. मैंने भी हाँ कहा और ये मीठा सा चैलेंज ले लिया और उसके बाद मैंने फिर एक कविता लिख कर भेजी.
वो लगभग ऐसी थी: तू बड़ी मासूम है, तू दूध सी गोरी है, तू हसीना है, चोदने लायक छोरी है। गर मिलो तो हर अंग मैं सहलाऊंगा, माशूका मैं आशिक तेरा कहलाऊंगा। तेरे उरोज मेरे हाथों से मसले जायेंगे, तेरे निप्पल मेरे मुंह से सुकून पायेंगे। जब चाटूंगा चूत रूह भी मचल जायेंगे, लंड संग गोलियां, तेरे मुंह में समायेंगे। गोद में उठा कर बिस्तर में ले जाऊँगा, तेरा हर अंग अपने लंड से सहलाऊंगा। तुझे नंगी करके अपने आगे झुकाऊंगा, कुतिया बना के पीछे से लंड घुसाऊंगा। तू चीखती रहना चिल्लाती रहना, मैं धक्के तेज ही तेज लगाऊंगा। जब आयेगी झड़ने की मेरी बारी, तब तेरे मुंह में पानी गिराऊंगा। इस बार अंजू जी मेरी इस कविता से बहुत खुश हुई.
उसे मैंने इससे भी बहुत ज्यादा लंबी कविता भेजी थी इसलिए उस कविता को पढ़कर उसकी चूत से पानी जरूर आया होगा। उसके बाद तो बातचीत और कविताओं का ये सिलसिला ही चल पड़ा, और फिर धीरे-धीरे मुझे भी समझ आने लगा कि उसे मेरी कैसी कविता पसंद है, और कितनी पसंद है, तो अब मैं उसे खुश करने के लिए कविता लिखता और बदले में वो मुझसे थोड़ा सा सेक्स चैट कर लेती थी, पर वो कहती थी कि लंड चूसना मुझे कम पसंद है, सामने वाले की खुशी के लिए कभी-कभी चूस देती हूँ। अब उसके मन में चाहे जो भी हो पर मैं उसका दीवाना होता ही चला गया.
फिर एक दिन उसने कहा- तुम सिर्फ मेरे लिए कविता लिखो, मेरे एक-एक अंग के लिए अलग-अलग कविता लिखो। मैंने कहा- मैं लिख तो दूंगा पर उसके लिए मुझे तुम्हें देखना भी तो पड़ेगा, तभी तो मैं तुम्हें महसूस कर सकूंगा और हर अंग की तारीफ मेरे मुंह से मेरे मन से स्वयं निकल पड़ेगी.
तब देखना कविता कैसे बनती है। मेरी बात समझ कर उसने एक पिक भेजी, जो पहले वाली पिक से अलग थी, ये भी बिना चेहरे की ही थी, और इस पिक में लड़की के साथ एक तीन चार साल की बच्ची भी थी। मैंने कहा- इस बार की पिक अलग लग रही है। तो उसने कहा- ये मेरी पड़ोस वाली भाभी की है.
और तुम अपनी कविता मेरी तारीफ में ही लिखो! अब मेरे मन में शंका ने जन्म ले लिया था कि बात कुछ तो अलग है। फिर भी मैंने कुछ नहीं कहा बस उस भाभी के बारे में थोड़ी जानकारी मांगी और कविता लिखने लगा। जो कविता मैं उसे भेजता था वो उसे बहुत पसंद आती थी, मैं जानबूझकर कर भाभी के शरीर की कुछ ज्यादा ही तारीफ किया करता था, इससे कई बार अंजू जी चिढ़ जाती थी, और मेरा शक सही हो जाता था कि वो पिक अंजू की ही है। अंजू भाभी के बहाने अपने शरीर की खुद तारीफ करती थी और कहती थी कि उसे अपने सुडौल स्तनों पर नाज है। जी हाँ, वो बिल्कुल सही कहती थी, उसके स्तन और उसका पूरा शरीर ही नाज करने लायक था.
उसने ने जो पिक मुझे दिखाई थी, उसके हिसाब से मैं ये कह सकता हूँ कि अगर कोई उसके हाथों की उंगलियां ही देख ले तो भी उसके लंड से पानी छूट जायेगा, अब सोचिए मेरे लंड ने अंजू के नाम पर कितना पानी बहाया होगा। लेकिन अब मुझे और ज्यादा पिक देखने का, अंजू को महसूस करने का लालच होने लगा। अब मैंने कविता लिखने के लिए, अपना मूड बनाने का बहाना करके और पिक मांगने शुरू कर दिये। अब वो भी अच्छी कविता के लालच में बिना चेहरे वाली पिक मेरे पास कभी-कभी भेजने लगी। सारे फोटोशूट काफी अच्छे कैमरे से हुए होते थे और फोटो वाली वो. लड़की या भाभी किसी फिल्मी नायिका माडल या अप्सरा से कम नजर नहीं आती थी। 32-28-32 के लगभग उसका फिगर नजर आता था, ऐसे फिगर का माप सुनकर ही एक सेक्सी कामुक लड़की की छवि स्वतः ही मानसपटल पर बन जाती है। उसकी हाईट पांच फीट पांच या चार इंच के लगभग रही होगी। जो उसके शरीर के बनावट के लिहाज से बिल्कुल परफेक्ट थी। उसके हर अंग में कटाव और त्वचा तो जैसे दूध मक्खन या रेशमी मखमल हो। पिक के बैकग्राउंड और लड़की की. अदाओं बैग सैंडल पर्स घड़ी और कपड़ों से लगता था कि वो काफी अच्छे घराने की और बहुत पढ़ी लिखी महिला है। अब आप ही बताइये जो पहले ही इतनी सुंदर और दीवाना कर देने वाली लड़की हो तो उसके लिए कविता लिखना कोई बड़ी. बात है क्या? मेरे मुंह से तो उसे देख कर ही कविता निकल जाती है.
