. मामी ने मुझसे इशारे में एक तरफ आने के लिए भी कहा, मगर न जाने मेरी सारी चंचलता किधर घुस गई थी.
उस दिन मामी चली गईं … मगर मुझे अभी भी नहीं मालूम था कि मामी दिल्ली रहने आ गई हैं.
मुझे लगा कि मामी कहीं घूमने जा रही हैं.
शाम को मामी नहीं आईं … और मुझे भी कुछ काम लग गया, तो मैंने सोचा कि मामी वापस चली गई हैं.
दूसरे दिन, मैं छत पर बैठा पढ़ रहा था, अचानक मामी छत पर आ गईं.
मैं थोड़ा असहज हो गया कि मामी रात को घर पर ही रही थीं और मैंने उनसे बात ही नहीं की.
मामी ने पूछा- तुम फोन पर जैसे हो … रियल में वैसे क्यों नहीं लगते? मैंने थोड़ा संभलते हुए कहा कि नहीं मामी … ऐसी कोई बात नहीं है.
मामी पूछने लगीं- फिर जैसे फोन पर बात करते हो, सामने से वैसे क्यों नहीं करते.
मामी मुझसे ये सब पूछ रही थीं और मेरी निगाहें अब मामी के उभरे हुए चूचों पर टिक गई थीं.
मेरी मामी पहले से थोड़ी सी मोटी हो गई थीं … लेकिन उनकी चूचियां मुझे पहले से भी ज़्यादा मोटी दिख रही थीं.
आज मामी लाल रंग की साड़ी और स्लीवलैस ब्लाउज पहने हुए थीं.
उनके बदन से वो ड्यू वाली खुशबू हवा में मदहोशी फैला रही थी.
उस मदमस्त कर देने वाली महक से मुझे लग रहा था कि अभी मैं मामी को अपनी बांहों में भर लूं और उनको पूरा का पूरा खा जाऊं.
मुझे इतनी गहरी सोच में डूबा हुआ देख कर मामी ने मुझे हल्का सा धक्का दिया और बोलीं- कहां खो गया? मैंने मुस्कुराते हुए का कहा- नहीं नहीं … कहीं नहीं … मामी … बस कुछ नहीं.
फिर हम दोनों बातें करने लगे.
थोड़ी ही देर में हम दोनों में वो वाली बातें आ गईं, जैसे फोन पर हुआ करती थीं.
मैंने एक बार सीढ़ी से नीचे झांक कर देखा.
उधर कोई नहीं था.
मैंने मामी से धीरे से कहा- मामी आपके चुचे सच में कमाल के हो गए हैं … ऐसे लगते हैं, जैसे पके हुए आम हों.
इस पर मामी ने भी मज़ाक करते हुए बोलीं- तो कभी फ्लैट पर इसी बहाने से आ जाइओ.
उधर इन आमों का जूस भी पी लेना.
मामी के मुँह से फ्लैट शब्द सुनकर मुझे थोड़ा अचंभा सा हुआ.
मैंने पूछा- फ्लैट … कैसे? वो बोलीं- हम पास वाले DDA फ्लैट में शिफ्ट हो गए हैं.
तेरे मामा ने उसको किराए पर लिया हुआ है.
ये सुनकर मैं एक बार के लिए तो थोड़ा उदास हो गया.
पर मामी बोलीं- टेंशन ना ले … सही किया, जो तेरे मामा ने फ्लैट किराए पर ले लिया.
अब तेरा 9 इंच का केला मैं आराम से देख सकती हूँ.
मामी ये कहकर हंसने लगीं और जल्दी से अपनी गांड मटकाते हुए नीचे चली गईं.
दोस्तो, ये सुनकर मुझे तो पता नहीं क्या हो गया था.
मैंने तो ये बात मामी से मज़ाक में बोली थी, लेकिन मामी के दिमाग में अभी भी मेरे 9 इंच के लंड वाली बात चल रही थी.
ये सोच सोच कर उस रात मैंने दो बार मुठ मारी.
अब तो मेरे दिल और दिमाग़ पर बस मामी ही मामी छा गई थीं.
मैं सारे दिन हर वक्त सिर्फ़ और सिर्फ़ मामी के ही सपने देखता रहा.
मैं सुबह ही मामी के फ्लैट पर चला गया और मामा व बच्चों से मिल आया.
मामा को मुझे उधर पाकर अच्छा लगा.
