. इसके लगभग आठ दिन बाद परवीन की मम्मी ने मुझसे नींद की दवा लाने के लिए कहा.
मुझे समझ आ गया कि अंकल आंटी को नींद की गोली लेकर सोने की आदत है.
मैंने उन्हें और अंकल दोनों को नींद की गोली खिला दी.
अब मैं उन दोनों के जागने की तरफ से बेफिक्र हो गया था.
रात को लगभग एक बजे मैं परवीन को अपने कमरे में उठा लाया.
उसके बाद मैंने उसे ऊपर से नीचे तक चूमते हुए उसके पूरे कपड़े उतार दिए.
उसने ब्रा पेंटी पहनी नहीं थी.
अब मैं उसकी मस्त चूचियों का रस पीने लगा, जिससे परवीन भी मस्त होकर आहें भरने लगी थी.
उसके बाद मैंने अपने भी टी-शर्ट और कैप्री उतार दिए.
मैं सिर्फ अंडरवियर में रह गया और मैंने अपना 6 इंच का खड़ा हुआ लंड परवीन के हाथ में दे दिया.
वो मेरे खड़े लंड को मसलने लगी.
इसके बाद मैंने परवीन की चूचियों को छोड़कर उसकी मस्त सीलपैक चूत को चूसना चालू किया.
लगभग 5 मिनट चूत चूसने के बाद उसने पानी छोड़ दिया.
अब मैंने परवीन का मुँह अपने खड़े लंड की तरफ किया, तो उसने थोड़ी नानुकुर के बाद मान लिया.
वो मेरा 6 इंच लम्बा लंड अपने रसीले होंठों से चूसने लगी.
मैं भी काफी दिन से नहीं झड़ा था, तो जल्दी ही मेरा पानी भी निकल गया.
जिसे उसने एक तरफ को डस्टबिन में थूक दिया.
अब मैं उसको अपने बिस्तर में खुद से चिपका कर लेट गया और उसके बदन पर हाथ फिराने लगा.
अंकल आंटी को नींद की गोली दी थी, तो आज कोई डर नहीं था.
थोड़ी ही देर में वो फिर से गर्म होने लगी और मेरे सोए हुए लंड को हाथ में लेकर मसलने लगी.
थोड़ी देर में मेरा लंड फिर से सलामी देने लगा.
परवीन की चूत में भी आग लगी हुई थी और मैं भी मौका खोना नहीं चाहता था.
मैंने परवीन की मस्त गदराई गांड को ऊपर उठाकर उसके नीचे तकिया लगाया और अपने लंड पर कंडोम लगा लिया, मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था.
अब मैंने उसकी दोनों टांगें उठाकर अपने कंधों पर रखी और अपना खड़ा 6 इंच का लंड परवीन की सील पैक चूत पर रगड़ने लगा.
परवीन मजे में आहें भरने लगी थी.
इसके बाद जैसे मैंने देखा कि परवीन अब मेरा लंड लेने के लिए तैयार है, तो मैंने हल्के से उसकी चूत में अपना लंड लगभग 2 इंच अन्दर डाल दिया.
उसे थोड़ा दर्द हुआ, पर मैं वहीं एक जगह रुककर उसकी चुचियों को पीने लगा, जिससे उसका दर्द कम हो गया.
फिर मैं हल्के हल्के से लंड को चूत में अन्दर बाहर करने लगा था.
परवीन भी मजे में आ चुकी थी.
वो बोल रही थी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ तभी मैंने परवीन को कंधों से पकड़कर कस लिया और एक जोरदार धक्का दे मारा.
यदि मैंने अपने होंठ से उसका मुँह बंद नहीं किया होता, तो उसकी चीख बहुत दूर तक जाती.
वो दर्द से तड़पने लगी थी, पर मैं ठहरा मेडिकल स्टूडेंट, मुझे सब पता था कि पांच मिनट में यही लौंडिया गांड उठाकर चुदने लगेगी.
थोड़ी देर उसका तड़पना भूलकर मैं उसकी चूचियों को चूसने लगा और उसे सहलाने लगा.
जैसे ही उसका कुछ दर्द कम हुआ, मैंने लंड हल्का हल्का अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.
वो दर्द से तड़पने लगी और कराहने लगी.
थोड़ी देर में उसे मज़ा आने लगा और वो आह आह की आवाज़ निकाल कर सिसकारियां भरने लगी.
अब मैं उसे तेज़ी से लंड अन्दर बाहर करके चोदने लगा था और वो भी पूरा साथ दे रही थी.
लगभग 5 मिनट की जबरदस्त धकापेल चुदाई के बाद वो झड़ गयी, तो मैंने पोजीशन बदल ली.
