. उसने मेरे लंड को पकड़ लिया तो मेरा लंड खड़ा हो गया.
दोस्तो इसमें मेरी क्या गलती थी.
जब कोई लड़की खुद ही लंड पकड़ने लगे तो लंड को तो खड़ा होना ही था.
मेरा लंड पूरा तन कर उसके हाथ में आ गया था.
वो काफी देर तक मेरे लंड को पकड़ कर ऐसे ही लेटी रही.
फिर पता नहीं उसको क्या हुआ कि उसने मेरा लंड छोड़ दिया और अपना हाथ बाहर निकाल लिया.
वो फिर चुपचाप एक तरफ होकर सो गई.
मेरा लंड अभी भी तना हुआ था लेकिन मैंने भी करवट बदल ली और दूसरी तरफ घूम गया.
फिर काफी देर तक तो मुझे इस घटना के बारे में सोचते हुए नींद नहीं आई लेकिन फिर मैं भी सो गया.
उस वक्त मुझे लग रहा था कि प्रिया ने शायद अपना प्रेमी जान कर नींद में ही मेरा लंड पकड़ लिया होगा और जब उसकी आंख खुली होगी तो उसने अपना हाथ वापस बाहर निकाल लिया होगा.
अगले दिन सुबह हुई तो मैंने सोचा कि वो कुछ रिएक्शन देगी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.
मैंने सोचा कि शायद उससे गलती से ही रात में वो सब हो गया होगा.
फिर उस दिन हम दिल्ली में कनॉट प्लेस घूमने के लिए चले गये.
शाम को वापस आते समय काफी जाम हो गया था तो हमें रात के 11 वहीं पर बज गये थे.
उस रात को भी प्रिया और उसका प्रेमी मेरे ही कमरे पर सो गये.
रात को 2 बजे के करीब मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कि मेरा हाथ प्रिया की जांघों को बीच में दबा हुआ है.
मेरा हाथ उसकी पैंटी पर टच हो रहा था.
मैं हड़बड़ा गया लेकिन खुद को संभालते हुए मैंने हाथ को बाहर खींचने की कोशिश की मगर प्रिया ने फिर मेरी तरफ ही करवट ले ली.
मेरा हाथ उसकी पैंटी पर टच होकर पूरा उसकी चूत पर लग गया था.
मैं ऐसे ही लेटा रहा.
अब मेरे अंदर भी वासना सी जगने लगी थी.
उसकी चूत को छूकर मुझे अच्छा लग रहा था.
इसलिए मैं आराम से उसकी चूत पर हाथ रख कर लेटा रहा.
कुछ देर के बाद प्रिया ने अपने होंठों को मेरे होंठों के करीब कर दिया.
उसके सांसों की गर्मी मुझे अपने चेहरे पर महसूस हो रही थी.
फिर उसने अपने होंठ मेरे होंठ से सटा दिये.
अब उसकी सांसें भी तेज होने लगी.
उसने मुझे बांहों में भर लिया और फिर बदले में मैंने भी उसकी पीठ पर बांहें डाल दीं.
मेरा हाथ उसकी पीठ को सहलाने लगा.
मेरे अंदर भी हवस सी भरने लगी थी.
मेरा हाथ उसकी पीठ पर फिर रहा था.
फिर कुछ देर तक उसकी पीठ को सहलाने के बाद मेरा हाथ उसकी ब्रा की पट्टी पर लगने लगा.
मैंने धीरे से उसके टॉप के अंदर हाथ डाल दिया.
मैं उसकी कमर पर हाथ फिराने लगा और मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था.
मैं नीचे से अपने खड़े हुए लंड को उसकी जांघों से सटाने की कोशिश कर रहा था.
मुझे बहुत मजा आने लगा था.
मैं खुद को रोक ही नहीं पा रहा था.
मैंने फिर हम्मत करके उसकी ब्रा के अंदर हाथ डाल दिया और उसके नर्म-नर्म चूचों पर मेरा हाथ चला गया.
आह्ह … मैंने पहली बार उसके चूचों को छुआ तो मुझे बहुत मजा आया.
मैं धीरे उसके निप्पलों को रगड़ने लगा.
जब मैं उसके निप्पल रगड़ रहा था तो वो अपनी गांड को मटका रही थी.
मैं समझ गया कि वो काफी गर्म हो चुकी है.
मैं भी अपना खड़ा हुआ लंड उससे सटा रहा था.
दोनों को ही मजा आने लगा.
हम दोनों अब एक-दूसरे के होंठों को चूमने लगे.
मेरे अंदर सेक्स भरता ही जा रहा था.
मैंने फिर उसकी पैंटी में हाथ डाल दिया.
उसकी पैंटी में हाथ डाला तो उसकी गीली चूत पर मेरा हाथ लगा.
मैं उसकी गीली चूत को रगड़ने लगा और अपने हाथ से मसलने लगा.
