. मैं उसके पास बैठा और बनावटी ढंग से खांसते हुए उससे कहा- तो शुरू करें! सुमन ने बिना कोई उत्तर दिए सर झुका लिया.
सुंदर हसीनाओं को भोग लेने के पश्चात उस भारी देह की युवती के शरीर पर आकर्षित होने लायक बहुत कम चीजें थीं.
पर उसकी लज्जा ने उस बाकी सभी अप्सराओं से ज्यादा खूबसूरत बना दिया.
मैं कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता था.
इसलिए मैंने उससे उसके अतीत की कुछ बातें की और उसके समीप बैठ कर उसका भरोसा जीतते हुए उसकी वासना को जगाने का प्रयत्न करने लगा.
मैंने उसकी जंघा को सहलाया, उसकी पीठ सहलाई … और उसके कंधे पर चुंबन अंकित कर दिया.
पूछने पर उसने बताया कि वो सिर्फ चार पांच बार ही चुदी है.
पहली चुदाई उसने नशे की हालत में की थी.
… और बाकी चुदाई उसने सहेलियों के दबाव में आकर उनके सामने की थी.
मतलब एक तरह की रैंगिंग जैसा सेक्स हुआ था.
आज पहली बार वो चुदाई का आनन्द पाने आई है.
मैंने कहा- देखो सुमन, लज्जा नारी का वस्त्र है … नारी जब कमरे में कदम रखती है, तब भी निर्वस्त्र अच्छी नहीं लगती.
अर्थात लज्जा का होना अच्छी बात है.
लेकिन पुरुष जब प्रयत्न से नारी को निर्वस्त्र करना चाहे, तो उसका सहयोग करना चाहिए.
अर्थात धीरे धीरे लज्जा का त्याग करना चाहिए.
चुदाई का असली आनन्द जिस्मों के मिलन से नहीं आता.
असली आनन्द तो रूह के मिलन से आता है और रूहें आपस में तब मिलती हैं, जब दोनों पूर्ण तृप्त हों.
सुमन तुम पढ़ी-लिखी समझदार हो.
मेरी बातों को समझ रही होगी.
ऐसा कहते हुए मैंने सुमन को अपनी बांहों में भर लिया.
उसके अड़तीस चालीस की साइज के खरबूजे मेरे हाथों को सुकून पहुंचाने लगे.
सुमन ने आनन्द से आंखें बंद कर लीं.
मैंने उसके तप्त होंठों पर अपने होंठ टिका दिए और रसपान करने लगा.
सुमन का चेहरा वासना से लाल होने लगा … और देह तपने लगी.
सुमन ने भी स्वतः मेरा साथ देना प्रारंभ कर दिया.
जब हम एक दूसरे में खो जाने को आतुर होने लगे … तब मैंने वस्त्र का त्याग करना उचित जाना.
सुमन ने इस पल फिर से लज्जा दिखाई.
पर उसके संकोच ने मुझे और भी उकसाने का कार्य किया.
मैंने समय ना गंवाते हुए उस गोरी और भरे पूरे देह की युवती को बिस्तर में लिटाया … और उसके बड़े घेराव वाले भूरे एक निप्पल को मुँह में भर लिया.
सुमन तड़प उठी.
उसने अपनी उंगलियां मेरे बालों में फंसा दीं … और खींचने लगी.
मैंने सुमन की बेचैनी जानकर खुद को उसके नीचे भाग तक सरका लिया.
और उसकी पैंटी को उतार दिया.
मैं तो पहले ही निर्वस्त्र था, तो इस चुंबन के दौरान मेरा बड़ा हथियार उसके बदन को स्पर्श करके सुमन को अपना दीवाना बना रहा था.
सुमन की फूली हुई गोरी चूत चिकनी और साफ थी, जो इस मुलाकात की तैयारी का बखान कर रही थी.
मैंने अपनी एक उंगली चूत की दरार पर ऊपर से नीचे तक फिराई, तो सुमन सिहर उठी.
ईस्सस्स … की आवाज उसके कंठ से स्वतः ही प्रस्फुटित हो गई.
मैंने 69 की पोजिशन ले ली और चूत चाटने लगा.
पर मुझे प्रतिउत्तर ना मिला.
फिर भी मैंने मखमली चूत को चाटने का और उसके स्वादिष्ट रस को चखने का मौका नहीं गंवाया.
मैंने बहुत देर तक चूत चाटने को बाद सुमन के चेहरे के पास लंड ले जाकर चूसने को कहा, तो सुमन ने कहा- ये बहुत बड़ा है … मेरा मुँह दुखेगा … और मैंने ये पहले किया भी नहीं है … इसलिए मुझे ये पसंद नहीं है.
पर मैंने जोर देते हुए कहा- कब तक अनाड़ी रहोगी जानेमन.
कभी तो सीखना पड़ेगा ना! इस पर उसने भी बात मानकर धीरे धीरे मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया.
जब कोई आहिस्ते आहिस्ते लंड चूसता है … तो मजा और कई गुना बढ़ जाता है.
मैं भी इस मजे में डूब गया था.
पर सुमन ने जल्दी ही लंड मुँह से निकाल दिया और कहने लगी- मुँह में ही सब कर लोगे … तो आगे क्या करोगे? मैंने हंसते हुए कहा- वैसे सभी चीजों के लिए मेरी एनर्जी अधिक से भी अधिक है.
