. कंडोम पहने बिना खेत में चुदाई करी मजदूरी करने वाली लड़की की उस मजदूर लड़की के स्तन बहुत ही ज्यादा बड़े बड़े और गांड कमाल की फूली हुई थी.
दोस्तों मैं के साथ अवैध सेक्स संबंध बनाने के लिए पागल हो चूका था और अब हर हाल में मैं उस गरीब लड़की की चुदाई करना चाहता था और वो भी बिना कंडोम पहने.
शहर में मैं कितनी बार भी रंडियो के पास जाके आया था लेकिन मुझे पता था की एक लड़की को पता के उस गरीब लड़की की चूत में लंड देने का मजा एक रंडी की चूत कभी भी नहीं दे सकती.
मैं मन ही मन सेक्स करने के लिए उस गरीब मजदूर लड़की को पटाने की योजना बनाने लगा.
मैंने उसे देखना और स्माइल देना चालू कर दिया.
वो जवान और सेक्सी माल लड़की भी मेरे सामने हंसती थी और मेरे तरफ देखती थी लेकिन वो मुझ से दूर दूर रहती थी.
शायद इसकी वजह उस गरीब लड़की की माँ थी जो उसके साथ ही काम पे आती थी.
मैंने सोचा की अगर इस लड़की की चूत में लंड देना हैं तो इसकी माँ को यहाँ से दूर करना ही पड़ेगा.
मैंने मुनीम जी से बात की और गरीब मजदूर लड़की की माँ दुलारी को भेंस के तबेले के गोबर उठाने का काम दे दिया.
दुलारी तो बहुत खुश हुई क्यूंकि यह काम उसके खेत के काम से दस गुना आसान था, वोह मुझे धन्यवाद करते हुए काम के लिए भेंस के तबेले के तरफ चली गई.
अब मेरी चंद्रकला और मेरे बिच कोई काँटा नहीं था.
अब मैं राह देख रहा था एक मौके की जिस दिन में इस गोरी की देसी चूत में अपना उसकी चुदाई कर सकूँ.
उस गरीब लड़की की माँ के दूर जाते ही चंद्रकला भी अब मुझ से नजदीक होने लगी थी.
वो मेरे साथ बातें करती थी और मैंने मस्ती में एक दो बार उसके स्तन पर भी हाथ मार दिए थे.
पहले तो वो रूठ के चली गई लेकिन फिर वो मुझे छूने देती थी.
हाँ लेकिन अभी मुश्किल यह थी की चोदने का प्लान नहीं आकार ले रहा था.
मैंने इसे बिना कंडोम पहने चोदूं लेकिन साली जगह की और सही मौके की किल्लत थी.
बहुत दिमाग चलाने के बाद आखिर कार सही मौका मिल ही गया.
आई और खेत के काम में 3 दिन की छुट्टी थी.
चंद्रकला के अलावा तो सभी लोग दुसरे गाँव के थे इसलिए छुट्टियों में वो लोग अपने गाँव गए.
दुलारी को हमने भेंसो के काम के लिए रोके रखा था.
मेरे पिता ने उसे डबल पैसे देने का वादा करा था ताकि भेंसो की अच्छी देखभाल हो सकें.
मैंने एक दिन पिताजी से कहा की सरसों के खेत में कुछ काम हैं और एक मजदुर लगाना पड़ेगा.
पिताजी बोले की दिवाली के बाद करवा लेना.
मैंने कहा नहीं पिताजी उसमे बहुत घास निकल आई है बिच में.
पिताजी बोले अभी तो कोई हैं भी नहीं करने के लिए.
मैंने कहा दुलारी की बेटी हैं उसे मुनीम जी के द्वारा कहेलवा दें वो काम भी अच्छा करती हैं.
पिताजी बोले, तू ही बोल दे उसे.
मैं दुलारी को बोल दूंगा, और हाँ उसे भी सामान्य वेतन से ज्यादा पैसे देना.
मजबूर हैं बिचारे वरना मजदूरी किसको अच्छी लगती हैं.
