. एक दो किस करने के बाद स्वाति बोली- मैं 5 मिनट में कपड़े चेंज करके आती हूँ, तब तक तुम आराम करो। ऐसा कहकर वो चली गयी.
पर मेरी रूह में आराम कहाँ … मैं ठहरा खुराफाती इंसान … मुझे तो बस उसको चोदने की ललक लगी थी। 10 मिनट बाद स्वाति ड्रेस बदल कर आई और आते ही दरवाजा बंद कर लिया। हल्का नीले रंग का गाउन पहने उसकी सांवली काया पर कयामत बरपा रहा था। उसको देखकर मैं अपनी सुधबुध खो बैठा औऱ एकदम उठकर उसको अपनी. गोद में उठाया और उसके पतले रसीले होंठों पर किस करने लगा। हम दोनों पहले भी कई बार किस कर चुके थे तो शर्म हया कुछ थी नहीं। स्वाति भी मेरा खुलकर साथ दे रही थी। फिर मैंने स्वाति को बेड पर लेटाया और उसका. गाउन निकाल दिया, वो भी मेरे कपड़े निकलने लगी। उसने गाउन के नीचे काले रंग की पैंटी डाल रखी थी। तब तक उसने मेरी शर्ट और पैन्ट्स निकाल दी थी तो अब हम दोनों एक दूसरे के सामने बस अंडरवियर में थे। अब आपको स्वाति के फिगर के बारे में बता दूँ, एकदम चिकनी देह, चूचे बस 30″ के ही होंगे, बिल्कुल पतली कमर और हिप्स का उभार करीब 34 का होगा जो किसी भी मर्द को पागल बना दे। उसकी शरीर से हल्की हल्की मादक खुशबू आ रही जो मुझे हर पल मस्त किये जा रही थी। उसकी नाजुक काया को स्पर्श करते ही मैं अपना आपा खो बैठा और भूखे भेड़िये की तरह उस पर टूट पड़ा। उसके होठों से होते हुए उसके चुचों पर जैसे ही मैंने अपनी जीभ से चाटा. स्वाति का एक एक रोम खड़ा हो गया, वह आंखें बंद करके एकदम सिहर सी गयी। मैं समझ गया कि यह उसका पहली बार है। उसके स्तनों को पीते हुए मेरा एक हाथ उसकी पैंटी के अंदर घुस गया। हाथ का स्पर्श होते ही स्वाति आह आह की धीमी धीमी आवाज निकलने लगी। कुछ ही देर में उसकी चुत गीली हो गयी जो मैं अपने हाथ से महसूस कर पा रहा था। फिर मैंने बैठकर उसकी पैंटी को निकाल दिया। उसकी मखमली चुत पर एक भी बाल न था। ऐसा लग रहा था. मानो चुत पर वेक्स करवा रखा हो। अब वो मेरे सामने एकदम नग्न थी। जैसा कि मैंने आपको मेरी पहली कहानी में बताया था कि मुझे सेक्स में चूत चाटना सबसे अच्छा लगता है। स्वाति अभी आंखें बंद करके ही लेटी थी तो. मैंने उसकी चुत के दाने पर अपनी जीभ रख दी। मेरे जीभ रखते ही स्वाति की चूत से रस बहने लगा और मैं उसके सारे रस को पी गया। मैं अब भी उसकी चुत को चाटे जा रहा था और स्वाति बिन पानी मछली की तरह छटपटा रही थी, जोर जोर से सिसकारियां भर रही थी, आहें भर रही थी उम्म्ह… अहह… हय… याह… और मैं बिना रुके उसकी चूत को चाटे जा रहा था। 4-5 मिनट बाद फिर से उसकी चूत से रस की एक फुहार निकली और मैं फिर सारा रस पी गया। अब वो निढाल हुए पड़ी थी। लेकिन मैं अब भी अपनी पूरी उत्तेजना में था, मैं उसके होंठों को फिर से चूमने लगा और वह भी मेरा साथ दे रही थी। अब मैंने खड़ा होकर अपना अंडरवियर निकाला और अपना 6 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा लौड़ा उसके हाथ मे रख दिया। मैं पहले कई बार उससे हस्तमैथुन करा चुका था तो ये उसके लिए नया न था। फिर मैंने उसको लण्ड चूसने के लिए बोला तो उसने मना कर दिया, मेरे कई बार कहने पर और मेरी कसम देने और वो बस एक बार मेरा लण्ड मुँह में लेने को तैयार हुई। उसने मेरे लण्ड का बस अगला हिस्सा अपने मुंह मे लिया और थोड़ी देर बाद बाहर निकाल दिया, वो बोली कि उसको ये अच्छा नही लगता तो मैंने भी उसे ज्यादा फ़ोर्स करना ठीक नहीं समझा। क्योंकि हम दोनों ही गर्म हो चुके थे तो मैंने उसकी चुदाई करना ही ठीक समझा। मैंने उसको सीधा लेटाकर फिर से उसकी चुत पर अपनी जीभ रख दी.
