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जवानी का ‘ज़हरीला’ जोश 4

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जवानी का ‘ज़हरीला’ जोश 4 1

. रूम पर जाकर मैं अपने फोन में गे सोशल साइट्स पर चैटिंग किया करता था क्योंकि समाज में तो मुझे नॉर्मल होने का ही शॉ ऑफ करना था न। इसलिए मन बहलाने के लिए गे सोशल साइट्स का सहारा लेना पड़ता था। मैंने एक. स्मार्टफोन भी ले लिया था जिसमें मैंने मशहूर गे सोशल साइट पर अकाउंट बना लिया था। गुड़गाँव में गे भरे पड़े थे लेकिन मेरी पसंद का एक भी नहीं था। किसी से बात होती भी थी तो 4-5 दिन तक उसके बाद ना उसका. मैसेज आता था और न ही मैं मैसेज करने की ज़हमत उठाता था। फोन पर पासवर्ड लगाकर रखना पड़ता था ताकि कोई उस साइट के बारे में जान न ले। नेहा ने कई बार मुझसे मेरा पासवर्ड पूछा लेकिन मैंने उसको भी नहीं बताया. क्योंकि अगर उसे पता लगता कि मैं गे हूं तो सकता था कि वो भी मेरा साथ छोड़ देती। एक दिन की बात है ऑफिस के बाद मैं और नेहा एक मॉल में कॉफी पीने चले गए। वहां से आते-आते काफी देर हो गई। नेहा मेरे साथ मेरे. रूम पर ही आ गई। खाना हम बाहर से ही लेकर आए थे। हमने खाना खाया और इधर-उधर की बातें करने लगे। नेहा ने एकदम से पूछ लिया- तुम ड्रिंक भी करते हो क्या? मैंने कहा- आज तक तो नहीं किया है। सुनकर वो हंस पड़ी, बोली- फिर क्या ज़िंदगी जी रहे हो तुम यार? चलो आज मैं तुम्हें बताती हूं जिंदगी के मज़े कैसे लेते हैं। मैंने कहा- मुझे ड्रिंक नहीं करना है नेहा, मैंने ये सब नहीं किया है आज तक। वो बोली- तो आज कर लो ना। मेरे बहुत मना करने के बाद भी वो नहीं मानी और मुझे बाहर लेकर जाने की ज़िद करने लगी। उसकी दोस्ती की खातिर मैं भी मान गया। हम बाहर जाकर पास की एक वाइन शॉप से बीयर की चार बोतलें लेकर आ गए। रूम पर आकर उसने. बोतलें खोल दीं और वो पूरी बोतल ही मुंह से लगाकर गटकने लगी। मैंने कभी नहीं पी थी, मैं उसको देखे जा रहा था कि ये लड़की होकर कैसे गटक-गटक बीयर पिए जा रही है। उसने कहा- मेरा मुंह क्या देख रहे हो? तुम भी पीओ। मैंने भी उसको देखते हुए बीयर की बोतल मुंह से लगाई और पीना शुरु कर दिया। बड़ा ही गंदा टेस्ट लगा लेकिन फिर भी किसी तरह घूंट-घूंट करके पीता रहा। जब आधी बोतल खत्म हो गई तो मेरा सिर घूमना शुरू हो गया, मज़ा सा आने लगा। उसके बाद मैंने बाकी बची हुई बोतल जल्दी ही खत्म कर दी। अब तक नेहा अपनी दूसरी बोतल भी आधी खत्म कर चुकी थी। सामने टीवी चल रहा था और हम दोनों मस्ती में हंसने झूमने लगे थे। मुझे याद है कि. नेहा ने अपनी दोनों बोतल खत्म करके मेरी दूसरे वाली बोतल जो आधी रह गई थी, मेरे हाथ से छीन ली और पीने लगी। मेरे दिमाग की सोचने की शक्ति अब तक खत्म हो चुकी थी। मैं आराम से जाकर बेड पर लेट गया, काफी अच्छी फीलिंग आ रही थी। पिछली जिंदगी का कुछ भी याद नहीं रहा। इधर नेहा टीवी के सामने आकर नाचने लगी थी और मैं उसे देखकर हंस रहा था। बहुत ही मस्त लड़की थी वो। उस वक्त ‘कांटा लगा…’ काफी फेमस सॉन्ग हुआ करता था. जिसके बाद रिमिक्स की जैसे बाढ़ सी आ गई थी। टीवी पर जब गाना शुरु हुआ तो नेहा ने उस वीडियो वाली लड़की तरह ही एक्ट करना शुरु कर दिया। उसने अपने टॉप के अंदर से अपने चूचों की दरार दिखाना चालू कर दिया।. लेकिन मुझ पर उसका क्या असर होना था। मैं उसे देखकर हंसता जा रहा था। मुझे लगा वो मज़ाक कर रही है। अगले ही पल उसने टॉप को भी उतार दिया। मैं हैरान था, ये लड़की पागल हो गई है। वो ब्रा और स्कर्ट में नाचने लगी। उसके चूचे काफी मोटे थे और वो उनको हिला-हिलाकर मेरे सामने दिखाते हुए नाच रही थी। अब मेरे चेहरे की हंसी गायब हो गई थी। नेहा भी मेरे एक्सप्रेशन देख रही थी। उसने देखा कि मैं उसकी हरकतों पर कैसे. रिएक्ट कर रहा हूं। उसके बाद उसने स्कर्ट भी उतार दी। अब वो ब्रा और पैंटी में थी। उसका फिगर ज्यादा अच्छा