. जब बाप चूत चाट रहा था तो पद्मिनी अपने दोनों हाथों से अपने बापू के सर को ज़ोर से पकड़े थी और ‘उफ.. आह्ह्ह ओह्ह..’ करते हुए लम्बी ठण्डी साँसें ले रही थी.
बापू आहिस्ते आहिस्ते अपनी बेटी पद्मिनी की जवान कुंवारी चुत की पंखुड़ियों को अपनी उंगलियों से आराम से खोलते हुए अपनी जीभ को चूत के उन मुलायम हिस्सों पर फेर रहा था.. जो ज़्यादा लाल और नाज़ुक होते हैं.
पद्मिनी की चूत कुछ भीगी सी हो गई थी.
बापू उसकी चूत चाटता चला गया और पद्मिनी सिसकारियों में डूबती गयी.
पद्मिनी की चुत चटने से उसकी आँखें जैसे नशीली हो गई थीं.
उसकी आंखें चुदास के नशे में ऐसे लग रही थीं, जैसे उसने पूरी बोतल शराब पी ली हो.
वो अपने बापू के सर को अपनी मक्खन जैसी नर्म चूत पर दबाए धीमी धीमी आवाज़ में तड़पती गयी.
उसने अपनी दोनों जांघों को दोनों तरफ फैला दिया था और वो खुल कर अपने बाप से अपनी चूत चटवा रही थी.
बापू अपनी बेटी पद्मिनी की चूत को अपनी जीभ से चाटता हुआ मजे लेता गया.
वो कोई 10 मिनट से भी ज़्यादा उसी पोजीशन में चूत को चाटता रहा था.
अब पद्मिनी बेहाल हो रही थी, वो कभी सर उठाकर बापू को देखती, तो कभी सर बिस्तर पर पटकती.. और कभी उठ बैठती.
उसके बाद पद्मिनी एक मादक आवाज़ में बोली- बापू बस भी करो अब, यहाँ आओ मेरे पास.. मैं आपको बांहों में लेना चाहती हूं.
आओ ना… यह कहकर पद्मिनी खुद अपनी चूचियों को दबाते हुए अपने हाथों से अपनी जीभ को अपने होंठों पर फेरते हुए, नशीली ऑखों से बापू को देखने लगी थी.
कुछ देर बाद बापू ने चूत को छोड़ दिया.
उसकी स्कर्ट को निकाल कर बाहर फेंक दिया और अब वो पद्मिनी की बांहों में आकर उसके ऊपर चढ़ गया.
पद्मिनी ने धीमी आवाज़ में बापू को किस करते वक़्त कहा- आप अपनी पैंट नहीं उतारेंगे क्या? तो बापू ने कहा- तुम्हीं उतार दो ना, बहुत मज़ा आएगा मुझको.. हम्म्म..! पद्मिनी ने फिर कहा- अच्छा ठीक है आप लेट जाइए और हिलना मत.. मैं उतारती हूँ.
बापू पीठ के बल अपने हाथों को सर के नीचे किए लेट गया.
नंगी पद्मिनी बापू के पैरों के बीच घुटनों पर आ गई थी.
वो अपने बापू पर झुक कर पैंट को आहिस्ते आहिस्ते खोल रही थी और बापू उसको निहार रहा था.
उसकी छोटी छोटी नर्म चूचियों को देख रहा था.
बापू उसके सपाट पेट को देखता, तो कभी उसकी पतली कमर पर उसकी नज़र चली जाती.
पद्मिनी की कमर के नीचे वाला हिस्सा तो उभरा हुआ था, वहां से लेकर जांघों तक तो एकदम एक अर्धवृत लग रही थी.
बापू एक एक करके पद्मिनी की नंगी जवानी को निहारता गया और इसी कारण उसका लंड पेन्ट के अन्दर एकदम तन गया था, जिससे पद्मिनी को पेंट उतारने में तक़लीफ़ हो रही थी.
एकाध बार उसका मुलायम हाथ बापू के मोटे तने हुए लंड पर भी दब गया.
उसके हाथ लगते वक्त बापू को बहुत मज़ा आ रहा था.. वो उसके हाथ को अपने लंड पर बहुत मजे से अनुभव कर रहा था.
पद्मिनी बापू की पेंट उतारने में जितनी देर लगा रही थी, बापू को उतना ही ज्यादा मज़ा आ रहा था.
आखिर में जब पद्मिनी ने बापू की पेंट को नीचे से खींचना शुरू किया तो कुछ दिक्कत सी हुई.
उसने बापू से कहा- अरे आप ऊपर उठाइये तो…! बापू ने मुस्कुराते हुए पूछा- क्या ऊपर उठाऊं? पद्मिनी भी मुस्कुरायी और आसमान की तरफ देखते हुए कहा- बापू मैं उसे गाली देना नहीं चाहती.. आप उठाईए ऊपर.. उसको बापू की गांड को ऊपर उठवाना था, ताकि पैन्ट निकाल सके.