मेरे जमीदार पिता को पता नहीं था की चंद्रकला आज दस गुना पैसे लेकर जाएगी अगर मेरा प्लान सफल रहा और मुझे उस गरीब लड़की की टाइट चूत में बिना कंडोम पहने लंड पेलकर चुदाई करने का मौका मिल गया तो.
चंद्रकला के साथ में खेत में गया और इधर उधर देखा की कोई नहीं हैं तो धीरे से उसके स्तन को सहला दिया.
सरसों के खेत में उस मजदूर लड़की की चुदाई करने के लिए अब मेरा लंड खड़ा हो गया था.
चंद्रकला घबराते हुए बोली, साहब कोई आ जाएगा तो बहुत बदनामी होगी आपकी आप इतने बड़े पैसे बाले आदमी हैं और मैं एक गरीब मजदूर.
मैंने कहा कोई नहीं आएगा जानेमन ये पूरा खेत मेरा है.
कंडोम पहने बिना सरसों के खेत में चुदाई करी मजदूरी करने वाली गरीब लड़की की फिर वर्जिन चूत को चोदने के बाद उसे गर्भनिरोधक गोली खिला दी :- अपने लंड पर बिना कंडोम पहने अवैध सेक्स संबंध बनाने के लिए मैंने कामुक चंद्रकला के घाघरे को अपने हाथ से उप्पर. उठाया और उसे निचे घास के ऊपर लिटा दिया.
फिर उसकी सील पैक वर्जिन बुर को चोदने के लिए मैंने उसके सभी कपडे एक एक कर के उतार फेंके और उसे बिलकुल नंगी कर दिया.
चंद्रकला शरमाते हुए मेरी तरफ देख रही थी और मैं उसके उभरे हुए सेक्सी स्तनों को किसी भूखे शेर की तरह घुर रहा था.
मैंने जैसे ही उस कामुक कुंवारी लड़की के मोटे मोटे स्तनों के ऊपर अपना हाथ लगाया वैसे ही उस गरीब लड़की की आंहे निकल पड़ी.
मैंने भी अपने कपडे उतार फेंके और सीधा खड़ा लंड उसके मुहं में दे दिया.
गरीब मजदूर लड़की को पता था की उसे मुझे खुश करने के लिए क्या करना हैं.
वो मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर किसी रंडी की तरह पुरे जोस के साथ चूसने लगी और मुझे ब्लोजॉब देने लगी.
मैंने उस नंगी लड़की के बालो में उँगलियाँ डाल के उसे अपने लंड के ऊपर जोर से दबाना चालू कर दिया.
वो मेरा पूरा के पूरा लंड मुहं में ले लेती थी और फिर गोलों को भी दबा के मस्त सुख दे रही थी.
मैंने चंद्रकला के चुंचे एक बार और जोर जोर से दबाना चालू कर दिया.
मेरा हाथ अब उस गरीब लड़की की चूत के ऊपर घूम रहा था, क्यूंकि वो मेरा लंड चूस रही थी इसलिए मुझे उस गरीब लड़की की चूत में हाथ देने में मुश्किल हो रही थी.
मैंने उस गरीब लड़की की चूत के होंठो पर हाथ फेर फेर उसका रस निकाल दिया.
फिर चुदाई करने के लिए मैंने उस गरीब मजदूर लड़की को वही सरसों के खेत में कुतिया बना दिया और पीछे से धीरे से उस गरीब लड़की की सील पैक वर्जिन चूत में लंड पेल दिया.
उस गरीब लड़की की वर्जिन चूत के अंदर लंड अभी तो सुपाड़े जितना ही घुसा था की उस गरीब लड़की की चीख निकल पड़ी.
वो आह्ह्ह आह्ह्हह्ह आऊऊऊऊ ओई ओही उई उई उई…करती रही और मैंने धीरे से उसके बड़े बड़े स्तनों को पकड़ लिया.
मैं उसे गर्म करने के लिए सुपाड़े को अंदर रख के उसके बड़े बड़े स्तनों को दबाने लगा.
