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चाची की चूत और अनचुदी गांड मारी

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चाची की चूत और अनचुदी गांड मारी 1

. उनके मुँह से लंड शब्द सुनकर मेरे होश ही उड़ गये.
मैंने चाची के चूचों के बीच में अपना लंड दे दिया और उनके चूचों की ही चुदाई करने लगा.
मेरे अंदर पूरी हवस चढ़ी हुई थी.
चाची भी अपने दोनों हाथों से अपने चूचों को दबा कर मेरे लंड को अपने चूचों के बीच में दबा कर मजे से चूचों की मैथुन करवा रही थी.
मैंने कई मिनट तक ऐसे ही चाची के गोरे चूचों के बीच में लंड को रगड़ा.
मेरा लंड चाची के होंठों तक पहुंच रहा था.
मैं सोच रहा था कि चाची खुद ही मेरे लंड को मुंह में लेने के लिए कहेगी लेकिन चाची मेरे लंड को मुंह में लेने के लिए पहल नहीं कर रही थी.
मेरे लंड का बुरा हाल हो गया.
मेरे लंड को पहली बार चाची के बदन का स्पर्श मिला था इसलिए मैं हर काम जल्दी ही जल्दी में कर लेना चाहता था.
मैं अब चाह रहा था कि चाची मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसे.
लेकिन चाची ने मेरे पानी छोड़ रहे लंड पर रहम नहीं किया और उन्होनों लंड को मुंह में नहीं लिया.
चाची का इंतजार करने के बाद मैंने अपने लंड को अपने हाथ में पकड़ा और चाची के बालों को पकड़ कर अपना लंड चाची के होंठों पर लगा दिया.
एक बार तो चाची मेरे लंड को हटाने का नाटक करने लगी.
लेकिन उनको लंड अपने होंठों पर शायद अच्छा लग रहा था.
मैं दो मिनट तक लंड को चाची होंठों पर रगड़ता रहा.
फिर मैंने चाची को मुंह खोलने के लिए कहा तो चाची ने अपना मुंह खोल दिया और मैंने अपना लंड चाची के मुंह में दे दिया.
अब चाची ने मेरा लंड मुँह में ले कर चूसना चालू कर दिया.
वो बहुत ही मजे से मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी.
अब मेरे मुंह से सीत्कार से निकल रहे थे.
आह्ह … चूसो चाची … आहह् … बहुत मजा दे रही हो… उफ्फ … पूरा चूस लो चाची.
इस तरह से मैं चाची को तेजी से अपना लंड चुसवा रहा था.
मेरा लंड पूरा का पूरा चाची के गले तक जा रहा था.
चाची को लंड चूसने का काफी तजुरबा था इसलिए मेरे लंड को बहुत मजा दे रही थी.
दो मिनट तक मैंने खूब मस्ती से चाची के मुंह में लंड देकर चुसवाते हुए मजा लिया.
थोडी देर के बाद जब मेरा लंड झड़ने को आया तो मैंने उसे चाची के मुँह से निकाल कर मेरा वीर्य उनके मुँह पर ही गिरा दिया.
वीर्य उनके मुंह पर गिरा तो उनको थोड़ा गुस्सा आ गया.
इस बात के लिए मैंने उनसे माफ़ी भी मांगी और उनका सारा मुँह एक कपड़े से साफ कर दिया तो उन्होंने मुझे माफ़ कर दिया.
बाद में उनको उठा कर मैंने बेड पर लिटा दिया और चूत पर मेरा लंड सेट करके अंदर डालने की कोशिश करने लगा.
मैंने चूत पर लंड को लगा कर धक्का लगाया लेकिन मेरा लंड चाची की चिकनी चूत पर फिसल जा रहा था.
मैंने दो बार कोशिश की लेकिन दोनों ही बार मेरा लंड चाची की चूत पर फिसल गया और सुपारा भी अंदर नहीं जा पाया.
मैं हैरान था कि चाची की चूत इतनी टाइट कैसे हो सकती है.
चाची मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर अपनी चूत में डालने की कोशिश करने लगी पर काफी दिनों से उनकी चूत अनचुदी होने के कारण उनको थोड़ा दर्द होने लगा तो उन्होंने मुझे चूत में नारियल का तेल डालने को बोला.
तेल डालने के बाद मैं फिर से प्रयास करने लगा.
चाची ने मेरा लंड हाथ में ले कर अपनी चूत में डालने का फिर से प्रयास किया.
इस बार लंड थोड़ा अंदर चला गया तो चाची को थोड़ा दर्द हुआ.
मैं बिना रुके लंड को अंदर बढ़ाता गया.
जैसे जैसे मेरा लंड चाची की अनचुदी चूत में उतर रहा था तो चाची को दर्द होता जा रहा था.
दर्द के कारण वो मुझे पीछे धकेलने लगी.
मैंने उनको टाइट पकड़ कर उनको किस करना चालू कर दिया.
थोड़ी देर इसी पोजीशन में रुकने के बाद चाची ने नीचे से धक्के लगाना चालू कर दिया तो मैं भी जोश में आकर धक्के लगाने लगा.
चाची ने अब आहें भरना चालू कर दिया.
मेरे हर धक्के के बाद उनकी आह आहह उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआअह्ह … ह्हह … ऊऊऊ … ऊईई … ईईइ … मर गई माँ.. की आवाजें चालू हो गई.
थोड़ी देर के बाद चाची आवाजें निकालते निकालते ही झड गई.
अब उनके झड़ जाने से उनकी सारी चूत गीली हो गई तो मेरा लंड आराम से अंदर बाहर होने लगा.
थोड़ी देर बाद मैं भी झड़ने को आया तो चाची से पूछा- मेरा निकलने वाला है तो कहाँ निकालूं? चाची बोली- बहुत दिनों से मेरी चूत प्यासी ही है.
