. गांड और चूत में शहद लगाकर चुदाई करी बदचलन विधवा माँ की अंदर बैडरूम में मेरी माँ के साथ एक नहीं बल्कि दो मर्द थे और मेरी माँ घोड़ी बनकर किसी धंधा करने वाली रंडी की तरह उन दोनों. पराये मर्दों के साथ थ्रीसम सेक्स कर रही थी.
दोस्तों मुझे तो मेरी आँखों पर बिलकुल भी यकीन नहीं हो रहा था की मेरी माँ पराये मर्दों को उनके साथ चुदाई करने दे सकती है.
वो दोनों शहद लगाकर मेरी माँ को चोद रहे थे.
दोस्तों मेरे घर में हमेशा शहद रहता था क्योंकि मेरी माँ को शहद बहुत पसंद था मगर आज मुझे इस शहद का राज पता चल चूका था की मेरी माँ इस शहद को किस काम में लिया करती थी.
दोस्तों उस मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था की अब मैं क्या करूँ.
फिर मैंने मेरी जेब से मेरा मोबाइल फोने निकला और उनके थ्रीसम सेक्स की पोर्न विडियो रिकॉर्ड करने लगा ताकि जरुरत पड़ने पर मैं इस सेक्स विडियो को साबुत के तौर पर प्रस्तुत कर सकूँ.
खैर वो दोनों दो घंटे की खतरनाक थ्रीसम चुदाई करने के बाद हमारे घर से चले गए और मेरी माँ नहाने के लिए बाथरूम में चली गयी.
मैं भी चुपके से घर से बहार चला गया था ताकि मेरी माँ को मेरे उप्पर शक ना हो.
मैं वापस लौटकर जब घर के अंदर आया तो मैंने देखा मेरी माँ बहुत खुश नजर आ रही है.
मैं माँ की खुशी का कारण जनता था मगर मैंने माँ से कुछ नहीं बोला.
पूरी रात मैं मेरी माँ की कल की चुदाई के बारे में ही सोचता रहा की मेरी माँ इतनी बड़ी रंडी निकलेगी ऐसा मैंने कभी सपनो में भी नहीं सोचा था.
मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया था.
फिर मैंने खाना खाया और दिनभर टीवी के सामने बैठकर टाइम पास करता रहा.
सुबह से ही मौसम खराब था और हल्की बारिश हो रही थी जो अभी तक रुकी नहीं थी.
दोपहर के बाद मां स्कूल से लौट आयी.
मैंने देखा कि कामवासना से भरी बदचलन माँ के कपड़े भीगे हुए थे.
उसने आते ही मुझसे तौलिया मांगा और उस बदचलन विधवा की मैक्सी व ब्रा पेंटी लाने को कहा.
फिर वो तौलिया लेकर बाथरूम में नहाने के लिए चली गयी.
मैं उनके दूसरे कपड़े लेने उनके रूम में चला गया.
जब मैं वापस आया तो माँ सिर्फ टॉवल लपेटे खड़ी थी.
मैं उन्हें गन्दी नजरों से घूर रहा था तो मेरी माँ बोली- दे मेरे कपड़े, ऐसे क्या टुकुर टुकुर देख रहा है मैं तेरी माँ हूँ ना की तेरी पत्नी थोड़ी तो शरम कर ले बेशरम लड़के? एकदम से मैं संभला और मैंने आगे बढ़कर कामवासना से भरी बदचलन माँ के हाथ में कपड़े थमा दिये.
तौलिये में मेरी माँ के दूध से भरे बड़े बड़े स्तन काफी ज्यादा उभरे हुए दिखाई दे रहे थे.
पलट कर जब वो बाथरूम में जाने लगी तो उस बदचलन विधवा की मटकती गांड देखकर मेरे मुँह से निकल पड़ा क्या मस्त गांड और बूब्स है… जो मेरी सेक्सी माँ ने बिलकुल साफ़ साफ़ सुन ली.
मेरी माँ ने पलट कर देखा तो मैं दूसरी तरफ देखने लगा.
फिर वो अंदर बाथरूम में नहाने के लिए चली गयी.
मैंने देखा कि माँ ने दरवाजा अंदर से लॉक नहीं किया.
