. फिर भी मैंने बात जितने के लिए कहा- तुम क्या चाहती हो, कहो तो सही! धरती अंबर तारे सितारे जो कहोगी तुम्हारे कदमों में बिछा दूंगा। खुशी ने कहा- तुमने कह दिया संदीप तो मुझे सबकुछ मिल गया.
और तुम मेरे पास आ रहे हो यही मेरे लिए सबसे बड़ा उपहार है.
फिर भी मुझे तुमसे कुछ अलग और ख़ास उपहार चाहिए। मैंने फिर कहा- तो तुम कहो तो सही, तुम्हारे लिए तो मेरी जान हाजिर है। खुशी ने कहा- मुझे तुम्हारी जान नहीं चाहिए, बस तुम्हारा लिंग चाहिए। उसकी बातों ने मुझे रोमांचित कर दिया और मैंने खुश होते हुए लेकिन थोड़ा भाव खाते हुए हंसते हुए लिखा- हा हा हा हा … मेरा लिंग तो तुम्हारा ही है.
लेकिन अगर तुम मुझे नहीं सिर्फ मेरे लिंग को बुलाना चाहती हो तो मैं उसे ही काट कर भेज देता हूँ। खुशी का जवाब भी मजाकिया अंदाज में आया- ठीक है, फिर गोलियों सहित काट कर भेजना। फिर तुरंत एक और मैसेज आया- यार मैं मजाक नहीं कर रही हूँ, मुझे सच में तुम्हारा लिंग चाहिए। मैंने भी जवाब दिया- मैं भी मजाक नहीं कर रहा हूँ, मेरा ये लिंग तुम्हारा ही है.
तुम इसे जैसे चाहो इस्तेमाल कर सकती हो.
इसके लिए मुझे पूछने की भी जरूरत नहीं है.
पर तुम्हारी शादी है, तुम सोच लो कि क्या करना है और क्या होगा। खुशी ने फिर कहा- तुम सचमुच बुद्धू हो, अरे यार तुम्हारा लिंग मुझे अपने लिए नहीं अपनी सहेलियों के लिए चाहिए.
तुम अपना लिंग देकर मेरी दो सहेलियों को संतुष्ट कर दो.
बोलो तुम अपना लिंग दोगे ना? अब मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई थी.
यार जिसके साथ मैं दिल लगाने लगा था, उसने मुझे सिर्फ जिगोलो समझा! वैसे सामान्य स्थिति में मैं हसीनाओं से शारीरिक संबंध के ऐसे प्रस्ताव पर सारे जहान की खुशियाँ पा लेता हूँ। पर मैं समझ नहीं पा रहा था कि मैं खुश होऊं या दुखी! मैंने सोचा हो सकता है खुशी मझे आजमा रही हो? खैर मेरी आँखों में आँसू तैर आये, और मैंने जवाब दिया- खुशी, तुम मुझे गलत समझ रही हो! मैं तुम्हारी शादी में नहीं आ रहा हूँ, मुझे माफ करना। खुशी ने फिर कहा- संदीप, तुमने ही तो अभी कहा कि मेरा लिंग तुम्हारा ही है, तुम जैसा चाहो इस्तेमाल करो, फिर अब क्या हुआ? और मैंने तुम्हें ऐसी बात करके दुखी किया, इसके लिए मुझे माफ कर दो.
लेकिन मुझे गलत समझने से पहले मेरी पूरी बात तो सुन लो। उसकी बात का कोई खास जवाब मेरे पास नहीं था, मैंने कहा- ठीक है कहो। खुशी ने कहा- तुमने किसी और से संबंध बनाने के लिए सीधे सीधे मना करके मेरा दिल जीत लिया, पर आज के समय में प्यार और सेक्स दो अलग-अलग चीजें हो गई हैं.
और तुम तो अन्तर्वासना से जुड़े व्यक्ति हो.
तुम इस चीज से परहेज कैसे कर सकते हो, और इसके अलावा भी कुछ बातें हैं। मैंने जवाब दिया- मुझे जिगोलो जैसे काम से कोई परहेज नहीं है.
मुझे जो भी बुलायेगी मैं वहां खुश होकर जाऊंगा.
पर खुशी तुम्हारी बात अलग है, तुमसे मेरा दिल का रिश्ता हो गया है.
तुम खुद ही मुझे किसी और के पास जाने को कहोगी तो मुझे बर्दाश्त नहीं होगा.
और तुम किसी और वजह की बात कह रही थी? तो खुशी ने कहा- संदीप, मैं तुम्हें अपने करीब पाना चाहती हूँ.
