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एक दिल चार राहें 2

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एक दिल चार राहें 2 1

. आजकल संजीवनी बूंटी (संजया बनर्जी हमारी नई पड़ोसन) शाम को मेरे लिए खाने का टिफिन भेज दिया करती है। मैंने तो मना भी किया पर वो बोलती है कि होटल का खाना खाने से मेरी सेहत खराब हो जायेगी। जब तक मिसेज. माथुर (मधुर) वापस नहीं आती आप शाम हमारे यहाँ खा लिया करें या वह टिफिन भेज दिया करेगी। मैं सोच रहा था कि यह बंगाली परिवार है तो नॉन-वेज भी खाते होंगे पर उसने मेरी इस उलझन भी दूर कर दिया था कि वे. नवरात्रों के महीने में नॉन-वेज नहीं खाते। सुहाना ( हमारी नई पड़ोसन संजया बनर्जी की बेटी) का प्रोजेक्ट वाला काम शुरू हो गया है। वह 2 बजे ऑफिस में आ जाती है। मैंने उसके प्रोजेक्ट से सम्बंधित साईनोप्सिस. और क्वेश्चनेयर (प्रश्नावली) आदि तैयार करवा दिए हैं और अब वह दिन में सेल्स स्टाफ के साथ मार्किट सर्वे और सैंपल कलेक्शन के लिए विजिट करती है और फिर शाम की चाय हम साथ पीते हैं। लौंडिया जितनी खूबसूरत है. अपने काम में भी उतनी ही सीरियस भी लगती है। टेनिस की बॉल जैसे उरोजों को देखकर तो मुझे बार-बार उस दिन कुत्ते के डर के मारे उसके मेरे से लिपटने वाली घटना रोमांच में भर देती है। काश इन उरोजों को एक बार. फिर से वह मेरे सीने से लगा दे … आह … लगता है ये फित्नाकार फुलझड़ी तो सच में मेरा ईमान खराब करके ही मानेगी। कई बार तो मैं सोचता हूँ काश! मैं सुहाना और इस मीठी कचोरी (सानिया) को लेकर कहीं निर्जन स्थान पर. भाग जाऊं और फिर सारी जिन्दगी इनके साथ ही बिता दूं। काश! कोई जलजला ही आ जाये और सब कुछ ख़त्म हो जाए तो बस ये दोनों फुलझड़ियाँ सारे दिन मेरे आगोश में किलकारियां मारती और किसी चंचल हिरनी की तरह कुलांचें ही. भरती रहें। आज सन्डे का दिन है। छुट्टी के दिन मैं थोड़ा देरी से उठता हूँ पर पता नहीं आज थोड़ी जल्दी आँख खुल गई। मैं फ्रेश होकर बाहर हाल में बैठा सानिया का इंतज़ार करने लगा। इतने में संजीवनी बूंटी का फ़ोन आ. गया वह चाय और नाश्ते के लिए बुला रही थी। मैंने फिलहाल मार्किट का बहाना बनाकर मना कर दिया पर शाम के खाने के लिए जरूर हाँ करनी पड़ी। आप सोच रहे होंगे कुआं खुद प्यासे के पास आना चाहता है और तुम ना कर रहे. हो? दोस्तो! इसके दो कारण थे। एक तो जिस प्रकार हसीनाओं के नाज-ओ-अंदाज़ और नखरे होते हैं.
उसी प्रकार उनको प्रेम जाल में फ़साने के भी कुछ टोटके होते हैं। उन्हें किस प्रकार कामातुर किया जाता है मैं अच्छे से जानता हूँ। दूसरी बात अभी सानिया आने वाली थी तो मैं आज पूरा दिन इस इंडियन देसी हॉट गर्ल सानिया के साथ बिताने के मूड में था। इस फुलझड़ी को देखकर तो मेरा पप्पू किसी मयकश (शराबी) की मानिंद झूमने ही लगता. है। और फिर आधे घंटे के लम्बे इंतज़ार के बाद सानिया आ गई। मैंने उसे देरी से आने का कारण पूछा तो उसने बताया कि उसकी साइकिल खराब हो गई थी इसलिए देर हो गई। ओह … तो सानिया साइकिल पर यहाँ तक आती है। “तुम्हें. स्कूटी चलाना भी आता है क्या?” “किच्च.
