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गेलचोदी बन भाई के लंड से फुद्दी चुदवाई हिन्दी सेक्स कहानी

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गेलचोदी बन भाई के लंड से फुद्दी चुदवाई हिन्दी सेक्स कहानी 1

. गेलचोदी बन भाई के लंड से फुद्दी चुदवाई हिन्दी सेक्स कहानी भाई का खड़ा लंड बार बार मेरी फुद्दी पर लग रहा था, मुझे यह सब बहुत ज्यादा मस्त कर रहा था.
मेरा दिल कर रहा था कि अभी के अभी भाई मुझे चोद दे बस.
पर मैंने सोचा पहले इसे और गरम कर दूं ताकि यह जल्दी से तैयार हो जाए और मेरे दीवाना बन जाए.. भाई ये तुम्हारे निचे क्या लटक रहा है? मैंने गेलचोदी बन भोलेपन से पूछा.. दीदी मुझे नहीं पता? भाई ने शरमाते हुए जवाब दिया.
भाई पर तुझे मजा तो आता है ना जब यह खड़ा हो जाता है? मुझे लगा कि वो मना कर देगा इसलिए मैंने उसके जवाब देने से पहले ही उसका काला मोटा लौड़ा अपने हाथों में ले लिया था.
मेरे लंड हाथ में लेने से वो एक दम कांप उठा और बोला दीदी यह क्या कर रही हो आप? ओह्ह सोरी लग गई क्या तुझे भाई? मैंने भाई का लंड छोड़ते हुए कहा.
नहीं नहीं दीदी मुझे तो बहुत मजा आया, भाई बोला.
ओह्ह भाई मैं तो डर गई थी, यह कहते ही मैंने उसका काला मोटा लौड़ा फिर से पकड़ लिया और दबाने लगी.
भाई मुझसे लिपट गया और मुझे हर जगह किस करने लगा.
वैसे तो हमारा खेल शुरु हो गया था जैसा मैं चाहती थी, पर यहां थोड़ा रिस्की था.
वैसे तो अंधेरा था पर मैं भाई पर लंड जोर जोर से मसल ने लगी, जिससे वह और बेचैन हो गया मुझे पता चल रहा था.
अब यह मुझे बिना चोदे नहीं छोड़ेगा.
इसलिए मैं बोली चल भाई अब घर चलते हैं, .
यहां हमें कोई देख सकता है.
बाकी काम घर जाकर करते हैं.
बस दीदी थोड़ी देर रुक जाओ मुझे बहुत मजा आ रहा है, भाई ने मुझे रोकते हुए कहा.
पर मैं घर की तरफ चल पड़ी, भाई भी मन मारकर मेरे पीछे पीछे घर की और चल पड़ा.
भाई सारे रास्ते मुझे सेक्स के बारे में बातें करता रहा, शायद वह बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो चुका था.
कुछ ही देर में हम घर आ गए और हम अपने रुम में चले गए और अपनी बुक खोलकर स्टडी करने लगे.. पर मेरे दिमाग में तो भाई का लंड घूम रहा था और उधर भाई भी मुझे बार बार मुस्कुरा कर देख रहा था, रात हो चुकी थी मम्मी डैडी भी सो गए थे.
वह उठा और अपने रूम की कुंडी लगा दी, मेरी तरफ मुड़कर मुस्कुराने लग गया और बोला चलो दीदी वही करते हैं अब.
आपकी बात सुनकर मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई है, पर अब हमें कोई टेंशन नहीं थी, क्योंकि मॉर्निंग तक हमें कोई तंग नहीं कर सकता था.
मैंने कहा भाई कपड़े तो चेंज कर लें और सिर्फ पजामा ही डालना उपर.
भाई ने कहा हां दीदी आप भी बदल लो.
मैं एक काफी छोटा सा शोर्ट डाल दिया था कि वह जल्दी से ऊपर हो जाए और मेरी फुद्दी एकदम सामने आ जाए.
और भाई ने भी अपना पजामा डाल दिया था, उसने मेरी तरफ देखते हुए अपनी दोनों बाहें फैला दी और मुझे मुस्कुराते हुए बुलाने लगा, मैं भी जाकर उसकी बाहों में समा गई और वह मुझे चूमने लगा.
उसका काला मोटा लौड़ा मेरी फुद्दी पर लग रहा था, जो मुझे साफ साफ महसूस हो रहा था.