और उसके लिए मुझे ये खेल रचना पड़ा.
मेरा मंगेतर वैभव मेरी एक सहेली को भोगना चाहता है.
और मैं जानती हूँ कि हम जिस सोसायटी में रहते हैं वो भी ज्यादा मुश्किल नहीं है। पर मैंने वैभव को कहा कि मेरी सहेली संदीप की बहुत बड़ी फैन है, वो हमारी शादी में शामिल रहेगी उसे हमारी शादी का उपहार समझकर संदीप का लिंग दे देते हैं.
तो मेरी सहेली का जिस्म भी तुम्हें शादी के उपहार के तौर पर मिल जायेगा। और सच में मेरी सहेली ने ही तुम्हारी कहानी मुझे भेजी थी.
वो तुम्हारी बहुत बड़ी फैन है.
उसने मुझे बार-बार कहा है कि शादी पर मैं तुम्हें बुलाऊं.
मुझे इन बातों में कोई परेशानी भी नहीं दिखी.
एक सच्चाई और भी है कि मैं इसी बहाने अपने मंगेतर की जानकारी में भी तुम्हारे पास रह सकती हूँ, तुम्हें देख सकती हूँ तुम्हें महसूस कर सकती हूँ। अब मेरे पास खुश होने के बहुत से कारण थे.
मैंने चहकते हुए मैसेज किया- ठीक है, तुम्हें जैसा अच्छा लगे वो करो, पर मेरे दिल में हमेशा तुम ही रहोगी। यार सच तो ये है कि खुशी का प्यार तो मिल ही रहा था.
और उस पर बोनस मिल रहा है तो मुझे हर्ज ही क्या है.
ऐसे भी ज्यादा अमीर घरों में सेक्स संबंध कौन किससे रखता है, इसका तो अता-पता भी नहीं रहता। मेरी सहमति पाकर खुशी और भी ज्यादा खुश हो गई, उसने ‘आई लव यू’ संदीप! तुम बहुत अच्छे हो, टिकट बनने के बाद मिलती हूँ, अभी कुछ दिन व्यस्त रहूंगी.
कहकर फोन रख दिया। आज मैं सोचने पर विवश हो गया कि खुशी मुझसे सचमुच प्यार करती है या मुझे अपने मतलब के लिए फांस रही है? फिर मैंने सोचा कि चलो ठीक ही है, सुंदर हसीनाओं का शरीर मुझे उपहार में मिल रहा है.
मुझे इसे खुशी के प्यार का उपहार समझ कर ग्रहण कर लेना चाहिए। अब तक बहुत सी बातें स्पष्ट हो चुकी थी.
और कुछ बातें अभी भी अनसुलझी रहस्य थी.
लेकिन अब मैंने किसी भी विषय पर ज्यादा सोचने के बजाए शादी पर फोकस किया.
आखिर ये मेरी जानेमन की शादी थी, चाहे बहाना कुछ भी हो मुझे अपनी खुशी के करीब आने का मौका मिल रहा था.
और खुशी ने भी तो यही कहा था। मैंने दूसरा दिन कुछ चीजों की तैयारी में गुजारा.
और रात को मैंने कुसुम से बात की.
एक वो ही तो थी जिससे मैं अपने दिल की बातें शेयर करता था। कुसुम ने मुझे बहुत सारे सेक्स संबंधों के आफर के लिए बधाई दी.
और खुशी के साथ बात आगे बढ़े इसके लिए बेस्ट आफ लक कहा.
फिर हमने जमकर सेक्स चैट किया। तब कुसुम ने विदा लेने से पहले कहा- कभी मैं भी तुम्हें मिलने बुलाऊंगी तो आओगे ना?? मैंने हाँ कहा.
नहीं का तो सवाल ही नहीं था.
फिर कुसुम ने कहा कि वो भी एक महीने बात नहीं कर पायेगी, कुछ जरूरी काम में व्यस्त रहेगी और आने के बाद पूरी कहानी सुनेगी.
मैंने हाँ कहा और हमने फोन रख दिया। दो दिन बाद खुशी का मैसेज आया.
उसने टिकट भेज दिया था, टिकट रेलवे की फस्ट क्लास एसी सुपरफास्ट का था.
साथ में सॉरी लिखकर कहा गया था कि उस डेट पर फ्लाइट की टिकट नहीं हो पाई। मैंने ‘कोई बात नहीं, यही बहुत है.
’ लिखकर जवाब दिया, अब उसे क्या बताता कि मुझे तो नार्मल रिजर्वेशन में भी चल जाता। कहानी जारी रहेगी.
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स्रोत:इंटरनेट