. घर आई तो सबसे पहले बाथरूम में जाकर मैंने अपने हाथ से किया, तब भी मुझे संतुष्टि नहीं मिली। रात को सोने से पहले एक लंबे बैंगन से मैंने अपनी फुद्दी चोदी, तब कुछ आराम आया। उसके बाद मैं अपने बॉयफ्रेंड के साथ कभी नहीं गई। मगर उसका वो दोस्त जिसके घर हमने सेक्स किया था, अक्सर मुझ पर लाइन मारता। एक दिन मौका मिला तो वो बोला- ऋतु, जो सुख वो तुम्हें नहीं दे सका, मैं दे सकता हूँ। मैंने बड़े हैरान होकर पूछा- कौन सा सुख? वो बोला- उस दिन तुम्हारे बेडरूम जो कुछ हुआ, मुझे एक एक बात का पता है। मैं शर्मिंदा तो हुई मगर फिर भी बोली- तो? वो बोला- मैं तुम्हें उससे बेहतर सेटीस्फाइ कर सकता हूँ। मैंने कहा- तो तुम मुझे सीधे सीधे सेक्स की ऑफर दे रहे हो। वो बोला- ऐसे ही समझ लो, अगर अच्छा लगा, तो तुम मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी, बोलो मानती हो। मैंने कहा- अच्छा जी, पहले सेक्स फिर लव? वो बोला- तुम्हारी मर्ज़ी, पर मैं सेक्स के मामले में उससे कहीं बेहतर हूँ। मैं वापिस घर आई और आकर सोचने लगी, क्या करूँ, क्या न करूँ … क्या मैं कोई रंडी हूँ, जो उसके पास सिर्फ चुदने के लिए जाऊँगी। फिर सोचा मज़ा भी तो आयेगा … चलो देखते हैं। यही सोच कर मैंने उसे फोन पर येस कर दी। अगले दिन ही शाम को उसने मुझे अपने घर पे बुला लिया। उसके घर वाले दूसरे शहर में किसी शादी में गए थे, तो सुबह आने वाले थे। मगर मैं सिर्फ 2-3 घंटे की मोहलत घर वालों से मांग कर लाई थी। मैं उसके घर पहुंची तो उसने मुझे घर के अंदर बुलाया। पहले ड्राइंग रूम में बैठाया। मुझे एक ठंडी बीअर दी पीने को। उस दिन मैंने अपने परिवार की सभी मान मर्यादाओं को तोड़ कर शराब पी। उस दिन. उसने मुझे सिगरेट का भी कश लगवाया। जबकि मेरे घर में नॉन वेज, सिगरेट शराब का नाम लेना भी गुनाह समझा जाता है, और मैं उस खानदान की बेटी, किसी लड़के के घर में अकेली उसके साथ बैठी, सिगरेट और शराब का मज़ा ले रही हूँ। कुछ देर की इधर उधर की बातें करने के बाद जब बीयर खत्म हो गई, वो मुझे उसी बेडरूम में ले गया। मैं जाकर बेड पर बैठ गई, वो भी मेरे साथ बैठ गया। मैं वेट कर रही थी, वो शुरू करे और वो शायद शुरू करने का मौका ढूंढ रहा था। खैर फिर उसने मेरा हाथ पकड़ा और मेरा चेहरे अपनी तरफ घूमा कर पूछा- शुरू करें? मैंने बड़े प्यार से सर हिला दिया। उसने पहले मेरे चेहरे पर हाथ फेरा और फिर मेरे गाल पर अपना हाथ रख कर मेरा. चेहरा अपने चेहरे के करीब ले कर गया। उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रखे। बहुत ही नर्म और रसीले होंठ थे उसके। उसको भी शायद मेरे होंठ ऐसे ही रसीले लगे होंगे। दोनों ने एक दूसरे को भरपूर किस किया। किस शुरू. हुआ तो दोनों ने एक दूसरे को बांहों में भरा और ऐसे बेड पर लेट गए, जैसे पहले भी ये सब कर चुके हों। उसके लिए मैं एक सेक्स करने का मौका थी, और मेरे लिए वो सेक्स में संतुष्टि की उम्मीद था। अगले ही पल वो मेरे ऊपर आ गया। होंठों से होंठ मिले तो अंदर से हम दोनों की जीभ भी अपने काम पर लग गई। पता नहीं क्यों पर मुझे जीभ चुसवा कर बहुत मज़ा आता है। वैसे मैं किसी का जूठा नहीं खाती। पर जीभ चूसने में चुसवाने में. मुझे अच्छा लगता है। मैं अपने हाथों से उसकी पीठ सहला रही थी और वो मेरे मम्मों से खेल रहा था। फिर वो उठा और बोला- बस अब सब्र नहीं होता, कपड़े उतारो। वो अपने कपड़े उतारने लगा और मैंने अपनी जीन्स और टी शर्ट उतार दी। मैंने अपनी ब्रा और पेंटी नहीं उतारी। मगर वो सारे कपड़े उतार कर बिल्कुल नंगा हो गया। बदन पर उसके बाल बहुत कम थे, साफ सपाट सीना। झांट शायद आज सुबह ही साफ की थी। गोरा साफ लंड, करीब 7 इंच का, पूरा