तुम अपना माल मेरी चूत में ही निकाल दो.
मैं चाची के कहने पर उनकी प्यासी चूत में ही झड़ गया.
झड़ने के बाद में निढाल हो कर चाची के ऊपर ही थोड़ी देर पड़ा रहा.
थोड़ी देर बाद मैंने फिर से चाची को किस करना चालू कर दिया.
मैंने चाची से बोला- मैं आपकी गांड मारना चाहता हूं.
तो वो बोली- मैं आज से पूरी तरह से तुम्हारी हूँ.
जो करना है जैसे करना है कर लो.
जब चाची ने मुझे पूरी छूट दे दी तो मैंने चाची को पलट दिया.
ऐसा करके उनकी गांड में नारियल का तेल डाल कर उंगली अंदर बाहर करनी शुरू कर दी.
चाची को गांड में दर्द होने लगा.
वो गांड मरवाने से बचने के लिए दूर हटने लगी.
लेकिन मुझे आज हर हाल में चाची की गांड को चोद कर ही रहना था.
वो कहने लगी- तुम्हारा लंड तो मेरी गांड को फाड़ कर रख देगा.
चाची ने बताया कि आज से पहले उन्होंने कभी अपनी गांड में लंड नहीं डलवाया था.
वो मुझसे कहने लगी- आज गांड को रहने देते हैं और तुम मेरी गांड फिर किसी दिन मार लेना.
मगर मैं तो आज ही चाची की गांड मारना चाह रहा था तो मैंने चाची को कहा कि एक बार कर लेने दो तो चाची मान गयी.
फिर मैंने एक तकिया लिया और चाची के पेट के नीचे लगा दिया.
तकिया जब पेट के नीचे आ गया तो चाची की गांड थोड़ी सी ऊपर आ गई.
थोड़ा नारियल तेल मैंने मेरे लंड पर लगा कर उनकी गांड में डालने की कोशिश की.
जैसे ही लंड का सुपारा चाची की गांड के अंदर गया तो चाची रोने लगी.
चाची को सचमुच में बहुत दर्द होने लगा.
वो लंड को बाहर निकालने के लिए छटपटाने लगी.
मुझसे लंड को वापस बाहर करने करने के लिए मिन्नतें करने लगी.
मगर मैं अब बना बनाया खेल बिगाड़ना नहीं चाह रहा था.
इसलिए मैंने चाची को शांत करने की कोशिश की.
मैं लंड को चाची की गांड में डाल कर उनके ऊपर ऐसे ही पड़ा रहा.
अब चाची का दर्द थोड़ा कम होना शुरू हो गया था.
मैंने दर्द कम होने पर अपने लंड को फिर से गांड में धकेलना शुरू किया.
एक जोर का झटका देकर मैंने पूरा का पूरा लंड चाची की गांड में उतार दिया तो चाची चीख पड़ी.
लेकिन मैंने उनको पकड़े रखा.
दो मिनट रुकने के बाद जब वो शांत हुई तो मैंने धीरे-धीरे चाची की गांड में अपने लंड को हिलाना शुरू किया.
जब मेरा लंड हिलना शुरू हुआ तो चाची को भी मजा सा आने लगा.
वो मेरे लंड को गांड में लेने लगी.
वो दूसरे तकिये पर अपना मुंह दबाकर पड़ी हुई थी.
कुछ ही देर में चाची के मुंह से कामुक आवाजें निकलने लगीं.
जब मुझे लगा कि अब चाची मेरे धक्के को झेल सकती है तो मैंने पूरी ताकत के साथ अपना लंड चाची की गांड में पेलना शुरू कर दिया.
अब तो चाची मस्ती से मेरे लंड को अपनी गांड में लेने लगी- आह्ह … और जोर से … फाड़ दो मेरी गांड को … आह्ह … इस तरह की आवाजें चाची के मुंह से निकलने लगीं.
कई मिनट तक मैंने चाची की गांड की जोरदार तरीके से चुदाई की तो मेरा माल भी झड़ने को आ गया.
मैंने चाची से बिना पूछे ही अपना माल चाची की गांड में उड़ेल दिया और मैं चाची की कमर पर ही ढेर हो गया.
फिर हम दोनों एक साथ बाथरूम में चले गए और एक दूसरे को साफ करके नंगे ही सो गए.
जब मेरी सुबह आँख खुली तो चाची नहा रही थी.
मैंने बाथरूम में जाकर फिर से उनकी चुदाई की और घर वालों के वापस आने तक हम पति-पत्नी की तरह रहे.
उन चार दिनों में चाची ने मुझसे अलग-अलग तरीके अपना कर चुदाई करवाई.
चाची की अनचुदी गांड और चूत को चोद कर मुझे बहुत मजा आया.
मैं भी बहुत दिनों से अपने लंड को हाथ से ही रगड़ रहा था और चाची ने मेरे लंड की प्यास बुझा दी.
जब तक घर वाले वापस आये मैंने चाची को कभी स्नानघर में तो कभी किचन में चोदा.
चाची ने भी पूरे मजे से अपनी चूत की प्यास बुझवाई.
फिर हमारे घर वाले वापस आ गये तो मैं अपने घर पर ही रहने लगा लेकिन चाची के साथ मेरे सेक्स संबंध बन गये थे.
मुझे जब भी मौका मिलता हैं मैं उनकी चुदाई करता हूँ.
मेरी यह पहली सेक्स कहानी आपको कैसी लगी, मुझे आप मेरे मेल आईडी पर रिप्लाई देकर जरूर बताएं और यदि कहानी को लिखते समय मुझसे कोई भूल हुई हो तो माफ़ करें.
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स्रोत:इंटरनेट