. पर मेरा झड़ना अभी बाक़ी था, सो मैं ज़ोर-ज़ोर से लंड को उसकी बुर के अंदर-बाहर करता रहा.
पर वो ऐसे झटके लेने लगी, जैसे उसे गुदगुदी हो रही हो.
उसके माथे पर बल पड़ने लगे.
वो झुंझलाने लगी.
पर मैं रुका नहीं.
मैं झड़ने को हुआ, तो उससे पूछा कि माल अंदर गिराऊं या बाहर निकाल लूँ, उसने इशारे से कहा कि अंदर ही डाल दो.
तो मैंने सारा गाढ़ा माल अंदर ही डाल दिया.
फिर मैंने उसे टेबल से नीचे उतार दिया और खुद बाथरूम में चला गया.
मैं वापस आया तो वो चली गई थी.
फिर मेरे रूममेट्स आये, हमने खाना खाया और सो गए.
दूसरी सुबह वो नाश्ता बनाने आई तो मुझे देखकर शरमाने लगी.
फिर जब मेरे तीनों साथी चले गए, तो उससे मैंने मुस्कुरा कर पूछा- कैसी हो, मेरा काम कैसा लगा? तो उसने बड़ी बेबाकी से कहा- फौजी भाई, निन चन्ना माड़तिया.
(आप बढ़िया करते हो).
बस फिर क्या था, मैंने फिर उसे धर दबोचा और शुरू कर दी चुदाई.
ऐसे एक महीने में मैंने उसे लगभग 30 बार चोदा.
उसे घोड़ी बनाकर पीछे से चोदा, बेड पर सुलाकर चोदा, शेल्फ पर बिठाकर चोदा, यानि हर मुमकिन पोज़ में चोदा.
उसके मुंह में लौड़ा घुसाकर चुसाया, पर इसमें वो ज़्यादा जानकार नहीं थी.
न ही उसके मुंह में मेरा लंड ठीक से घुस पाता था.
पर एक बात मैंने मार्क की कि वो एक बार झड़ जाती, तो आगे और करने से उसे शायद तकलीफ होती थी.
वो करना नहीं चाहती थी.
मुझे रोकती थी, या जल्दी निपटने को बोलती थी.
ऐसे ही एक बरसाती रात में वो मेरे साथ ही मेरे कमरे में रह गई थी क्योंकि उसका पति अपनी पहली पत्नी को लेकर ससुराल गया हुआ था.
उसे बिजली, बारिश में डर लगा, तो वो मेरे कमरे में आ गई.
अपने बच्चे को उसने बेड के एक कोने में सुला दिया और लगी मेरे लंड से खेलने.
मैंने एक बार उसे चोदा, वो शांत हो गई.
दूसरी बार मैंने उसे घोड़ी बनाकर ज़ोरदार धक्कों के साथ लगभग 25 मिनट चोदा.
इस बार उसने बार-बार मुझे रोका क्योंकि वो झड़ गई थी, और झड़ने के बाद वो चुदाई कर नहीं पाती थी.
तीसरी बार मैंने फिर से जमकर उसकी चुदाई की.
वो इस बार बड़ी देर में, बड़ी लम्बी चीख के साथ झड़ी, और काफी देर तक झड़ती रही.
थरथराती रही, झटके लेती रही.
फिर निढाल होकर एक तरफ जैसे गिर सी गई.
पर मेरा माल तो गिरा नहीं था, सो मैं 5 मिनट रूककर फिर से उसे चोदने की कोशिश करने लगा.
पर उसने साफ मना कर दिया.
अब मैं क्या करता? तो मैंने उसे ज़बरदस्ती घोड़ी बनाया, उसकी गांड को काफी देर तक सहलाया, फिर अपने लौड़े पर नारियल का तेल लगाया, उसकी गांड पर भी ढेर सारा तेल लगा दिया.
उसने पूछा- क्या कर रहे हो? तो मैंने कहा- मेरे लंड को शांत करना है, तेरी बुर तो ठंडी हो गई.
पर वो समझी नहीं.
मैंने अपने लंड के मोटे सुपारे को उसकी गांड के छेद पर टिकाया और उसके कूल्हों को ज़ोर से जकड़ कर एक ज़ोर का धक्का लगाया.
वो चीख पड़ी- मर गई, मर गई, फौजी भाई, वह जगह नहीं है, वह जगह नहीं है … गलत जगह घुसा रहे हो! और उसने आगे बढ़ कर अपने को बचाना चाहा, पर मेरी मज़बूत पकड़ से छूट नहीं पाई.
मैंने कहा- जो भी जगह है, ठीक है, मुझे मज़ा आ रहा है, घुसाने दे.
और मैंने पूरी बेरहमी से अपने लौड़े को उसकी गांड के छोटे से सुराख में ज़ोरदार धक्कों के साथ पूरा घुसेड़ दिया.
साली दर्द से चिल्लाने लगी.
सर धुनने लगी, गांड हिलाने लगी.
पर मैंने उसे हिलने या बचने का मौक़ा दिए बिना खचाखच लंड को उसकी गांड में पेलना शुरू किया.
वो चिल्लाती रही- नई तईते फौजी भाई, साका… (दर्द हो रहा है फौजी भाई, बस करो).
पर मैं कहाँ मानने वाला था, उसकी गांड मारना पूरे जोश से जारी रखा.
यह मेरा पहला मौक़ा था जब मैं किसी की गांड मार रहा था.
उसकी तंग गांड मेरे लौड़े को जैसे दबा कर उसकी जान ले लेने की कोशिश कर रही थी.
उसका अंदरूनी हिस्सा बहुत गर्म लग रहा था और गांड का छेद मेरे लंड को कसकर पकड़ रहा था.
यह एहसास मेरे लिए नया था, और काफी मस्त लग रहा था मुझे.
मैं पूरी रफ़्तार से उसकी गांड की चुदाई करने लगा.
थोड़ी देर विरोध करने के बाद वह भी शांत हो गई, और सहयोग करने लगी.
पता नहीं उसे मज़ा आ रहा था या नहीं, पर वो किसी तरह मेरे मोटे लंड को अपनी गांड की गहराई तक झेल रही थी.
मन भर चोदने के बाद मैंने अपना सारा माल उसकी गांड में ही निकाल दिया.
वह निढाल होकर एक तरफ गिर पड़ी.
धीरे से उसने दर्द से कराहती आवाज़ में कहा- निन मनसा अला, वंदु राक्षस.
(तुम मनुष्य नहीं, एक राक्षस हो.
) इसके बाद जब भी हमारी चुदाई के दरमियान वह पहले झड़ जाती, तो मैं उसकी गांड मारता.
कभी-कभी तो वो खुद भी मुझे बोलती गांड मारने को.
उसकी गांड मैंने पहली बार मारी, फिर उसके गांव में कई औरतों ने मुझसे गांड मरवाने की फरमाइश की.
कइयों की गांड मैंने मारी, जो उनके लिए नया तजुर्बा था.
पर नए स्टाइल की ललक में वह तकलीफ सहकर भी अपनी गांड में मेरा लंड लेती रही.
वहाँ से मुझे औरतों की गांड मारने का नया अनुभव मिला.
या यूँ कहें कि मुझे गांड मारने की ललक भी जगना शुरू हो गई.
इस तरह चूत की अपेक्षा गांड मारने में मेरे लंड को ज्यादा मज़ा आने लगा.
आपको मेरी कहानी के बारे में अगर अपनी राय देने का मन हो तो आप मुझे मेल कर सकते हैं.
फिर मिलेंगे एक नई कहानी के साथ.
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स्रोत:इंटरनेट