मेरे अंदर की हवस जाग चुकी थी.
माँ को तौलिया में देखने के बाद मुझे कल वाले चुदाई के सीन अपनी आंखों के सामने दिख रहे थे.
मैंने सोचा कि एक बार तो मुझे हिम्मत करनी ही पड़ेगी.
अगर ये दो मर्दों के साथ चुदवा सकती है तो इसकी चूत को लंड का बहुत चस्का होगा.
ये अपने बेटे का लंड भी लेने के लिए तैयार हो जायेगी.
हिम्मत करके मैं बाथरूम के दरवाजे के पास गया.
मैंने अंदर झांक कर देखा तो माँ ने अपनी मैक्सी एक तरफ टांगी हुई थी और वो अपनी ब्रा के हुक लगा रही थी.
उस बदचलन विधवा की गांड मेरी तरफ थी और उसके चूतड़ गीले थे.
इतना कामुक नजारा देखकर मेरी कामवासना बहुत ही ज्यादा बुरी तरह से भड़क उठी.
अब मुझ कुंवारे लड़के से रहा नहीं गया और मैंने पीछे से जाकर माँ को अपनी बांहों में जकड़ लिया.
मेरी माँ समझी की कोई उसका रेप करने वाला है और वो एकदम से घबराकर पलटी.
फिर वो मेरे हाथों से खुद को छुड़ाकर बोली- क्या कर रहा है बेटा ये सब क्या है…? तू मेरे साथ सेक्स करेगा क्या मैं माँ हूं तेरी तुझे जन्म दिया है मैंने.
मैंने उसे फिर से अपनी बांहों में जकड़ते हुए उसके चूचों में मुंह देकर उस बदचलन विधवा की चूत को सहला दिया.
वो मुझे हटाने लगी तो मैंने उस बदचलन विधवा की चूत में उंगली दाल दी और उंगली अंदर बाहर चलाते हुए बोला- कल जब दो दो मर्दों से घोड़ी बनकर किसी धंधा करने वाली रंडी की तरह चुदवा रही थी तो तुम्हें शर्म नहीं आई? ये सुनकर मेरी माँ के चेहरे की रौनक उड़ गयी.
मेरी कामुकता से भरी बदचलन विधवा माँ बोली की बेटा क्या बकवास किये जा रहा है, ये सब क्या बक रहा है तू? मैं मेरी विधवा माँ से बोला की आप ज्यादा बनो मत, तुम्हें क्या लगा? मैं कॉलेज गया हुआ हूं? मैं तुम्हारे अश्लील कारनामे यहीं छुपकर देख रहा था.
फिर माँ को पता लग गया कि मैं सब कुछ देख चुका हूं.
मेरी कामुकता से भरी बदचलन विधवा माँ बोली की बेटा सॉरी बेटा, लेकिन तेरे पापा के जाने के बाद मुझे सेक्स पार्टनर की कमी खलती थी इसलिए मजबूरी में अपनी कामवासना शांत करने के लिए अवैध शारीरिक सम्बन्ध बना लिए.
मैं बोला माँ सेक्स पार्टनर की कमी तक तो ठीक है मगर एक साथ दो दो मर्दों से चुदवाना और थ्रीसम सेक्स ये तो गलत बात है…? अब मेरी कामवासना से भरी कामुक विधवा माँ हँसते हुए बोली- ठीक है बेटा अब मुझे कपड़े पहनने दे.
मैं कामवासना से भरी बदचलन माँ के नंगे जिस्म को ध्यान से देखने लगा.
ब्रा उस उस विधवा रांड की चूचियों से उतर गयी थी.
माँ की मोटी चूची तनी हुई थीं.
मैंने उनको हाथ में भरा तो माँ ने हाथ हटा दिया.
मैंने फिर से माँ के बड़े बड़े स्तनों को अपने हाथ में भरा और अबकी बार माँ हटाने लगी तो मैंने कस कर दोनों हाथों से उनके दूध से भरे मोटे मोटे स्तनों को दबाना शुरू कर दिया.
वो मुझे हटाने लगी लेकिन मेरे अंदर हवस का भूत सवार हो चुका था.
माँ को धकेल कर मैंने दीवार के साथ सटा दिया.
