. मैं दोस्त के रूम पर पहुंच कर दरवाज़ा खोलकर उसे अन्दर ले लिया.
वो अन्दर आकर बेड के पास नीचे सर करके खड़ी हो गयी.
वो शर्मा रही थी.
मैं दरवाजा बंद करके उसके सामने खड़ा होकर उसका हाथ अपने हाथों में पकड़ लिया.
वो तुरंत मुझसे लिपट गयी.
वो ऐसे लिपटी कि जैसे मेरे जिस्म में समा जाएगी.
हम ऐसे ही 2 मिनट खड़े रहे, उसके बाद मैंने धीरे से उसका सर अपने हाथों से पकड़ कर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये.
गुलाब की पंखुड़ियों जैसे उसके होंठ मेरे होंठों में थे.
मैं उसके होंठों को चूसता रहा.
कुछ समय बाद वो भी मेरा साथ देने लगी.
हम दोनों ऐसे ही 10 मिनट तक एक दूसरे को चूसते रहे.
उसके बाद मैंने अपने हाथों को उसके सर से हटा कर उसके चुचियों पर रख दिए.
धीरे धीरे फेरने लगा.
इससे उसकी चुचिया एकदम टाईट हो गयी थीं, वो सिहर सी गयी थी.
लेकिन मैंने उसके होंठों को चूसना नहीं छोड़ा और टॉप के ऊपर से ही उसकी चुचियों को जोर जोर से दबाने लगा.
फिर धीरे धीरे मैं उसके होंठों से हटकर उसके गर्दन पर चूमने और चाटने लगा.
ऐसे करते हमें लगभग 20 मिनट हो गए थे.
हम लोग अभी तक खड़े ही थे.
उसके बाद मैं उससे अलग होकर उसको बेड पर लिटा दिया.
फिर उसके बगल में लेट कर उसको चूमना शुरू कर दिया और उसको टॉप निकालने के लिए बोला.
वो बोली- तुम खुद ही निकाल दो.
मैंने तुरंत उसके टॉप को निकाल कर रख दिया.
वो काले रंग की ब्रा में इतनी सुंदर लग रही थी कि क्या बताऊं दोस्तो … मैं वो पल बयान ही नहीं कर पा रहा हूँ.
अब मैं ब्रा के ऊपर से ही उसके चुचियों को जोर जोर से दबाने लगा.
उसके निप्पल टाइट हो गए थे.
मैंने उसके पेट को चूमना शुरू कर दिया.
फिर मैं उसकी नाभि में अपनी जीभ डालकर चूसने लगा.
उसके बाद मैं नाभि से नीचे जाने लगा तो उसकी जीन्स बीच में आ गई.
मैंने उससे कहा- बाबू, इसे भी निकाल दो.
उसने बोला- जो भी करना है, तुमको ही करना है … मैं नहीं कुछ करूँगी.
यह कहकर रेशमा हंस दी.
मैंने तुरंत उसकी जीन्स को उतार दिया.
अब वो मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पैंटी में ही थी.
काले रंग की ब्रा पैंटी में वो जन्नत की अप्सरा लग रही थी.
दूध जैसा गोरा बदन था उसका.
मैंने उसको फिर से चूमना चालू कर दिया.
मैंने उसके पेट पर से शुरू किया, फिर धीरे धीरे नीचे आने लगा और उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसके चूत को चूमने और चाटने लगा.
उसकी पैंटी अब तक गीली हो गयी थी और मुझे कुछ अजीब सी महक आ रही थी और स्वाद भी.
वो पूरी तरह से अब पागल हुए जा रही थी लेकिन फिर भी कुछ मुँह से बोल नहीं रही थी.
मैंने सही समय समझ कर पहले उसकी ब्रा और फिर पैंटी को उसके शरीर से अलग कर दिया.
उसकी चुत पर एक भी बाल नहीं था, उसने कल ही शायद चूत को शेव किया था.
मैंने अपने कपड़े भी निकाल दिए, मैं सिर्फ निक्कर में हो गया.
वो तो शर्मा कर सिमट गई और उसने अपनी जांघों को सटा कर अपनी चूत को ढक लिया और अपने हाथों से अपने चुचियों को छिपाने लगी.
मैंने बहुत प्यार से उसके हाथों को हटाया और उसकी चुचियों को अपने मुँह में लेकर जोर से चूसने लगा.
निप्पल चूसने काटने के दर्द से उसकी चीख निकल गयी.
मेरे दांतों के निशान उसके मम्मों पर पड़ गए थे.
मैं उसकी चुचियों को छोड़कर उसके होंठों पर आ गया औऱ एक हाथ से उसकी चूत को सहलाने लगा.
फिर धीरे धीरे करके मैं उसकी चूत में उंगली डालने लगा, लेकिन चूत टाईट होने की वजह से उंगली अन्दर नहीं जा रही थी.
फिर मैं उसके नाभि को चाटने लगा और चाटते चाटते उसकी चूत तक पहुंच गया.
मैं उसकी चूत को चूसने लगा, जिससे उसकी चुत ने पानी छोड़ दिया.
इसी के साथ उसने मेरा सर अपनी चुत पर दबा लिया.
उसकी चुत का सारा पानी मेरे मुँह पर आ गया और कुछ पानी मेरे मुँह में भी चला गया.
