. उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- आज अपनी इच्छा से अपने लिये कुछ कर रही हूँ और मेरे परिवार में किसी को कुछ नहीं मालूम है। मैंने कहा- कोई बात नहीं, अगर तुम नहीं चाहती तो कोई बात नहीं, कोई जबरदस्ती नहीं है.
वो आगे कुछ नहीं बोली और फिर बस मेरे होंठों को किस करने लगी.
मैंने उसके होंठों पर एक नर्म सा चुम्बन लिया और जूली के चेहरे को अपने हाथों में लेकर गाल पर किस किया.
वह शर्म के कारण सिमट कर मुझसे लिपट गयी.
मैंने जूली को अपने गले से लगा कर उसकी पीठ पर हाथ फिराना शुरू कर दिया.
उसकी पीठ बहुत नर्म-मुलायम और चिकनी थी.
दोस्तो, बस क्या बताऊँ! 21 साल की बला की खूबसूरत जूली को देख कर मेरा लंड बेकाबू होने लगा था.
उसका रंग दूध से भी गोरा था.
इतना गोरा कि उसका छूने भर से ही मैला हो जाए.
बड़ी-बड़ी, काली, मदमस्त आँखें, गुलाबी होंठ, हल्के भूरे रंग के लम्बे बाल, बड़े-बड़े गोल-गोल बूब्स, नर्म चूतड़, पतली कमर, सपाट पेट, पतला छरहरा बदन और फिगर 36-24-36 का था.
उसका कद पांच फीट पांच इंच का था.
दिखने में एकदम माधुरी जैसी और आवाज़ कोयल जैसी मीठी.
जूली किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। उसने सिर्फ लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी.
मेरा 7 इंची हथियार शिकार के लिए तैयार हो रहा था.
उसे गोदी में उठाकर मैं बेडरूम में ले गया और उसे बिस्तर पर बिठा दिया.
मैं थोड़ा सा आगे होकर बिस्तर पर बैठ गया और उसके हाथ पर अपना हाथ रख दिया.
उसका नर्म-मुलायम मखमल जैसा गर्म हाथ पकड़ते ही मेरा लंड फुफकारें मारने लगा और सनसनाता हुआ पूरा 8 इंच तक बड़ा हो गया.
उसकी चमड़ी इतनी नर्म, मुलायम, नाजुक और पारदर्शी थी कि उसकी फूली हुई नसें साफ़ नज़र आ रही थीं.
मैंने गुलदस्ते से एक गुलाब का फूल उठा कर उसके हाथों पर हल्के से स्पर्श किया और वह कांप कर सिमटने लगी.
दूध जैसी गोरी-चिट्टी, लाल-गुलाबी होंठ वाली वो अप्सरा शरमाते हुए और भी हसीन लग रही थी! मैंने उसके कान में कहा- तुम तो बेहद हसीं हो हो मेरी जान … धीरे से मैंने उसके चेहरे को ऊपर किया.
जूली की आँखे बंद थीं.
उसने आँखें खोलीं और हल्की सी मुस्करायी.
उसने सिर्फ साड़ी ओढ़ रखी थी.
न ब्लाउज और न ब्रा.
उसके गोल-गोल सुडौल मम्में मुझे ललचा रहे थे.
फिर मेरे हाथ फिसल तक उसकी कमर तक पहुँच गए.
मैंने उसका दुपट्टा सीने से हटा दिया और उसे घूरने लगा.
मेरे इस तरह घूरने से जूली को शर्म आने लगी और वो पलट गयी.
मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया.
वो शरमाई, लेकिन मैं तो पक्का खिलाड़ी था। उसको खड़ा किया और उसके पूरे जिस्म को अपनी बांहों में जकड़ लिया। मैंने उसे दीवार के साथ खड़ी कर दिया। उसके दोनों हाथ दीवार के साथ सटे हुए थे.
जूली की गोल उभरी हुई गांड मेरी तरफ थी.