उस बदचलन विधवा की चूचियों पर हाथ फेरते हुए उस बदचलन विधवा की चूत पर हाथ ले गया और उस बदचलन विधवा की चूत में उंगली दे दी.
वो उचकी और बोली- मत कर ना … आह्ह … पागल हो गया है क्या? मैं मेरी विधवा माँ से बोला की हां, तुम्हारे जिस्म के लिए पागल हो गया हूं.
जब से तुमको चुदते देखा है मेरी नींद हराम हो गयी है.
आज तो मैं आपकी गांड और चूत को चोदकर ही रहूंगा.
अब अपनी बदचलन माँ की विधवा चूत में मैं तेजी से उंगली चलाने लगा और अपनी उँगलियों से उनकी चूत को चोदने लगा.
वो धीरे धीरे विरोध बंद करने लगी और चुदाई करवाने के लिए उस विधवा रांड की टांगें अब अपने आप ही खुलने लगीं.
जब माँ को चूत में उंगली का पूरा मजा मिलने लगा तो उसने मुझे बांहों में ले लिया और हम माँ बेटे दोनों के होंठ मिल गये.
मैं नीचे से बदचलन माँ की विधवा चूत में उंगली करते हुए उसके होंठों को चूसने लगा.
माँ ने मेरे लंड को पकड़ लिया.
मैं शॉर्ट्स में था.
वो शॉर्ट्स को खोलने लगी लेकिन मैंने उसका हाथ रोक लिया.
उसने मेरे लौड़़े को देखा तो पूरा तना हुआ था.
उस विधवा रंडी ने झट से मेरे शॉर्ट्स को नीचे कर दिया और मेरे तने हुए लंड को मुंह में भर लिया.
मैं एकदम से जन्नत में पहुंच गया.
माँ मेरे लंबे मोटे लंड को पूरा गले तक ले जाकर चूसने लगी तो इस शानदार ब्लोजॉब की वजह से मैं तो कुछ ही पलों में मदहोश होने लगा.
मेरे हाथ कामवासना से भरी बदचलन माँ के सिर पर पहुंच गये.
मैं उसके मुंह को चोदने लगा.
कुछ ही देर बाद मुझे लगा कि मैं झड़ जाऊंगा.
मैंने लंड को कामवासना से भरी बदचलन माँ के मुंह से बाहर खींच लिया.
वो एक भूखी कुतिया की तरह मेरे चेहरे को देखने लगी.
मैंने लंड को अंदर कर लिया.
मेरी कामुकता से भरी बदचलन विधवा माँ बोली की बेटा अब क्या हुआ? कुछ देर पहले तो इतनी बदतमीजी से मेरे से चिपक रहा था, अब दूर जा रहा है?मैं मेरी विधवा माँ से बोला की माँ मैं तुम्हें सेक्स का असली मजा दूंगा माँ फिर तुम्हें बाहर के मर्दों के साथ अवैध सेक्स संबंध बनाने की बिलकुल भी जरूरत नहीं पड़ेगी बीएस आप आज शाम को मेरे साथ के लिए बिलकुल तैयार रहना.
उसके बाद माँ ने अपना तौलिया वापस से लपेट लिया और हम माँ बेटे दोनों बाहर आ गये.
माँ अपने काम में लग गयी.
मैं अपने रूम में चला गया.
मगर मेरा लंड बैठने का नाम नहीं ले रहा था.
फिर मैंने लंड की मुठ मारी और तब जाकर मुझे थोड़ी शांति मिली.
फिर माँ रात का खाना बनाने लगी.
खाना बनाने के बाद वो मेरे रूम में आई और मुझे नहाने के लिए कहने लगी.
मैं कपड़े निकाल कर अंदर बाथरूम में घुस गया.
मैं मेरी बदचलन माँ के साथ वाला था इस लिए मैंने अपने झांट के बाल साफ़ करे और लंड को भी अच्छे से साफ किया.
करीब एक घंटे के बाद मैं नहा धोकर बाथरूम से बाहर आया.
जैसे ही मैं नहाकर बाहर निकला तो माँ ने मेरी आंखों पर पट्टी बांध दी.
