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एक उपहार ऐसा भी 7

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एक उपहार ऐसा भी 7 1

. तो फिर खुशी ने मुझे देखा और कहा- संदीप तुम मेंहदी लगवाओगे? मैंने हड़बड़ाते हुए कहा- मैं? फिर उस लड़की को देखते ही मेरे दिमाग की बत्ती जली और मैंने कहा- अच्छा ठीक है, अब तुम्हारी शादी है तो लगवा ही लेते हैं। खुशी ने कहा- अच्छा तो ठीक है.
जाओ तुम मेंहदी लगवा लो.
और सुनो … फिर मेरे पास आकर थोड़े धीरे से बोली- तुम वैभव के दोस्त और संदेशवाहक हो.
तुम कभी भी कहीं भी आ जा सकते हो.
तुम्हें शादी की सारी रस्मों में शामिल रहना है। मैंने मुस्कुरा के हाँ कहा.
मैं आँचल से और ख़ुशी से विदा लेकर मेहंदी वाली लड़की के साथ अपने कमरे की ओर चल दिया। यहाँ पर खुशी के चिड़चिड़े व्यवहार से मेरी तरह आप भी अचंभित होंगे.
पर अमीर घरानों की लड़कियों का ऐसा व्यवहार स्वाभाविक ही होता है.
वैसे मेरी खुशी ऐसी नहीं है.
उसका व्यवहार वैसा ही था जैसे कोई जानवर अपने नवजात शिशु की चिंता में असहज होता है। खुशी की आँखों में मेरे लिए वही चिंता थी.
लेकिन मेरी खुशी अपनी बेबसी के चलते कुछ कर भी नहीं सकती थी.
इसलिए उसने ऐसा रूप धरा था.
खैर जो भी हो … नेहा के साथ बुरा हुआ था.
‘मैं अब उससे कैसे नजरें मिलाऊंगा’ सोच ही रहा था कि मेहंदी वाली से नजर मिल गई। मैंने नजर मिलते ही मुस्कुरा के नाम पूछा तो उसने कहा- सर मेरा नाम हीना है। मैंने नाम दोहराया- हीना! बहुत अच्छा नाम है! बातें करते हुए हम कमरे में आ गए थे.
मैंने हीना को पहले कमरे में जाने दिया.
फिर पीछे से मैंने दरवाजा लॉक करके अंदर आया.
यकीन मानिए … मेरा इरादा गलत नहीं था.
पर अनलॉक दरवाजे से भाभी अंदर आ गई थी.
तबसे मैंने सोच लिया था कि ऐसी गलती मुझे बड़े संकट में डाल सकती है। खैर हीना ने मुझे हाथ धोकर सुखा कर एक जगह बैठ जाने के लिए कहा.
तो मैंने बिस्तर पर एक तौलिया बिछाया जहां पर मेंहदी गिरने की संभावना थी.
और मैं हीना के निर्देश का पालन करते हुए बैठ गया.
मेरे सामने हीना खुद भी बैठ गई.
उसने एक बैग साथ रखा था.
जिसमें से उसने एक बॉक्स निकाला, उसमें मेंहदी और कुछ उससे संबंधित कुछ सामान रखे थे। पहले उसने मुझे एक मेंहदी पुस्तक देखकर डिजाइन पसंद करने को कहा.
मैंने भी कह दिया- बिना पुस्तक देखे कोई अपने मन का डिजाइन बना दो.
तब तो तुम्हारे हुनर का पता चलेगा। उसने भी मुस्कुरा के जी सर कहा.
फिर मेरे हाथों पर कोई तरल चीज लगाई.
फिर एक हाथ को एक कपड़े से पौंछा और मेंहदी लगानी शुरू कर दी। उसके नर्म हाथों की छुवन मेरे हाथों पर निरंतर पड़ रही थी.
उसके शरीर का स्पर्श मुझे उत्तेजित कर रहा था.
वो तो मेंहदी लगा रही थी पर मुझे कोई काम ना था.
इसलिए मैं बड़ी तसल्ली से उसे निहार रहा था.
उसके अंग-अंग और हर कटाव को मैंने नजरों से नाप डाला। जब हम साथ चल रहे थे तो उसकी ऊंचाई मेरे कंधों तक थी.
शरीर बहुत ही कसा हुआ सुडौल, लेकिन हीना गदराये बदन की मल्लिका थी.
लगभग 36 के स्तन और 38 के कूल्हों का अनुमान हो रहा था.
जब मैं उसे जी भर निहार रहा था, तब मैंने महसूस किया कि उसे भी मेरी इस हरकत का पता है। मैं उससे बीच-बीच में बातें भी कर रहा था.
उसके जॉब, घर, पढ़ाई, कंपनी सबके बारे में हमारी बातें होती रही.
अब वो मेंहदी लगाते हुए बारीक कारीगरी पर पहुंची तो उसने अपने दोनों पैर थोड़े पीछे कर लिये.
वो सामने की ओर मेरे हाथों के करीब चेहरा लाकर झुक गई.
जिससे मुझे उसके शामदार स्तन के दर्शन होने लगे। वैसे उसने कपड़े सलीके से पहन रखे थे.
फिर भी वो मेरे सामने जिस अवस्था में थी, उस अवस्था में मेरे सामने नजारा स्पष्ट हो गया। उसका दूधिया रंग और नर्म बदन मेरे होश उड़ा रहा था, मेरे लिंग में तनाव आ चुका था, मेरा ध्यान भटकने लगा था.
मैंने उसे पहले पूछ चुके ही सवाल दोहराने शुरू कर दिये। उसे अटपटा तो लगा.
पर उसने जवाब देते हुए एक हाथ पर मेंहदी का काम पूरा कर लिया.
और तब वो सर को उठा कर ठीक से बैठी.
