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एक उपहार ऐसा भी 15

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एक उपहार ऐसा भी 15 1

. मैंने अब रूमाल आंख से हटा दिया.
वैसे तो मुझे सबसे अच्छा चुंबन भावना का लगा था, पर मैंने नई लड़की का हौसला बढ़ाना ठीक समझ कर कहा.
जो पांचवें नम्बर में सिर्फ गाल को चूम कर चली गई, मुझको उसका चुंबन सबसे अच्छा लगा.
अनीता ने कहा- अच्छा वो तो रेशमा थी! मैंने कहा- नहीं, वो तो काव्या थी! अनीता ने तुरंत कहा- तुमने कैसा जाना? मैंने कहा- पहली बात तो उसकी हाइट कम है और धंधे में पहला दिन है … तो संकोच और हया का स्वाद भी उसके चुंबन में था.
इस बार रेशमा बोल पड़ी- तुम तो बड़े खिलाड़ी निकले … जरा बाकियों के बारे में भी तो बताओ.
मैंने कहा- मैंने घाट-घाट पर लड़की चोदी है, अनुभव तो होगा ही.
सुनो सबसे आखिर में अनीता ने लंड चूसा.
उसने बात कर दी थी, इसलिए उसकी पहचान आसान थी.
काव्या के बारे में तो बता ही चुका हूँ.
और सबसे पहले रेशमा तुमने किस किया था.
मैंने तुम्हारे अनुभवी अंदाज और खुशबू से तुम्हें पहचान लिया था.
मैंने तुम्हारे सौदागर के परिचय कराने के समय तुमको सूंघा था.
रेशमा- और? मैं- और दूसरे नम्बर पर रूपा आई थी, क्योंकि रूपा की हाइट अच्छी थी, उसने कान में चूड़ी के आकार की बाली पहन रखी थीं, जो किस करते वक्त मेरे गालों से टकरा रही थीं और मसाज वालों का स्टाइल भी डीसेंट होता है.
रूपा ने हाई हील सैंडल पहने थे.
उसके पास आने के समय ही मैंने उसके सैंडल की आवाज से उसे पहचान लिया था.
तीसरे नम्बर पर सोहा आई थी.
उसने भी वैसी ही हाई हील वाली सैंडल पहनी थी.
पर उसकी हाइट रूपा से कम थी.
मैंने उसका भी अनुमान उसकी अलग अदा से लगा लिया था.
‘फिर?’ मैं- फिर अब जो चौथे नम्बर पर भावना आई, उसने मुझको पहले गाल पर किस किया.
फिर माथे पर और फिर मेरे सीने और गले को सहलाते हुए मेरे होंठों को चूसने लगी.
कुछ ही पल में उसने अपनी जीभ मेरे मुँह के अन्दर डालनी शुरू कर दी थी.
जब मुझसे भी रहा ना गया और मैंने उस बांहों में भर लिया, तब उसके कपड़ों से पता लगा कि वो भावना थी, जो काम-पिपासा के चलते कॉलेज लाइफ में ही धंधे पर आ गई थी.
सब मेरी तरफ प्रशंसा भरी नजरों से देखने लगी थीं.
उनको आज शायद पहली बार कोई ऐसा मर्द देखने को मिला था जो चुत का पारखी था.
मैंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा- मैंने सही परखा या नहीं? बाकी तो शांत रहीं, पर अनीता और रेशमा ने कहा- मान गए उस्ताद.
तुम तो बड़े खिलाड़ी निकले.
फिर अनीता ने कहा- अब तुम बताओ तुम्हें किसकी सर्विस चाहिए.
वैसे तुमने काव्या का नाम लिया था, पर यहां तो लगता है, सब खुद ही तुम्हारे लिए मरी जा रही हैं वैसे तो मैं सबको एक साथ ही चोदना चाह रहा था, पर मेरे लिए तो और भी बेहतरीन चूतों का इंतजाम था, उनके लिए भी अपनी उर्जा बचाना सही समझते हुए मैंने अपनी राय रखी.
मैंने कहा- मुझको भूखी शेरनी का शिकार बनना पसंद है.
अनीता ने कहा- चल भावना … जा, ये तुझको बुला रहा है और इसपर चढ़कर चुदाई कर देना … ये वही चाह रहा है.
