. अम्मी ने कहा- मुन्ना, तेरी जितनी भी मामियां, मौसियां या फूफी हैं, सब अपने शौहर से गांड मराती रही हैं.
मेरे कहने पर तेरे अब्बू ने कोशिश तो कई बार की लेकिन उनके लण्ड में शायद वो ताब नहीं थी कि मेरी गांड का किला फतेह कर सकें.
तेरे लण्ड की ताकत देख कर मुझे अन्दाज है कि मेरी अधूरी ख्वाहिश तू पूरी कर सकता है.
उठ मेरे लाल, तेल की शीशी उठा ला और मेरी गांड मार दे.
अम्मी की ढीली ढाली चूत में मुझे मजा भी नहीं आ रहा था और गांड मारने का अनुभव भी होने जा रहा था इसलिए मैंने अपना लण्ड अम्मी की चूत से निकाला और अम्मी की अल्मारी से तेल की शीशी निकलने लाया.
हथेली पर तेल लेकर मैंने अपने लण्ड की मसाज की और थोड़ा सा तेल अपनी बाईं हथेली पर डालकर मैं बिस्तर पर आ गया.
अम्मी ने अपना लहंगा उठाया और घोड़ी बन गईं.
अम्मी के हृष्ट पुष्ट गोरे गोरे चूतड़ देखकर मेरा लण्ड जोश में आ गया.
अपने दाहिने हाथ के अंगूठे को तेल में भिगोकर मैंने अम्मी की गांड के छेद पर रखा.
अम्मी के चूतड़ों को फैला कर उनकी गांड के गुलाबी रंग के चुन्नटों पर तेल भरा अंगूठा रगड़ते रगड़ते मैंने अपना अंगूठा अम्मी की गांड में डाल दिया और धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा.
अपनी बायीं हथेली में बचा हुआ तेल अपनी दोनों हथेलियों पर मल कर मैंने अम्मी के चूतड़ों की मालिश कर दी.
गोरे गोरे चूतड़ों पर तेल लगाने से अम्मी के चूतड़ चमकने लगे थे.
चमेली के तेल की खुशबू से कमरे का वातावरण मादक हो रहा था.
अपने लण्ड की खाल चार बार आगे पीछे करके मैंने अपने लण्ड का सुपारा अम्मी की गांड के छेद पर रखा.
लाल मैरून रंग का सुपारा अम्मी की गुलाबी गांड में जाने के लिए बेकरार हो रहा था.
अम्मी की कमर पकड़कर अपने लण्ड को अम्मी की गांड पर दबाते हुए मैंने अम्मी से पूछा- अम्मी डाल दूं? गांड मराने के लिए बरसों से तरस रही अम्मी ने मादक आवाज में कहा- डाल दे मुन्ना, अब और न तड़पा.
अम्मी को मजबूती से पकड़कर मैंने धक्का मारा तो टप्प की आवाज के साथ मेरे लण्ड का सुपारा अम्मी की गांड के अन्दर हो गया.
अम्मी जोर से चिल्ला पड़ीं.
अम्मी की चिल्लाहट पर तव्वजो न देते हुए मैंने दो धक्के और मारे और पूरा लण्ड अम्मी की गुफा में उतार दिया और अम्मी आगे की ओर खिसक न जायें इसलिये अम्मी की कमर को मैंने जकड़ लिया.
गांड के चुन्नट फटने की वजह से चिल्लाई अम्मी पूरा लण्ड झेल गई थीं.
लेकिन अम्मी की चिल्लाहट नीचे अब्बू के कमरे में पहुंच गई थी.
किसी अनहोनी की आशंका के चलते अब्बू दौड़ते हुए ऊपर आये और अपना तहमद बांधते हुए पूछा- क्या हो गया, चिल्लाई क्यों थी? तभी रुकैय्या कमरे में पहुंची और अपने लहंगे का नाड़ा बांधकर अपनी चोली के हुक बंद करते हुए बोली- अब्बू, आप भी अजीब सवाल करते हैं.
मुन्ना अम्मी की गांड मार रहा है.
हो सकता है कि गांड मराने की वजह से दर्द हुआ हो.
अब बोलने की बारी अम्मी की थी- रुकैय्या बेटी, पिछले पच्चीस साल में मैंने तेरे अब्बू से तमाम बार गुजारिश की कि मेरा गांड मराने को मन करता है लेकिन इन्होंने मेरी इच्छा कभी परी नहीं की.
“बेगम, ये इल्जाम न लगाओ कि मैंने तुम्हारी इच्छा पूरी नहीं की.
मैंने कई बार कोशिश की लेकिन तुम्हारी गांड इतनी टाइट थी जिसे मेरा लण्ड भेद नहीं पाया.
” इतना कहते कहते अब्बू शर्मिंदगी महसूस करने लगे.
