. सुबह सारे बदन पर उनके काटने के निशान होते। जिन्हें देख कर मैं उनसे और भी मोहब्बत करने लगती। हमारी ज़िंदगी एक हसीन ख्वाब की तरह गुज़र रही थी। मगर ख्वाब बुरा हो या हसीन उसे एक ने एक दिन मुकम्मल होना. होता है। और फिर मेरा हसीन ख्वाब भी मुकम्मल हो गया। शादी के एक साल बाद ही मुझसे भी यही उम्मीद की जाने लगी कि मैं भी एक प्यारे से बेटे की माँ बनूँ। बेशक मेरे शौहर हर बार अपना माल मेरे अंदर ही गिरा रहे. थे, और उनका माल आता भी बहुत सारा और बहुत गाढ़ा था। मगर फिर भी ना जाने क्यों, मेरी कोख हरी नहीं हो रही थी। हर महीने लाल रंग के सैनीटरी पैड मैं फेंक रही थी। मैं हर बार यही दुआ करती के इस बार मुझे महीना ना आए। मगर कहाँ जी … महीना तो हर महीने तय तारीख पर आ रहा था। फिर घर में मेरी सास ने मुझे यहाँ वहाँ दिखाना शुरू किया, इससे पूछ, उससे पूछा। फिर जब एक डॉक्टर के कहने पर हम दोनों के टेस्ट हुये, तो पता चला कि कमी इनमें थी, मुझमें नहीं। फिर इनका इलाज शुरू करवाया गया। ये भी बड़ी परेशानी में थे और उससे ज़्यादा नामोशी में … क्योंकि टेकनिकली ये साबित हो चुका था कि ये मर्द नहीं नहीं। मगर मैं जानती थी कि ये नामर्द भी नहीं हैं। मैं इनके साथ पूरी खुश थी। ये भी पूरी मुस्तैदी के साथ दवाई खा रहे थे और बाकी सब बातों का भी पूरा ख्याल रख रहे थे। मगर मैं फिर भी खाली गोद थी। एक बार एक शादी में मुझे इनकी मामी मिली।. देखने में बहुत खूबसूरत, पढ़ी लिखी, खुद बिज़नस संभाल रही थी। वो मुझसे बोली- अरे काहे के चक्कर में पड़ी है; चुपचाप बकरा बदल ले। मैंने वो बकरे वाला इंगलिश जोक सुन रखा था, तो मैंने कहा- अरे मामी जी ऐसे कैसे? वो बोली- क्यों क्या दिक्कत है। अब मेरे दोनों बेटे मेरे बॉयफ्रेंड के हैं। आज तक किसी को पता चला? तू भी चुपचाप किसी और के बीज से अपनी ज़मीन हरी कर ले। पहले तो मुझे मामी जी की बात बहुत बुरी लगी। मगर उस. रात मैं कितनी देर तक इस बारे सोचती रही, तो सुबह तक मैं एक नतीजे तक पहुँच चुकी थी। उस दिन मैं अपने मायके गयी, और वहाँ अपनी एक पुरानी डायरी में लिखा अपने पुराने बॉयफ्रेंड का नंबर ढूंढ कर निकाला। फिर अपने घर वापिस आते हुये मैंने बाज़ार से उसे फोन किया और उस से बात करी। शादी के 2 साल बाद वो मेरी आवाज़ सुन कर बहुत खुश हुआ। पहले तो यहाँ वहाँ की बातें करती रही। मगर वो मेरे दिल की बात जान गया और उसने. मुझसे मिलने की बात कही। मैंने भी थोड़ी सी आना कानी के बाद मिलने के लिए हाँ कर दी। अब घर में मुझे कोई दिक्कत नहीं थी, मैं अक्सर अकेली घर से बाहर आ जा सकती थी। हाँ इतना ज़रूर था कि मैं बुर्का पहन कर जाती थी। घर में सलवार कमीज़ और शादी ब्याह में साड़ी वगैरह पहन लेती थी। तो मैंने उस से तीन दिन बाद मिलने का प्लान बनाया। घर से पंजाबी सूट के ऊपर से बुर्का पहन कर मैं अपने घर से निकली। करीब 20 मिनट के सफर के. बाद मैं अपने पुराने यार के घर के सामने खड़ी थी। मैंने बेल बजाई, उसने दरवाजा खोला, मुझे दरवाजे पर खड़ा देख, उसने मुझे वहीं अपनी आगोश में ले लिया। “हाय अल्लाह!” मेरा तो कलेजा धक्क से रह गया। मेरा शौहर जो मुझसे जी जान से मोहब्बत करता है और