. चुदक्कड़ सविता भाभी का पेटीकोट खोल करी गांड और चुत में ऊँगली हिंदी सेक्स स्टोरी फिर मेरी सविता भाभी बैड पर अपने दोनों हांथो को टेक मेरी तरफ अपनी टट्टी से भरी मोटी गांड करके घोड़ी. बन गई और मै अपने घुटनों के बल बैठ कर सविता भाभी की गांड में अपनी ऊँगली करने लगा उनकी गांड में टट्टी भरी हुई थी जिस कारण मेरी पूरी की पूरी ऊँगली टट्टी में संद गई तो मैंने भाभी जी को बोला की भाभी जी. क्या बात है आज आपने टट्टी नहीं करी आप की गंड में टट्टी भरी हुई है तो भाभी बोली की देवर जी आज प्रेशेर ही नहीं बना इसी लिये नहीं करी.
यहाँ भी देंखे फिर मेरी सविता भाभी जी बोली की देवर जी आप को एक जादू दिखाऊ तो मैंने बोला की कैसा जादू भाभी जी तो भाभी जी ने एक जोर का बदबूदार पाद मारा दिया उनके पद में बहुत गन्दी बदबू आ रही थी तो मैंने अपने एक हाथ से अपनी नाक बंद कर ली और दुसरे हाथ की ऊँगली से उनकी. गांड की चुदाई जारी रखी फिर भाभी जी वोली बहुत मार ली मेरी गांड अपनी ऊँगली से चलो देवर जी अपनी इस ऊँगली से मेरी चूत की चुदाई करो फिर मेरी सविता भाभी सीधी होकर मेरे बैड पर लेट गई.
फिर मै मेरी ऊँगली में लगी भाभी की गांड से निकली टट्टी लगी ऊँगली अपने मुझ में लेकर उनकी टट्टी खा ली मेरी भाभी की टट्टी बहुत ही स्वादिष्ट थी.
फिर मैंने उनकी चूत में अपनी अंगूठे के पास वाली सबसे लम्बी ऊँगली करने लगा और भाभी तड़पने लगी और जोर जोर से आह…… आह…………उमह……….
आह………………………………………… जैसी मादक गन्दी गंदी आवाजे निकाल रही थी जिस कारण मेरे अंदर और उत्तेजना बढती जा रही थी और फिर मैंने धीरे धीरे अपनी ऊँगली की स्पीड बड़ा थी और जल्दी जल्दी उनकी चूत में ऊँगली करने लगा.
और फिर मेरी सविता भाभी से रहा नहीं गया और उन्हों ने पेशाब कर दिया और उनकी चूत से निकली पेशाब की धर सीधे मेरे मुह में आकर पड़ी तो मैंने भी उनका सारा का सारा पेशाब पी लिया.
दोस्तों मेरी सविता भाभी का पेशाब बहुत स्वादिष्ट था.
यहाँ भी देंखे दोस्तों आज का दिन मेरी जिन्दगी का सबसे यादगार दिन था क्यों की आज सब कुछ पहली बार हो रहा था.
पेशाब के कारण सविता भाभी का सारा का सारा पेटीकोट गीला हो चूका था तो मैंने भाभी को उसे उतारने के लिये बोला फिर भाभी जी अपना घागरा खोलने के लिये खड़ी हो गई और फिर मैंने अपने दोनों हाथो से अपनी रंडी सविता भाभी का पेटीकोट खोल डाला अब. मेरे सामने उनकी गोरी गोरी चूत थी तो मेरे से रहा नहीं गया और फिर मैंने भाभी को मेरे भैया की कसम डे डाली तो वो मेरे साथ सेक्स करने के लिये तैयार हो गई.
फिर मैंने सविता भाभी का ब्लाउज और ब्रा भी उतार डाली अब सविता भाभी पुरी नंगी मेरे लंड से चुदवाने के लिये तैयार हो गई थी.
भाभी और मैं अब योनि और लिंग की लड़ाई का खेल खेलने के लिये पूरी तरह तैयार थे.
अब मेरी सविता भाभी ने मेरे होंठों को अपने मुह में लेकर चूमना शुरू कर दिया और मै भी उनके गुलाबी गुलाबी होंठो का रस पान करने लगा । फिर एक दुसरे को चुमते चुमते हम दोनों मेरे बैड पर लेट गए.
