. मेरा साथी जोर से चिल्ला पड़ा- आ आ आ … पास ही में प्रकाश भाई पानी में खड़े थे.
वे उसकी चीख सुनकर जल्दी से पास आए और डांटा- क्यों बे … क्या हुआ? नसीम उंगलियां डाले ही डाले दांत निपोरे हंस रहे थे … बोले- कुछ नहीं भैया जी, थोड़ी देर में लौंडे का दर्द बंद हो जाएगा.
वो लड़के की कमर पकड़े थे.
उंगलियां उसकी गांड में आगे पीछे करने लगे.
प्रकाश भाईसाब ने जल्दी से उनका हाथ पकड़ कर बाहर खींचा और डपट कर बोले- नसीम छोड़ बे … लौंडे की गांड फट गई, तो लेने के देने पड़ जाएंगे.
वो लड़का अब शांत हो गया था.
उन्होंने उसके चूतड़ सहलाए और कहा- कोई बात नहीं … चुप हो जा.
उस लौंडे की मखमली गांड से खुद प्रकाश भाईसाब को मजा आ गया.
फिर प्रकाश भाईसाब ने उसके चूतड़ फैला दिए.
उसकी गांड पर थूका, अपनी उंगली से सहलाते रहे.
फिर साबुन लगा कर थूक के साथ अपनी एक उंगली उसकी गांड में डाल कर सहलाई और घुमाते रहे.
फिर उंगली निकाल कर बोले- बस अब तो नहीं लग रही न! लड़का मुस्करा दिया.
वे घुटनों तक पानी में खड़े थे.
उन्होंने लड़के के चूतड़ के दो तीन चुम्बन ले डाले और बोले- जाओ बाहर बैठो.
उस समय हम सबने देखा कि उनका मस्त लंड खड़ा हो गया था.
खड़ा लंड ढीले लंगोट से झांक रहा था.
हम लोगों ने पहली बार एक जवान खड़े लम्बे मोटे मस्त लंड को देखा था.
नसीम यह देख कर हंस पड़ा.
वो बोला- भाई साहब … आपका भी तो उसकी चिकनी गांड देख कर मचल गया.
प्रकाश भाई की चोरी पकड़ी गई.
वे मुस्कुरा दिए- मेरा खड़ा उसकी गांड में जाने को नहीं भोसड़ी के, तेरी गांड में जाने को मचल रहा है.
नसीम बेशर्मी से मुस्कुरा कर बोला- तो डाल दो.
बस प्रकाश भाई को जोश आ गया.
वे एकदम से नसीम पर झपट पड़े.
उन्होंने नसीम को पकड़ लिया और जोर से उसकी चड्डी नीचे खींच दी.
फिर उसे तालाब की दीवार से चिपका कर उसकी गांड में लंड टिका दिया.
वह शायद कुछ तैयार सा ही था … कुछ नखरे तो करता रहा, पर प्रकाश भाई ने जब धीरे से लंड पर थूक मला, तो नसीम लंड देखता रहा.
फिर उसने अपनी गांड में लंड पिलवा लिया.
साले ने जरा सी भी गांड नहीं हिलाई … न सिकोड़ी.
अब प्रकाश भाईसाब जोरदार धक्के दे रहे थे.
हम लौंडों से मानो उन्हें कोई शरम नहीं थी.
हम लड़कों ने पहली बार हगने के अलावा गांड का एक और इस्तेमाल देखा था.
उधर नसीम को मजा आ रहा था.
वह उचक उचक कर गांड मरवा रहा था.
वो लड़का भी इस सीन को देख रहा था, जिसकी गांड में नसीम ने अपनी दो उंगलियां डाल कर उसकी गांड फाड़ दी थी.
दो दिन बाद तालाब पर नसीम ने फिर से हमारे उस दोस्त की गांड में दो उंगलियां डाल दीं.
आज वो क्रीम लाया था.
लड़का थोड़ी देर चिल्लाया, फिर शांत हो गया.
इसके बाद नसीम ने अपना लंड निकाला और हम सबके सामने उसकी गांड पर लौड़ा टिका दिया.
हम सब कौतूहल व आश्चर्य से ये सब देख रहे थे.