मैं भी जिसे अपनी जान से ज़्यादा प्यार करती हूँ। उसको छोड़ कर उससे फरेब कमा कर मैं अपने यार से मिलने आई हूँ। कितनी गिरी हुई हूँ मैं। ये सोच कर मेरी आँखों में आँसू आ गए।. वो मुझे अपनी बांहों के घेरे में ही मुझे अंदर ले गया। मुझे सोफ़े पर बैठाया, मेरा नकाब खोला और पीने के लिए पानी ला कर दिया। उसने पूछा- क्या हुआ शाहीन, रोई क्यों? मैं क्या बताती, सिर्फ इतना कहा- कुछ नहीं। वो बोला- अरे कुछ तो … क्या हुआ बता न? मैं कुछ न बोली, थोड़ा और रोई, तो उसने मेरा सर अपने सीने से लगा लिया और मैंने अपने आंसुओं के साथ अपनी सारी वफ़ा को भी बहा दिया। आफताब ने मेरे माथे पर चूमा और मुझे खूब हौंसला दिया और मेरे लिए चाय भी बनाई। थोड़ा संभालने के बाद मैंने घर देखा, वैसा ही बेतरतीब। मैंने पूछा- शादी नहीं की? वो बोला- तुझसे ही करनी थी। तू चली गई तो किस से करता। मैं हल्के से मुस्कुरा दी। कुछ देर हम अपनी पुरानी बातें करते रहे, इधर की उधर की, फालतू की, बेमतलब की। मगर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी कि मैं आफताब से अपने दिल की बात कर सकूँ। कुछ देर बाद उसने ही पूछ लिया- शौहर से कैसी चल रही है? मैंने कहा- बहुत अच्छी, बहुत मोहब्बत करते हैं मुझसे! वो बोला- और बच्चे? मैंने सिर्फ ना में सर हिलाया। वो समझ गया और बोला- मैं कुछ हेल्प कर सकता हूँ? मैं क्या कहती चुप रही। तो वो उठ कर मेरे पास आकर बैठ गया और मेरे कंधे के ऊपर से अपनी बांह घुमा कर बोला- देखो, मैंने तुम्हें हमेशा ही अपनी जान से ज़्यादा प्यार किया है। तुम अपने दिल की कोई भी बात मुझसे कह सकती हो। डरो मत, मुझ पर यकीन रखो। और उसने मुझे अपनी आगोश में लेकर मेरी पीठ सहलाते हुये मेरे गाल पर चूम लिया। मुझे डर सा लगा। एक ऐसा शख्स जिसके साथ दो साल पहले मैं अपनी शादी के सपने बुन रही थी, जिसको मैं अपना तन मन सब कुछ सौंप देना चाहती थी, आज उसके छूने से मुझे डर लग रहा था। वो आगे बढ़ता गया और उसने मेरा चेहरा अपने हाथों में पकड़ कर मेरे लबों को चूम लिया। मैं बेशक घबरा रही थी मगर मैंने उसे रोका नहीं क्योंकि मेरे मन में दो बातें चल रही थी, पहली कि मुझे एक बच्चा चाहिए, बस और कुछ नहीं, चाहे वो बच्चा मुझे किसी भी कीमत पर मिले। मगर साथ की साथ मेरे मन में ये बात भी चल रही थी कि यार एक बच्चे के लिए क्या ज़रूरी है कि मैं कोई ऐसा गलत काम करूँ, जिसके लिए मेरी नज़रें मेरे शौहर के आगे नीची हो जाएँ। मेरे शौहर भी तो कोशिश कर ही रहे थे, एक साल से वो लगातार दवाई खा रहे थे.
और तो और वो एक इंफर्टिलिटी सेंटर में भी पता कर के आए थे.
वहाँ भी उन्होंने हमसे वादा किया था कि वो अपनी तकनीक से हम दोनों को औलाद का सुख दे देंगे। फिर क्यों मैं अपने ज़मीर, अपने किरदार से गिर कर अपने माथे पर लगाने जा रही हूँ। बेशक मेरे शौहर को पता न चले, पर मैं … मैं तो सब कुछ देख रही हूँ। मेरा परवरदिगार देख रहा है। मुझे लगा जैसे मुझे इस जगह पर सांस लेना मुश्किल हो रहा है। मैंने अपने आपको आफताब की गिरफ्त से आज़ाद करवाया और बोली- मुझे जाना है। कहानी जारी रहेगी.
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स्रोत:इंटरनेट