मेने भाई का पजामा नीचे खिसका दिया और उसका मस्त झूमता हुआ बाहर निकाल लिया, मेरे लिए अब लंड पकड़ना बहुत आसान हो गया, भाई अपने हाथों से मेरे दोनों चूतड़ दबा रहा था.
और मैं उसके उसका काला मोटा लौड़ा पकड़ कर ऊपर नीचे करने लगी.
मुझे अब समझ आ गया था कि भाई मेरी तरह भोला बनने की एक्टिंग कर रहा था.
उसने कहा दीदी इसमें तो बहुत मजा आ रहा है यार.. मैंने कहा हां वह तो है तू भी और जोर से दबा पीछे से, अब मैं भी उससे खुलने लग गई, और उसका पूरा साथ देने लगी.
भाई बोला दीदी आपका सुसु कहां है वह खड़ा नहीं हुआ? मैं हंसने लगी और बोली भाई हमारा यह डंडा नहीं होता जैसे तुम्हारे यह बूब्स नहीं होते, समझा.
तभी वह बोला अरे हां दीदी आपके मस्त बूब्स भी तो है.. कहते ही उसने अपने हाथ मेरे कुर्ती में डाल दिए और मेरे बूब्स को ढूंढने लग गया.
मुझे इस में बहुत मजा आ रहा था.
मैंने भी बड़े आराम से अपने दोनों स्तन उसके हवाले कर दिए और उससे अपने मोटे मोटे स्तन दबवाने लगी.
जोर से दबाओ ना, मैंने मस्त हो कर कहा.
क्यों दीदी उसे क्या होगा? और मेरे स्तन के निप्पल पकड़ कर घुमा लिए मैं मस्ती में झूम पड़ी.. भाई जैसे तुम्हें अपने डंडे में मजा आता है ना बस वैसे ही मुझे अपने मोटे मोटे स्तन में मजा आता है, मैंने थोड़ा शांत होकर उसका जवाब दिया.
अच्छा इतना मजा आता है, चलो दिखाओ अपना डंडा फिर.
यह कहते ही उसने मेरी फुद्दी पर अपने हाथ रख दिए और अपनी एक्टिंग चालू रखी, उसे अच्छे से पता था कि ऐसा कुछ नहीं होता, पर फिर भी वह लगा हुआ था.
आराम से मेरी जगह बहुत नाजुक है, उसके हाथ मेरी फुद्दी पर घूम रहे थे.
वह मेरा डंडा ढूंढ रहा था.
और उसे वह कभी नहीं मिलने वाला था.
तभी उसने अपनी उंगलियां मेरी फुद्दी में घुसा दी और मेरे मुंह से आह्ह्ह औऊ अह्ह्ह निकल गई मैं, पूरी मस्त हो चुकी थी.
भाई मैं खड़े खड़े थक चुकी हूं चल बेड पर चलते हैं, वहां आराम से करेंगे मैंने कहा.
उसने कहा ठीक है दीदी.
दीदी कपड़े उतार कर पूरी नंगी धडंगी हो जाओ बहुत मजा आने वाला है, मैंने भी उसकी बात मान ली और सारे कपड़े उतार दिए और मन ही मन सोचने लगी कि अब नाटक करने का कोई फायदा नहीं है वरना चुदाई में कोई मजा नहीं आएगा.
भाई एक बात सच सच बताओ.
उसने कहा हां ही बोलो दीदी.
मैने कहा – क्या तुमने किसी लड़की को चोदा है? भाई डरते हुए बोला नहीं दीदी.
यह कैसे होता है कैसे करते हैं? मैंने कहा अरे मेरे प्यारे भाई मैं किसी को कुछ बताऊंगी थोड़ी ना, बताना सच.
भाई कुछ सोचने लग गया और थोड़ी देर बाद बोला नहीं दीदी चलो अपनी मस्ती करते हैं.
अरे तेरा लंड तो साफ साफ बता रहा है कि उसने किसी फुद्दी का पानी पिया हुआ है, बोलना.
मैंने उस पर जोर देते हुए पूछा.
वो शरमाते हुए बोला, हां दीदी आपकी ही फ्रेंड है वह मुझसे प्यार नहीं करती बस चुद्वाती है.
मैंने कहा चल आ जा यह देख मेरी फुद्दी भी चुद सकती है.
भाई ने कहा अरे दीदी फिर इतना पहले नाटक को क्यों किया? यह तो मैंने बस तुझे खोलने के लिए किया, चल मुझे छोड़ दे अब, मैंने मीठे लफ्जों में कहा.
