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गांड मराने का पहला अनुभव 3

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गांड मराने का पहला अनुभव 3 1

. उधर वे भी इसी बात से बड़े उत्साहित थे कि उनको कुंवारी गांड ओपनिंग का मौका मिल गया है.
पूरी इन्क्वारी के बाद उनको अपनी बात सही लगी, तो उनका जोश और भी बढ़ गया.
इससे मुझे ये फायदा हुआ कि अब वे मेरी गांड को कोरी समझ कर लंड से धीरे धीरे धक्के देने लगे.
वे बड़ी नजाकत से मेरी गांड में लंड अन्दर बाहर करने लगे.
मुझे भी सही लगने लगा.
धीरे धीरे उनके झटकों की रफ्तार बढ़ गई.
उनके झटके अब मेरे लिए गांड फाड़ू हो गए थे.
मैं सोच रहा था कि कहां फंस गया, पर अब क्या हो सकता था.
अब तो जब तक प्रकाश भाईसाब का लंड पानी नहीं छोड़ेगा, लंड गांड में झेलना ही पड़ेगा.
उनके ताबड़तोड़ झटकों से मेरी गांड थोड़ी देर में ढीली पड़ गई, दर्द भी कम हो गया.
वे समझ गए कि मुझे मजा आने लगा है.
तो बोले- हम्म … मजा आ रहा है न! मैं मुस्करा दिया तो वे और जोरदारी से गांड पर पिल पड़े.
कोई दस मिनट बाद उनके धक्के थोड़े कम पॉवर के हो गए थे.
अंत में वे मेरी गांड से चिपक कर रह गए.
वे तेज फुहारा मारते हुए मेरी गनद में झड़ने लगे थे.
लंड खाली करके उन्होंने लंड निकाल लिया और हांफते हुए स्टूल पर बैठ गए.
मैं उनके सामने नंगा खड़ा था.
तभी एक चमत्कार हुआ.
उस कमरे में पीछे की तरफ दो दरवाजे थे, एक कोने वाले दरवाजे का दरवाजा खुला, उसमें से सलीम निकल आया.
मैं नंगा खड़ा था, प्रकाश भाई साहब ने भी कपड़े नहीं पहने थे.
वो एक साफी से अपना हथियार पौंछ रहे थे.
सलीम सो कर उठा था इसलिए ऊंघ सा रहा था.
वो हम दोनों को देखता रहा.
तब तक बाहर बरसात थम गई थी.
प्रकाश भाईसाब को भी कोई काम याद आ गया था.
उन्होंने कपड़े पहन कर सलीम से कहा- आज मौसम ठीक नहीं है … अब शायद कोई ग्राहक नहीं आएगा.
तुम दुकान बंद करके चाबी मेरे घर पर देते हुए चले जाना.
इतना कह कर वे साईकिल उठा कर चले गए.
सलीम ने दूसरा दरवाजा खोला, तो वो एक आंगन की ओर खुलता था.
उसमें भी एक टीन शेड था.
आंगन कच्चे फर्श का था … बीच में एक बड़ा नीम का पेड़ था.
सामने लेट्रिन बाथरूम बने थे और पानी का एक मटका व कुछ बाल्टियां रखी थीं.
सलीम ने वहां जाकर मुँह धोया, आंखों पर छींटे मारे … थोड़ा जग से पानी पिया.
फिर वो अन्दर आ गया.
उसने उस दरवाजे को बंद किया और वही साफी उठा कर, जिससे भाई साहब अपना लंड पौंछ रहे थे, उसी से अपना मुँह पौंछने लगा.
मैं अपना झोला उठा कर चलने को हुआ, तो उसने मेरा हाथ पकड़कर रोक दिया.
थैला मुझसे लेकर दीवार में बने एक आले में रख दिया.
अब वह हाथ पकड़ कर मुझे उसी कमरे में ले गया, जिसमें से वह आया था.
वहां एक दस फीट लम्बा दस फीट चौड़ा एक छोटा सा कमरा था, जिसमें सामान के कार्टून छत तक भरे थे.
केवल थोड़ी सी जगह खाली थी.
उसमें एक सूती मोटी देशी करघे के द्वारा बुनी दरी बिछी थी.
मैली सी, काली चीकट … जगह जगह मोबिल ऑयल के धब्बे थे.
उसी पर ऐसा ही मैल से चीकट तकिया पड़ा था.