चंद्रकला ने साँसे अब धीरे से लेना चालू किया, नहीं तो थोड़ी देर पहले तो उस गरीब लड़की की साँसे फुल चुकी थी.
मैंने एक और जोरदार झटका दिया और आधा लंड चूत में दे दिया.
उस गरीब लड़की की साँसे फिर से तेज तेज चलने लगी.
चुदाई करते करते मैंने अब एक और झटके से लंड को पूरा अंदर कर दिया.
गरीब मजदूर लड़की की टाइट चूत में लंड देते ही मेरे रोंगटे खड़े हो गए थे.
मैं अपने लंड पर कंडोम पहने बिना ही उस मजबूर लड़की की बहुत ही ज्यादा खतरनाक तरीके से चुदाई कर रहा था.
मैं नहीं चाहता था की वो मेरे बच्चे की माँ बने इसके लिए मैंने पहले से प्लान तैयार कर रखा था की चुदाई ख़त्म करने के बाद इस कुंवारी लड़की को माला-डी गर्भनिरोधक गोली खिला दूंगा मेडिकल की दुकान से लाकर.
मैंने भी पहली बार इतनी जवान लड़की की चूत में लंड दिया था और वो भी बिना कंडोम के.
नहीं तो अभी तक तो मुझे चुदाई करने के लिए शादी शुदा महिलाओं और धंधा करने वाली रंडी औरतों की चूत ही नसीब हुआ करती थी.
चंद्रकला हिलने लगी और मेरा लंड उस गरीब लड़की की टाइट चूत में इधर उधर होने लगा.
चुदाई करने के दौरान मैं उस नंगी लड़की की कमर पकड़ के जोर जोर से अपना लंबा मोटा लंड उस गरीब लड़की की टाइट चूत के अंदर बहार करने लगा.
गरीब मजदूर लड़की की पांच मिनिट की चुदाई के बाद मेरे लंड में एक अजीब सा खिंचाव आने लगा.
चुदाई के दौरान मुझे ऐसा लग रहा था मानो मेरे शरीर का सारा खून मेरे खड़े लंड के अंदर दौड़ गया हो.
मैंने दो जोर के झटके लगाये और तभी मेरे लंड ने गरमा गर्म वीर्य का सफेद सफेद लावा उगला.
मैंने चुदाई करने के दौरान अपने लंड पर कंडोम नहीं पहना हुआ था इस लिए उस नंगी मजदूर लड़की की टाइट चूत में ही मेरे लंड ने गरमा गर्म वीर्य का लावा उगला.
चंद्रकला ने भी तभी चूत को टाईट कर के सारा माल अपनी चूत की गहराई में भर लिया.
दोस्तों मुझे तो कंडोम पहन कर सेक्स करने में जरा भी आनंद नहीं आता इस लिए मैं कंडोम का बहुत ही कम प्रयोग करता हूँ.
खैर खेत में आउटडोर चुदाई ख़त्म करने के बाद मैं उसके ऊपर नंगा ही लेट गया और हम दोनों थक के खेत में नंगे ही सो गए.
शाम को मैंने मेडिकल से उस कुंवारी लड़की को ला के दे दी थी ताकि वो मेरे बच्चे के माँ न बन जाये.
दोस्तों अब तो वो जवान और सेक्सी लड़की मेरे खेत में काम करने के बहाने मेरे से चुदवाने के लिए आती है.
वो गरीब लड़की एक दिन में मजदूरी करके जितना कमाती नहीं है उससे ज्यादा पैसे तो मैं उसे मेरे साथ सेक्स करने के बदले दे देता हूँ मगर मेरी एक बड़ी गन्दी आदत है की मैं हर बार उसे बिना कंडोम पहने ही चोदता हूँ खैर इस बात से उसे कोई प्रोब्लम नहीं है.
दोस्तों उम्मीद करता हूँ की आप सभी को मेरी हिंदी सेक्स स्टोरी “कंडोम पहने बिना खेत में चुदाई करी मजदूरी करने वाली वर्जिन लड़की की” बहुत पसंद आई होगी और आप इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करेंगे….
स्रोत:इंटरनेट