” सानिया ने चिरपरिचित अंदाज़ में जवाब दिया। “तुम्हारी कभी स्कूटी चलाने की नहीं इच्छा होती है क्या?” “मेला तो बहुत मन करता है। मैंने एक बार अंगूर दीदी को बोला था कि मुझे भी अपनी फटफटी पर बैठाकर झूटा दे दो.
” “हम्म! … फिर?” “दीदी ने मना कल दिया.
” “ओह … कमाल है … क्यों?” “वह तो अपनी चीजों को किसी को हाथ भी नहीं लगाने देती.
” “तुम कहो तो मैं तुम्हें झूटा भी दे सकता हूँ और चलाना भी सिखा सकता हूँ.
” “सच्ची?” सानिया को तो जैसे मेरी बातों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था। “हाँ भई? पर एक बात है …” मैंने सस्पेंस बनाते हुए अपनी बात बीच में छोड़ दी। “क … क्या?” सानिया का दिल जोर जोर से धड़कने लगा था। “इस बात का जिक्र तुम किसी से नहीं करो तब?” “हो … ठीक है। कब सिखायेंगे?” सानिया की उत्सुकता तो बढ़ती ही जा रही थी। “अभी दिन में तो पॉसिबल नहीं पर अगर तुम शाम को आ सको तो आज. सन्डे का दिन है.
मैं तुम्हें सब सिखा दूंगा.
” “ठीक है मैं शाम को कितने बजे आऊँ?” “5-6 बजे के आसपास आ सकती हो तो देख लो? लेकिन … अगर घर वालों ने पूछा तो क्या कहोगी?” “वो मैं शाम को एक घर में काम करने जाती हूँ तो वहाँ से काम निपटाकर जल्दी आ जाऊँगी.
” “ओके.
” “सानिया यार! अब तुम बातें छोड़ो, पहले कल जैसी बढ़िया चाय पिलाओ फिर बात करते हैं।” “कल चाय अच्छी बनी थी?” “अच्छी नहीं लाजवाब कहो?” मैंने मुस्कुराते हुए कहा- सच में तुम बहुत बढ़िया चाय बनाती हो लगता है तुम्हारे हाथों में तो जादू है। अब बेचारी सानिया के पास मुस्कुराने के अलावा और क्या बचा था। वह मुस्कुराते हुए रसोई में चली गई और मैं उसके नितम्बों की. लचक और थिरकन ही देखता रह गया। मैंने कामशास्त्र के जानकार बताते हैं कि जब किशोरी लड़की के नितम्ब चलते समय थिरकने लगें तो समझ लेना चाहिए उसने अपने अनमोल गोपनीय खजाने से थोड़ी बहुत चुहल या छेड़खानी करनी. शुरू कर दी है। और सानिया के तो पिछले 2-3 महीनों में जिस प्रकार नितम्बों का आकार सुडौल और गोलाकार हुआ है.