मेरे ऐसा करते ही वो फिर से मचल उठी। मैं समझ गया कि वो अब चुदाई के लिए तैयार है। मैं बैठा और अपना लौड़ा उसकी चुत पर रखा औऱ आराम से घुसाने की कोशिश करने लगा। उसकी चुत टाइट होने की वजह से मेरा लण्ड अंदर घुस नहीं रहा था औऱ बस बाहर ही रगड़ रहा था। उधर स्वाति सेक्स. में आहें भर रही थी। फिर मैंने कोशिश करके अपना लण्ड उसकी चुत के मुँह पे रखा और जोर से धक्का मारा। मेरे लण्ड का टोप उसकी चुत के अंदर घुस गया और टोप अंदर घुसे ही स्वाति दर्द से चिल्ला उठी। मैंने उसके. मुंह पर हाथ रखा और उसको शांत किया। कुछ देर वैसे ही रहने के बाद मैं उसको किस करने लगा औऱ किस करते करते एक और धक्का मारा जिससे मेरा आधा लण्ड उसकी चुत में घुस गया। क्योंकि मेरे होंठ उसके होठों पर थे तो. वह चिल्ला तो न सकी पर उसकी आँखों से दर्द के आंसू निकल आये। कुछ देर मैं उसके ऊपर वैसे ही लेटा रहा और उसको किस करता रहा। कुछ देर बाद जब वह नॉर्मल हुई तो मैंने आराम से धक्के देना शुरू कर दिया। थोड़ी देर. बाद उसे भी मजा आने लगा और वो धीरे धीरे मेरा साथ देने लगी। 5 मिनट के सेक्स के बाद मैंने सारा माल उसके अंदर ही छोड़ दिया और उसके ऊपर ही लेट गया। जब मैं उसके ऊपर से उठा तो देखा कि उसकी चुत की किनारियों और. मेरे लण्ड के टोपे पर हल्का हल्का खून लगा है। मैं समझ गया कि मैंने ही स्वाति को पहली बार लण्ड का स्वाद दिया है। अब तक स्वाति नॉर्मल हो चुकी थी।पर उसे थोड़ी जलन महसूस हो रही थी। उस रात फिर हमने दोबारा. सेक्स नहीं किया। स्वीटी जो कि बगल वाले कमरे में सो रही थी, अगले दिन मुझ से मजाक में बोली- जीजा जी, आवाज थोड़ी ज्यादा ही आ रही थी कमरे से! यह सुनकर मैं और स्वाति एक दूसरे को देखकर हल्के हल्के मुस्कुराने लगे। मैं वहाँ 2 दिन और रहा और अगले 2 दिन मैंने स्वाति की अलग अलग पोज़ में चुदाई की जिसमें उसने भी मेरा पूरा साथ दिया। उसके बाद हमने बहुत बार सेक्स किया और फिर 6 महीने बाद अंशिका की वजह से हमारा ब्रेक. अप हो गया। तो यह थी दोस्तो, मेरी गर्लफ्रेंड की चुदाई की सच्ची दास्तान। आशा करता हूँ आप लोगों को जरूर पसंद आएगी। अगर कोई भी शंका या सवाल हो तो जरूर पूछिएगा। अगर आप मेरी और कहानियां जानना चाहते हैं तो मुझे मेल करके जरूर बताएगा, आपके सुझाव का इंतजार रहेगा और अगर कोई लेखन में त्रुटि हो तो क्षमा कीजिएगा। धन्यवाद। आपका दोस्त टोनी [email protected]
स्रोत:इंटरनेट