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चुदवाने के बदले पैसे मिलने लगे अधूरे ख्वाब पुरे होने लगे अन्तर्वासना सेक्स स्टोरी

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चुदवाने के बदले पैसे मिलने लगे अधूरे ख्वाब पुरे होने लगे अन्तर्वासना सेक्स स्टोरी 1

. चुदवाने के बदले पैसे मिलने लगे अधूरे ख्वाब पुरे होने लगे अन्तर्वासना सेक्स स्टोरी सतीश हालांकि दिल के बहुत अच्छे हैं लेकिन मैं सतीश के साथ मैरिज नहीं करना चाहती थी क्योंकि वह भी. एक मिडिल क्लास फॅमिली से ही हैं.
मैंने अपनी माँ से कहा था कि मुझे अभी मैरिज नहीं करनी लेकिन मेरा कॉलेज खत्म होने के बाद ही उन्होंने मेरी मैरिज सतीश के साथ तय कर दी.
जब मेरी सगाई हो गई तो उस वक्त मैं बहुत ज्यादा परेशान थी और उस बात से मैं बिल्कुल खुश नहीं थी मैंने अपनी माँ से उस वक्त भी कहा कि मुझे सतीश के साथ मैरिज नहीं करनी.
मेरे माता पिता की जोर जबरजस्ती के कारण मेरी सगाई सतीश के साथ हो चुकी थी लेकिन उसके बाद भी मैंने सतीश से काफी समय तक बात नहीं की.
यहाँ भी देखें>> कुछ समय बाद मुझे एहसास हुआ कि इसमें सतीश की क्या गलती है इसलिए मैंने अब इन सब चीजों को अपने दिमाग से निकाल दिया मैंने सोचा जो मेरे जीवन में होना होगा वह हो जाएगा.
मैंने अपनी किस्मत पर सब कुछ छोड़ दिया कुछ समय बाद मेरी मैरिज सतीश के साथ हो गई से जितना हो सकता था उन्होंने मेरी मैरिज में उतना किया मेरी मैरिज सतीश से हो गई थी सतीश के परिवार में उसके पापा माँ और उसकी एक बड़ी सिस्टर है.
हालांकि मैरिज के बाद सतीश ने मेरा बहुत ध्यान रखा.
शादी शुदा जिन्दगी में कदम रखने के बाद मैं अपने अधूरे ख्वाब भूल चुकी थी क्योंकि उन सब को पूरा करना अब नामुमकिन सा था.
मेरी मैरिज हो चुकी थी मैरिज के एक वर्ष बाद ही हमें एक लड़का हुआ और उसके बाद भी हमें एक और लड़का हुआ मैरिज को कब 10 वर्ष हो गए कुछ पता ही नहीं चला समय इतना तेजी से निकला कि मुझे तो कुछ मालूम ही नहीं चला.
अब हम दोनों के ऊपर बहुत जिम्मेदारियां आ चुकी थी सतीश की बड़ी सिस्टर की मैरिज हो चुकी थी और अब सारा दारोमदार सतीश के ऊपर ही था जैसे जैसे हम लोगों का परिवार बढ़ता जा रहा था तो वैसे ही हम दोनों के खर्चे भी बढ़ने लगे थे और परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर होने लगी.
मेरे का भी देहांत हो चुका था सतीश के ऊपर ही घर की सारी जिम्मेदारियां थी मेरी सासू मां की भी तबीयत ठीक नहीं रहती थी और वह अक्सर बीमारी रहती थी.
मैं बहुत ज्यादा परेशान रहने लगी थी सतीश और मेरे बीच में कभी भी झगड़े नहीं हुए सतीश ने हमेशा मुझे प्यार किया और इसी बात से सतीश का साथ हमेशा दिया करती थी.
हम दोनों के बीच बहुत अच्छी बॉन्डिंग थी और हम दोनों एक दूसरे को हमेशा समझते लेकिन थे.