लगभग आधा घंटा हो चुका था.
इसलिए उसे कमर भी सीधी करनी थी.
उसने कमर सीधी की और मुझसे नजरें मिल गई.
मैं अब भी बेशर्मों की तरह उसके उभार पर ही नजरें गड़ाया हुआ था। मेरी इस हरकत पर वो हड़बड़ा सी गई उसने दुपट्टा ठीक करते हुए ऊपर तक ढक लिया.
मैंने उसे कह भी दिया- अब ढकने का क्या मतलब.
मैंने सब कुछ देख ही लिया। वो कुछ ना बोली और मुस्कुराते हुए मेरे दुसरे हाथ में मेंहदी लगाने लगी। मैंने पहले हाथ की मेंहदी को देखकर कहा- सचमुच तुम्हारी बनाई मेंहदी बहुत खूबसूरत है, पर तुमसे ज्यादा नहीं! मेरी बातों का असर बाहर से नहीं दिखा.
पर उसकी दबी हुई मुस्कुराहट बता रही थी कि अंदर तक असर हो रहा है। फिर मैंने सोचा क्यों ना कुछ और बातों पर छेडूं.
क्या पता मामला फिट हो जाए.
यही सोचकर मैंने कहा- हीना, एक पर्सनल बात पूछूँ? हीना ने कहा- जी पूछ सकते हैं सर! मैंने कहा- क्या तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है? हीना ने कहा- नहीं है सर! मैंने तुरंत कहा- झूठ, तुम झूठ बोल रही हो। हीना ने कहा- नहीं सर.
मेरा यकीन कीजिए.
मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है। मैंने कहा- यार ये कैसे हो सकता है कि कोई भी लड़का इतनी खूबसूरत लड़की के पास ही ना आये? हीना ने अपना काम करते हुए ही कहा- मैंने ऐसा भी नहीं कहा सर.
एक लड़का मेरे पास आया था.
पर मेरे अब्बू बहुत गरीबी में मुझे पढ़ा रहे हैं.
मैं बॉयफ्रेंड बनाती तो मेरी पढ़ाई बर्बाद हो जाती.
यही सोचकर मैंने उसे बॉयफ्रेंड नहीं बनाया.
और अपनी पढ़ाई से समय निकालकर ये पार्टटाइम जॉब कर रही हूँ। मैंने बात पकड़नी चाही- बॉयफ्रेंड नहीं बनाया और करीब भी आया.
मतलब तुम लोगों ने सेक्स किया था क्या? अब उसने दो मिनट के लिए काम रोका और उठकर मुझसे नजरें मिलाकर देखा.
मुझे लगा कि अब डाँट ही देगी.
लेकिन वो फिर झुककर काम में लग गई। लेकिन मैं तो जैसे पीछे ही पड़ गया था.
मैंने कहा- बता दोगी तो मैं तुम्हारे अब्बू को बताने नहीं चला जाऊंगा! और आजकल तो चलता है.
इस बार मैं हीना के जवाब की प्रतीक्षा कर रहा था.
पर कोई जवाब नहीं आया.
तब मैंने फिर दोहराया- तुमने उसके साथ सेक्स किया था या नहीं? इस बार उसने झुके हुए ही सर हाँ मे हिलाया.
और मेरा लंड़ फुंफकार उठा.
मैंने फिर सवाल किया- अच्छा बताओ कितनी बार किया है? अब उसने सर झुकाये ही कहा- प्लीज सर.
ये सब मत पूछिये.
नहीं तो मैं शर्म के मारे मर जाऊंगी। मैंने भी रहम किया, कुछ देर शांत रहकर उसकी चुदाई के उपाय सोचने लगा और उसके बदन को निहारते रहा.
फिर मेरे आनंद के समापन का समय भी आ गया.
मेरे दूसरे हाथ में भी मेंहदी लग चुकी थी.
मैंने हीना की जमकर तारीफ करते हुए कह दिया- दिल चाहता है तुम्हारे हाथ चूम लूँ। उसने कहा- दिल तो बहुत कुछ चाहता है सर! पर दिल की सारी ख्वाहिशें पूरी करना मुनासिब भी तो नहीं है! मैंने हम्म्म करते हुए कहा-. लेकिन एक और प्राब्लम है.
मुझे तुम्हारी बनाई मेंहदी तुरंत ही धोनी पड़ेगी। तो हीना ने बेचैनी से पूछा- क्या हुआ सर, मेंहदी की डिजाइन पसंद नहीं आई क्या? तो मैंने कहा- अरे ऐसी बात नहीं है, डिजाइन तो तुमने बहुत खूबसूरत बनाई है पर मुझे जोर सो शुशु लगी है, तो कपड़े खोलने से पहले मेंहदी तो धोनी पड़ेगी ना! हीना का चेहरा एकदम से उतर गया.
उसे अपनी पूरी मेहनत बर्बाद होती दिखी.
फिर मैंने उसकी आँखों में आँखें डाली और कहा- अगर कोई होता जो मेरे कपड़े उतार के शुशु करवा देता तो मुझे मेंहदी नहीं धोनी पड़ती। वो चुप खड़ी रही जिसे मैंने मौन स्वीकृति समझा.
मैंने कहा- अगर तुम्हें कोई प्राब्लम ना हो तो मेरी इतनी मदद कर दो.
लेकिन हम दोनों एक दूसरे की आँखों में झाँकते हुए स्तब्ध खड़े थे जैसे हम भविष्य के सारे करार अभी ही कर लेना चाहते हों। क्या हीना की चुदाई होगी? क्या मैं नेहा को मना पाया? जानने के लिए कहानी के साथ बने रहें.
रोमांटिक कहानी जारी रहेगी.
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स्रोत:इंटरनेट