पद्मिनी गांड उठाने को कह रही थी.
तो बापू हँसते हुए अपनी गांड को ऊपर उठा दिया और पद्मिनी ने उसके पेंट को निकाल कर ज़मीन पर फेंक दिया.
अब अंडरवियर में बापू का लंड एकदम फॉर्म में था और पद्मिनी एक बार अपनी नज़र वहां करके मुस्करा रही थी.
बापू ने कहा- अब इसको कौन उतारेगा बिटिया? बापू का इशारा उसका अंडरवियर पर था.
तो शरमाती हुई पद्मिनी बोली- वह मैं नहीं उतारने वाली, उसे आप ही उतारो.
बापू ने कहा- अरे, मैंने जैसे तेरी पेंटी उतारा था, वैसे ही तू भी उतार ना बेटी.
पद्मिनी बोली- आपने जब पेंटी उतारी थी, तो वहां कुछ इतना मोटा नहीं था.. आपकी पेंट के नीचे यहाँ पर यह है.
अपनी उंगली के इशारे से पद्मिनी ने मुस्कुराते हुए चेहरे पर लाली लिए बापू के लंड की तरफ उंगली दिखाई.
बापू ने ज़िद की कि वो ही उसकी अंडरवियर को उतारे.
पद्मिनी नखरे कर रही थी.
बापू ने उसके हाथों को खींच कर अपने लंड पर रखा और अंडरवियर उतारने की जिद की.
पद्मिनी बापू की दोनों फैली हुए जांघों के बीच बैठी हुई थी.
उसने हाथों को बापू के अंडरवियर पर रखा.. मगर वो उसे उतार नहीं रही थी.
बापू के बहुत कहने के बाद पद्मिनी ने अपनी आँखों को बंद कर लिया और अंडरवियर को खींचना शुरू कर दिया.
बापू का अंडरवियर आधा ही निकला, क्योंकि ऊपर वाला हिस्सा तने हुए लंड पर अटका हुआ था.
अब पद्मिनी को आँखें खोल कर देखना ही पड़ा.
फिर अपने होंठों को दांतों में दबाते हुए एक छोटी सी मुस्कान के साथ पद्मिनी ने अपनी उंगलियों से लंड को उस जगह से हटाया, जहाँ अंडरवियर में अटका हुआ था.
फिर अंडरवियर को खींचकर निकाल कर नीचे ज़मीन पर फेंक दिया.
उसने मुस्कुराते हुए अपनी आँखें बंद कर लीं.
बापू ने पद्मिनी के सर को थाम कर अपने लंड के तरफ खींचा और रुक गया.
पद्मिनी ने आँखों को बंद किया हुआ था, उसको समझ में आ गया था कि बापू क्या चाहता है.. मगर वह बहुत शर्मा रही थी और आगे बढ़ने के लिए कुछ हिचकिचा भी रही थी.
बापू ने पद्मिनी के हाथों को अपने खड़े हुए लंड पर रखा और सिसकती आवाज़ में कहा- इसको सहला और सहलाती जा मेरी गुड़िया.. आह आह.. मेरी जान करती जा.. ऐसे ही करती जा… बापू ने पद्मिनी के हाथों को अपने लंड पर फेरते हुए उससे यह सब कहा.
पद्मिनी ने बापू के लंड अपने हाथों पर महसूस करते हुए अपने जिस्म में एक कंपकंपी सी महसूस की और उसकी रूह भी काँप उठी.
उसने अपनी ज़िन्दगी में कभी भी लंड को अपने हाथों में नहीं थामा था.
फिर पद्मिनी ने अपनी आँखों को बंद करते हुए अपने छोटे मुलायम हाथों में पहली बार अपने बापू के मोटे लंड को पकड़ा और उसको सहलाना शुरू किया.
बापू पूरे जिस्म को ढीला करते हुए लेट गया और ज़ोर से चुदासी आवाजें निकालने लगा- आहहहह.. इसिश.. बहुत मज़ा आ रहा है मेरी रानी.. और ज़ोर से और ज़ोर से अपना हाथ चला.. मेरी जान.. ऐसे ही.. आह.. ठहर जरा.. अभी बताता हूं.. यह देख अपनी मुठ्ठी को ज़रा सा बंद करके.. ऐसे अब हाथ को चला.. ज़ोर से चलाती जाना.. बापू ने गहरी साँस लेते हुए पद्मिनी को सिखाया कि कैसे वह अपने हाथ को उसके लंड पर चलाए.
इस चुदाई की कहानी के लिए मुझे ईमेल जरूर कीजिएगा.
[email protected] कहानी जारी है.
स्रोत:इंटरनेट