अनीता ने बिल्कुल सही कहा था, मैं उसके अनुभव के आगे नतमस्तक था.
फिर मैंने कहा- लेकिन मुझे भूखी शेरनी के साथ अनुभवी सलाहकार भी चाहिए.
तो अनीता ने कहा- ठीक है चलो! वैसे मुझ अपनी किस्मत पर नाज है कि तुमने मुझको चुना.
मैंने बाकी हसीनाओं से कहा- समय रहा तो मैं तुम सबके साथ भी समय बिताना चाहूंगा.
फिर अनीता ने सबको हॉल में जाने को कहा और भावना को बाथरूम से आ जाने को कहा.
मेरी पैन्ट जो अधूरी निकली थी, उसे मैंने पूरा निकाल दिया और अनीता को पास खींच लिया.
बाकी सभी हवा में किस देते हुए कमरे से निकल गईं.
इन रंडियों का सौदागर तो पहले ही काम का बहाना करके निकल गया था.
मैं तो पहले से गर्म भी था और अर्धनग्न भी.
तो मैंने अनीता को बांहों में जोरों से जकड़ लिया और कहा- साली कुतिया, तुझमें बहुत आग है, चल मुझे अपनी अगन से पिघला दे.
ये गाली नहीं थी, ये तो उसकी प्रशंसा थी और दो अनुभवी के द्वंद्व की विधिवत शुरूआत थी.
अनीता ने मुस्कान बिखेरी और अपनी कुर्ती निकाल फैंकी.
भावना ने भी बाथरूम से आकर अपनी टी-शर्ट को निकाल दिया.
अनीता ने नीली ब्रा पहन रखी थी और भावना लाल ब्रा में कहर बरपा रही थी.
अब दोनों मेरे अगल-बगल आकर चिपक गईं.
भावना ने मुझ पर झुक कर फिर से माऊथकिस करना शुरू कर दिया और अनीता ने मेरी शर्ट ऊपर सरका कर मेरे निप्पल और पेट को सहलाते हुए मुझे चूमना शुरू कर दिया.
उन दोनों ने मुझे पल भर में ही वासना के भंवर में डुबो दिया.
अनीता मुझे चूमते हुए नीचे सरक गई और अकड़ कर बेहाल होते मेरे लंड को सहलाने लगी.
उसका सहलाना भी कुछ पल का ही था, क्योंकि उसने फिर लंड मुँह में ले लिया.
अनीता का लंड चूसना गजब का था, उसने सुपारे को आइसक्रीम की तरह चूस लिया और गोलियों को भी चाटने लगी.
वो मेरे लंड को गले गले तक ले लेती थी और हाथों से मेरे अंडकोषों को सहला कर लंड की गर्मी को भड़काने का काम कर रही थी.
मैं उसकी चूचियों को मसलना चाहता था मगर मेरे ऊपर भावना चढ़ी थी.
मैंने अनीता के मम्मों का मजा बाद में लेने का फैसला किया और बस लंड चुसवाने का खेल चलने दिया.
इधर भावना ने मेरे मुँह के अन्दर अपनी जीभ डालनी शुरू कर दी थी.
मैं उसका पूरा साथ देने लगा.
साथ ही मैंने उसके सुडौल उन्नत बोबे भी मसलने शुरू कर दिए थे.
वो बहुत ही मखमली और कामुक अहसास करा रहे थे.
मुझे कुछ पल पहले जो अनीता के चूचे दबाने की चाहत थी, वो मैं भावना के मम्मों को मसल कर पूरा करने लगा था.
मैं उसकी चूचियों के गुलाबी निप्पलों को बारी बारी से चूस कर उसे गर्म कर रहा था और खुद भी उत्तेजित हुआ जा रहा था.
मेरे लंड पर काबिज अनीता ने मुझे चुदाई के लिए एकदम से कड़क लंड वाला बना दिया था.
दो रंडियों के साथ चुदाई की कहानी में अभी बहुत कुछ बाकी है दोस्तो.
बस मजा लेते रहिए और अपने मेल भेजते रहिए.
आपके मेल मिल भी रहे हैं, मैं पूरी कोशिश भी कर रहा हूँ कि आपको अपनी सेक्स कहानी को और अच्छे ढंग से लिख कर आनन्दित करूं, धन्यवाद.
[email protected] कहानी जारी है.

स्रोत:इंटरनेट