. थोड़ी देर में ही लालजी की आवाज आई कि मैं तैयार हो गया हूँ.
पीयूष भी बोला- मौसी, मैं भी तैयार हो गया हूँ.
मैं बोली- मुझे थोड़ा टाइम लग लग रहा है.
मैंने तभी लाल जी को आवाज दी कि लालजी अन्दर आना, मेरे को थोड़ी तेरी हेल्प चाहिए.
तो लालजी आ गया, मैं पेटीकोट में थी और ब्लाउज का पीछे बटन बंद करना था.
मैंने कहा कि लालजी थोड़ा पीछे का बटन बंद कर दो, मुझसे नहीं हो रहा.
ये कह कर जैसे ही मैं सामने घूमी तो एकदम से लालजी मुझे देखता ही रह गया.
मैं ब्लाउज और पेटीकोट में थी.
मेरा पूरा नंगा पेट, खुली नाभि और ब्लाउज में उभरे हुए चूचे देख कर कोई भी पागल हो जाता.
मैंने देखा कि वह बिल्कुल ही एकटक मुझे घूरे जा रहा था.
मैंने पूछा- लाल जी क्या हुआ? तो उसने कहा- वन्द्या, तुम तो बिल्कुल हीरोइन लग रही हो, बहुत सुंदर हो तुम.. और एक बात बोलूं, बुरा ना मानना! मैं बोली- कुछ भी बोलो आज मैं किसी बात का बुरा नहीं मानूंगी.
तो लालजी बोला- वन्द्या तुम बहुत बहुत ज्यादा सेक्सी लगती हो और दिखती भी हो.. सच में मुझे अगर तुम्हारे जैसी दुल्हन मिल जाए तो मेरी जिंदगी बन जाए.
मैं बोली- लाल जी आज मैं तुम्हारी दुल्हन बन ही रही हूं, फिर अगर तुम्हें इतनी खुशी मिलेगी तो हम ऐसा खेल रोज खेल लिया करेंगे.
खेल में ही सही तुम्हारे अरमान पूरे तो हो ही जाएंगे.
लालजी बोला- ठीक कह रही हो वन्द्या.
तभी मैंने एकदम से निगाह डाली तो लाल जी के पैंट की ज़िप के पास उसका लंड फूल कर खड़ा हो गया था.
फूला हुआ लंड अलग दिख रहा था.
वह हाथ से अपने खड़े लंड को दबाने की कोशिश करने लगा.
मैं बोली- लालजी इधर आओ जरा.
जैसे ही मेरे पास आया, वह मुझे घूरने लगा और बोला कि वन्द्या तुम बहुत सेक्सी लग रही हो.
मैं बोली कि लालजी तुम्हारी यह पैंट के जिप के अन्दर क्या है? इतना अलग बहुत फूला सा क्या है? उसने झट से वहां हाथ रख लिया.
मैंने उसका हाथ पकड़ा और जैसे ही मैंने खुद अपना हाथ रखा, वह पैन्ट के ऊपर से ही बहुत बड़ा सा लगा.
मैं बोली- तुम्हारा यह क्या है? बिना झिझक के बोलो, मुझे साफ़ सुनना है.
लालजी बोला कि बुरा तो नहीं मानोगी? मैं बोली- बिल्कुल नहीं.. तुम बोलो.
लालजी बोला- अरे वन्द्या मैं बोल नहीं सकता तुमसे, क्या बताऊं? मैं उसके और नजदीक चली गई.
अब उसके और मेरे बीच में सिर्फ एक अंगुल का फासला था.
मेरी सांस उसकी सांसों से टकराने लगी.
मैं बिल्कुल उसके जिस्म के करीब हो गई.
तभी वह बोला कि वन्द्या मुझे कुछ हो रहा है.
मैं बोली- क्या? लालजी बोला कि मुझे आज के लिए माफ करना वन्द्या और तू मौसी या किसी से कुछ बता तो नहीं देगी? मैं समझ गई कि यह बहुत डर रहा है.
मैं बोली- अभी थोड़ी देर में हमारी शादी हो जाएगी, हम दोनों पति-पत्नी बन जायेंगे.
भले ही खेल में ही सही, पर आज तू लालजी मेरा होने वाला पति है, फिर भी इतना डर रहा है.
कह दे जो कहना है और कर ले जो करना है.
मैं आज की कोई बात किसी से नहीं बताऊंगी.
जैसे ही मैंने उससे यह कहा, लालजी बोला- सच वन्द्या किसी से नहीं बताएगी, तू बहुत अच्छी है.
ये कह कर वो एकदम से मुझसे लिपट गया और बोला- तुम बहुत अच्छी हो आई लव यू वन्द्या.. तभी उसका जो लंड था, मेरी जांघों में बहुत कड़ा सा होकर चुभने लगा.
मुझे लगा कि यह तो बहुत बड़ा लंड है.