मैंने अपने नंगे बदन पर केवल एक तौलिया लपेटा हुआ था.
फिर मेरी बदचलन माँ मुझे अपने बैडरूम में ले गयी.
वहां पर जाते ही मुझे एक मनमोहक खुशबू आने लगी जो की थी.
मैं मेरी विधवा माँ से बोला की माँ कहां ले आयी हो मुझे? मेरी कामुकता से भरी बदचलन विधवा माँ बोली की बेटा अभी पट्टी मत उतारना.
जब मैं बोलूं, तभी उतारना.
उसके बाद वो मुझे थोड़ा और आगे ले गयी और पट्टी उतारने के लिए कहा.
मैंने पट्टी उतार कर देखा तो पूरा कमरा गुलाब के फूलों से सजा हुआ था.
माँ ने लाल साड़ी व जेवर पहने हुए थे और वो बिलकुल नयी नवेली दुल्हन के जैसी लग रही थी.
माँ को दुल्हन के रूप में देखते ही मेरा लंड उनके साथ सुहागरात बनाने के लिए खड़ा हो गया.
वो तो मेरे साथ सुहागरात मनाने की तैयार कर चुकी थी.
मैंने मेरी कामुकता से भरी बदचलन माँ से बोला की माँ मुझे तुम्हारे साथ हार्डकोर बी.
डी.
एस.
एम.
सेक्स करना है.
मेरी कामुकता से भरी बदचलन विधवा माँ बोली की बेटा ये क्या होता है? मैंने बताया- इसमें औरत को प्यार से खूब गांड पर मारते हैं.
उसको बहुत तड़पाते हैं, फिर मजा लेते हैं.
फिर मैं मेरी प्यारी माँ के पास गया और उनको किस करने लगा.
वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी.
मैंने मेरी कामुकता से भरी बदचलन माँ से बोला की मेरा लंड चूसो.
मैंने माँ को घुटनों के बल बैठा दिया और तौलिया उतार कर लौड़ा उसके मुँह में दिया.
मेरी बदचलन माँ मेरे खड़े लंड को किसी रंडी की तरह चूस रही थी.
मैंने एक झटके में माँ के मुंह में पूरा लंड डाल दिया और धक्के दे देकर चुसवाने लगा.
उसके मुंह में तेजी से मैं लंड को अंदर बाहर करने लगा.
फिर मैंने लंड बाहर निकाला और माँ को खड़ी किया.
फिर उस बदचलन विधवा की साड़ी को उतार दिया.
अब माँ सिर्फ पेटीकोट व ब्लाउज में थी.
मैंने मेरी कामुकता से भरी बदचलन माँ से बोला की माँ घोड़ी बन जाओ.
माँ घोड़ी बन गयी.
मैं बाहर गया और अपनी बेल्ट लेकर आया.
माँ बोली- इसका क्या करेगा? उनको मैंने बिना कुछ बताये एक रस्सी से उनके हाथ बांध दिये.
फिर मेरी कामुकता से भरी बदचलन विधवा माँ बोली की बेटा क्या कर रहा है, मुझे तो कुछ बता.
मैं मेरी विधवा माँ से बोला की रुक जा बहन की लौड़ी.
इतना कहते हुए मैंने माँ का पेटीकोट उठाकर उस बदचलन विधवा की मोटी गांड पर एक जोर की बेल्ट मारी.
वो समझ गयी कि मैं क्या कर रहा था.
उस बदचलन विधवा की गांड पर लाल निशान हो गया.
फिर मैंने मेरी कामवासना से भरी कामुक विधवा कामवासना से भरी बदचलन माँ के ब्लाउज और ब्रा दोनों को खोल दिया.
उसके चूचे नंगे होकर लटकने लगे.
अभी तक मैंने पेटीकोट नहीं खोला था.
उसके नीचे पैंटी भी थी.
15 मिनट तक मैं माँ को तड़पाता रहा.
कभी उस बदचलन विधवा की जांघों पर बेल्ट मारता तो कभी चूतड़ों पर.
कभी उस बदचलन विधवा की चूचियों पर हल्का सा मारता तो कभी उसके चूचों को जोर से खींच देता.
इस तरह से वो रोती तड़पती रही.