सतीश के ऊपर घर की जिम्मेदारियों का ज्यादा ही बोझ होने लगा तो मुझे भी लगा कि मुझे कुछ काम करना चाहिए और पैसे कमाने चाहिये तभी मैंने भी आस पास के बच्चों को ट्यूशन क्लास पढ़ाने की सोची और मैं घर में ही बच्चों को ट्यूशन क्लास पढ़ाने लगी.
हमारे आस पड़ोस के बच्चे मेरे पास ट्यूशन पढ़ने आया करते थे और मुझे जो भी पैसे मिलते मैं वह सतीश को दे दिया करती जिससे कि हमारे घर का खर्चा अच्छे से चल जाया करता था.
मेरे पति सतीश और मेरे बीच बहुत प्यार है हम दोनों अपने का बहुत ध्यान रखते हैं हम अपने बच्चों को कोई भी कमी नहीं होने देते हम लोगों ने काफी मेहनत की और अब हम लोग अपने बच्चों को एक अच्छे स्कूल में पढ़ने के लिए भेजने लगे थे.
हम लोगों ने अपना पुराना घर बेच दिया था और हम लोगों ने एक नई कॉलोनी में घर खरीद लिया था वहां पर सारे ही अच्छे लोग रहा करते थे.
हम लोग नई सोसाइटी में आकर बहुत खुश थे मैंने सतीश से कहा हम दोनों ऐसे ही मेहनत करते रहेंगे और अपने परिवार को आगे बढ़ाएंगे हमारे आस पड़ोस में काफ़ी अच्छे लोग रहा करते थे.
हमारे पड़ोस के अमीर और पैसे वाले हाई प्रोफाइल लोगों से भी मेरी अच्छी बातचीत होने लगी थी मैंने अपने घर में ही एक छोटा सा ट्यूशन क्लास सेंटर खोल लिया था हमारे आस पड़ोस की माल दार पार्टी के अमीर बच्चे मेरे पास. ट्यूशन क्लास पढ़ने आया करते थे.
अब मैं पैसे वालों की अच्छी सोसाइटी में रहती थी इसलिए बच्चों की ट्यूशन फीस भी ठीक थी जिससे कि मेरा खर्चा निकल जाया करता था.
सतीश का भी प्रमोशन हो चुका था सतीश की भी सैलरी बढ़ने लगी थी मैं हमेशा ही सतीश से कहती कि हम लोग एक गाड़ी खरीदेंगे.
मैं बीएमडब्ल्यू एक्स5 लग्जरी कार खरीदना चाहती थी हमारे एक कार थी लेकिन मुझे बड़ी बीएमडब्ल्यू एक्स5 लग्जरी कार चाहिए थी और मेरा यह सपना से ही था लेकिन हम लोग इतना पैसा नहीं जमा कर पा रहे थे.
मुझे अब ऐसा लगने लगा था कि मुझे अपने ख्वाबों को पूरा करने के लिए खुद ही कुछ करना पड़ेगा अब मैं सिर्फ बच्चों को ट्यूशन ही नहीं पढ़ाती थी उसके अलावा मैंने एक प्राइवेट भी ज्वाइन कर लिया था परन्तु उसमें से भी हमारे अधूरे ख्वाब पुरे होने वाले नहीं थे.
यहाँ भी देखें>> मेरा सपना था कि हमारा एक बड़ा सा बंगला हो और बड़ी सी गाड़ी हो और हमारे पास अच्छा खासा बैंक बैलेंस हो लेकिन इतनी मेहनत करने के बावजूद भी हम लोग उस तक कभी पहुंच ही नहीं पाए.
मैं हमेशा ही सोचती रहती कि कब मेरे अधूरे ख्वाब पुरे होंगे.
जब भी मेरे पति सतीश फ्री होते तो हम दोनों इस बारे में जरूर बात किया करते थे, सतीश मुझे कहते कि हमेशा जीवन में धैर्य रखना चाहिए सब कुछ ठीक हो जाएगा.
पहले भी तो हम लोग एक छोटे घर में रहते थे और अब हम लोगों ने बड़ा घर ले लिया है समय के साथ साथ हमारी आर्थिक स्थिति में भी सुधार होता रहेगा.
