. उसने मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया.
मुझे बहुत मजा आ रहा था.
उसकी जीभ जब मेरी चूत को चाट रही थी तो मेरे पूरे बदन में सिरहन हो रही थी.
मैं पागल सी होने लगी थी लेकिन मैं ज्यादा तेज आवाज़ भी नहीं कर सकती थी क्योंकि मेरी सास को दिखाई तो नहीं देता था लेकिन सुनाई जरूर देता था.
मुझे इस बात का डर भी लग रहा था कि कहीं सास को हम दोनों के सेक्स कांड का पता न लग जाए.
वैसे तो मैं अपनी सास से नहीं डरती थी लेकिन उस वक्त बदनामी से डर लगता था.
वैसे भी ससुर भी इस दुनिया में नहीं थे इसलिए मैं अपनी सास के साथ ज्यादा लड़ाई झगड़ा नहीं करना चाहती थी.
इसलिए मैं अपनी कामुक आवाजों को मुंह से बाहर न आने देने की पूरी कोशिश कर रही थी.
पंकज भी मेरी बात को समझ रहा था.
वह उम्र में मुझसे काफी छोटा था इसलिए उसे भी डर था कि कहीं हम दोनों पकड़े न जाएँ.
मगर जिस तरह से वह मेरे बदन के साथ खेल रहा था वह मुझे कच्चा खिलाड़ी नहीं लग रहा था.
इसलिए हम दोनों कंट्रोल में रह कर ही सब कुछ कर रहे थे.
उसके बाद मैंने पंकज की शर्ट के बटन खोलना शुरू कर दिया.
मैंने उसकी छाती के बालों में अपने होंठों को फिरा दिया और उनको चूम लिया.
उसके बाद मैंने उसकी पैंट को भी खोल दिया.
अब मेरे सामने केवल कच्छा में लेटा हुआ था और उसका लंड अंदर तना हुआ था.
मैंने उसके कच्छे को भी उतरवा दिया और उसका बड़ा और लम्बा, मोटा लंड उछल कर बाहर आ गया.
बाहर आते ही मैंने पंकज के लंड को अपने मुंह में भर लिया.
बहुत दिनों से मैं लंड की प्यासी थी.
इसलिए मैं जी भर कर लंड चूसना चाहती थी.
मैं उसके लंड को खा जाना चाहती थी.
बहुत दिनों के बाद मुझे लंड मिला था.
मैं उसके लंड को चूस रही थी और पंकज के मुंह से कामुक सिसकारियां निकल रही थीं.
आह्ह … ओह … उम्म … करके वह अपने लंड को चुसवा रहा था और मैं मजे के साथ उसके लंड को चूस कर पंकज को मजा दे रही थी और साथ में खुद भी उसके लंड का मजा ले रही थी.
उसके बाद मैंने पंकज के टट्टों को अपने हाथ से सहलाना शुरू कर दिया.
फिर मैंने उसकी गोलियों को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी.
वह पागल सा होने लगा.
मैं कभी उसके लंड को चूस लेती तो कभी उसकी गोलियों को मुंह में भर लेती थी.
उसने मेरे सिर को पकड़ लिया और अपने लंड को मेरे मुंह में घुसा दिया और मेरे मुंह को चोदना शुरू कर दिया.
वह अपनी गांड को उठा उठा कर मेरे मुंह में लंड को धकेल रहा था.
उसका लंड अब पहले से ज्यादा टाइट हो गया था और बिल्कुल मोटे डंडे की तरह तन कर सख्त लगने लगा था.
उसके बाद पंकज ने मुझे फिर से नीचे गिरा लिया और मेरे होंठों को चूसने लगा.
फिर मैंने पंकज को अपनी बांहों में भर लिया और वह मेरे पूरे बदन को चाटने लगा.
उसका लंड मेरे बदन पर यहां-वहां टच हो रहा था.
मैंने एक हाथ से पंकज के लंड को पकड़ लिया और अपनी जलती हुई गर्म चूत पर रखवा दिया.
मैं अब और नहीं रुक सकती थी.
मेरी चूत लंड लेना चाहती थी.
लेकिन पंकज अभी भी मेरे होंठों को चूसने में लगा हुआ था.
मैंने पंकज को अपनी तरफ खींच लिया जिससे उसका लंड मेरी चूत पर फिसलने लगा.
मैं उसका लंड लेने के लिए तड़प रही थी.
मैं मन ही मन उससे अपनी चूत में लंड डालने के लिए मिन्नत कर रही थी.
मैं बहुत दिनों से लंड की प्यासी थी.
उसका लंड लेकर मैं अपनी चूत की आग को शांत कर देना चाहती थी.
फिर पंकज ने मेरी चूत के छेद पर लंड को लगाया और एक धक्का दे दिया.
मेरी गीली और गर्म चूत में लंड अंदर गच्च की आवाज के साथ चला गया.
मुझे आनंद आ गया.
बहुत दिनों के बाद ऐसा मोटा और रसीला लंड चूत ने चखा था.
उसके बाद पंकज ने अपनी स्पीड को बढ़ा दिया और मेरी चूत को चोदने लगा.
मैं उसके लंड से चुदाई करवाने लगी.