मुझे लगता है उसने अपनी बुर से मूतने के अलावा भी कुछ करना जरूर शुरू कर ही दिया होगा। आज उसने बालों की दो चोटियाँ बनाई थी और सफ़ेद रंग का स्कर्ट और शर्ट पहन रखी थी। स्कर्ट के नीचे छोटे से निक्कर में उसकी रोम विहीन जांघें तो किसी हॉकी की खिलाड़ी जैसी लग रही थी- एकदम चिकनी, मखमली, स्निग्ध। थोड़ी देर में सानिया चाय और बिस्किट्स लेकर आ गई। आज वह कप के बजाय गिलास लेकर आई थी। उसने गिलास में चाय डालकर मुझे पकड़ा दी। मेरे कहने के बाद उसने अपने लिए भी गिलास में चाय डाल ली। मैंने उसे फर्श पर बैठने के. बजाय स्टूल पर बैठ जाने को कहा तो वह थोड़ा झिझकते हुए स्टूल पर बैठ गई। स्कर्ट के नीचे उसकी चमकती-खनकती मुलायम जाँघों के बीच का उभरा भाग देखकर तो मेरा लंड अंगड़ाई लेकर हिलोरे ही खाने लगा था। “फिर कल. क्या-क्या खाया?” “आं … कल …” सानिया चाय पीते पता नहीं क्या सोचे जा रही थी मेरी बात सुनकर चौंकी। “पहले तो बल्गल खाया फिर पेसपी (पेप्सी) पिई और रसमलाई भी खाई।” “खूब मजा आया ना?” “हओ … बहुत मज़ा आया।”. सानिया ने हंसते हुए कहा। उसके गालों पर तो जैसे लाली ही बिखर गई थी। “मैं भी कल शाम को ऑफिस से आते समय तुम्हारे लिए स्पेशल काजू की बर्फी, पेप्सी की 2 लीटर की बोतल और चिप्स-नमकीन लेकर आया था.
मुझे लगा तुम्हें काजू की बर्फी बहुत पसंद आएगी।” सानिया मेरी और हैरानी और अविश्वास भरी नज़रों से देखती ही रह गई। “वो फ्रिज के ऊपर मिठाई का डिब्बा रखा है ना? उसमें तुम्हारी मनपसंद काजू की बर्फी और साथ में नमकीन, बढ़िया इम्पोर्टेड चोकलेट और च्विंगम रखे हैं जाते समय घर ले जाना।” “ना … ना … मैं घर पर नहीं ले जाऊँगी.
” “अरे … क्यों?” “वो घर पर तो सारे एक ही बार में सारी खा जायेंगे?” “ओह …” “मैं यहीं खा लिया करूंगी” “ठीक है जैसा तुम्हारा मन करे?” “घर पर तो मेला विडियो गेम भी मोती भैया ने तोड़ दिया था?” “ओह …” मुझे याद आया गौरी को जो मोबाइल दिया था वह मधुर के साथ मुंबई जाते समय यहीं भूल गई थी। उसमें तो 3 महीने का. रिचार्ज भी करवाया हुआ है अगर वह मोबाइल सानिया को दे दिया जाए तो उस पर वह विडियो गेम ही नहीं और भी बहुत कुछ देख और खेल सकती है। “कोई बात नहीं मैं बाज़ार से नया विडियो गेम ला दूंगा। और हाँ अगर तुम्हें. मोबाइल पसंद हो तो वह भी मिल सकता है.
” “सच्ची?” सानिया हैरत भरी निगाहों से मेरी ओर देखने लगी। उसे तो मेरी बातों पर जैसे यकीन ही नहीं हों रहा था। “हाँ भई सोलह आने सच्ची.
” लगता है चुनमुन चिड़िया चुग्गा लेने को जल्दी ही तैयार हो जायेगी। गौरी को तो अपने जाल में फंसाने में मुझे पूरा एक महीना लग गया था पर लगता है सानिया नाम की इस कबूतरी को वश में करना ज्यादा मुश्किल काम नहीं है। बस किसी तरह इसके दिमाग. में यह बात गहराई तक बैठानी है कि हमारे बीच जो भी बात हो उसकी खबर किसी को कानों-कान ना हो और यह काम तो मैं बखूबी कर ही लूंगा। “ओके … रुको मैं अभी आया.
” कहकर मैं स्टडी रूम में रखा मोबाइल ले आया और उसे सानिया पकड़ा दिया। “लो भई सानिया मैडम … अब तुम जी भर कर इसमें विडियो और जो मन करे देखा करो.
” मैंने हंसते हुए कहा। सानिया मोबाइल को गौर से देखे जा रही थी। वह बोली- ऐसा मोबाइल तो तोते दीदी के पास भी था? “हाँ उसे दूसरा दिलवा दिया तुम इसे काम में ले लो.