मैंने पीछे से उसके चूचे पकड़ लिए और दबाना शुरू कर दिया जिससे वो कसमसाने लगी। मैंने उसकी गांड पर हाथ फिराते हुए उसे गर्म कर दिया और धीरे-धीरे साड़ी उतार कर उसे सिर्फ पैंटी में लाकर छोड़ दिया। फिर उसके बूब्स को पकड़ कर मैं सहलाने लगा और चूमने लगा.
चूमते हुए धीरे-धीरे उसकी पेंटी तक पहुंचा और मैंने उसे भी खोलकर दूर हटा दिया और उसकी चूत को देखने लगा। मैं उसकी चूत के दर्शन करने लगा तो वो शरमा गई.
बोली- क्या सिर्फ देखते ही रहोगे या कुछ करोगे भी? फिर अपने मुख को उसकी चूत के पास ले जाकर मैंने अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया और जीभ से उसकी चूत को चोदने लगा। वो अभी भी शरमा रही थी लेकिन मैं पागल हुआ जा रहा था। एक भरी-पूरी जवान लड़की मेरे सामने नंगी खड़ी थी। फिर ऊपर आकर मैंने उसके बोबों को चूसना शुरू कर दिया। उसे भी मजा आने लगा.
उसके मुंह से कसमसाहट भरी कामुक सिसकारियाँ हल्की-हल्की बाहर आने लगीं.
उसको गर्म होती देख मुझसे रहा नहीं गया। मैं जल्दी से जल्दी उसे चोदना चाहता था। चूंकि मैंने अपने तौलिये को दोबारा लपेट लिया था, अब उसे उतार फेंका और उसके सामने नंगा हो गया.
वो मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ कर बोली- तुम्हारे लंड से चुदने में बहुत मजा आएगा.
इतना कह कर उसने मेरे लंड को धीरे-धीरे अपने हाथों में लेकर सहलाना शुरू कर दिया.
दस मिनट तक जूली को चूमने-चाटने और सहलाने के बाद मैंने उसके दोनों पैरों को फैलाकर उसे लिटा लिया और लंड उसकी चूत पर रख दिया। जैसे ही धक्का लगाया वो सिहर उठी। उसकी चूत कसी हुई थी। जैसे ही मैंने जोर लगाया. तो उसका चेहरा टमाटर की तरह लाल हो गया और उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। मैंने जोर से धक्का लगाया और लंड पूरा अंदर चला गया.
वो चीख पड़ी- मर गई मां, फाड़ दी! कोई है … मुझे इस जालिम से बचाओ! फाड़ दी मेरी चूत! धीरे डालो! इतने में लंड ने जूली की चूत के अन्दर जगह बना ली थी। लेकिन जूली मुझे मेरा लंड बाहर निकालने के लिये लगातार बोले जा रही थी.
कह रही थी- आमिर, प्लीज … मेरी चूत के अंदर बहुत जलन हो रही है, निकालो! मैंने उसकी बात को अनसुना करते हुए अपने काम को करना चालू रखा.
अभी बस हल्के-हल्के ही मैं अपने लंड को अन्दर बाहर कर रहा था.
मेरे दोनों हाथ मेरे पूरे जिस्म का बोझ उठाये हुए थे और वो भी अब दर्द करने लगे थे.
फिर उसके बाद मैंने अपना पूरा बोझ जूली के जिस्म के ऊपर डाल दिया और उसके होंठों को चूसने लगा.
धीरे-धीरे मेरी मेहनत रंग लाने लगी और अब जूली अपनी कमर भी उचकाने लगी.
मैंने अपने आपको रोका और जूली की तरफ देखते हुए बोला- तुम अपनी कमर को क्यों उचका रही हो? वो बड़ी ही साफगोई से बोली- मेरी चूत के अन्दर जहाँ-जहाँ खुजली हो रही है, तुम्हारे लंड से वहाँ-वहाँ खुजलाने का मन कर रहा है! कितनी मीठी होती है यार ये खुजली.