तो नहीं था लेकिन ब्रा और पैंटी में कोई उसे देखे तो उसे चोदने के लिए आसानी से तैयार हो जाता। ये. मेरी अब की सोच है। उस वक्त मेरे मन ऐसी कोई फीलिंग नहीं आ रही थी। लेकिन मैं ध्यान से उसको देख ज़रूर रहा था। जब उसने देखा कि मैं सीरियस होकर उसको देख रहा हूं तो उसने टीवी का रिमोट उठाकर टीवी बंद कर. दिया और बेड पर आकर मेरे ऊपर चढ़ गई। हालांकि वो मेरी दोस्त थी लेकिन उसका ये रूप मैंने कभी नहीं देखा था। मैं बेड पर पड़ा हुआ बीयर के सुरूर का मज़ा ले रहा था, नेहा आकर मेरे लंड वाले हिस्से पर बैठ गई और अपनी ब्रा को खोलने लगी। ब्रा खोलते ही उसके चूचे हवा में झूलने लगे। उसने अपने बालों में हाथ फिराया और चूचों को अपने ही हाथों से दबाते हुए मेरी तरफ देखने लगी। मैं चुपचाप लेटा हुआ ये सब देख रहा था। उसने. मेरे हाथ पकड़े और अपने चूचों पर रखवा दिए, वो चाह रही थी कि मैं उनके साथ खेलूं लेकिन मेरे अंदर वो फीलिंग आ ही नहीं रही थी। ऊपर से बीयर का नशा चढ़ा हुआ था। अगर कुछ फीलिंग लाने की कोशिश भी करता तो दिमाग पर काबू था ही नहीं। जब मैंने चूचे नहीं दबाए तो उसने मेरा हाथ अपनी पैंटी में डलवा दिया। उसकी चूत को छूकर मुझे गुदगुदी सी हुई और मैंने उसकी चूत को पैंटी के अंदर ही हल्के से मसाज देना शुरु किया। वो भी. कामुक हो रही थी और अपनी चूत को मेरे हाथ की तरफ धकेल रही थी। मैंने उंगली उसकी चूत में डाल दी। उसने पैंटी निकाल दी और चूत को नंगी करवा दिया। वो दोबारा से मेरे पेट पर बैठी और मेरे हाथ की उंगलियां अपनी. चूत में डलवा कर खुद ही आगे-पीछे होने लगी। मेरा हाथ जब उसकी चूत में जा रहा था तो मुझे भी थोड़ा अच्छा लग रहा था। लेकिन लंड अभी तक सो ही रहा था। ये दिमाग का नशा था शायद जो उसकी चूत में उंगली करने की. फीलिंग का मज़ा ले रहा था। नेहा कामुक होती जा रही थी, उसने अपनी उंगलियां मेरे मुंह में डाल दीं और मेरे ऊपर लेट गई। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या करना है। उसने अब मेरे होठों को चूसना शुरू कर दिया। उसके मुंह से आ रही बीयर की स्मैल से मेरा मूड खराब होने लगा और मैंने उसे अपने ऊपर से हटने को कहा। वो हैरानी से बोली- क्या हो गया? मैंने कहा- कुछ नहीं… मुझे नींद आ रही है। वो बोली- मैं यहां तुम्हारे. सामने नंगी नागिन की तरह नाच रही हूं और तुम्हें नींद आ रही है? कैसे मर्द हो यार तुम? उसके इन शब्दों ने मेरी पुरानी यादों को फिर से ताज़ा कर दिया। मेरा मूड बिल्कुल खराब हो गया और मैंने उससे कहा- यार. मुझे सोने दे, सुबह बात करते हैं। वो बोली- ठीक है, अगर तुम्हें इतनी ही प्रॉब्लम हो रही है तो मैं चली ही जाती हूं। मैंने जवाब में कुछ नहीं कहा। उसने उठकर अपनी ब्रा और पैंटी पहनी और कपड़े पहनकर दरवाज़ा पटकते हुए रूम से बाहर निकल गई। मेरा सारा नशा ढीला हो गया। सिर में दर्द सा महसूस हो रहा था लगा और मैं बिल्डिंग के टेरेस पर चला गया। छत पर पहुंचकर आसमान में निकले चांद को देखने लगा। मेरी गे लाइफ का ये. दूसरा घाव था। मैं खुद को इतना मजबूर और बेसहारा महसूस करने लगा कि वहीं छत के कोने में बैठकर रोने लगा। सोच रहा था कि क्या ज़िंदगी पाई है मैंने। इससे अच्छा तो भगवान हिजड़ा बना देता। कम से कम एक टैग तो. मिल जाता अपने वजूद का। अब दुनिया को कैसे समझाऊं मैं क्या चाहता हूं। मुझे किस चीज़ से खुशी मिलती है। यह सोच-सोचकर आंखों से आंसू बहे जा रहे थे। जिनको बार-बार पौंछने के बाद भी कमबख्त जिद्दी बनकर फिर से. निकल आते थे। घंटे भर तक ऐसे ही उदास उस छत के कोने में बैठा रहा। जब रो रोकर मन थोड़ा हल्का हुआ तो सामने रोड पर आते-जाते ट्रैफिक को देखने लगा। दुनिया के साथ-साथ अपनी ज़िंदगी को समझने की कोशिश करने लगा।. खड़े-खड़े पैर थक गए तो वापस नीचे आकर बिस्तर पर गिर गया… और नींद आ गई.
कहानी जारी है.
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स्रोत:इंटरनेट