नसीम ने धीरे धीरे अपना पूरा लंड उस माशूक की चिकनी गांड में उतार दिया.
लंड पलते समय उसने खूब सारी क्रीम भी लगाई, बहुत सारा थूक भी लगाया.
आज हम लोग दूसरी बार गांड मराई देख रहे थे.
वैसे गांड मराई हमारे कस्बे में आम बात थी.
बहुत सारे लोगों की गांड मारने के किस्से सुनने में आते थे.
मेरा दोस्त नसीम से गांड मरा कर थोड़ी देर गांड सहलाता रहा, फिर नॉरमल हो गया.
यह उसका गांड मराने का पहला एक्सपीरियंस था … वह शांत था.
नसीम ने भी गीले कपड़े उतारे और सूखे पहन लिए.
हम सबने भी अपने अपने कपड़े पहने और घर को चले आए.
इस घटना से सिर्फ हमारे दोस्त का ही डर कम नहीं हुआ था … उसे देख कर हम सब समझ गए थे कि गांड मराना कोई खास कष्टकारक काम नहीं है.
इन दो महीने में गर्मियों की छुट्टियों में हम सब लौंडे काम चलाऊ तैरना सीख गए थे.
मतलब हम सभी तालाब के बीच में पानी से घिरी एक पहाड़ी तक तैर कर पहुंच जाते थे.
ये उस दिन की बात है, जब हम सब दूसरी बार तैर कर उस पहाड़ी तक पहुंचे थे.
उस दिन साथ में नसीम भाई भी थे.
यह हमारी नसीम भाई के साथ पहली विजय थी, विजयोत्सव के रूप में भी गुरू दक्षिणा देनी पड़ी.
नसीम भाई का लंड एक दूसरे माशूक लौंडे को, जो उन्हें पंसद था … उसे अपनी गांड में डलवाना पड़ा.
उस लौंडे ने लंड लेने में बहुत नखरे किए, पर इस बार सब उसे मना रहे थे.
आखिर वह तैयार हो गया.
इस बार भी नसीम भाई ने हम सबके सामने ही उसकी गांड मारी.
पर इस बार नसीम ने लंड पर केवल थूक लगा कर गांड मारी थी … क्योंकि बीच पहाड़ी पर क्रीम लाने का कोई साधन नहीं था.
वह लड़का कुनमुनाते हुए कह भी रहा था कि मेरी गांड केवल थूक लगा कर … उसकी क्रीम लगा कर मारी थी.
नसीम बार बार उसे मनाते हुए पूछ रहा था कि यार मजा आया कि नहीं … अगली बार और बढ़िया क्रीम लाउंगा.
तीसरी बार हमारे साथ प्रकाश भाईसाब भी थे.
नसीम कह रहा था कि इस बार तीसरे लौंडे का नम्बर है.
उसकी निगाह मेरे पर थी.
पर प्रकाश भाईसाब ने कहा- नहीं … मेरा लंड लौंडे नहीं झेल पाएंगे … ये अभी छोटे हैं.
वे नसीम से जोर से बोले- भोसड़ी के तू अपनी खोल.
नसीम नखरे करने लगा- वाह भाईसाहब … बार बार मेरी ही लोगे? प्रकाश भाईसाब बोले- साले नखरे नहीं … जल्दी से खोल … वरना समझ ले.
नसीम ने घबरा कर जल्दी पैंट उतार दी.
प्रकाश भाईसाब बोले- अबे यार खड़े खड़े नहीं; तू औंधा लेट जा.
फिर इस बार प्रकाश भाईसाब ने नसीम की जम कर उचक उचक कर गांड मारी.
उसकी बुरी तरह से रगड़ दी.
मेरी ये गांड मराने वाली सेक्स कहानी अभी बाकी है.
कल फिर मिलता हूँ, मेरे गांडू भाइयों आपकी गांड में चुनचुनी हो रही होगी.
मगर गांड में कोई चीज या लंड डलवाने से पहले मेल करके जरूर बताएं कि सेक्स कहानी कैसी लग रही है.
आपका आजाद गांडू कहानी जारी है.
लेखक की पिछली गे कहानी: मेरी गांड की प्यास कहानी का अगला भाग: गांड मराने का पहला अनुभव-2
स्रोत:इंटरनेट