मैंने अपने हाथ से उसके पैंट के ऊपर से ही उसके लंड को पकड़ लिया और पूछा- यह इतना बड़ा क्या है, अब तो बता दे लालजी? लालजी बोला- अब यह तेरा है, खुद ही देख ले.
पता नहीं मुझे भी क्या हो गया था, मैंने लालजी के पैंट की ज़िप खोली और अन्दर हाथ डाल कर अंडरवियर में पहुंचा दिया.
अन्दर एकदम से कड़क, बहुत मोटा और लम्बा लोहे के जैसा सख्त लंड मेरे हाथ में लगा.
इतना गर्म लंड कि जैसे आग में डाल कर गर्म किया गया हो.
मैं जान गई कि लालजी का लंड खड़ा हो गया है, पर इतना बड़ा कैसे हो गया.
यही जानने का बहाना करते हुए मैंने उसके लंड को पैंट की ज़िप खोल कर बाहर निकाल लिया और उसके मूसल लंड को लंड को जोर से दबा दिया.
जैसे ही अपने हाथ से लंड को दबाया, लालजी तड़प उठा और कसके मुझसे लिपट गया.
उसने सीधे ही मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और मुझे जमकर चूमने लगा.
इससे मुझे बहुत अजीब सी गुदगुदी सी होने लगी.
मेरा हाथ अपने आप लालजी के लंड में चलने लगा और मैं हाथ से लंड को मुठ मारने के अंदाज में रगड़ने लगी.
इधर लालजी बिल्कुल अकड़ा जा रहा था.
जल्द ही वो हांफने लगा.
तभी लालजी ने अपने दोनों हाथ मेरे दोनों मम्मों पर रख दिए और ब्लाउज के ऊपर से ही मम्मों को दबा दिया.
मुझे एकदम अलग सा महसूस हुआ और मैं और जोर से उससे चिपक गई.
लालजी अब जोर जोर से मेरे ठोस मम्मों को दबाने लगा.
इधर मैं नीचे उसका लौड़ा और जोर से रगड़ने लगी.
तभी लालजी अपना एक हाथ मेरे नाभि में चलाने लगा, मेरे अन्दर बहुत अजीब सी हलचल होने लगी.
इतने में धीरे से उसने अपना हाथ पेटीकोट के ऊपर से ही मेरी चूत के ऊपर रख दिया और पेटीकोट के ऊपर से, जहां मेरी चूत थी, उस जगह को ज़ोर से दबाने लगा और वहीं अपना हाथ रगड़ने लगा.
अब मुझे बिल्कुल मदहोशी छाने लगी.
मैं बिल्कुल मदहोश हो गई और कसके लालजी से चिपक गई.
तभी मैंने लाल जी के होंठों को अपने होंठों में जकड़ लिया और जमकर चूसने लगी.
मुझसे अब बिल्कुल गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी.
मैं कुछ बोल भी नहीं रही थी.
तभी लालजी थोड़ी देर में पेटीकोट को ऊपर खींचने लगा और उसने मेरे पेटीकोट को मेरी कमर तक चढ़ा दिया.
फिर अपना हाथ मेरे नंगी जांघों से चलाते हुए मेरी पैंटी की इलास्टिक खींचकर अन्दर घुसा दिया.
जैसे ही लाल जी का हाथ अन्दर गया, उसने बिल्कुल से सीधे ही अपनी हथेली को मेरी चूत पर रख दिया और कसके चूत दबाने लगा.
मैं बिल्कुल सिमट के चिपक गई थी कि तभी लालजी ने अपनी उंगली मेरी चूत में डाल दी.
अब तो मैं बिल्कुल उछल पड़ी और कसकर लाल जी के होंठ काट दिए, साथ ही लाल जी की बांहों में मैं प्यासी मछली की तरह मचलने लगी.
लालजी ने उंगली को चूत में डाला ही था कि इतने में पीछे कमरे से उसी कमरे में पीयूष आ गया और सामने आके खड़ा हो गया.
वो हम दोनों को देखने लगा.
लालजी थोड़ा झिझकते हुए डरा, तो मैं उससे बोली- कुछ नहीं लालजी, पीयूष को सब पहले से पता है.
पीयूष.. तुम भी आ जाओ अब इस खेल में.
पीयूष बोला- अभी नहीं वन्द्या, पहले तुम अच्छे से तैयार हो जाओ, दुल्हन बन जाओ.. अपन गुड्डा गुड्डी की शादी और अपनी शादी का खेल पहले पूरा करें.
फिर सुहागरात में यह सब करेंगे.
तुम्हें ऐसे देखकर मुझे बहुत कुछ होने लगा है, मैं बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगा.
तुम बहुत सेक्सी हो वन्द्या.. तुम प्लीज़ अब थोड़ा रुक जाओ, ये सब अच्छे से करेंगे.
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स्रोत:इंटरनेट