पर लगता है अब मुनिया रानी को सब्र नहीं हो रहा है? मैं नीचे जाकर पोजीशन में आ गया.
मैंने लंड चूत में डालने से पहल लंड से चूत को अच्छी तरह सहलाया.
सुमन तड़प उठी.
उसकी चूत की दीवारें आपस में चिपकी हुई सी थीं.
मतलब सुमन की ढंग से चुदाई नहीं हुई थी.
मैंने उसकी पानी छोड़ती चूत में लंड पेल दिया.
सुमन चीख उठी.
पर उसका दर्द ज्यादा देर ना रहा … क्योंकि मैंने भी उसे संभलने का मौका दे दिया.
लेकिन कुछ ही देर बाद घमासान चुदाई का दौर शुरू हो गया.
मैं चोदता रहा … हर तरीके से … हर पोजीशन में उसे चोदा.
सुमन भी चुदती रही … पता नहीं उसकी कसी हुई चूत का आज क्या हाल होना था.
क्योंकि रोज की चुदाई की वजह से मेरा पानी जल्दी गिरने वाला नहीं था.
सुमन तो कई बार अपना रस बहा चुकी थी.
देर तक की चुदाई के बाद पसीने से तर-बतर और बेहाल सुमन ने हाथ जोड़कर चुदाई रोकने को कहा, तो मुझे चुदाई रोकनी पड़ी.
मैं उसकी जांघ के सामने बैठकर पन्द्रह मिनट मुठ मारता रहा … तब जाकर मेरे लंड ने वीर्य का त्याग किया.
मेरे कामरस से सुमन के पेट नाभि और घाटी पूरी तरह भीग गए.
सुमन ने मुँह बनाया और बाथरूम चली गई.
मैंने भी तौलिए से खुद को पौंछा और नाइट गाउन पहन कर लेट गया.
सुमन ने कपड़े पहने और वो जाने से पहले मुझे किस करने लगी.
मैंने कहा- और नहीं चुदोगी? तो उसने आश्चर्य से मुँह बनाते हुए कहा- ना बाबा … अभी तो कम से कम एक साल का डोज हो गया.
हम दोनों हंसने लगे और वो चली गई.
मैं भी वैसे ही सो गया.
सुबह उठा तो देखा कि खुशी, पायल, प्रतिभा के बहुत से कॉल आए थे.
फ़ोन किसी कारण से बंद हो गया था.
जब मैंने खुशी को कॉल किया, तो उसका नम्बर बंद बताने लगा.
अब मैं खुद ही नीचे गया तो देखा कि मेहमान होटल से जाने लगे थे.
पता चला कि खुशी की विदाई सुबह सुबह ही हो गई थी.
प्राची भाभी सबको विदा कर रही थीं.
मैंने कहा- भाभी, मुझे भी तीन बजे निकलना है.
भाभी ने मुस्कुरा कर कहा- ठीक है.
मैंने तुम्हारा फ़ोन नम्बर ले लिया है.
कभी बुलाऊंगी, तो चले आना.
मैंने मुस्कुरा कर हां कहा.
फिर भाभी ने कहा- पायल तुम्हें छोड़ आएगी.
तुम फ्रेश होकर रेडी रहना.
सब रात भर के जगे हैं.
तो सो रहे होंगे.
मैं तैयार होकर पायल का वेट कर रहा था.
पायल दो बज भागते हुए मेरे पास आई.
पायल- सॉरी मैं लेट हो गई … चलो जल्दी … नहीं तो फ्लाइट मिस हो जाएगी.
मैंने छेड़ा- तो इतनी जल्दी है … हमें यहां से भगाने की! पायल ने मुँह बनाया और कहा- आपको तो जिन्दगी भर विदा ना करूं … पर आपने जाने की बात कही थी, तो मुझे ये ड्यूटी मिली है.
अब जाओ … मैं नहीं छोड़ने वाली आपको.
इस पर मैंने उसे बहुत मनाया, तब वो मानी.
वो मुझे नीचे दादी के पास ले गई.
आंचल पास खड़ी थी.
उसने कुछ गिफ्ट दादी को पकड़ाया, जिस पैर छूने पर दादी ने मुझे दे दिया.
आंचल की आंखों पर विदाई के आंसू थे.
पर छलकने से उसने रोक रखा था.
आंचल ने सिर्फ एक वाक्य कहा- फ़ोन करना.
और मैंने हां में सर हिला कर मुँह फेर लिया … नहीं तो मेरी आंखें भी छलक जातीं.
पायल ने एयरपोर्ट पहुंचने से पहले कार में ही मुझे कसके किस किया और रोने लगी.
मैंने उसे समझाया और फिर मिलने का वादा किया.
इस शादी ने मुझे बहुत कुछ दिया.
पर अभी बहुत कुछ बाकी है … अधूरा है.
फिलहाल कहानी यही तक समाप्त की जा रही है.
निरंतर प्रेम और स्नेह के लिए धन्यवाद.
आप सबको मेरी ये कहानी कैसी लगी.
आप अपनी राय मुझे इस पते पर दे सकते हैं.
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स्रोत:इंटरनेट