. “आपका हिसाब? कौन सा हिसाब चाचा?” “इतने साल तुमको चाट खिलाये हैं, कभी एक पैसा नहीं मांगा.
अब जा रही हो जाते जाते कुछ हमारे मन की करती जाओ.
” “बताओ चाचा, जो बताओ कर दें.
” “बस एक बार अपनी चूची चुसवा दो.
” “ये क्या कह रहे हो चाचा?” “वही कह रहा हूँ, जो तुम सुन रही हो.
चार दिन बाद चली जाओगी और उस आदमी के सामने बिछ जाओगी जिससे तुम्हारा कोई परिचय नहीं है.
हमारे साथ तो तुम्हारा पुराना नाता है और फिर एक बार चूची चुसवा लेने से तुम्हारा कुछ घिस थोड़े जायेगा.
” हकीकत है कि चाचा ने कई साल तक हमें बिना किसी स्वार्थ के खिलाया था.
इसलिये हम चाचा को मना भी नहीं कर पा रहे थे.
तभी चाचा हमारे करीब आये और वहां रखी कुर्सी पर बैठ गये.
चाचा पट्टेदार जांघिया और चाची के हाथ की सिली हुई जेबदार बनियान पहने थे.
चाचा ने अपनी बनियान उतार दी और हमें अपने पास खींचकर हमारा कुर्ता ऊपर उठा दिया.
हमारी ब्रा ऊपर खिसकाकर चाचा ने हमारी चूचियां निकाल लीं और चूसने लगे, हमें भी अच्छा लगने लगा था.
तभी चाचा ने हमारा कुर्ता निकाल दिया और हमारी चूचियां चूसते हुए हमारी नंगी पीठ पर हाथ फेरने लगे.
हम नजर नीचे किये हुए चुपचाप खड़े थे.
चूंकि हम नजरें नीचे किये हुए थे इसलिए हमारी नजर चाचा के जांघिये में होने वाली हरकत पर पड़ गई.
चाचा हमारी चूचियां चूस रहे थे और अपना लण्ड सहला रहे थे.
चाचा ने एक बार अपने जांघिये में हाथ डालकर अपने लण्ड को हिलाया भी.
चाचा का जांघिया तम्बू की तरह तन गया तो चाचा हमारे चूतड़ों को मलने लगे.
चूतड़ों पर चाचा का स्पर्श पाकर हमारे बदन में चींटियां रेंगने लगीं.
तभी चाचा ने हमारी सलवार निकाल दी और हमें अपनी गोद में बिठा लिया.
चाचा का लण्ड हमारी गांड में चुभ रहा था लेकिन हमें अच्छा लग रहा था.
चाचा ने हमारे जांघिये में हाथ डालकर हमारी चूत को छुआ तो हम पगला गये.
चाचा हमें भगवान लग रहे थे जो हमें इतना सुख दे रहे थे.
हमें अपने सीने से सटाकर हमारी चूचियां अपने सीने के बालों पर रगड़ते हुए हमारे होंठ चूसने लगे.
हमारी चूत कुलबुलाने लगी थी.
तभी चाचा उठे और हमें गोद में उठाकर पलंग पर ले गये.
हमें पलंग पर लिटाकर चाचा ने अपना जांघिया निकाल दिया और अपने लण्ड पर हाथ फेर कर लण्ड की खाल आगे पीछे करने लगे.
चाचा अपने लण्ड की खाल पीछे करते तो उनका लाल रंग का सुपारा दिख जाता.
पलंग के पास खड़े होकर चाचा ने अपना लण्ड हमें चूसने को कहा तो हम चूसने लगे.
चाचा का लण्ड कड़क हो चुका था.
चाचा का लण्ड चूसते हुए हम उसकी खाल आगे पीछे कर रहे थे और चाचा हमारी चूत पर हाथ फेर रहे थे.
तभी चाचा ने हमारे जांघिये का नाड़ा खींच दिया.
चाचा का लण्ड हमारी चूत में जाने को बेकरार था और हम चुदवाने के लिए बावले हुए जा रहे थे.
चक्रव्यूह का आखिरी दरवाजा हमारा जांघिया था, चाचा ने उसका नाड़ा भी खींच दिया था.
चाचा ने अपना लण्ड हमारे मुंह से निकाला और हमारी टांगों के बीच आकर हमारा जांघिया नीचे खींचा, हमने अपनी आँखें बंद कर लीं.
चाचा ने हमारा जांघिया नीचे खींचा लेकिन जांघिया नीचे खिसका नहीं क्योंकि चाचा ने नाड़ा खींचते समय उल्टी डोरी खींच दी थी जिससे नाड़ा खुलने के बजाय पक्की गांठ लग गई थी.
चाचा गांठ खोलने में जुट गये, जब ऊंगलियों से नाड़े की गांठ नहीं खुली तो चाचा अपने दांतों से कोशिश करने लगे.
चाचा के नाक व मुंह से निकल रही गर्म सांस हमारी नाभि और चूत के आसपास फैलने लगी.
जब चाचा दांतों से भी गांठ नहीं खोल पाये तो हमारे जांघिये को एक साइड में खिसका कर चाचा ने अपने लण्ड का सुपारा जांघिये के अन्दर डाला.
जांघिया काफी टाइट था इसलिये लण्ड और चूत का मिलन नहीं हो पा रहा था.
चाचा फुर्ती से उठे और कैंची ले आये, हमारा नाड़ा काट दिया.
नाड़ा कटते ही चाचा ने हमारा जांघिया निकाल फेंका और हमारी टांगें फैला दीं.
हमारी चूत पर हाथ फेर कर चाचा ने अपना लण्ड सम्भाला, लण्ड को हिलाकर खाल को आगे पीछे करके टाइट किया और हमारी चूत के मुंह पर रख दिया.
हमारी कमर पकड़ कर चाचा ने धक्का मारा लेकिन लण्ड अन्दर नहीं गया.
चाचा ने लण्ड को दोबारा सेट करके धक्का मारा तो लण्ड फिसल गया.
चाचा फिर से पलंग से कूदे और तेल की शीशी लेकर आ गये.
चाचा ने अपनी हथेली में तेल लेकर लण्ड पर चुपड़ा और हमारी चूत के होंठ फैला कर हमारी कमर पकड़ ली.
हमने आँखें बंद कर लीं.
इससे पहले कि चाचा धक्का मारते, उनके लण्ड ने पिचकारी छोड़ दी.
शांति की कहानी सुनकर मैं यह तय नहीं कर पाया कि उस दिन बदनसीब कौन था, शांति या रामू चाचा? अपने चूतड़ उचकाते हुए शांति ने लण्ड का मजा लेते हुए कहा- चुदाई में इतना मजा आता है, मैंने आज महसूस किया है.
शांति की चुदाई के दौरान उसकी चूचियों से खेलते हुए मैंने उसके निप्पल कचोटे तो चिंहुक गई.
अब तो शांति रोज घर का काम निपटाने के बाद बेडरूम में आ जाती है और तरह तरह के आसनों का प्रयोग करके मुझे मजा देती है.
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स्रोत:इंटरनेट