कड़क, टोपा पहले ही बाहर निकाला हुआ, सुर्ख लाल रंग का। मेरा दिल किया कि इसका लंड चूस कर देखूँ। मुझे अपना लंड घूरते देख वो मेरे पास आया और मुझे बेड पर लेटा कर मेरी छाती पर बैठ गया। उसका लंड बिल्कुल मेरे मुंह के ऊपर रखा था, उसकी नमकीन सुगंध मैं अपने नाक में सूंघ पा रही थी। उसने इशारा किया, तो मैये उसका लंडन पकड़ा और उसका टोपा अपने मुंह में ले लिया। उसने अपने हाथों से मेरे सर के बाल सही किए, मेरे माथे को सहलाया। फिर थोड़ा ऊपर को उठा और अपनी कमर आगे पीछे करके चलाने लगा और वो मेरे मुंह को चोदने लगा। उसका पूरा लंड तो मेरे मुंह में नहीं जा रहा था, पर जितना मैं ले सकती थी, मैं ले रही थी। थोड़ा चुसवाने के बाद उसने उठ कर मेरी ब्रा खोली और पेंटी भी उतार दी। मुझे नंगी करके उसने मेरी दोनों टांगें उठा कर अपने कंधों पर रखी और फिर अपना लंड मेरी फुद्दी पर रखा। हल्का सा ज़ोर लगते ही उसका कड़क लंड मेरी गीली फुद्दी. में अंदर तक फिसलता चला गया। जब पूरा लंड अंदर घुस गया उम्म्ह… अहह… हय… याह… तो मन को बड़ा सुकून सा मिला। उसके बाद उसने मेरी दोनों टांगें अगल बगल फैला दी और फिर बड़े प्यार से अपना लंड मेरी फुद्दी में अंदर. बाहर करने लगा जैसे डर रहा हो कि उसके कड़क लंड से मेरी नर्म फुद्दी को कोई तकलीफ न पहुंचे। मगर इस तरह धीरे धीरे करने से उसका पूरा लंड मेरी फुद्दी में अंदर गहराई तक अंदर बाहर आ-जा रहा था जिससे मेरी फुद्दी. में रह रह कर आनंद की लहरें उठ रही थी। हर बार जब अपना लंड अंदर को धकेलता तो मैं भी अपनी कमर ऊपर को उचकाती, ताकि उसका पूरा लंड मेरी फुद्दी की तह तक जाए। सच में इसे लड़की को चोदने का तरीका आता था। जितना आराम से करो, उतना लड़की को तड़पाओ। मुझे नहीं पता कितनी देर लगी, शायद 5-6 मिनट ही हुये होंगे, मगर मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी। मैं खुद नीचे से अपनी कमर को ज़ोर ज़ोर से ऊपर को उठा उठा कर मार रही थी। मैंने कहा- यारा, अब सब्र नहीं हो रहा, ज़ोर से पेलो, मैं मर रही हूँ। मुझे झाड़ दो, मेरा पानी निकाल प्लीज़, ज़ोर सो चोदो, और ज़ोर से! बेशक उसने अपनी स्पीड थोड़ी बढ़ाई मगर इतनी नहीं। और फिर जैसे मेरी फुद्दी में से कोई फव्वारा फूटा हो। पिच पिच करके बहुत सारा पानी निकला मेरी फुद्दी से। मैंने उसे खुद ही नीचे खींच लिया और सीधा उसके मुंह में अपनी जीभ डाल दी- चूस इसे, मेरी जीभ चूस, मेरा हो गया, आह … मर गई मैं बहनचोद। ज़ोर से कर … आज माँ चोद दे मेरी, और मार ज़ोर से … आई … हाँ … हाँ … आह … और मुझे तड़पा तड़पा कर उसने मेरा पानी गिरा दिया। मैं इतना आनंदित कभी नहीं हुई, हाथ से करके भी नहीं, फुद्दी में कुछ लेकर भी नहीं। आज मुझे एक सच्चा मर्द मिला था जिसने मेरी फुद्दी का पानी निकाल दिया। मैं शांत चित्त होकर लेट गई तो उसने भी थोड़ी सी और चुदाई के बाद अपना माल मेरे मुंह पर गिराया, कुछ उसने मुझे चटवाया भी। खैर आधे घंटे बाद उसने मुझे फिर से चोदा और फिर से मुझे तड़पा तड़पा कर मेरा पानी निकाला। रात के 8 बज गए थे मगर मेरा घर जाने को दिल नहीं कर रहा था, बड़े बेमन से मैं घर वापिस आई। घर आकर मैंने माँ के साथ डिनर बनाया, खाया भी। मगर मेरा मन अब भी सेक्स करने को कर रहा था। दिल कर रहा था कि वो फिर से आए और सारी रात मुझे पेले। रात को जब दीदी के साथ सो रही थी, आधी रात को उठ कर मैंने दीदी के होंठो पर किस किया। बेशक उसने डांट दिया, मगर मेरे बदन में आग लगी थी तो उठकर बाथरूम में गई और दो बार हाथ से किया। तब कहीं जा कर मेरी तसल्ली हुई, फिर मुझे गजब की नींद आई। सच में अच्छी चुदाई से बेहतर और कोई मज़ा नहीं है। [email protected]
स्रोत:इंटरनेट