मेरी प्यास और ज्यादा बढ़ गई थी.
मैं उसके चूतड़ों को अपने हाथों से पकड़ कर उसका लंड अपनी चूत में धकेलने लगी.
साथ में मैं अपनी गांड को भी उछाल रही थी.
मुझे बहुत मजा आ रहा था.
मैं पंकज की पीठ पर अपने नाखून से नोंचने लगी थी.
पंकज मेरी चूत को पेलने में लगा हुआ था.
वह जवान लड़का था इसलिए उसके लंड में बहुत जोश था.
वह शरीर से भी जवान था और उसके लंड में बहुत ज्यादा कड़कपन था.
मेरी चूत की प्यास बुझने लगी.
मैं मजे से पंकज के साथ चूत चुदवाती हुई उसकी चुदाई का मजा लेने लगी.
पंकज भी मेरी चूत को चोद रहा था.
साथ में वह मेरे मम्मों को भी दबा रहा था.
बहुत देर तक पंकज मेरी चूत की चुदाई करता रहा.
फिर एकदम से मेरे शरीर ने अकड़ना शुरू कर दिया और मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.
मैं तृप्त हो गई लेकिन पंकज अभी भी मेरी चूत को चोदने में लगा हुआ था.
अब मुझे चूत में दर्द महसूस होने लगा लेकिन मेरे पानी से चूत पूरी तरह से गीली हो गई थी जिसके कारण पंकज का लंड अब और ज्यादा अच्छी तरह मेरी चूत को फाड़ने में लग गया.
लगभग 20 मिनट तक उसने मेरी चूत की चुदाई की और फिर उसके लंड के धक्के और ज्यादा तेज हो गए.
मैं दर्द से कराहने लगी.
पंकज ने मेरे होंठों को काटना शुरू कर दिया.
साथ में वह मेरे चूचों के निप्पलों को भी मसल रहा था.
वह एक जानवर की तरह मेरी चूत को चोदने में लगा हुआ था.
कुछ ही देर में मैं दोबारा झड़ गई.
फिर उसके बाद मुझे थकान महसूस होने लगी और अचानक से पंकज धक्के भी तेज होकर धीमे होना शुरू हो गए.
उसके लंड ने भी वीर्य छोड़ दिया था.
मैं अब माँ नहीं बन सकती थी इसलिए मैंने भी उसका वीर्य अपनी चूत के अंदर ही गिरवा लिया.
उसके बाद पंकज मेरे ऊपर ही गिर गया.
हम दोनों 15 मिनट तक ऐसे ही एक दूसरे के ऊपर नंगे पड़े रहे और फिर मुझे बगल वाले कमरे में कुछ बर्तनों की आवाज सुनाई दी.
शायद मेरी सास जग गई थी.
मैंने पंकज को छिप जाने के लिए कहा.
पंकज ने अपने कपड़े उठाए और दरवाजे साथ लगे पर्दे के पीछे छिप गया.
लेकिन कुछ मिनट तक इंतजार करने के बाद दोबारा कोई आवाज नहीं हुई.
उसके बाद वह बाहर आ गया.
उसका लंड वापस सिकुड़ गया था.
फिर मैंने टाइम देखा तो बच्चों के आने का समय हो गया था.
मैंने पंकज से कहा कि अब बच्चे आने वाले हैं तो वह अपने घर वापस चला जाए.
उसके बाद उसने कपड़े पहन लिये.
मैंने अपने कपड़े पहले ही पहन लिए थे.
मैंने सेफ्टी के लिए पंकज से पहले बाहर निकल कर देखा तो मेरी सास के कमरे का दरवाजा बंद ही था.
मैंने वापस आकर पंकज को बाहर आने का इशारा किया.
वह दबे पांव बाहर आया और चुपके से सीढ़ियों पर से होते हुए छत पर वापस चला गया.
उसके जाने के बाद मैं बाहर चली गई.
बच्चों के मदरसे से वापस आने का समय हो गया.
उस दिन मैं बहुत खुश थी.
बहुत दिनों से प्यासी मेरी चूत की आग आज पंकज ने ठंडी कर दी थी.
उसके बाद तो मैं अपनी सास की नजरों से नजर बचाकर पंकज को अपने कमरे में बुला लिया करती थी.
बहुत दिनों तक मैंने पंकज के लंड से अपनी चूत की चुदाई करवाई और मेरी चूत की प्यास हर दिन बढ़ती ही चली गई.
उसके बाद मैं एक दिन में दो बार लंड लेने लगी और चुदक्कड़ बन गई.
अब मुझे रोज लंड की जरूरत महसूस होती रहती है.
कभी रिक्शे वाले को पकड़ कर चुदवा लेती हूं तो कभी सब्जी वाले चुदवा लेती हूँ.
मेरी चूत हमेशा ही प्यासी रहती है.
इसलिए जहाँ भी मुझे मौका मिलता है मैं अपनी चूत की प्यास को लंड लेकर शांत करवा लेती हूँ.
आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी, इसके बारे आप मुझे जरूर बताना.
मैं एक चुदक्कड़ औरत हूँ और हमेशा ही लंड के इंतजार में रहती हूँ.
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स्रोत:इंटरनेट