुद मेरे लंड पर ऊपर नीचे होने लगी.
मेरे भी चूतड़ चलने लगे थे.
हर धक्के के साथ सारा के मुँह से आह निकल जाती थी.
सचमुच वो काफी मादक लग रही थी.
लगभग आधे घंटे बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए.
अगले राउंड में हमने पोज़ बदल दिया और मैंने सारा को घोड़ी बना दिया और लंड उसकी चूत में डाल दिया.
मुझे लगा जैसे मेरा लंड इस बार कुछ ज्यादा अन्दर गया.
फिर हम रिदम में चुदाई करने लगे.
मैं उसके गोल मम्मे दबाने लगा और खुद आगे पीछे होने लगी.
हर धक्के के साथ सारा के आह निकल जाती थी.
सचमुच वो काफी प्यासी थी.
फिर पन्द्रह बीस धक्कों के बाद पीछे से अन्दर डाले हुए ही मैंने उसे खड़ा कर किया और कस कस कर धक्के लगाने शुरू कर दिए.
लगभग बीस मिनट बाद हम दोनों एक साथ फिर से झड़ गए.
उस रात मैंने सारा आपा या सारा बेगम, जो भी कह लो, लगातार 4 बार चोदा, जब मैं आखरी बार उसकी गांड में लंड डाल कर चोद रहा था तो फजर का टाइम हो गया और मामू ने डोर नॉक कर के हमें आवाज़ दी.
मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा ताकि मामू भी चुदाई की आवाज़ सुन लें और समझ जाएं कि हम जाग रहे हैं.
खैर फिर मैं फारिग हुआ.
हमने एक बहुत लम्बी जफी लगाई और किस भी की.
फिर हम फ्रेश होने चले गए.
कहानी आगे जारी रहेगी.
आपका आमिर अपने जवाब मेरे ईमेल [email protected] पर दे सकते हैं.
स्रोत:इंटरनेट