और उसे चोदने का सोचते ही लंड से पानी निकल आता है। और अब तो काफी समय से बात होने की वजह से हम धीरे-धीरे पास भी आने लगे थे.
अब वो भाभी का बहाना करके अपनी जिंदगी के राज और मन में छुपे अरमानों के बारे में मुझे बताने लगी, फिर कुछ दिनों बाद कहने लगी- भाभी के साथ वो लैसबियन भी करती है.
दरअसल ऐसा सच में नहीं था, वो तो बस मुझसे मजाक कर रही थी, अगर सच होगा भी तो मुझे इस बात से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता था। मुझे शक था कि वो भाभी ही अंजू है, मतलब कि अंजू अपनी ही पिक किसी और के नाम से मुझे दिखा रही है। फिर मेरे बहुत जोर देने पर उसने कबूल किया कि भाभी कोई और नहीं है, वो खुद के बारे में ही भाभी बोलकर सब बता रही थी। फिर मैंने उसके साथ उसे भाभी बनाकर और मैं उसका देवर बनकर सेक्स चैट किया। एक दूसरे पर हमारा भरोसा बढ़ने लगा था। वो मुझ पर भरोसा करती थी या नहीं, ये तो मुझे नहीं पता, पर मैं उस पर बहुत ज्यादा भरोसा करने लगा, उससे किसी भी बात को अपना समझकर ही बताने लगा, अब मैं उससे कोई भी बात नहीं छुपाता था। लेकिन वो मुझसे रोज बात नहीं करती थी तब मैं उसके अलावा भी और लोगों से चैट करता था जिससे उसे भी कोई परेशानी नहीं थी। और चैट के दौरान बहुत सी भाभियों ने मुझे अपनी सेक्स स्टोरी लिखने को कहा था, तो मैंने अंजू से भी पूछ लिया कि क्या आप भी अपनी कहानी लिखवाना चाहती हैं? साथ ही उसे मैंने कहानी लिखवाने की शर्त भी बताई कि उसके लिए मैं पहले आपसे मिलूँगा आपको चोदूंगा और तब मैं उस समय की फिलिंग्स कहानी में लिख पाऊंगा। तो उसने कहा कि पहले आप कहानी लिखो. अगर कहानी पसंद आई तो मिलने का मौका भी मिलेगा। फिर मैंने मिलने की एक उम्मीद देखते हुए खुशी से ‘हाँ ठीक है’ कहा और कहानी लिखने के लिए कुछ जरूरी बातें पूछी। मैंने अंजू को कह दिया कि जब मेरी कहानी गलतफहमी. और उसका ही आगे का भाग सम्भोग से आत्मदर्शन पूरी प्रकाशित हो जायेगी तब मैं आपकी कहानी को लिखना शुरू करुंगा। तो उसने भी थोड़ा जल्दी लिखने को कहते हुए खुशी जाहिर की। जब कहानी लिखने का समय आया तो कुछ दिन. पहले मैंने उससे कहानी में उसका नाम क्या होगा पूछने के साथ ही कुछ जरूरी बातों को और कंफर्म किया, क्योंकि सच्ची कहानी में सब सही हो तो ही रंग आता है। साथ ही उससे यह भी पूछा कि कहानी में आप थ्रीसम करोगी या अकेले से ही चुदना है और कैसा सेक्स चाहती हो, वाईल्ड या आराम से। तो उसने भी बिंदास जवाब दिया- यार, आराम से तो पति भी चोदता है, थोड़ा रगड़ के अंदर तक चुदाई हो, और थ्री सम या ग्रुप भी हो जाये तो मजा आ जायेगा। मैं चाहती हूँ कि मर्द मुझे बड़े-बड़े लंडो से घंटों तक चोदते रहें, जब तक मैं थक कर गिर ना जाऊं। मैंने कहा- ठीक है रानी, तुझे तो अब ऐसे ही चोदूंगा.
और मैंने साथ ही उसकी चूत और बोबे की पिक मांगी। दोस्तो, चूत को जितना ज्यादा समय तक चोदोगे, चुदाई जितनी लंबी होगी उतना ही मजा बढ़ जाता है, ठीक वैसे ही जैसे च्विंगम को जितना ज्यादा चबाओगे मजा बढ़ते ही जाता है, तो आप सब समझदार ही हैं.
कहानी के साथ बने रहिए … आगे बहुत मजा आने वाला है। कहानी जारी रहेगी.
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स्रोत:इंटरनेट