मैंने मेरे पति सतीश से कहा मेरे भी कुछ ख्वाब हैं मैंने भी बचपन से कुछ ख्वाब देखे थे जो कि मैं पुरे करना चाहती हूं लेकिन मेरे अधूरे ख्वाब तो जैसे पुरे होने का नाम ही नहीं ले रहे हम दोनों इतनी मेहनत करते हैं उसके बावजूद भी हम दोनों अपनी जिंदगी नही जी पा रहे हैं.
सतीश कहने लगा तुम बिल्कुल सही कह रही हो क्या हम लोग इस बीच कहीं घूमने के लिए चलें.
मेरे पति सतीश ने रविवार के दिन घूमने जाने का प्लान बना लिया पहले हम लोग बच्चों को 3 D कार्टून फिल्म दिखाने के लिए ले गये काफी समय बाद सतीश और मैं साथ फिल्म देख रहे थे.
मै सतीश की तरफ देख रही थी और सतीश बड़े मजे से 3 D कार्टून फिल्म का आनंद ले रहे थे.
उसके बाद हम लोग वहां से हमारे शहर के पार्क में चले गए वहां पर काफी भीड़ थी दोपहर का खाना हम लोगों ने वहीं पर किया.
हमारे बच्चे पार्क में झूला झूल रहे थे और हम दोनों साथ बैठकर आपस में बात कर रहे थे मैं बच्चों की तरफ देख रही थी क्योंकि मुझे डर था कि बच्चे कहीं इधर-उधर ना चले जाएं इसलिए मेरा ध्यान सिर्फ बच्चों की तरफ था.
हालांकि सतीश मुझसे बात कर रहे थे मैं उनकी बातों का जवाब भी दे रही थी लेकिन मेरा ध्यान बच्चों की तरफ ज्यादा था.
हम लोग सब शाम को घर लौटे तो सतीश मुझे कहने लगे आज अच्छा रहा? मैंने सतीश से कहा हां आज तो सब कुछ अच्छा रहा और मुझे बहुत ही अच्छा लगा.
काफी लम्बे समय के बाद हम पति पत्नी दोनों एक दूसरे के साथ में समय बिता रहे थे तो हम दोनों को ही बहुत अच्छा लग रहा था हम दोनो वहां से घर लौट आए थे.
हम लोग काफी थक चुके थे इसलिए सतीश ने उस दिन खाना बाहर से ही ऑर्डर करवा लिया हम लोगों ने खाना खाया और हम सो गए.
हमारी लाइफ में सब कुछ सामान्य चल रहा था लेकिन एक दिन मैं अपने घर से बाहर जा रही थी तो मैंने अपने पड़ोस में देखा कि एक बड़ी सी गाड़ी खड़ी है मैं उसे देखने लगी, गाड़ी में काले शीशे लगे हुए थे अंदर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था पर शायद अंदर कोई पैसे वाला अमीर मर्द बैठा हुआ था.
जब गाड़ी का दरवाजा खुला तो अंदर से एक मोडल जैसे दिखने वाला युवक निकला उसकी उम्र 30 वर्ष के आस पास की रही होगी उसने मुझे कहा भाभी जी आप ऐसे गाड़ी को क्यों देख रही है.
मैंने उस अमीर युवक को पूरी बात बताई वह मुझे कहने लगी मैं आपको अपनी बीएमडब्ल्यू एक्स5 लग्जरी कार की सैर करवाता हूं पहले तो मुझे बड़ा ही अजीब सा लगा लेकिन फिर मैं बीएमडब्ल्यू एक्स5 लग्जरी कार के अंदर बैठ गई.
मैं बीएमडब्ल्यू एक्स5 लग्जरी कार में बैठ गई थी और वह लड़का मुझे काफी आगे तक ले आया था मैंने उसे कहा अब वापस चले तो वह कहने लगा आपके साथ क्या मे सेक्स कर सकता हूं.
मै उसकी तरफ देखने लगी उसने जब मेरी जांघ पर हाथ रखा तो मैं समझ गई कि उसे मुझ जैसी खुबसूरत और जवान महिला से क्या चाहिए.