” “हओ” कहकर सानिया मंद-मंद मुस्कुराने लगी। “अरे … सानिया तुमने कभी साड़ी पहनी या नहीं?” “किच्च?” “तुम्हें आती है क्या साड़ी बांधना?” “ना!” “एक बात तो है?” “क्या?” “तुम अगर साड़ी पहन लो तो उसमें तुम बहुत ही खूबसूरत लगोगी.
” “अच्छा?” “पता है गौरी को भी मधुर ने ही साड़ी बांधना सिखाया था.
” “मैंने भी तोते दीदी को बोला था मुझे भी साड़ी पहनना सिखा दो तो तोते दीदी नालाज़ हो गई?” “क्यों?” “पता नहीं.
वो बोलती है तुम यहाँ मत आया करो.
” कहकर सानिया ने उदास होकर अपनी मुंडी झुका ली। मैं सोच रहा था ये साली तोतेजान भी अपने आप को यहाँ की महारानी समझने लगी है.
और शायद वह अपना सिंहासन छिन जाने के डर से ऐसा सोचती होगी। वैसे भी हर स्त्री में नारी सुलभ ईर्ष्या तो होती ही है उसे लगा होगा मेरा आकर्षण कहीं सानिया की तरफ ना हो जाए या मधुर उसकी जगह कहीं सानिया को ज्यादा भाव. देना ना शुरू कर दे। मधुर ने मुझे एकबार बताया था कि सानिया का मन यहाँ रहने के लिए बहुत करता है। अब अगर उसे यहाँ रख लेने का लालच दे दिया जाए तो इस कमसिन कलि को फूल बनाने की मेरी हसरत बहुत जल्दी ही पूरी. हो सकती है। फिर तो मैं एक कुशल भंवरे की तरह इसका सारा मधु चूस ही डालूँगा। “अरे! तुम गौरी की चिंता मत करो … पता है मधुर तुम्हारे बारे में क्या बोलती थी?” “क्या?” सानिया ने डबडबाई आँखों से मेरी ओर देखा।. “वह बोल रही थी मेरा मन करता है सानिया को भी यहीं रख लूं.
” “सच्ची?” गौरी का चेहरा ख़ुशी के मारे चमकने लगा था। इससे पहले कि उसकी आँखों में आये कतरे गालों पर ढलकते उसने अपनी अँगुलियों से उन्हें पोंछते हुए कहा- पर मेरी किस्मत ऐसी कहाँ है? “अरे नहीं, मैं सच बोल रहा हूँ.
मधुर बोल रही थी कि गौरी तो शादी होने के बाद ससुराल चली जायेगी तो फिर हम सानिया को यहीं रख लेंगे।” “सच्ची?” “तुम्हारा मन करता है क्या यहाँ रहने को?” “मेरा तो बहुत जी कलता है।” “ठीक है मधुर को आ जाने दो फिर तुम्हें भी यहीं रख लेंगे … पर एक बात है.
” “क … क्या?” उसने कांपती आवाज में पूछा। लगता है सानिया के दिल की धड़कन तेज़ हो गई थी। साँसों के साथ उसके उठते-गिरते उरोजों को देख कर तो ऐसा लगता था जैसे मुश्किल से हाथ आने वाले खजाने के मिलने में कहीं देरी तो नहीं हो जायेगी। उसकी उरोजों की फुनगियाँ तो तनकर भाले की नोक की मानिंद हो चली. थी। “वो बोल रही थी सानिया कहीं पेट की कच्ची ना हो?” “पेट … कच्ची? … मैं समझी नहीं?” लगता है सानिया को कुछ समझ ही नहीं आया था। वह तो बस मुंह बाए गूंगी गुडिया की तरह मेरी ओर देखती ही रह गई। “अरे … मधुर. का सोचना है कि तुम यहाँ की बातें कहीं अपने घर पर या किसी और को ना बता दो?” “ओह … अच्छा? पर मैं तो यहाँ की कोई बात किसी से नहीं बताती? मम्मी औल भाभी बहुत पूछती हैं पर मैंने उनको कभी कुछ नहीं बताया.
