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जंगल में भाभी की चूत की चुदाई

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जंगल में भाभी की चूत की चुदाई 1

. मैं अब बेफिक्र होकर लंड चुसवाए जा रहा था.
भाभी ने मेरे लौड़े को चूस चूस कर और बड़ा कर दिया.
वो कहने लगीं- मुझे बड़ा लंड पसंद है.
तुम्हारा सागर से बड़ा लंड है.
मैं अब काफ़ी जोश में आ गया था.
मैं भाभी का सर दबा रहा था और अपना लंड पूरा अन्दर तक दे रहा था.
भाभी हाथों से लंड की मुठ मार मार कर उसे चूस रही थीं.
इससे मेरा लौड़ा गर्म हो गया.
मैंने सारा माल निकाल भाभी के मुँह में गिरा दिया.
भाभी ने मेरा सारा माल पी लिया और लंड चाट कर सारा माल साफ कर दिया.
फिर भाभी बोलीं- अब तुम मुझे अपने लंड से चोदो.
बस माल अन्दर मत गिराना.
आज मुझे हर स्टाइल में चोदो, अब मुझसे रहा नहीं जाता.
जल्दी करो … चोदो मुझे … आंह चोद दो मेरी चूत.
इसे फाड़ कर रख दो.
मैंने अपने होंठों से उनके होंठों पर चूमना करना शुरू किया.
मैं बहुत तेजी से भाभी को किस कर रहा था और साथ में उनके मम्मों को मसल रहा था.
भाभी के मम्मों के बाद मैंने उनके गाल पर, गले पर, चूत, गांड.
हर जगह चूमा और चूसा.
फ़िर नीचे से हाथ डाल कर उनकी चूत को सहलाने लगा और अन्दर उंगली डालने लगा.
भाभी की चूत में उंगली और बड़े सख्त मम्मों को मैं पूरी ताकत से पी रहा था.
मैं भाभी के मम्मों को मसलने और जोर से दबाने लगा.
मैंने उनके एक निप्पल को अपने मुँह में लेकर दबाते हुए मींजा.
तो वो जोर से सिसकारने लगीं- उह उह आह विकास … आज मुझे पूरी तरह से चुदाई का मज़ा दे दो.
मुझे तेरा लंड चूत में चाहिए.
प्लीज़ जल्दी से डाल दो.
चाहो तो माल अन्दर ही निकाल देना, लेकिन अब सब्र नहीं होता.
मैंने भाभी को सीधा किया और ऊपर चढ़ गया.
मैंने अपना लंड भाभी की चूत के ऊपर रगड़ने लगा.
उनकी चूत पूरी गीली हो गयी थी.
उनकी एकदम टाईट चूत को चोदने के लिए मैंने पहला झटका ही जोर से दे दिया, पर अन्दर नहीं घुस सका.
भाभी गीली चूत की वजह से लंड फिसल रहा था.
फिर भाभी ने एक हाथ से लंड चूत की फांकों में सैट किया.
मैंने उनके एक बूब को मुँह में लिया और एक ज़ोर का शॉट लगा दिया.
लंड अन्दर घुसते ही भाभी ज़ोर से चिल्ला दीं- ओह मर गई … कितना बड़ा है तेरा … आह मुझे दर्द हो रहा है.
जबकि अभी मेरा आधा लंड ही भाभी की चूत में गया था.
मैंने बात करते हुए और एक शॉट दे मारा.
मगर भाभी की चूत काफ़ी टाईट थी.
कुछ देर के दर्द के बाद भाभी ने अपनी गांड ऊपर की और बोलीं- हां … अब लगाओ शॉट.
मैंने एक बार फिर जोर के झटके से अपना पूरा लंड भाभी की चूत में डाल दिया और चुदाई करने लगा.
भाभी मादकता से बोल रही थीं- आह धीरे धीरे करो … मुझे भी मज़ा लेने दो.
लंड चूत की चप चप की आवाज़ आनी चाहिए.
भाभी मेरी पीठ में नाख़ून के निशान छोड़ रही थीं.
मैंने उनके मम्मों को दबाते हुए धीरे धीरे अपने लंड को आगे पीछे करने लगा था.
साथ में बीच में एकाध ज़ोर से शॉट लगा देता था.
कुछ देर बाद भाभी का दर्द भी कम हो गया और वो भी गांड उठाते हुए लंड का मज़ा लेने लगीं.
भाभी जोर से आवाजें निकालने लगीं- ओहो … हए ह्म्म … आ … जोर से … आंह और ज़ोर से करो.
मुझे तुम्हें पूरा अन्दर लेना है.
आंह विकास मर्द की तरह चोदो … आह प्लीज़ स्पीड बढ़ाओ अपनी … आंह मैं आने वाली हूँ.
मैंने अपने झटकों की ताकत बढ़ाई और स्पीड भी … और भाभी को जोर जोर से चोदने लगा.
कुछ देर बाद मैंने भाभी के पैर अपने कंधे पर ले लिए और चुदाई की स्टाइल चेंज कर दी.
अब तो पच पच आवाज़ से सारा माहौल मस्त बन गया था.