फिर मैने मेरी भाभी की चूत फतह करने के लिये उनके नंगे जिस्म पर चडाई कर दी.
इससे भाभी के मोटे मोटे बूब्स मेरे सीने से दब गए और मेरा उत्तेजित लिंग भाभी की नंगी जाँघों के बीच लग गया। मेरी सेक्सी सविता भाभी मेरे होंठों को चूमते हुए हल्की-हल्की सी ‘आहें..’ भरने लगी थीं.. साथ ही उनका हाथ भी मेरे कूल्हों से लेकर मेरे सिर तक घूम रहा था। मैं भी एक हाथ से भाभी के भरे हुए मखमली बूब्स के निप्पल सहलाने लगा। फिर मैं थोड़ी देर तक अपनी सविता भाभी की चूत को सहलाते हुए अपनी ऊँगली अंदर बाहर करने लगा और फिर अपने हाथ से अपना 12 इंच लम्बा लंड भाभी की चूत पर सेट करा और एक जोर के धक्के के साथ मेरे लंड को भाभी की चूत में उतारने की नाकाम कोशिश करने लगा.
यहाँ भी देंखे इसी कोशिश में मैं अपना लिंग भाभी की योनि पर रगड़ रहा था कि तभी भाभी मेरे गालों को चूमने के लिए थोड़ा सा ऊपर हुईं.. और जैसे ही वो ऊपर हो कर नीचे होने लगीं.. उसी पल मेरे लिंग का सुपारा ठीक योनिद्वार के होंठों के बीच फँस सा गया। लिंग का सुपारा भाभी की योनि की फांकों में फंसा ही था कि भाभी ने ‘इईईई.. श्श्शशश..’ करके जोरों से मेरे कूल्हों को भींच लिया।मगर अगले ही पल फिर से मेरा लंड चिकनी चूतद्वार से निकल गया। मैंने भी हार नहीं मानी। मैं फिर से अपनी कोशिश में जुट गया.. मगर कामयाब नहीं हो सका। इस दौरान एक-दो बार फिर से मेरा लंड चिकनी चूतद्वर पर लगा भी.. मगर चिकनाई की वजह से वो बार-बार फिसल रहा था। जब मैं कामयाब नहीं हो सका तो मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी ने करवट बदल कर मुझे अपने ऊपर खींच लिया और अपनी जाँघें फैलाकर मुझे अपनी दोनों जाँघों के बीच भींच में दबा लिया।मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी का मखमली नंगा. सेक्सी जिस्म अब मेरे नीचे था, उनके दोनों उभार मेरी छाती से दबे हुए थे और मेरा लंड ठीक मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी की चिकनी चूत पर था। मगर, अब भी मेरा लंड सही से चिकनी चूतद्वार में नहीं जा रहा था और मैं ऐसे ही चिकनी चूत की दोनों फांकों के बीच लंड को घिस रहा था। तभी मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी ने मेरे लंड को पकड़ कर चिकनी चूतद्वार के होंठों से लगा लिया और मेरे हमले का इन्तजार करने लगी।बाहर से ही मैं अपने. लंड पर उनकी चिकनी चूत की तपिश महसूस कर रहा था। मैंने भी अब देरी नहीं की और एक जोर को धक्का लगा दिया। मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी का चिकनी चूतद्वार कामरस से भीग कर चिकना था और मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी भी. इसके लिए तैयार थीं.. जिससे एक ही झटके में मेरा आधे से ज्यादा लंड मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी की चिकनी चूत में समा गया।यहाँ भी देंखे मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी के मुँह से ‘इईईई.. श्श्शशश.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… अआहह..’ की आवाज निकल गई। मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी ने अपने पैरों व हाथों को समेटकर मेरे सेक्सी जिस्म को जोरों से भींच लिया और बड़े ही प्यार से मेरे गालों को चूम लिया जैसे कि मैंने बहुत बड़ा और गर्व का काम किया हो।एक बार मैंने अपने लंड को थोड़ा सा बाहर खींचा। मैंने फिर से एक धक्का और लगा दिया.. इस बार लगभग मेरा पूरा लंड मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी की चिकनी चूत की गहराई में उतर गया। फिर से मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी के मुँह से ‘इईईई.. श्श्श्श्शशश.. अआहह..’ की आवाज निकल गई। मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी ने फिर मेरे गालों को चूम लिया और दोनों हाथों से मुझे अपनी बाँहों में भरकर जोरों से भींच लिया जिससे मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी के उरोज मेरी छाती तले पिस से गए। अब लगभग मेरा पूरा लंड मेरी 21 साल की जवान सविता भाभी की चिकनी चूत में था और मैं अपने लंड पर चिकनी चूत की गर्माहट को महसूस कर रहा था।