. सुनील ने कहा- अगर आप चाहो तो कल आप टीम से बाहर नहीं होगी। मैंने शक से और उत्सुकतावश पूछा- वो कैसे? सुनील ने जवाब दिया- मैं आपकी हेल्प कर सकता हूँ.
बस मेरे इशारे समझते रहना और वही ऑप्शन बोल देना। मैं कन्फ्यूज हो गयी थी इसलिए कुछ नहीं कहा और फिर अपनी टीम के पास आ गयी। मैंने रात भर सोचा और सुबह तक उसकी मदद लेने का फैसला ले चुकी थी। प्रतियोगिता में पहुँचते ही मैंने सुनील को इशारों में हामी भर दी। वो. जैसे जैसे उत्तर बता रहा था, मैं जवाब देती जा रही थी। हमारी टीम ऊपर उठती चली गयी और बाकी टीम की परफॉर्मेंस कम हो गयी और किसी तरह से हमारी टीम जीत गयी.
उस दिन और दूसरे किसी कॉलेज की टीम बाहर हो गयी। मेरी टीम के सदस्यों ने पूछा- क्या बात है! आज तो बहुत पढ़ के आयी हो तुम सुहानी? और उन सब ने मुझे बधाई दी। सुनील ने भी दूर से अपनी डेस्क से ही मुझे इशारों में बधाई दी। प्रतियोगिता के बाद वो मेरे पास आया. और मेरी टीम को बधाई दी। हमने उसे शुक्रिया कहा और फिर मैंने निधि को इशारा किया। वो बाकी के सदस्यो को लेकर चली गयी। सुनील ने कहा- तो कॉफी कहाँ पिला रही हो आप सुहानी जी? मैं अपने वादे से नहीं मुकर सकती. थी.
हम दोनों एक कॉफी शॉप में कॉफी पीने चले गए। वहाँ हम दोनों कॉफी पीते पीते बातें करने लगे। थोड़ी देर में उसने इधर उधर बातें घुमाते हुए मुझे प्रपोज़ कर दिया गर्लफ्रेंड बनने के लिए। मैंने प्यार से मना कर दिया और बोला- तुम्हारे ऑफर के लिए थैंक्स! पर मैं इन सब चक्करों में नहीं पड़ना चाहती.
इसलिए नहीं बन सकती तुम्हारी गर्लफ्रेंड। फिर हम प्रतियोगिता की बात करने लगे। मैंने कहा- तुम तो हर साल जीत जाते हो.
इस बार भी हमारी टीम को हरा के जीत जाओगे। सुनील ने कहा- अगर तुम चाहो तो तुम जीत सकती हो इस बार। मैंने खुश होते हुए पूछा- कैसे? सुनील ने बोला- मैं जिताऊंगा तुम्हें। मैंने आश्चर्य से पूछा- तुम मुझे क्यूँ. जिताने लगे? सुनील ने बोला बिना झिझक बोला- देखो सुहानी चौधरी, तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो.
इतनी खूबसूरत हो कि पहली बार जब देखा तो मेरा दिल धक् से रह गया.
मैं फैसला नहीं कर पाया कि मैं होश में हूँ या कोई सपना देख रहा हूँ। मैं अपनी तारीफ सुन के खुश होती जा रही थी और सुनील बोलता जा रहा था। फिर आगे वो बोला- देखो फुल टाइम गर्लफ्रेंड तो आपको बनना है नहीं.
तो क्यूँ ना आप मेरी मदद कर दो? और मैं आपकी। मैंने पूछा- कैसे? उसने कहा- देखो बुरा मत मानना, पर मेरी और मेरे दोस्तो की शर्त लगी है कि मैं आपको पटा के दिखाऊँ। अब मुझे शर्त हारना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं है। तो जब तक हम सब यहाँ है तब तक के लिए आप मेरी असली न सही, नकली ही गर्लफ्रेंड बन जाइए.
मेरे दोस्तो को दिखाने के लिए प्लीज प्लीज। मैंने थोड़ा सोचा कि यार अगर मैं इसका इस्तेमाल करूँ और ये मेरा! और नतीजा यह कि हमारा कॉलेज ये प्रतियोगिता जीत जाता है तो इसमें क्या बुराई है। आखिर मैंने हाँ कर दी और वो खुश हो गया। हमारी डील हुई कि वो और मैं उसके दोस्तों को दिखाने के लिए गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड बन जाते हैं.
इसके बदले में वो मुझे प्रतियोगिता में सही उत्तर बता के हमें जिताएगा। दिन में प्रतियोगिता होती और शाम को सब घूमते रहते इधर उधर या फिर अगले दिन की तैयारी में लग जाते। एक दिन शाम को ऐसे ही टहलते हुए सुनील ने मुझसे मेरे बॉयफ्रेंड के बारे में. पूछा। तो मैंने करन के बारे में बता दिया। फिर ऐसे ही बात करते हुए उसने मुझसे पूछा- क्या तुम दोनों ने कुछ किया है? उस वक़्त मैंने ये बात किसी तरह टाल दी। फिर उसने अपनी और पुरानी गर्लफ्रेंड की बातें बताई. और बिना झिझक उसके साथ किए सेक्स की बात भी बताई। मुझे मन में शक होने लगा कि सुनील मेरे साथ सेक्स करना चाहता है। और थोड़ी देर में ही मेरा शक यकीन में बदल गया। वो मुझे रात को मिलने को बोलने लगा। मैंने. बहाना सा करके टालने की कोशिश की पर मन तो मेरा भी करने सी लगा था। उसने बोला- यार, मैं तुम्हें प्रतियोगिता जिताऊंगा, तुम मेरे साथ सेक्स कर लो, सेमीफाइनल जीतने के लिए अलग और फ़ाइनल जिताने के लिए अलग। मेरे तो मानो कान सुन्न हो गए ये सुन के। मैंने भड़क के कहा- दिमाग खराब है तुम्हारा, क्या बकवास कर रहे हो? अभी तुम्हारी कम्प्लेंट कर दूँगी तो जेल जाओगे सीधा। आपकी सुहानी चौधरी। [email protected] कॉलेज गर्ल सेक्स स्टोरी का अगला भाग: कभी कभी जीतने के लिए चुदना भी पड़ता है-2.
स्रोत:इंटरनेट