अजीब सा स्वाद था.
मैं उसकी चुत को ऐसे ही 5 मिनट तक चाटता रहा.
अब वो पूरी तरह से गर्म हो गयी थी लेकिन मैं उसको अभी लंड भी चुसाना चाहता था.
मैंने उसको बोला- बाबू मेरा मुँह में लोगी? उसने कुछ नहीं बोला, तो मैंने उसके मुँह के पास अपना लंड कर दिया.
पहले तो उसने अपने हाथों मेरे निक्कर से मेरे लंड को बाहर निकाला, जो कि एकदम तनकर 8 इंच का हो गया था.
वो लम्बा लंड देखकर डर सी गयी और बोली- ये इतना लंबा … कैसे जाएगा मेरे अन्दर? मैं सिर्फ हंस दिया.
फिर वो धीरे धीरे लंड को आगे पीछे करने लगी और फिर मेरे दोबारा कहने पर उसने अपने होंठों से मेरे लंड के सुपारे को अपने होंठों पर रख दिया.
मैंने इतने में थोड़ा सा धक्का दे दिया.
मेरा 2 इंच लंड उसके मुँह में चला गया और उसने डरकर तुरन्त मुँह से लंड को बाहर निकाल दिया.
वो बोली- मैं नहीं चूसूंगी … इतना मोटा है.
मुझे अपना लंड लड़कियों को चुसाना बहुत पसंद है.. लेकिन रेशमा मान नहीं रही थी.
मैंने भी उस पर कोई दबाव नहीं डाला.
मैंने उसको लिटा दिया.
मैं उसकी गुलाबी सी चुत को देख रहा था तो बोली- देखते ही रहोगे क्या, अब कुछ करो ना … नहीं तो मैं मर जाऊँगी.
मुझे मालूम नहीं मेरे अन्दर कुछ हो रहा है.
मैंने उसकी गांड के नीचे तकिया लगाया जिससे उसकी चुत खुल गई.
मैंने पास में रखी एक जैली क्रीम से उसकी चुत भर दी.
फिर मैं अपने लंड पर भी क्रीम लगा ली और धीरे से उसकी चुत पर रखकर रगड़ने लगा.
वो तो जैसे पागल हुए जा रही थी.
मैंने उसकी जांघों को अपने हाथों से पकड़ कर एक धक्का लगाया, वो सिहर सी गयी और मेरा लंड फिसल गया.
मैंने फिर अपने हाथों से उसकी चुत को खोलकर लंड को सैट करके फिर एक जोरदार झटका मारा.
इस बार मेरा लगभग 3 इंच लंड उसकी चुत में चला गया.
उसके मुँह से इतनी जोर से चीख निकली उम्म्ह… अहह… हय… याह… कि बता नहीं सकता.
वो जोर जोर से रोने लगी, कुछ बोलना चाहती थी, लेकिन बोल ही नहीं पा रही थी.
वो मूर्छित सी हो गई थी.
मैं ऐसे ही कुछ समय तक शान्त रहा, उसे सहलाता रहा.
फिर उसका दर्द कुछ कम हुआ, तो उसने रोना बन्द किया और मैं भी उसके होंठों को चूमने लगा.
अब वो सामान्य हो गयी थी.
फिर मैंने एक जोर का झटका मारा, अबकी बार मेरा आधा से ज्यादा लंड उसकी चुत में घुस गया था.
वो चिल्लाना चाहती थी लेकिन मेरे होंठों में उसके होंठ होने की वजह से अन्दर ही घुट कर रह गयी.
मैंने उसी समय फिर से एक झटका दे मारा, जिससे कि मेरा पूरा लंड उसकी छोटी सी चुत में चला गया था.
वो रो भी नहीं पा रही थी, बस अपने नाखूनों से मेरे पीठ में चुभा रही थी.
मैंने उसको कस कर पकड़ा हुआ था, जिससे कि वो चाहकर भी अलग नहीं हो सकती थी.
मैं लगातार धक्के लगाए जा रहा था.
करीब 5 मिनट की चुदाई के बाद मैं उसकी चुत में ही झड़ गया क्योंकि बहुत दिन बाद चुत मिली थी, तो मैं जल्दी झड़ गया.
उसके बाद मैंने देखा कि उसकी चुत से खून निकल कर मेरे लंड औऱ उसकी चुत व जांघों पर लग गया था.
वो अब तक किसी से चुदी नहीं थी इसलिए पहली बार चूत की सील टूटने का खून था.
उसके बाद मैंने अपने लंड को साफ किया और उसकी चुत को भी पौंछा.
फिर मैं उसको उठाने लगा, तो वो उठ ही नहीं पा रही थी.
मैं उसको अपनी गोद में उठाकर वाशरूम ले गया.
फिर हम दोनों ने साथ में अपने आपको साफ किया.
उस दिन हम दोनों ने 2 बार और चुदाई की.
वो दर्द के बावजूद कैसे हुआ, दोस्तों मैं आपको अगली कहानी में बताऊँगा.
आप मुझे मेल कीजिए कि आपको मेरी ये चुदाई की कहानी कैसी लगी ताकि मैं और कहानी लिख सकूं.
मेरी मेल आईडी है [email protected]
स्रोत:इंटरनेट