यहाँ. भी देंखे यह दूसरा अवसर था.. जब मेरा लंड मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी की चिकनी चूत में था। इस अहसास को मैं बयान नहीं कर सकता कि मुझे कैसा मस्त लग रहा था। मैं भी अब रुका नहीं बल्कि मैंने धीरे-धीरे अपने सेक्सी जिस्म को आगे-पीछे करके धक्के लगाने शुरू कर दिए। मेरा लंड मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी की चिकनी चूत में अन्दर-बाहर होने लगा और साथ ही मेरी छाती से दबे मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी के दोनों उरोज भी चटनी. की तरह मसले जाने लगे। मेरे प्रत्येक धक्के के साथ मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी ‘अआआह.. अआआह..’ की आवाज करने लगीं।मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी ने अब अपने पैरों को मेरी जाँघों के ऊपर किया और फिर अपने पैरों को मेरे पैरों में इस तरह से फँसा लिया कि अब मैं चाह कर भी मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी के ऊपर से उठ नहीं सकता था। मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी ने मुझे जोरों से भींच लिया था और मेरी गर्दन व गालों को चूमने लगीं।. मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी का साथ देने के लिए मैंने भी उनके होंठों को मुँह में भर लिया और धीरे-धीरे उन्हें चूसने लगा।मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी ने अब मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया, उन्होंने पहले की तरह ही अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी और मेरे पूरे मुँह में अपनी जीभ घुमाने लगीं। मैं उनकी जीभ को होंठों के बीच दबाकर जोरों से चूसने लगा मगर इस बार मैंने अपनी जीभ मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी के मुँह में. डालने की गलती नहीं की.. बस मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी की ही जीभ को चूसता रहा।जब मैंने अपनी जीभ मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी के मुँह में नहीं दी.. तो मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी ने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़ लिया और बुरी तरह से मेरे होंठों को चूसने लगीं। मुझे तो वो अब चूमने का मौका ही नहीं दे रही थीं.. बल्कि खुद ही मुझे चूम-चाट रही थीं। उत्तेजना के वश धीरे-धीरे अपने आप ही मेरे धक्कों की गति बढ़ गई.. जिससे मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी के मुँह से फिर सिसकारियां निकलनी शुरू हो गईं। मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी का मुँह मेरे होंठों से बन्द था.. मगर फिर भी वो मेरे होंठों को चूसते हुए ‘हुहुह.. हूहूहूहहह.. हुहुह..’ की आवाज करने लगीं।मेरी सेक्सी सविता भाभी के दोनों पैर अब मेरे कूल्हों पर आ गए और वो अपनी एड़ियों से मेरे कूल्हों को दबाकर धक्का लगाने लगीं.. साथ ही उनके दोनों हाथ भी मेरी पीठ को पकड़ कर मुझे आगे-पीछे करने लगे। मुझमें भी अब जोश आ गया और मैंने अपनी गति बढ़ा दी। मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी भी अब जोरों से मेरे कूल्हों व पीठ को दबाकर मुझे आगे-पीछे करने लगीं.. इसी के साथ अब उनके नितम्ब भी ऊपर-नीचे होने लगे थे। यहाँ भी देंखे मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी बहुत अधिक उत्तेजित हो गई थीं, मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी जोरों से सिसकारियां भरते हुए पागलों की तरह मेरे होंठों को चूमने चाटने लगीं। वो मेरे होंठों के साथ-साथ अब मेरे गालों को भी जोरों से नोंचने की हद तक चूमते हुए काटने सी लगीं.. जैसे कि मेरे होंठों व गालों को खा ही जाएंगी। मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी के काटने से बचने के लिए मैं मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी के उरोजों पर से उठ गया। मैंने अपने हाथों के सहारे अपनी छाती व मुँह को ऊपर उठा लिया।