” “ठीक है अगर तुम पक्का प्रोमिज करो कि तुम यहाँ की कोई भी बात किसी से भी नहीं करोगी.
तो मैं मधुर से बात करूंगा कि सानिया ने पक्का वादा किया है कि वह यहाँ की कोई भी बात किसी से नहीं करगी।” “हो … प्लोमिज” सानिया अपना गला छूते हुए बोली। (कुछ लोग अपनी बात को सच साबित करने के लिए कसम खाने की बजाय अपने गले के हाथ लगा कर बात बोलते हैं।) ”ऐसे नहीं? हाथ मिलाकर सच्चा प्रोमिज किया जाता है।” कहकर मैंने अपना हाथ. उसकी ओर बढ़ा दिया। सानिया ने झिझकते हुए मेरे हाथ में अपना हाथ थमा दिया। मैंने उसे जोर से दबाते हुए पहले तो थोड़ा हिलाया और बाद में उस पर चुम्बन ले लिया। सानिया ने कुछ बोला तो नहीं पर छुई-मुई की तरह थोड़ा. शर्मा जरूर गई। “तुम भी इस पर चुम्बन करो तब जाकर प्रोमिज पक्का होगा।” मैंने गंभीर लहजे में कहा.
तो सानिया ने थोड़ा सकुचाते हुए पहले तो मेरी ओर देखा और बाद में उसने अपने कांपते हुए होंठों से मेरे हाथ पर एक चुम्बन ले लिया। मैंने गौर किया वह लम्बी-लम्बी साँसें लेने लगी थी और शायद रोमांच के कारण उसके शरीर के रोयें खड़े हो गए थे। मेरा हाल भी लगभग सानिया जैसा ही हो गया था। “हाँ अब तुम्हारा और मेरा प्रोमिज. पक्का हो गया पर एक बात और भी है?” कहकर मैं हंसने लगा। “ओल क्या?” उसने हैरानी से मेरी ओर देखा। “मान लिया तुम अपने घर वालों को तो नहीं बताओगी पर तुम्हारी किसी सहेली ने पूछ लिया तो?” “मैं सच्ची बोलती मैं. यहाँ की कोई बात किसी से नहीं करती। वो प्रीति दीदी भी कई बार मेले से पूछती थी पर मैंने उसको भी कुछ नहीं बताया।” मुझे प्रीति का नाम कुछ सुना-सुना सा लगा। मुझे हैरानी हो रही थी भेनचोद ये प्रीति नामक नई. बला अब कहाँ से अवतरित हो गई? “ये प्रीति कौन है?” मैंने पूछा। “वो भाभी की छोटी बहन है ना प्रीति?” “ओह … अच्छा.
” अरे हाँ … मुझे अब याद आया … गौरी जब अपने भैया भाभी की सुहागरात का किस्सा बता रही थी तब इस प्रीति नामक फुलझड़ी का भी जिक्र आया था जिसके ऊपर कालू लोटन कबूतर हो गया था। पता नहीं कालू ने इस फुलझड़ी को चिंगारी दिखाई या नहीं। “वह तुम्हें कहाँ मिल गई?” “भाभी के बच्चा हुआ था तो घर पर काम करने वाला. कोई नहीं था तो भाभी ने प्रीति को बुला लिया था।” “हम्म! तो प्रीति क्या पूछ रही थी तुमसे?” “वो … वो … बॉय …” कहते हुए सानिया शर्मा सी गई और उसने अपनी मुंडी नीचे झुका ली। इस्स्स्स … इसके शर्माने की अदा. पर तो मैं दिल ओ जान से फ़िदा ही हो गया। “कौन … बॉय … ?” मैंने हैरानी से उसकी ओर देखते हुए पूछा। “वो पूछ लही थी कि मेला कोई बॉयफ्रेंड है क्या?” “ओह … फिर तुमने क्या बताया?” “किच्च?” “मतलब? यार … अब. शरमाओ मत। तुमने मेरे साथ पक्का प्रोमिज किया है कि अपने दोस्त से कोई बात नहीं छिपाओगी और ना ही शरमाओगी। प्लीज पूरी बात बताओ ना?” “वो … वो … मैंने बोला मेला तो कोई बॉय फ्रेंड नहीं है.