थोड़ी देर बाद भाभी झड़ गईं.
फिर भी वो गांड उठा उठा कर मेरा साथ दे रही थीं.
उनकी चूत का रस टपकने लगा था, मुझे उसकी महक आ रही थी.
मुझे और भाभी दोनों को काफ़ी मज़ा आ रहा था.
अब फ़च फ़च की आवाज़ और भी तेज आ रही थी.
थोड़ी देर बाद मुझे लगने लगा कि मैं भी होने वाला हूँ.
मैंने लंड निकाल कर भाभी उल्टा कर दिया और उन्हें कुतिया बना कर पीछे से उनकी चूत में अपना लंड घुसा दिया.
लंड घुसाते ही मैंने शॉट लगाना चालू कर दिए.
मैं पीछे से जोर जोर से धक्के लगा रहा था.
अब मेरा लौड़ा रुकने वाला नहीं था.
मैंने भाभी से बोला- मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है, मेरा होने वाला है.
मैं चूत में निकल रहा हूँ.
भाभी ने कहा- ठीक है … निकाल दो.
मैं गोली ले लूंगी.
मैं पूरी ताकत से भाभी की टाईट चूत में झटके लगा रहा था.
वो बेहाल थीं और स्लो करने के लिए कह रही थीं.
मगर मेरा लंड मानने को तैयार ही नहीं था.
फिर भाभी ने मेरी गोटियां सहलाईं और कुछ तेज झटके के साथ मैंने अपना पूरा माल भाभी की चूत में डाल दिया.
झड़ने के बाद हम दोनों नंगे ही वहां पर पड़े थे.
हमें अब ठंडी नहीं लग रही थी, पूरे पसीने से बेहाल थे.
भाभी ने मुझे थैंक्स कहा और मेरे लंड को चाट कर साफ करने लगीं.
दस मिनट बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.
इस टाइम पर भाभी ने बोला- चूत में दर्द हो रहा है.
कुछ देर बाद में करते हैं.
मैंने ओके कह दिया.
अब भाभी मेरी तरफ गांड करके एकदम चिपक कर लेट गईं.
कुछ देर बाद फिर से चुदाई का दौर चला, और भाभी जी ने मस्ती से चूत लंड का खेल खेला, मैंने भाभी की चूत की चुदाई की.
इसके बाद हम दोनों चिपक कर सो गए.
मैं सुबह जगा, तो मेरा लंड खड़ा था.
मैंने भाभी की गांड में लंड डालने की कोशिश की, लेकिन भाभी ने गांड ज्यादा बार नहीं मरवाई थी.
भाभी को दर्द हुआ, तो वो जाग गईं और बोलीं- आखिरी बार करने दे रही हूँ.
मैंने भाभी की गांड मारी और झड़ने के टाइम मैंने लंड बाहर निकाल कर अपने पैंट से पौंछ कर भाभी के सामने हिलाया, तो भाभी समझ गईं.
उन्होंने बोला- मुझे मुँह में लेना है.
मैंने उनके दोनों मम्मों के बीच में लंड रगड़ते हुए उनके मुँह में लंड डाला और भाभी के मुँह को चोदने लगा.
कुछ ही देर में मैंने सारा माल भाभी के मुँह में निकल दिया.
भाभी ने मेरे लंड को किस किया और ‘मिस यू..’ कहा.
फिर हम दोनों ने अपने कपड़े पहने.
भाभी ने कहा- ये बात कभी किसी को पता नहीं चलनी चाहिए.
मैंने उन्हें हग किया और प्रॉमिस किया कि कभी किसी को पता नहीं चलेगा और ये दुबारा भी नहीं होगा.
हम दोनों ने एक दूसरे को हग किया और एक लंबा किस किया.
भाभी ने मेरे लंड की तरफ़ देखा, वो खड़ा था.
भाभी ने लंड से कहा- हाथ हिलवाओ या कोई और ढूंढ लो.
मेरी नहीं मिलने वाली है.
मैं हंस दिया.
फिर हम खंडहर से बाहर आ गए.
रास्ता समझ आने लगा था.
हम दोनों लोग टेंट में आ गए.
आज भी हम लोग दोस्त हैं और मस्त जी रहे हैं.
कभी कभी भाभी को देखकर भाभी की चूत की चुदाई का मूड होता है, मैं उनको बोलता भी हूँ लेकिन फिर हम लोग कंट्रोल कर लेते हैं.
इस कंट्रोल की वजह है मेरा दोस्त और उनका पति सागर.
दोस्तो, ये थी वो सेक्स कहानी जो मैंने एक पाठक की रिक्वेस्ट पर उसकी आपबीती लिखी थी, उससे सम्पर्क करना सम्भव नहीं है, इसलिए अप मुझे मेल कीजिए और लिखिए कि ये सेक्स कहानी कैसी लगी.
अंत में मैं एक ही बात कहूँगा कि औरतों का सम्मान कीजिए, उनको प्यार और इज़्ज़त दीजिए.
उनकी प्राइवेसी का पूरा ख्याल रखें.
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स्रोत:इंटरनेट