भाई भी शर्म छोड़ कर मुझे लिपट गया और किस करने लगा.
मैंने भी उसके होंठों में होंठ में डाल कर किस किया और उसकी जीभ मुंह में लेकर चूसने लगी.
अब उसने मुझे गोदी में उठाया और बिस्तर पर लेटा दिया.
मैं उस को नीचे कर दिया और खुद उसके पास बैठकर लंड को हाथ में लेकर मसलने लगी.
उसको बहुत मजा आने लग गया और वह मुह से सिसकियां भरने लगा, मैंने मुस्कुराकर फुद्दी को लंड पर रखा और धीरे से उसके लंड पर फुद्दी रखकर घुसा दीया.
मेरी फुद्दी में से पानी निकल रहा था, जिसकी वजह से लंड आसानी से अब मेरी चूत में अंदर बाहर हो रहा था.
और मेरी फुद्दी को आराम मिल रहा था, मैं उठा उठा कर लंड को अपनी बच्चेदानी तक उतार रही थी.
और अब भाई भी अपनी गांड नीचे से हीला कर मुझे चोद रहा था.
मैंने अपनी फुद्दी को हीलाने से रोक दिया और भाई से पूछा लंड गांड में भी चला जाता है? भाई ने कहा पता नहीं दीदी, मैंने आज तक ऐसा कुछ नहीं किया.. चल करते हैं मैंने उसे जवाब दिया.
भाई के सामने मै घोड़ी बनकर झुक गई और उसे अपनी गांड के प्रथम दर्शन कराएं वह भी मेरी गोल मटोल मोटी गांड को देखकर पागल हो गया और मेरी गांड पर रख लिया पर गांड टाइट होने की वजह से लंड गांड में जाने को तैयार ही नहीं हो. रहा था.
मैंने कहा मेरी गांड पर तेल लगा और फिर चोद भाई.
उसने ऐसे ही किया और मेरी गांड पर उंगली से तेल लगाकर गांड में घुसा दी, जिससे मुझे बहुत तेज का दर्द हुआ पर मैंने अपने भाई के लंड से अपनी गांड को चुदाने की प्यास में दर्द भी अनदेखा कर दिया.
फिर अचानक ही मेरी गांड में लंड चलता हुआ महसूस हुआ और मुझे लंड के घुसने का दर्द महसूस होने लगा.
और उसके लंड को भी अंदर आने में जरा सी तकलीफ हो रही थी.
मैंने भाई से कहां भाई बस कर मेरी गांड फट जाएगी आगे की कोशिश हम कल करेंगे.
उसने मेरी बात मानते हुए अपना सुपाड़ा गांड में से निकाल दिया और निकलते ही मेरी फुद्दी में घुसा दिया और जोर जोर से फ्री स्टाइल में चोदने लगा.
मैं घोड़ी बनी हुई अपनी फुद्दी चुदवा रही और उधर मेरे भाई मेरी फुद्दी मारता रहा, और मेरे स्तन को पकड़कर मसलता रहा.
उसकी ऐसी चुदाई से अब मेरा निकलने वाला था इसलिए मैं भी अपनी गांड हिलाकर मेरे प्यारे भाई के तगड़े लंड को मेरी बच्चेदानी तक लेने लगी और अगले ही पल जड़ गई.
मेरे मुंह से आहाह औऊ हहह ई औऊ ओह्ह उऔउ ऐईउ उईइ जैसी कामुक सिसकियां निकली और मैंने उसे पीछे कर दिया.
भाई ने कहा दीदी मेरा तो अभी हुआ नहीं.. मैंने उसको खड़ा किया और उसके लंड को मुंह में ले कर चूसने लगी.
उसका अगले ही पल मेरे मुंह में निकल गया और फिर भी मैं उसके सुपारी को चुस्ती रही.
जब तक उसके पानी की एक एक बूंद तक खत्म नहीं हुई.
अब भाई मुझसे लिपट कर सो गया खराटे लेने लग गया.
मैं मुस्कुराई और अपने राजदुलारे भाई को किस कर के भाई के बिस्तर पर आकर सो गई और भाई और उसके दोस्तों के साथ गैंग बैंग चुदाई के सपनों में खो गई.
तो दोस्तों उम्मीद करती हूँ की आप सभी को मेरी हिंदी सेक्स कहानी “गेलचोदी बन भाई के लंड से फुद्दी चुदवाई हिन्दी सेक्स कहानी” बहुत पसंद आई होगी.

स्रोत:इंटरनेट