सलीम मुझे उस कमरे में खड़ा कर गया और कुछ ही में लौट आया.
वो उसी ताक से तेल की शीशी लेने गया था.
मुझे देख कर सलीम मुस्कुरा रहा था.
उसकी आंखें चमक रही थीं.
उसने कमरे में आकर अपना पैंट उतार दिया, साथ में गन्दी बदबू देती बनियान भी उतार दी.
वह उसके नीचे कुछ नहीं पहने था.
इस समय वो पूरा नंगा खड़ा था.
उसका लंड भी पूरा तना था.
उसने मेरा हाफ पैंट भी उतार दिया और शर्ट भी.
फिर मुझसे लेटने को बोला, तो मैं उसी दरी पर सीधा लेट गया.
वो नाराज होकर बोला- यार नखरे नहीं कर … पोजीशन में आ जा.
उसने मुझे जोर लगा कर औंधा कर दिया.
वो दरी बड़ी बदबू मार रही थी … मुझे मतली सी आने लगी थी.
मैं चूतड़ ऊपर किए लेटा था, वह मेरे ऊपर चढ़ बैठा.
उसने अपने लंड पर तेल चुपड़ा, मेरी गांड पर भी लगाया और लंड टिका कर धक्का देने लगा.
उसे हड़बड़ी थी, पर इस बार भी उसका लंड खिसक कर मेरे नीचे दोनों जांघों के बीच घिस रहा था.
मुझे हंसी आ गई.
वह बोला- क्या हुआ? मैं बोला- लंड बाहर है.
वह अचकचा गया और बोला- नहीं यार! फिर वो मेरे ऊपर लेटे हुए ही बैठ सा गया और उसने देखा- हां यार तुम सही कह रहे हो … मुझसे कई बार ऐसा हो जाता है.
साला कोई बताता ही नहीं है, मगर तुमने बता दिया.
उसने फिर से लंड गांड पर रख पर उसे ठीक से घुसाया.
मगर इस बार फिर ध्यान नहीं दिया, सो लंड फिर नीचे खिसक गया.
वह मस्ती से धक्के देने लगा.
मैंने कहा- यार … देख तो ले किधर पेल रहा है.
उसने लंड देखा तो शर्मिंदा हो गया.
साथ ही उसे समझ नहीं आया कि क्या करे.
फिर मैंने ही उसका लंड पकड़ कर अपनी गांड पर टिकाया और कहा- अब धक्का दे.
उसने लंड पेला, तो अब लंड गांड के अन्दर घुस गया था.
मेरी गांड इस वक्त प्रकाश भाईसाब के लंड के कारण खुली हुई थी, सो मुझे कुछ दर्द-वर्द नहीं हुआ.
मैंने कहा- जल्दी नहीं मचा … धीरे धीरे डाल.
उसने स्लो मोशन में लंड अन्दर बाहर करना शुरू किया.
अब उसका लंड मस्ती से गांड में अन्दर तक जाने लगा था.
जब पूरा लंड घुस गया तो मैंने कहा- डाले रखो … और चुपचाप मेरे ऊपर लेटे रहो … जब मैं कहूं, तब आगे पीछे करना.
वह बोला- अच्छा.
वो लंड पेले मेरे ऊपर चुपचाप लेट गया.
उसने मेरे गाल पर गाल रख कर मेरे चूतड़ के दोनों तरफ अपनी टांगें फैलाए हुए उसने हरकत की, तो मैंने डांट दिया.
मैं- ड्रामा नहीं … मैं उतार दूंगा.
वह बोला- अच्छा ठीक है.
असल में वो अपने लंड में उठी सुरसुरी को कन्ट्रोल नहीं कर पाता था … शुरू होते ही झड़ जाता.
मैंने कहा- अब धीरे धीरे कर.
वो मान गया.
थोड़ी देर बाद मैं फिर से उसे रोक दिया.
वह हाथ पैर हिला रहा था, पर मान गया.
कुछ देर बाद मैंने फिर कहा- हां.
वो फिर से धीरे धीरे करने लगा.
फिर वो बोला- अब रुक नहीं पा रहा हूँ यार माफ करना.
उसने दो तीन ही जोरदार झटके दिए और झड़ गया.
उसकी पिचकारी निकलते ही वो मेरे ऊपर से उठ गया.
हालांकि अब भी उसका पानी निकल रहा था, जिस वजह से दरी गीली हो गई थी.
मेरी गांड मराने की सेक्स कहानी अभी बाकी है.
फिर मिलता हूँ.
मुझे मेल करके जरूर बताएं कि मेरी गे सेक्स कहानी कैसी लग रही है? आपका आजाद गांडू कहानी जारी है.

स्रोत:इंटरनेट