” “फिर?” “वो बोली तुम तो निरी पूपड़ी हो.
जब तक शादी नहीं हो जाती जवानी के मजे लेने के लिए बॉयफ्रेंड तो होना ही चाहिए। मेरे तो तीन-तीन बॉय फ्रेंड हैं। सभी मुझे बहुत प्यार करते हैं और बढ़िया गिफ्ट भी देते हैं। ये देख ये मोबाइल और रिस्ट वाच भी मेरे बॉय फ्रेंड ने गिफ्ट दिया है।” “अरे वाह … उसके तो मजे ही मजे हैं फिर तो?” मैंने हंसते हुए कहा। सानिया ने पहले तो हैरत भरी नज़रों से मेरी ओर देखा और फिर धीमी आवाज में बोली-. आपको एक ओल बात बताऊँ? “हाँ बताओ?” मेरे दिल की धड़कन बहुत तेज हो गई थी और लंड तो जिसे पायजामा फाड़ कर बाहर आने को उतारू हो गया था। “आप किसी को बताओगे तो नहीं ना?” “यार तुम भी कमाल करती हो? जब हम दोनों ने. एक दूसरे के हाथों का चुम्बन लेकर सच्चा प्रोमिज कर लिया तो फिर मैं भला तुम्हारे साथ हुई बात किसी को कैसे बता सकता हूँ? बोलो?” मैंने उलाहना दिया। “फिल ठीक है?” सानिया ने गला खंखारा और फिर बोली- ये. प्रीति है ना? “हओ?” मैंने भी आज ‘हाँ’ की जगह सानिया की तरह ‘हओ’ बोलकर हामी भरी। “ये मोबाइल पर गन्दी फ़िल्में देखती है और फिर अपने बॉयफ्रेंड से वैसी वाली बातें भी कलती है।” सानिया ने रहस्य मई ढंग से. धीमी आवाज में बताया। “वैसी मतलब गन्दी वाली?” मैंने पूछा तो सानिया ने शर्माते हुए हामी भरी। “हा … हा … हा … अरे जवानी में तो सभी लड़के और लड़कियां ऐसी फ़िल्में भी देखते हैं और आपस में ऐसी प्यार वाली बातें. भी खूब करते हैं.
” मैंने हंसते हुए कहा। सानिया आश्चर्य से मेरी ओर देखने लगी उसे तो लगा मैं प्रीति के बारे में कोई अन्यथा टिप्पणी करूंगा। “उसने एक बात और भी बताई थी?” “क्या?” “वो बोलती है बड़े दूद्दू वाली लड़कियों को उनके बॉय फ्रेंड बहुत प्यार करते हैं.
” “उसके दूद्दू बड़े हैं क्या?” “हओ … वो बोलती है उसका बॉय फ्रेंड तो उसके दूद्दू खूब मसलता है तभी ये इतने बड़े हो गए हैं.