मैंने मामा से कहा भी कि मुझे तो मालूम ही नहीं चला कि आपने फ्लैट किराए पर ले लिया है.
उधर क्या दिक्कत थी? मामा कुछ नहीं बोले … बस हल्के से मुस्कुरा दिए.
कुछ दिनों बाद ही मामा ने बच्चों को पास के एक स्कूल में एड्मिशन दिलवा दिया और फिर जॉब पर जाने लगे.
मेरी मामी से फोन पर रोज बात होती रहती थी.
मामा की जॉब सेल्स की थी और उनकी कंपनी भी काफ़ी दूर थी.
मामा सुबह 8 बजे ही घर से निकल जाते थे और लेट नाइट ही घर आते थे.
एक दिन मेरी मम्मी को कुछ सामान मामी को देना था, तो वे बोलीं कि अतुल एक बार मामा को फोन करके पूछ ले कि वो आकर सामान ले जाएं.
मैंने मामा को फोन लगाया और अपनी मम्मी से बात करवाई.
फ़ोन स्पीकर पर था, तो मैं भी आवाज़ सुन सकता था.
मामा बोल रहे थे- मैं तो कब का घर से निकल गया हूँ दीदी … तुम अतुल को घर पर भेज देना.
उसकी मामी सामान ले लेगी.
मम्मी ने ओके कह कर फोन काट दिया.
फिर उन्होंने मुझसे कहा- तुम ज़रा अपनी मामी को फोन लगा कर पूछ कि वो घर पर है कि नहीं.
ये सब सुन कर मैं मन ही मन बहुत खुश हो रहा था.
मैंने फोन लगाया और झट से कहा- मामी जी मेरी मम्मी आपसे बात करेंगीं.
वहां से मामी की आवाज़ आई.
वो बोलीं- दीदी जी नमस्ते.
मम्मी ने कहा- थोड़ी देर में मैं अतुल को कुछ सामान देकर भेज रही हूँ … तुम घर पर ही हो ना! मामी ने कहा- हां दीदी जी … मैं घर पर ही हूँ … मैं कहां जाऊँगी.
मम्मी ने मुझे कुछ सामान दिया और बोलीं कि लो ये सामान मामा के घर देकर आओ.
मैंने कहा कि मैं थोड़ी देर उनके बच्चों के साथ भी खेल लूंगा.
… तो मैं देर से ही आऊंगा.
इस पर मम्मी बोलीं- कोई बात नहीं … पर जल्दी आ जइयो.
मैं अन्दर ही अन्दर बहुत खुश हो रहा था.
मैंने मामी के घर जाने की तैयारी की.
सबसे पहले मैं वॉशरूम में गया और अपनी झांट के बालों की शेविंग की और मामी के नाम की एक मुठ भी वहां मारी.
फिर अच्छे से नहा धोकर सामान लेकर मामी के घर चल दिया.
उस समय दिन के लगभग 11 बज रहे होंगे.
मैं सामान लेकर मामी के फ्लैट के सामने खड़ा था.
मैंने घंटी बजाई … बस थोड़ी देर में ही मामी नाइटी में बाहर आ गईं और दरवाजा खोलकर मुस्कुराते हुए बोलीं- आओ अतुल आओ … कैसे हो … मैं तुम्हारा ही इन्तजार कर रही थी.
अब मैं क्या बताऊं मामी को कि मैं कैसा हूँ.
बस आपको ही सोच कर मेरा सोच कर ही मेरा लंड फड़फड़ाता रहता है.
मैंने मामी को गौर से देखा, तो ऐसा लगा कि जैसे मामी ने अभी नहाया नहीं था.
उनकी अलसाई जवानी इस समय कहर बरपा रही थी.
मामी ने मुझे अपने कमरे में ले जाकर बेड पर बिठाया और मेरे सामने कोल्ड ड्रिंक और नमकीन की प्लेट रखते हुए कहा- अतुल तू ये खा … जब तक मैं नहा कर आती हूँ.
मैंने उनसे पूछा- बच्चे कहां हैं? मामी जाते जाते बोलीं कि वो तो स्कूल गए हैं … दो बजे तक आएंगे.
उनके इस फ्लैट में उनके रूम में ही बाथरूम लगा हुआ था.
मामी मुझे नमकीन और कोल्डड्रिंक देकर नहाने चली गईं.
उनकी मटकती गांड देख कर मेरे दिल में तो जैसे सांप लोट गया था.
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स्रोत:इंटरनेट