जितना वो तड़प रही थी मुझे उतना ही जोश चढ़ता जा रहा था.
फिर मैंने उसका पेटीकोट उतारा तो देखा गांड पर बेल्ट मारने के लाल निशान पड़ गये थे.
मैंने मेरा लंबा मोटा लंड निकाला और उस बदचलन विधवा की पैंटी में घुसा दिया.
उस बदचलन विधवा की टाइट चूत पर लंड को छुआने लगा.
उसे अच्छा लगने लगा.
फिर मैंने उस बदचलन विधवा की पैंटी उतार दी.
अब माँ पूरी नंगी थी.
उस बदचलन विधवा की चूत को देखकर मेरे लंड में झटके लगने लगे.
उस बदचलन विधवा की गांड बहुत ही मस्त थी.
मैंने उस बदचलन विधवा की गांड के छेद पर लंड रख दिया और रगड़ने लगा.
वो सिसकारने लगी.
फिर मैंने एक झटके से लंड को अंदर डाल दिया.
दर्द के मारे वो विधवा रांड एकदम से चीखी और मैंने मेरी कामवासना से भरी कामुक विधवा कामवासना से भरी बदचलन माँ के घने काले बाल पकड़ लिये.
फिर मैंने एक झटका और दे मारा और माँ की गांड में पूरा लंड पेल दिया.
वो रोने लगी थी.
मैं उसको बाल पकड़ कर चोदने लगा.
मुझे चुदाई का पूरा जोश चढ़ा हुआ था.
अब मैंने कामवासना से भरी बदचलन माँ के हाथ खोल दिये.
फिर मैंने उसको सीधा किया और लण्ड पर बैठने को कहा.
माँ लण्ड पर बैठ गयी.
उसने पूरा लण्ड अंदर ले लिया और मेरे लंड पर कूदने लगी.
वो विधवा रांड बहुत मजे से अपनी गांड के छेद में बहुत मस्त तरीके से मेरा लंबा मोटा लंड ले रही थी.
उस बदचलन रांड की गांड की चुदाई करते हुए मुझे भी बहुत आनंद आ रहा था.
फिर थोड़ी देर में माँ भी गांड चुदाई को फुल इंजॉय करने लगी.
अपनी गांड की चुदाई करवाते करवाते मेरी नंगी माँ के मुंह से अब बहुत ही ज्यादा मादक सिसकारियां निकल रही थीं- आह्ह … विशाल … आह्ह विशाल … चोद दे बेटा … आह्ह … मेरी गांड में बहुत मजा आ रहा है.
आह्ह चोद … तेरा लंड लेकर बहुत मजा आ रहा है बेटा इतना मजा तो कभी तेरे बाप ने भी नहीं दिया था मुझे.
करीब दस मिनट तक मैंने उस बदचलन विधवा की गांड में से लंड निकाला और फिर लंड को चूत में लेने के लिए कहा.
पास में रखे शहद के डिब्बे में से मेरी नंगी माँ ने बहुत सारा शहद निकाला और अपनी चूत और मेरे लंबे और मोटे लंड पर लगा दिया.
शहद लगाकर चुदाई करवाने के लिए उस बदचलन रंडी ने अपनी टाइट चूत थोड़ी आगे की और फिर लंड को चूत में ले लिया.
चूत में लंड लेकर वो एकदम मस्त हो गयी.
वो मेरे लंड पर आगे पीछे होते हुए सिसकारियां लेने लगी- आह्ह … ओह्ह … याह … ओह्ह … चोदो.
मस्त मजा आ रहा है … ओह्ह विशाल। फिर वो लगभग झड़ने के करीब आ गयी.
मैंने पूछा- माँ आ रहा है क्या आपका पानी? मेरी कामुकता से भरी बदचलन विधवा माँ बोली की बेटा हां … चोदता रह … आह्ह … अभी आने वाला है … आह्ह … आईई … ओह्ह। मैंने मेरी कामुकता से भरी बदचलन माँ से बोला की मुझे आपकी चूत का पानी पीना है.
फिर मेरी बदचलन विधवा माँ मेरे खड़े लंड पर से उठ गयी.