मैं दुविधा में थी की उसके साथ सेक्स करूँ या नहीं करूँ लेकिन उसके बहुत जिद करने के बाद मैंने भी उसकी बात मन ली.
जब उसने मुझसे कहा कि क्या चुदाई करने कहीं होटल में चले तो मैंने उसे कहा नहीं हम बीएमडब्ल्यू एक्स5 लग्जरी कार में ही सेक्स करेंगे.
फिर वो मेरे और करीब आ गया और उसने मेरे गुलाबी गुलाबी होठों को अपने मुह में लेकर चूमना शुरू किया.
हम लोग सेक्स करने के लिए पीछे की सीट में चले गए उसने मेरे मोटे मोटे मम्मो का दूध भी काफी देर तक चूसता रहा.
मेरे दूध से भरे मोटे मोटे मम्मे पिने के बाद उस अन्तर्वासना से भरे मर्द ने जब मेरी चुत को किसी आवारा कुत्ते की तरह चुसना और चाटना शुरू किया तो मुझे भी मजा आने लगा मेरी चुत से गिला पदार्थ निकलने लगा.
मैं उस पैसे वाले मर्द के लंड से अपनी चुत चुदवाने के लिए पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई थी जैसे ही उसने अपने मोटे लंड को मेरी चुत के अंदर प्रवेश करवाया तो मैं उत्तेजित हो गई और उसका पूरा साथ देने लगी.
मुझे बड़ा मजा आ रहा था उसने मेरे दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया और बड़ी तेजी से मुझे धक्के मारता जाता.
मैंने भी चुदवाने के लिए अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया और वह मेरी गरम चुत चोदने का मजा बड़े अच्छे से ले रहा था और मेरी चुत से अपने लंड की अन्तर्वासना शांत क्र रहा था.
काफी देर तक उसने मेरे साथ सेक्स किया.
मुझे चोदते चदते उसे करीब एक घंटा होने वाला था और अब उसका झड़ने वाला था.
जब उसका वीर्य निकलने को हुआ तो उसने अपने वीर्य को मेरे मुंह के अंदर गिराया तो मैंने उसे अंदर ही ले लिया वह बहुत ज्यादा खुश था और मुझे भी बहुत खुशी हुई.
मैंने उसे कहा अब बताओ तुम मेरे ख्वाबों को कैसे पूरा करोगे उस पैसे वाले युवक ने अपनी गाड़ी से कुछ पैसे निकाले और मुझे दिए.
उस दिन की चुदाई के बाद से उसका जब भी दिल करता वो अपनी अन्तर्वासना शांत करने मेरे घर के बाहर आ जाता और मुझे चोदने के लिए होटल ले जाता और खूब चोदता था और में भी अपना लंड पलता था.
वो मुझे उससे चुदवाने के बदले बहुत सारे पैसे देकर जाता था.
दोस्तों चुदवाने के बदले पैसे मिलने लगे थे और पैसे बनाने का यह तरीका मुझे बहुत अच्छा लगने लगा.
धीरे धीरे मैंने ऐसे पैसे वाले बहुत सरे अमीर मर्दों को अपने जाल में फास लिया और उनसे चुदवाने के बदले पैसे लेने लगे.
अब पैसे कमाने के खातिर मै एक रंडी बन चुकी थी और अमीर यूवकों के साथ अवैध शारीरिक संबंध बनाने लगी थी.
मुझे भी चुदवाने के बदले पैसे मिलने लगे थे और साथ ही साथ मेरी भी अन्तर्वासना पूरी होने लगी थी.
चुदवा चुदवाकर मैंने भी कुछ समय में ही बहुत सरे पैसे जोड़ लिए थी और फिर एक गाड़ी खरीद ली और अपनी चुदाई करवाकर आने वाले पैसे से मैं मेरे अधूरे ख्वाबों को मैं पूरा करने लगी.
दोस्तों मै एक शदी शुदा महिला थी और मुझे गैर मर्दों के लंड से चुदवाने में कोई शर्म नहीं थी…
स्रोत:इंटरनेट