उसको मैंने घोड़ी बनाकर पीछे से उसकी चूत में पूरा लंड एक बार में ही डाल दिया.
उसकी फिर से हल्की सी चीख निकल गयी ‘आहहहह उफ्फ्फ..’ पर उसकी ये चीख दर्द की नहीं थी, ये चुदाई के मजे की चीख थी.
फिर इसी पोजीशन में मैंने परवीन को 10 मिनट चोदा और मैं भी कंडोम में ही लंड उसकी चूत के अन्दर डाले डाले झड़ गया.
मैंने कंडोम निकाल कर फेंक दिया और परवीन से चिपककर लेट गया.
थोड़ी देर में ही परवीन मेरे लंड को फिर से सहलाने लगी.
मैं उसके सहलाने दिया और वो मेरे लंड को यूँ ही पांच मिनट तक सहलाती रही.
उसके बाद मैंने उसे 69 की पोजीशन में ले लिया.
परवीन मेरा लंड चूस रही थी और मैं उसकी चूत को चाट रहा था.
चूत को चाटने से पहले मैंने चूत को साफ किया, फिर हल्के हल्के सहलाने लगा.
परवीन मेरे लंड पर अपने होंठों को घुमा रही थी, तो मुझे बहुत ही मज़ा आने लगा.
अब वो मेरे लंड और अपने हाथों को हल्के हल्के लगाने लगी थी.. जिससे मेरी वासना और ज्यादा बढ़ रही थी.
परवीन मेरे लंड को अपने दांतों से एक बच्चे की तरह हल्का हल्का काटने लगी थी और मुझे जन्नत का मजा करा रही थी.
मैंने भी अब परवीन की चूत को सहलाना छोड़ दिया.
मैं उसकी चूत को अपने होंठों में भरकर चूसने लगा.
परवीन मजे में आह आह करने लगी.
लगभग 5 मिनट की चूत चुसाई के बाद परवीन का सब्र जवाब दे गया और अपनी चूत मेरे मुँह से उठाकर मेरे लंड पर बैठ गयी.
उसने मेरा पूरा लंड कराहते हुए अपनी चूत में ले लिया और मेरे ऊपर खुद घुड़सवारी करते हुए ऊपर नीचे धक्के लगाने लगी.
लगभग 5 मिनट में ही उसके धक्के तेज़ हो गए और परवीन कराहते हुए झड़ गयी.
झड़ने के बाद परवीन थककर नीचे लेट गयी.
मैं उसके बाद उसके ऊपर आ कर उसे चोदने लगा.
वो मस्त आवाजें निकाल रही थी.
परवीन- आहह आह उफ्फ उफ्फ.. तुम पहले से कहां थे.. आह ऐसे ही मुझे चोदते रहो.. आह मम्मीई.. और तेज़ज़्ज़.. आह.. मैं- हां परवीन डार्लिंग ये ले.. लंड खा.. और ऐसे ही चुदते रहना मुझसे.. आह ये ले और ले.. मैं परवीन की चूत में धक्के पर धक्का मारता रहा और और परवीन ‘आहह अऊह ह्म्म्म आऊर्रर जजोरर से.. आह मजा आ रहा है..’ कहती रही और चुदती रही.
पूरे कमरे में हमारी चुदाई की फचफच की आवाजें आ रही थीं.
लगभग 10 मिनट इसी तरह की चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए.
मैं झड़ कर परवीन के ऊपर ही ऐसे ही पसर गया.
उसकी चूत में मेरा बिना कंडोम का लंड था और मेरा पानी उसकी चूत में भर गया था.
मेरा लंड सिकुड़ कर बाहर आने लगा, तो परवीन की कली से फूल बन चुकी चूत से मेरा और परवीन का रज और वीर्य निकल रहा था.
मैंने परवीन को अपनी बांहों में भर लिया और हम नींद के आगोश में चले गए.
उसके बाद मेरी आँख खुली, तो परवीन के बदन की गर्मी से मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया था.
मैंने उसे एक बार और चोद दिया.
उसके बाद जब वो जाने लगी, तो उससे ठीक से चला नहीं जा रहा था.
मैंने उसे दर्द की गोली खिलाई और उसके कमरे तक छोड़ कर आया.
उसके बाद मैं वापस आकर सो गया.
इसके बाद जब तक मैं जयपुर में रहा मैंने कई बार परवीन को चोदा, अब उसकी शादी होने वाली है.
अब मैं मुरादाबाद आ गया हूँ, तो यहां मेरे पास कोई सेक्स पार्टनर नहीं है.
ये मेरी अन्तर्वासना पर पहली सेक्स कहानी है, पाठक और पाठिकाएं मुझे [email protected] पर मेल करके अपने सुझाव दे सकते हैं.
स्रोत:इंटरनेट