मैंने उसे नीचे लिटाया और उस बदचलन विधवा की टांगें खोलकर उस बदचलन विधवा की चूत में मुंह लगाकर चाटने लगा.
उसने मेरे होंठों को अपनी चूत पर जोर से दबा लिया.
मेरी जीभ बदचलन माँ की विधवा चूत के अंदर बाहर होने लगी और तभी उस बदचलन विधवा की चूत ने पानी छोड़ दिया.
ढे़र सारा पानी बदचलन माँ की विधवा चूत से निकला.
मैंने चूत का सारा पानी चाट लिया.
अभी मैं झड़ा नहीं था.
मैंने माँ को फिर से चुदाई करने के लिए घोड़ी बना लिया और उसके ऊपर चढ़ गया.
मेरी नंगी माँ की बुर काफी ज्यादा रुकी हो गयी थी तो मैंने एक बार फिर उनकी बुर में शहद लगाया और फिर पीछे से उनकी शहद लगाकर से संदी बुर में अपना खड़ा लंड पेल कर चुदाई करन प्रारंभ कर दिया.
अपनी चुदाई करवाते करवाते अब उस बदचलन विधवा की चूत में दर्द होने लगा और वो कराहने लगी.
अब मैंने उस बदचलन विधवा की चूत से लंड को निकाला और उस बदचलन विधवा की गांड में पेल दिया.
वो फिर से चिल्लाने लगी- आह्ह विशाल … स्लो … आह्ह … धीरे करो … आह्ह … आराम से … आह्ह … आईई … ओह्ह। उसके मुंह से ऐसी दर्द भरी आवाजें सुन कर मेरा जोश और ज्यादा बढ़ गया था.
मैं पूरी ताकत लगा कर उस बदचलन विधवा की गांड में धक्के मार रहा था.
मगर अभी मैं चुदाई खत्म करना नहीं चाहता था.
उस बदचलन विधवा की गांड से लंड निकाल कर मैं चूचियां पीने लगा.
उसके निप्पलों को काटने लगा.
वो भी मेरे सिर को चूचियों पर दबाने लगी.
फिर मैंने माँ को लण्ड चूसने को बोला.
फिर ब्लोजॉब करने के लिए मेरी बदचलन विधवा माँ अपने घुटनों के बल बैठ गयी और मेरे लंड को अपने मुँह ले लेकर पूरी मस्ती के साथ चूसने लगी.
मैंने फिर उसे खड़ा किया.
अब मैं और माँ दोनों एक दूसरे की आँखों में आंखें डाल कर देखने लगे.
हम माँ बेटे दोनों अब मां बेटे के रिश्ते से ऊपर उठ गये थे.
माँ मेरे करीब आ गयी.
उन्होंने मेरे गले में अपनी बांहें डाल लीं.
मेरी गर्दन को अपनी ओर घुमाकर उन्होंने मेरे होंठों पर अपने होंठों को रख दिया.
मैं भी माँ का साथ देने लगा.
माँ के गुलाबी होंठों पर किस करते हुए मैं एक अलग ही दुनिया में पहुंच गया था.
किस करते हुए हम माँ बेटे दोनों एक दूसरे में खो गये थे.
मां की चुदाई का सपना कौन नहीं देखता.
आज मेरा ये सपना पूरा हो गया था और माँ इसमें मेरा पूरा साथ दे रही थी.
अब मैंने उसे फिर से घोड़ी बनाया और उस बदचलन विधवा की चूत पर जीभ लगाकर चाटने लगा मगर माँ की चूत थोड़ी नमकीन लग रही थी और मुझे नमकीन स्वाद बिलकुल भी पसंद नहीं था.
फिर मैंने पास में रखा शहद का डिब्बा उठाया और फिर मैंने मेरी नंगी माँ की टाइट चूत पर बहुत सारा शहद लगाया और उसे चाटने लगा.
शहद लगाकर अपनी नंगी चाटने में मुझे बड़ा आनंद आ रहा था.
माँ की शहद से संदी चूत चाटने के बाद मैंने उनकी चुदाई करने के लिए उन्हें कुतिया बनने के लिए बोला तो वो जल्दी से लपक कर चुदाई करवाने के लिए कुतिया बन गयी.
