. मेरे धक्के का जोर बढ़ रहा था जिससे उसके नंगे चूतड़ बाथरूम की दीवार पर लग जाते थे और फट्ट की आवाज सी हो जाती थी.
इस आवाज को रोकने के लिए उसने अपने एक हाथ को पीछे अपने चूतड़ों पर लगा लिया जिससे उसकी चूत थोड़ा और आगे आ गई.
अब पीछे की आवाज भी बंद हो गई थी.
मेरा लंड पूरा का पूरा उसकी चूत में घुसने लगा.
अब चुदाई में वाकई मजा आ रहा था.
मैं तेजी के साथ उसकी चूत की चुदाई करता हुआ आनंद में डूबने लगा.
वो एक हाथ से मुझे अपनी तरफ खींचने की कोशिश करती हुई पूरा लंड चूत में उतरवा रही थी.
उसकी चूत को चोदने में इतना मजा मुझे पहले दिन भी नहीं आया था.
फिर उसने मुझे पीछे धकेला और लंड को चूत से बाहर निकलवा दिया.
उसने मुझे नीचे बैठने के लिए अपने हाथों से मेरे कंधे पकड़ कर नीचे की तरफ धकेला.
मैं घुटनों के बल बैठ कर उसकी चूत को चूसने और काटने लगा.
उसने टांग उठाकर मेरे कंधे पर रख दी और मेरे सिर को पकड़ कर अपनी चूत में धकेलते हुए मेरे बालों को सहलाने लगी.
उसकी चूत का नमकीन सा पानी मेरे मुंह में स्वाद देने लगा.
मैंने उसकी चूत में जीभ डाल दी और अपनी जीभ से उसकी चूत की चुदाई करने लगा.
वो अपनी गांड को आगे की तरफ धकेलते हुए चूत को मेरे होंठों की तरफ फेंकने लगी.
मेरी जीभ तेजी से उसकी चूत के अंदर-बाहर हो रही थी.
कुछ देर तक उसने मजे से चूत चटवाई और मुझे दोबारा से खड़ा होने के लिए ऊपर की तरफ खींचा.
मेरा लंड अब तक थोड़ा डाउन हो गया था.
उसने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ कर सहलाया और फिर से मेरा लौड़ा तन गया.
मैंने दोबारा से उसकी चूत में लंड को डालकर उसे चोदना शुरू कर दिया.
उसकी चूत को चोदते हुए मैं उसके सूट के ऊपर से उसके चूचों को दबाने लगा.
उसके चूचे आज पहले से ज्यादा टाइट लग रहे थे.
उनके साइज में भी थोड़ा फर्क लग रहा था.
मैंने सोचा कि शायद सूट की वजह से ऐसा लग रहा है.
मैं तेजी से उसकी चूत को पेलता रहा और दस मिनट में मेरे लंड ने उसकी चूत में अपना माल गिरा दिया.
मैं हाँफने लगा और उसके कंधे पर सिर रख कर वहीं खड़ा हो गया.
मेरी सांसें तेजी से चल रही थीं.
एक तो गर्मी का मौसम था और ऊपर से इतनी गर्मा-गरम चुदाई हो गई.
पूरे बाथरूम में उमस सी भर गई.
फिर किचन में बर्तन गिरने की आवाज हुई तो हम दोनों हड़बड़ा गये.
मैंने सोचा कि अगर किचन का काम खत्म हो गया और जागृति बाहर आ गई तो आज उसे फिर से हमारी चुदाई का पता लग जाएगा.
मैंने अपनी लोअर को ऊपर की तरफ खींच कर अपनी कमर पर बांधा और बाथरूम के दरवाजे से बाहर निकलने लगा.
मैं गद्दे पर जाकर लेटने ही वाला था कि तभी लाइट आ गई.
लाइट आते ही मैंने पंखा चलाया और अपने माथे का पसीना पोंछने लगा.
मैंने टीवी का रिमोट उठा कर टीवी ऑन करने के लिए हाथ आगे ही किया था कि मुझे किचन से मनीषा आती हुई दिखाई दी.
मैं उसकी तरफ ऐसे देख रहा था जैसे मैंने कोई भूत देख लिया हो.
मेरे हिसाब से मनीषा को बाथरूम में होना चाहिए था तो फिर वह किचन से कैसे बाहर आई? मैंने बाथरूम की तरफ देखा तो जागृति बाहर हॉल की तरफ चली आ रही थी.
उसने मुंह धो लिया था और उसको पौंछते हुए वो हॉल की तरफ बढ़ रही थी.
इधर मनीषा मेरे बगल में आकर बैठ गई थी.
इसका मतलब वह जागृति थी जो मुझे बाथरूम में लेकर गई थी? अंधेरे का फायदा उठा कर उसने अपनी चूत चुदवा ली मेरे लंड से? मैं उसकी चालाकी पर हैरान था.
वह मेरे पास आकर बैठ गई.
मैंने उसकी तरफ देखा तो वह मुस्करा रही थी.
मैंने फिर मनीषा की तरफ देखा और फिर सीधा टीवी देखने लगा.
कुछ ही देर में मामी और मनोज भी घर में दाखिल होते हुए दिखाई दिये.
मामी सीधे अपने कमरे में चली गई और मनोज हमारे साथ बैठ कर टीवी देखने लगा.
अब जागृति आराम से बैठ कर हमारे साथ फिल्म देख रही थी.
रात को सोते समय मैंने अनजाने में हुई जागृति की गर्मा-गर्म चुदाई के बारे में सोचकर मुट्ठ मार डाली.
उन दोनों बहनों ने एक दूसरे के साथ लुकाछिपी करते हुए अपनी चूतें चुदवा लीं.
मगर मेरी तो जैसे लॉटरी लग गई थी.
इस बारे में मैंने मनीषा से भी कोई जिक्र नहीं किया कि जागृति भी मेरे लंड के नीचे से चुद कर निकल चुकी है.
एक ही घर में दो-दो जवान चूतें मिल गईं मुझे.
अगले दिन जब मनीषा बाथरूम में नहाने गयी हुई थी और घर मे कोई नहीं था तो मैंने जागृति से पूछा- तुम्हें डर नहीं लगा रात को ऐसे बाथरूम में चुदाई करवाते हुए? वो बोली- जब मेरी बहन को अपनी चूत में तुम्हारा लंड चोरी से लेते हुए डर नहीं लगा तो मैं कैसे पीछे रहती.
वो मजे ले सकती है तो मैं क्यों नहीं? उस दिन के बाद से वो दोनों बहनें अपनी चूतें मुझसे चुदवाने लगीं.
मगर अभी तक उन्होंने एक दूसरे को इस बात की भनक नहीं लगने दी कि मैं दोनों की ही चूतों के मजे लेता हूं.
जागृति तो मनीषा के बारे में जानती थी लेकिन मनीषा अभी भी यही सोच रही थी वो छिपते-छिपाते हुए ही अपनी चूत मुझसे चुदवा रही है.
उन दोनों बहनों के साथ लुक्का-छिपी का ये खेल मैंने काफी दिनों तक खेला और फिर मैं अपने घर आ गया.
दोस्तो, ये थी मेरी कहानी.
आपको ये कहानी कैसी लगी.
क्या मैंने उन दोनों बहनों की चूत मारकर सही किया? या मुझे मनीषा को बता देना चाहिए था कि उसकी छोटी बहन जागृति भी मुझसे चुदाई करवा रही है? आप इस बारे में अपने विचार जरूर साझा करें.
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स्रोत:इंटरनेट