मैं अपनी मुंह बोली बहन प्रिया की चूत को मसल रहा था.
उसने मेरे लंड को पकड़ लिया था.
वो मेरे लंड को पकड़ कर अपने हाथ से सहला रही थी.
मैंने उसकी चूत में उंगली डाल दी.
उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी.
मेरी उंगली प्रिया की चूत में थी और वो मेरे लंड को पकड़ कर अपने हाथ से मजा लेकर सहला रही थी.
मेरा मन कर रहा था कि उसकी चूत में लंड को घुसा दूं लेकिन उसके प्रेमी के उठने का भी डर था इसलिए हम दोनों लेटे हुए मजे ले रहे थे.
काफी देर तक उसने मेरे लंड को सहला दिया तो मेरा माल निकलने को हो गया.
हम दोनों अब जोर से एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थे.
फिर मैंने उठ कर एक दम अपना लंड बाहर निकाला और उसके मुंह पर लंड को रगड़ने लगा.
उसने मेरे लंड को किस कर दिया तो एकदम से मेरा माल निकल गया और मैंने सारा माल उसके मुंह पर छोड़ दिया.
माल निकलने के बाद मुझे बड़ा अजीब सा लगा.
मुझे शर्म सी आने लगी.
मगर प्रिया कुछ नहीं बोली.
मैं सोच रहा था कि ये सब क्या हो गया.
मैंने उसको सॉरी कहा और वापस लेट गया.
फिर वो बोली कि कोई बात ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है.
कई बार ऐसा हो जाता है.
अगली सुबह भी सब नॉर्मल ही था.
इतना सब होने के बाद उसने मुझसे कुछ नहीं कहा लेकिन अब उसका बर्ताव थोड़ा बदल गया था.
उसने मेरे अंदर के शैतान को जगा दिया था.
मैं अब उसको सेक्स की नजर से ही देखने लगा था लेकिन वो उसके बाद कभी मेरे करीब नहीं आई.
मैंने कई बार उसको गर्म करने की कोशिश की लेकिन उसने पहल नहीं की.
फिर कई बार रात को सोते समय मैंने उसकी गांड पर अपने लंड को टच करवाया लेकिन वो फिर भी कुछ नहीं बोलती थी.
चुपचाप लेटी रहती थी.
मैं रात में उसके चूचे भी छेड़ देता था फिर भी वो कुछ नहीं कहती थी.
एक दिन जब वो रात को मेरे साथ सो रही थी तो मैंने उसकी चूत देखने की सोची.
मैंने उसकी स्कर्ट को उठा दिया और उसकी चूत पर टॉर्च की लाइट मार कर देखने लगा.
उसकी चूत को देखने के बाद उस मेरा मन किया कि आज इसकी चूत को चाटने का स्वाद भी ले लेता हूँ.
मैंने उसकी पैंटी को निकाल कर नीचे खींच दिया और अपनी मुंह उसकी चूत पर रख दिया.
उसने मेरे बालों को पकड़ लिया और मेरे मुंह को अपनी चूत से वापस हटा दिया.
पता नहीं उसको क्या हो गया था लेकिन अब वो मुझे अपने इतने करीब नहीं जाने देना चाहती थी.
मैंने कई बार कोशिश की उसको उकसाने की लेकिन उसने मुझे कुछ भी नहीं करने दिया.
जब वो नहाने के लिए जाती थी तो मैं उसकी पैंटी पर मुठ मार कर अपना माल गिरा देता था लेकिन वो सब कुछ देखने के बाद भी कुछ नहीं बोलती थी.
बहुत दिनों तक ऐसा ही चलता रहा.
मगर उसके बाद मैंने भी उसके गलत हरकतें करना छोड़ दिया.
मुझे समझ नहीं आया कि जो शुरूआत उसने खुद की थी अब वो उसमें मेरा साथ नहीं दे रही थी.
इसलिए मैंने भी उसके बाद उसके साथ ऐसा कुछ भी करने की कोशिश नहीं की.
उसको शायद इतना ही मजा लेना था मेरे साथ.
तो दोस्तो, ये थी मेरी कहानी.
वो किसी लड़की के साथ मेरा पहला अनुभव था.
अनुभव भी ऐसा कि जिसके बारे में मैंने कभी सोचा नहीं था.
कई बार ऐसा होता है कि हम जान नहीं पाते हैं कि लड़कियों के मन में क्या चल रहा होता है.
प्रिया के साथ मैंने जो मजे लिये उसकी शुरूआत खुद उसने की थी लेकिन जब फिर मैंने आगे बढ़ने की कोशिश की तो वो खुद पीछे हट गयी.
इसलिए लड़कियों के मन को पढ़ना बहुत मुश्किल होता है.
आज भी मैं उस बात को सोच कर हैरान हो जाता हूँ कि उस लड़की ने मेरे साथ वो सब कैसे किया.
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स्रोत:इंटरनेट