बस मेरे पेट के नीचे का ही भाग अब मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी के ऊपर उनकी चिकनी चूत में धक्के लगाने के लिए था। नीचे. की तरफ से भी मैं अब अपने घुटनों पर हो गया.. जिससे कि मुझे तेजी से धक्के मारने में आसानी हो गई। मैं किसी पहलवान की तरह दण्ड पेलने की मुद्रा में मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी की चिकनी चूत में तेजी से धक्के लगाने लगा। मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी का मुँह अब आजाद हो गया था इसलिए वो अब जोर-जोर से सिसकारियां लेने लगीं। मेरी मासूम सी दिखने वाली सविता भाभी के पैर अब मेरी कमर पर आ गए और हाथ मेरे कूल्हों पर पहुँच. गए, वो मेरे कूल्हों को पकड़कर मुझे जोरों से दबाने लगीं।यहाँ भी देंखे मैं अब अपनी पूरी ताकत से अपनी भाभी की चूत में धक्के लगा रहा था। मेरा पूरा लंड मेरी सविता भाभी की चिकनी चूत के बाहर आता और फिर मेरी पूरी ताकत के साथ चिकनी चूत की गहराई में उतर जाता.. जिससे मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी जोरों से ‘इईईई.. श्श्श्श्शशश.. अआआ.. ह्ह्हह.. इईईई.. श्श्श्शश.. अआआ.. ह्ह्ह..’ कर रही थीं।मेरा व मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी का नंगा जिस्म पसीने में लथपथ हो चूका था और सेक्स करते करते हमारी साँसें भी उखड़ने लगी थीं। फिर अचानक से मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी की चिकनी चूत में सँकुचन सा हुआ और वो ‘इईई.. श्श्श्श्शशश.. अआहहह..’ करके मुझसे लिपट गईं। मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी के हाथ मेरी पीठ पर और दोनों पैर मेरी कमर पर कस गए। मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी ने एक और लम्बी ‘आह..’ भरते हुए मुझे जोरों से भींच लिया और उनकी चिकनी चूत ने मेरे लंड को चिकनी चूतरस से नहला दिया।मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी अपने चरम को पा चुकी थीं.. मगर मैं अब भी प्यासा ही था.. इसलिए मैं धक्के लगाता रहा। चिकनी चूतरस से भीगकर मेरा लंड और भी आसानी से चिकनी चूत के अन्दर-बाहर होने लगा। कुछ देर तो मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी ऐसे ही मुझसे लिपटी रहीं.. मगर फिर वो मुझे रोकने लगीं। शायद उन्हें दिक्कत हो रही थी मगर मैं रूका नहीं और धक्के लगाता रहा क्योंकि मैं भी अपनी मँजिल के करीब ही था। मेरी रंडी सविता भाभी को भी शायद अहसास हो गया था कि इस हालत में मेरा रुकना मुमकिन नहीं होगा.. इसलिए उन्होंने अपने सेक्सी जिस्म को ढीला छोड़ दिया और मुझे अपने मुकाम पर पहुँचाने के लिए मेरी कमर को सहलाने लगीं।कुछ ही देर में मैं चर्मोत्कर्ष पर पहुँच गया, मैंने तीन-चार जोरदार धक्के लगाए और फिर मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी के सेक्सी जिस्म से लिपट गया। मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी से लिपट कर मैं हल्के-हल्के धक्कों के साथ उनकी चिकनी चूत को अपने वीर्य से सींचने लगा। मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी ने भी मुझे जोरों से भींचकर मेरा साथ दिया। उस रात को चार बार इस खेल का दौर चला और रात भर मैंने मेरी. चुदक्कड़ सविता भाभी को जगाए रखा। यहाँ भी देंखे इसके बाद तो रोजाना ही मेरे व मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी के बीच ये गन्दा खेल चलने लगा। जब भैया छुट्टी पर घर आते.. तभी मैं दूसरे कमरे में सोता.. नहीं तो मेरी चुदक्कड़ सविता भाभी के कमरे में ही सोता और हमारे बीच इस खेल का दौर चलता रहता और मेरी भाभी को मेरे से एक लड़का भी हो गया है । दोस्तों आप सभी को मेरी इंडियन भाभी की चुदाई की ये हिंदी सेक्स स्टोरी. “चुदक्कड़ सविता भाभी का पेटीकोट खोल करी गांड और चुत में ऊँगली हिंदी सेक्स स्टोरी” कैसी लगी मुझे ईमेल करके जरुर बताना… .
स्रोत:इंटरनेट