तभी बात को सम्भालते हुए रुकैय्या बोली- कोई बात नहीं अब्बू.
देर आये दुरुस्त आये.
अब मुन्ना ने अम्मी की गांड का छेद बड़ा कर दिया है, आपका लण्ड शायद अब चला जायेगा.
यह कहने के बाद रुकैय्या मेरी तरफ मुखातिब होते हुए बोली- भाई, अब्बू को अम्मी की गांड मारने दे, तू अपने लण्ड की गर्मी मुझ पर निकाल ले.
इतना कहते कहते रुकैय्या वहीं अम्मी के बिस्तर पर लेट गई और अपना लहंगा उठाकर चूत खोल दी.
मैंने जल्दी जल्दी चार छह धक्के मारकर अम्मी की गांड से अपना लण्ड निकाल लिया और रुकैय्या के करीब आते हुए पूछा- गांड मरायेगी? अपने दोनों कानों को पकड़ कर रुकैय्या ने इन्कार कर दिया और बोली- न बाबा न, तुम्हारा लण्ड अम्मी की गांड नहीं झेल पाई, अम्मी चिल्ला पड़ीं, तुमसे गांड मरा कर मुझे सारा मुहल्ला नहीं जगाना है.
मैंने कहा- चल कोई बात नहीं, गांड न मरा लेकिन चूत मराने के लिए घोड़ी तो बन जायेगी? “हां, चूत मराने के लिए घोड़ी बन सकती हूँ.
” ऐसा कहकर रुकैय्या घोड़ी बन गई और अपना लहंगा कमर तक उठा लिया.
रुकैय्या और अम्मी दोनों घोड़ी बनी हुई थीं.
मैंने रुकैय्या की चूत के लब फैला कर अपना लण्ड पेल दिया और रुकैय्या की कमर पकड़ कर उसे चोदने लगा.
बिस्तर के दूसरी तरफ अम्मी अपनी गांड खोल कर घोड़ी बनी हुई थीं और अब्बू अपना लण्ड हिला हिला कर टाइट करने की कोशिश कर रहे थे.
कुछ देर बाद अब्बू ने अपना लण्ड अम्मी की गांड के छेद पर रख कर अन्दर करने की कोशिश की लेकिन बात बनी नहीं तो मैंने अब्बू से कहा- अपने अंगूठे में तेल लगा कर अम्मी की गांड में चला दीजिये.
अब्बू ने वैसा ही किया और फिर से अपना लण्ड अम्मी की गांड में डालने की नाकाम कोशिश की.
अब्बू ने मेरी ओर कातर निगाहों से देखते हुए कहा- एक बार तू अपने लण्ड से अम्मी की गांड का छेद फैला दे.
मैंने रुकैय्या की चूत से अपना लण्ड निकाला और अम्मी की गांड में उतार दिया.
“मुन्ना, मेरे मुन्ना!” कहते हुए अम्मी कसमसाने लगीं.
अम्मी की चोली ऊपर खिसका कर मैंने अम्मी की चूचियां पकड़ लीं और अम्मी की गांड मारने लगा.
अम्मी की गांड मारने में रुकैय्या को चोदने की बनिस्बत ज्यादा मजा आ रहा था.
अपना लण्ड तेजी से अन्दर बाहर करते हुए मैंने अब्बू से कहा- अब्बू, आप अपने लण्ड पर तेल लगाकर तैयार रहिये.
जैसे ही मैं निकालूं, आप झट से डाल दीजियेगा.
अब्बू अपने लण्ड पर ढेर सा तेल लगाकर हिलाने लगे.
तेजी तेजी से धक्के मारते हुए मैंने अपना लण्ड अम्मी की गांड से निकाल लिया.
इससे पहले कि अम्मी की गांड का छेद सिकुड़े, अब्बू ने अपना लण्ड अम्मी की गांड में पेल दिया और आगे की ओर झुककर अम्मी की चूचियां दबोच लीं.
इधर मैंने अपना लण्ड अम्मी की गांड से निकाल कर रुकैय्या की चूत में पेला तो रुकैय्या ने अपनी चोली खोल दी.
मैं रुकैय्या की चूचियों से खेलने लगा.
रुकैय्या को तेजी से चोदते हुए मैंने अब्बू को भी स्पीड पकड़ने का इशारा किया तो बोले- पड़ा रहने दे, मुन्ना.
मुझे अपनी औकात पता है, चार धक्के मारते ही मेरी टैं बोल जायेगी.
अब हम लोगों में कुछ भी छिपा नहीं है, मैं रुकैय्या कौ गांड मराने के लिए अक्सर उकसाता रहता हूँ और घोड़ी बना कर चोदने के दौरान अंगूठे से उसकी गांड की मसाज करता रहता हूँ.
[email protected] लेखक की पिछली कहानी: कामवाली की कुंवारी बेटी की चुदाई
स्रोत:इंटरनेट