बदचलन विधवा माँ की गांड और चूत में शहद लगाकर चुदाई करी अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी: मेरी नंगी कामवासना से भरी बदचलन माँ के कुतिया बनते ही मैंने अपने खड़े लंड पर बहुत सारा शहद लगाया और थोड़ा से शहद मेरी कुतिया बनी हुई माँ की गांड और चूत के छेद पर भी लगा लिया.
फिर मैंने मेरी कामवासना से भरी बदचलन माँ के गांड पर लगाया हुआ सारा का सारा शहद अपनी जीभ से चाट चाट कर साफ़ कर दिया.
माँ की गांड से शहद चाटने के बाद अब बारी थी बदचलन माँ की विधवा चूत में मेरे शहद से संडे लंड को पेलने की.
फिर मैंने एक ही झटके में मेरा शहद से संदा लंड मेरी कुतिया बनी हुई बदचलन माँ की विधवा चूत में लंड डाल दिया और उनकी डॉगी स्टाइल सेक्स पॉजिशन में खतरनाक चुदाई करने लगा.
वो नंगी विधवा रांड चुदवाते चुदवाते अपने मुंह से मस्त आवाजें निकालने लगी.
मैं कभी अपनी सगी माँ की डॉगी स्टाइल सेक्स पॉजिशन में चुदाई करूँगा मैंने कभी सपनों में भी नहीं सोचा था.
उन्हें इस डॉगी स्टाइल सेक्स पॉजिशन में अपनी चुदाई करवाने में बड़ा आनंद आ रहा था ऐसा चुदवाते वक्त उन्होंने ही मुझे बताया था.
जब मैंने शहद लगाकर चुदाई करनी प्रारंभ करी तब मुझे मेरी माँ ने बताया की बेटा जब तेरे पापा जिन्दा थे तब मुझे शहद लगाकर चुदाई करवाने का बड़ा शौक था मगर तेरे पापा की मौत के बाद मेरे सभी शौक अधूरे रह गए.
करीब दस मिनट तक मैंने मेरी नंगी माँ की ऐसे ही डॉगी स्टाइल सेक्स पॉजिशन में खतरनाक चुदाई करी वो भी पूरी मस्ती में चुदवाये जा रही थी.
फिर मैं झड़ने वाला था तो उस साली रंडी को उठाया और लौड़ा चुसवाने लगा.
थोड़ी देर बाद मेरा शरीर अकड़ने लगा और मैं माँ के मुंह में ही झड़ गया.
मेरे लंड से बहुत सारा स्पर्म निकला था जिसे पूरा का पूरा पी पाना मेरी से भरी नंगी कामवासना से भरी बदचलन माँ के बस की बात नहीं थी.
जितना हो सकता था उतना स्पर्म तो मेरी नंगी कामुक माँ ने निगल लिया था मगर अभी भी बहुत सारा स्पर्म उनके मुँह से लार के रूप में टपक रहा था जिस वजह से उनका पूरा खुबसूरत चहरा मेरे वीर्य से संद गया था.
माँ की गांड और चूत की चुदाई करने के बाद अभी भी मेरे लंड पर भी बहुत सारा स्पर्म लगा हुआ था जिसे मेरी माँ ने मेरे लंड पर लगा वीर्य अपनी जीभ से चाट चाट कर साफ कर दिया.
वो बहुत खुश दिखाई दे रही थी.
मैं भी उस बदचलन विधवा की चूत चोदकर संतुष्ट हो गया था.
उसके बाद हमने देर रात में खाना खाया और फिर सो गये.
इस तरह से माँ की चुदाई की शुरूआत मैंने कर दी थी.
अब मैं उस बदचलन विधवा की चूत को जब मन चाहे बजा देता था क्योकि अब मेरी माँ मेरी रंडी जो बन चुकी थी.
वो भी चुदकर खुश हो जाती थी.
दोस्तों उम्मीद करता हूँ की आप सभी को हम माँ बेटे के अवैध सेक्स संबंध बनाने वाली यह अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी “गांड और चूत में शहद लगाकर चुदाई करी अपनी बदचलन विधवा माँ की” बहुत पसंद आई होगी और आप इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करोगे….
स्रोत:इंटरनेट