” “वाह … उसके तो खूब मजे हैं फिर तो?” सानिया मेरी बात सुनकर चुप सी हो गई शायद उसे प्रीति के बड़े दुद्दुओं से ईर्ष्या होने लगी थी। “सानिया माना तुमने किसी को अपना बॉयफ्रेंड तो नहीं बनाया पर तुम्हारी खूबसूरती को देखकर बहुत से लड़के. तो तुम्हारे पीछे ही पड़े रहते होंगे? है ना?” “हओ … ” सानिया ने शरमाकर अपनी मुंडी नीचे झुका ली थी। फिर थोड़ी देर बाद बोली “आपको एक बात बताऊँ?” “हाँ?” “वो … चिंटू है ना?” “कौन चिंटू?” “भाभी का छोटा भाई …”. “ओह.. हाँ?” “वो जब हमारे यहाँ आया था तो मेले पीछे ही पड़ गया था?” सानिया तो बताते हुए गुलजार ही हो गई थी। “क … क्या किया उसने?” मैं सोच रहा था कहीं साले उस चिंटू के बच्चे ने सानिया का गेम तो नहीं बजा दिया होगा। “मुझे बोलता था तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो मेरा मन तुम्हारे साथ शादी करने को करता है।” “ओह … फिर?” “मैंने उसे झिड़क दिया कि मुझे ऐसी बाते अच्छी नहीं लगती मैं भाभी से तुम्हारी शिकायत कर. दूँगी?” “हा हा हा … इसमें शिकायत वाली क्या बात थी … बेचारे का मन तुम्हारी खूबसूरती देखकर मचल गया होगा उसका क्या दोष है? उससे शादी कर लेती या उसे बॉय फ्रेंड बना लेती तो तुम्हारे भी दूद्दू बड़े कर देता?”. मैंने हंसते हुए कहा। “मुझे उस लटूरे से शादी नहीं कलनी!” “अच्छा तो तुम कैसे लड़के से शादी करना चाहती हो?” “बहुत प्यार करने वाला हो और अच्छी कमाई करने वाला हो?” “हम्म! एक बात तो है?” “क्या?” “तुम्हारी. शादी जिसके साथ होगी वह तुम्हें प्यार तो बहुत करेगा?” “कैसे?” “अरे तुम इतनी खूबसूरत हो … कोई भी तुमसे आसानी से शादी को राजी हो जाए!” “मैं कहाँ इतनी सुन्दर हूँ?” “तुम्हें अपनी खूबसूरती का अंदाजा ही नहीं. है? तुम सच में बहुत खूबसूरत हो.
” सानिया मंद-मंद मुस्कुराते हुए कुछ सोचे जा रही थी। शायद अब उसे अपनी जवानी और खूबसूरती का कुछ अहसास होने लगा था। “सानिया मैं सच कहता हूँ अगर मैं कुंवारा होता तो मैं तो झट से तुमसे शादी करने को मनाने की कोशिश करता.
” कहकर मैं हंसने लगा। उसके चहरे पर कई भाव आ-जा रहे थे। वह कुछ बोलना चाह रही थी पर उसके होंठ काँप से रहे थे और शायद उसकी जबान उसका साथ नहीं दे रही थी। “एक बात तो हो सकती है.
” “क … क्या?” सानिया ने नशीली आँखें फड़फड़ाते हुए मेरी ओर देखा उसकी आँखें एक अनोखे रोमांच में डूब सी गई थी उनमें लाल डोरे से तैरने लगे थे। “तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा?” “किच्च?” “सच कहता हूँ अब तो मेरा मन भी तुम्हारा बॉयफ्रेंड बन जाने को करने लगा है.
” मैंने हंसते हुए कहा। इस्स्स्स … सानिया तो लाज के मारे गुलजार ही हो गई थी। “मुझे ऐसी बातों से शर्म आती है।” उसने मुंडी झुकाए हुए ही कहा। “अरे मैं तो मज़ाक कर रहा था। अच्छा अब मैं नहाने जा रहा हूँ तुम पहले तो झाड़ू लगा लो आज पोंछा रहने दो.
और उसके बाद जल्दी से कपड़े धो लेना फिर हम दोनों मिलकर तुम्हारी पसंद का नाश्ता बढ़िया बनाते हैं।” “हो … ठीक है।” सानिया गंभीर हो गई थी शायद वह मेरे इस प्रस्ताव के बारे में जरूर सोच रही होगी। वह धीमे कदमों से बर्तन समेट कर रसोई में चली गई और मैं बाथरूम में। [email protected] इंडियन देसी हॉट गर्ल की. कहानी जारी रहेगी.

स्रोत:इंटरनेट