जितनी मिटाने की कोशिश कर रही हूँ, उतनी ही बढ़ती जा रही है। मैंने पूछा- तो तुम्हें मजा आ रहा है? वो बोली- बहुत मजा आ रहा है! मैं चाहती हूँ कि तुम अपना लंड मेरी बुर के अन्दर डाले ही रहो। उसके इतना कहने के साथ ही मैं रूक गया.
लंड उसकी चूत में ही था.
मैंने उसके जिस्म के साथ खेलना शुरू किया.
उसकी मस्त चूचियों को कभी मैं मुंह के अंदर भर लेता तो कभी निप्पलों पर अपनी जीभ चलाने लगता.
मेरी इन हरकतों से उत्तेजित हो कर जूली एक बार फिर बोली- आमिर, खुजली और बढ़ रही है! मैं समझ चुका था कि अब उसे मेरे लंड के धक्के चाहिये.
इसलिये मैं एक बार फिर पहली वाली पोजिशन में आया और अपने दोनों हाथों को एक बार फिर बिस्तर पर टिकाया और इस बार थोड़ा तेज धक्के लगाने लगा.
प्रति उत्तर में डॉक्टर जूली भी अपनी कमर उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी.
करीब 10 मिनट तक दोनों एक दूसरे से दंगल लड़ते रहे और फिर एकदम से ही वह ढीली और सुस्त हो गई.
अब उसने अपनी कमर उचकाना बंद कर दिया था.
वो झड़ गयी थी.
मैंने उसे दोबारा किस करना शुरू किया और उसके चूचों का रस चूसने लगा.
कुछ ही देर में वो दूसरी बार गर्म हो गयी.
अपना लंड उसकी चूत में डालकर अब मैं फिर से उसे धीरे-धीरे चोदने लगा.
लेकिन वो दर्द के कारण अपनी आंखें बंद करके मुझे जोर से पकड़कर चुपचाप पड़ी रही और कहने लगी- और जोर से चोदो मुझे … कर दो आज मुझे पूरा … दो मुझे आज चुदाई का पूरा मजा.
दोस्तो लेकिन उसकी चूत बहुत टाईट थी और तभी मैंने उसे स्पीड बढ़ा कर चोदना चालू कर दिया.
जब मेरी स्पीड बढ़ी तो उसकी टाइट चूत की चुदाई करने में मुझे मजा आने लगा। मेरे धक्के बढ़े और तेजी के साथ लगने लगे और डॉक्टर जूली को भी चुदाई का दोगुना स्वाद आने लगा। मेरी चुदाई से मस्त होकर वो लगातार बोले जा रही थी- फ़क मी …(चोदो मुझे) फ़क मी हार्डर (जोर से चोदो) … आह-आह … ओह्ह! वो चीखे जा रही थी और. मैं धक्के मारता चला जा रहा था। मज़ा दोनों को बराबर आ रहा था। 15 मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ने को हुआ तो मैं भी मजे और जोश में बड़बड़ाने लगा- हाय जूली … मेरी जान! मजा आ गया तुझे चोद कर! वाह क्या. जवानी है! ले मेरी जान … ले ले ले! वो भी बोले जा रही थी- आह-आह-आह … आआआ … आआआ अह! इतने में ही मैं भी झड़ गया। वो भी तीन बार झड़ चुकी थी। अपना पूरा वीर्य जूली की तपती चूत में छोड़कर मैं उसके ऊपर ही लेट. गया.
कुछ देर तक मैं ऐसे ही उसके गर्म बदन पर लेटा रहा और फिर धीरे-धीरे उसके लाल हो चुके बूब्स को चूसने लगा। मगर लंड महाराज झड़ने के बाद भी बदस्तूर खड़े थे.
कहानी अगले भाग में जारी रहेगी.
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स्रोत:इंटरनेट