. सच में किसी की चूत में लंडन घुसने के जैसा तजुरबा था। अब सच में भी ऐसा ही मज़ा आता है या नहीं पर, मुझे बड़ा अच्छा लगा। मैं और ज़ोर लगाता गया और मेरा लंड पूरा का पूरा बोतल में घुस गया। फिर मैंने शुरू की बोतल की चुदाई। थोड़ी थोड़ी देर बाद मैं एक दो बूंद तेल टपका देता और पिचक पिचक कर मैं बोतल को चोदता रहा। क्या मस्त मज़ा था। बेशक बोतल थोड़ी टाईट थी, मगर चुदाई का मज़ा पूरा था। मैं यही सोच रहा था कि जो लोग लड़की की चूत मारते हैं, उन्हें भी ऐसा ही मज़ा आता होगा। मुझे बड़ा मज़ा आया, और जब एक कसी हुई टाईट चूत को मैंने जम कर चोदा तो 5 मिनट में ही मेरा पानी गिर गया। ‘ओह…’ कितना आनंद आया, चूत (चाहे प्लास्टिक की ही थी) के अंदर ही अपना माल गिरा कर! मैं वैसे ही बोतल के अंदर डाले लेट गया। कुछ देर बार जब लंड ढीला पड़ गया तो मैंने बोतल से निकाल लिया। फिर बोतल को अच्छी तरह से साफ करके, धोकर उसमें पानी भर कर रख दिया कि अगर कोई देखे तो सोचे के पीने के लिए पानी रखा होगा। उसके बाद तो हर रात यही कहानी होने लगी। मैंने अपनी जान पहचान की हर औरत को अपने ख्यालों में लाकर उस बोतल को चोद दिया। मगर बोतल टाईट थी, तो मुझे थोड़ी, दिक्कत होती थी। फिर मैंने सोचा कि कुछ इंतजाम किया जाए। एक दिन मैंने बाज़ार में एक गुब्बारे वाले के पास गुब्बारे देखे जिन्हें उसने सेब की तरह बना रखा था। कमीनी सोच… मैंने तभी सोच लिया कि अगर इस गुब्बारे को चोद कर देखा जाए, बोतल तो सख्त है, पर ये नर्म है। मैं उससे एक गुब्बारा खरीद लाया, और अपने कमरे में छुपा दिया। रात को मैंने उस गुब्बारे को चोदने की कोशिश की मगर उसमे लंड ही न घुसे, फिर मैंने उसके सुराख पर और अपने लंड पर हल्का सा तेल लगाया। इस बार मेरा लंड बड़े आराम से अंदर घुस गया, मगर दिक्कत ये कि ये बहुत ही ढीली चूत थी, साला बिल्कुल भी मज़ा नहीं आ रहा था। थोड़ी देर करने के बाद जब मज़ा नहीं आया, तो मैंने गुब्बारा खिड़की से बाहर फेंक दिया, और फिर से अपनी पेट बोतल निकाली और फिर से उसमें चोदा, पानी निकला तो मैं संतुष्ट हो कर सो गया। मगर अभी भी मेरी खोज रुकी नहीं थी, एक बढ़िया और अच्छी नकली चूत की। अब वैसे तो बाज़ार में सेक्सी डॉल और बनी बनाई सिलिकोन की चूत मिलती है, मगर वो बहुत महंगी हैं तो मैंने यूटऊब पर भी नकली चूत के लिए सर्च किया। उसमें भी मुझे कुछ बढ़िया आइडियाज़ मिले, मगर सब के लिए, सामान ज़्यादा चाहिए था, और फिर उसको मैं छुपाता कैसे। एक दिन एक और सेक्सी साइट पर एक और वीडियो देखी। उस विडियो में एक आदमी ने लौकी को आधा काट कर उसके अंदर का गूदा निकाल कर उसे एक चूत की तरह इस्तेमाल किया। मुझे यह आइडिया भी अच्छा लगा। अगले दिन मैं बाज़ार से लौकी ले आया। रात को अपने रूम में मैंने पहले उसको बीच से आधा काटा, फिर उसके अंदर का गूदा खुरच खुरच कर निकाला, जब लगा कि यह छेद मेरे लंड के साइज़ का बन गया है तब मैंने अपने लंड को पहले तो हिला हिला कर खड़ा किया, फिर जब मैंने लौकी को बेड पे रख कर उसमे अपना लंड डाला, तो ये तो बिल्कुल आराम से अंदर घुसा, नरमी से घुसा। अंदर से पहले ही गीला होने की वजह से कोई तेल भी लगाने की ज़रूरत महसूस नहीं हुई। ये प्रयोग बहुत बढ़िया लगा मुझे, बड़ा मज़ा ले कर लौकी को चोदा। बहुत अच्छी बीवी साबित हुई, ये लौकी तो। जब झड़ा तो अंदर ही माल गिरा गिया। फिर उस को भी धोकर लिफाफे में बंद करके रख दिया। अगले दो तीन उस लौकी ने मुझे खूब स्त्री सुख दिया। मगर तीन दिन में ही वो 18 साल की जवान लड़की की चूत 80 साल की बूढ़ी औरत की चूत बन गई। उसके बाद एक दिन मैं एक छोटा कद्दू ले कर. आया। उसको चोदा, मगर वो भी ठीक नहीं लगा। एक दिन एक छोटा तरबूज लाया, उसमे सुराख कर के उसको चोदा। मगर असली मज़ा आया, लौकी में ही। मैं अक्सर कहीं दूर से लौकी खरीद कर लाता और फिर उसको चोदता। फिर कुछ भी प्रयोग करके देखे, जैसे मैं लौकी को चोद रहा हूँ तो एक लंबा बैंगन अपनी गांड में भी लेकर देखा। अब जब अपने ही बदन से खेलना है, तो अच्छी बुरी और चीज़ें भी करके देखनी चाहियें। मगर गांड में कुछ लेने का मुझे कुछ मज़ा नहीं आया इसलिए मैं सिर्फ चोदने के लिए ही लौकी की सब्जी लाता हूँ। कभी कभी सोचता हूँ, लड़कियों के लिए भगवान ने कितनी चीज़ें बनाई हैं। बैंगन, लौकी, तुरई, खीरा, कुछ भी अपनी चूत या गांड में ले लो, मगर मर्द के लिए ऐसे कोई सब्जी नहीं बनाई, जिसमें पहले से ही सुराख हो, जिसमें मर्द अपना लंड घुसेड़ सके। आजतक यही चल रहा है। मगर सच में मैं किसी औरत या लड़की चूत मारने को बहुत तड़प रहा हूँ। प्लीज मुझे मेल करें, आपकी मेल पाकर मैं खुद को बहुत खुशनसीब समझूँगा। [email protected]
स्रोत:इंटरनेट