. बस ऐसे ही बोलते बोलते मां ने मेरा चेहरा अपने हाथों में पकड़ कर मेरे माथे पर किस किया, फिर गालों पर चूमा और फिर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
मैं भी इससे मदहोश हो गया था.
मैंने भी उन्हें अपनी बांहों में कस लिया.
मैं भी उन्हें साथ देने लगा.
मैं भी उनके होंठों चूसता रहा.
हम दोनों एक दूसरे की पीठ पर हाथ घुमा रहे थे.
हम दोनों की सांसें बहुत तेज चलने लगी थीं.
मेरे दोनों हाथ उनके मुलायम सेक्सी बदन पर फिरने लगे थे.
वो भी मेरी कमर, पीठ, जांघों पर हाथ फिरा रही थीं.
इससे मेरा लंडा खड़ा होने लगा.
मेरी लुंगी में तंबू सा बन गया था.
लंड खड़ा हुआ, तो मैंने झट से अपने हाथ मां के बदन से हटा लिए.
मां बोलीं- क्या हुआ हर्षद! मैं बोला- मां हम दोनों ये सब गलत कर रहे हैं.
तुम मेरी मां हो.
ये सब करना पाप है.
ये कह कर मैं खड़ा हो गया.
तभी मेरी लुंगी में तंबू बना देखकर मां बोलीं- अगर ये सब पाप है, तो ये ऐसा क्यों हो गया? उन्होंने वैसे ही तंबू को पकड़ कर मेरा लंड हिला दिया.
मेरी तो फट रही थी.
मां के पकड़ने से मेरा लंड तो और जोश में आने लगा था.
मेरे पास इसका कुछ जवाब नहीं था.
मैं बोला- पता नहीं, कल से ऐसा क्यों होने लगा है.
मां बोलीं- तुम एक मर्द हो और मैं एक औरत हूँ.
इसलिए सेक्स भावनाएं जागृत होती हैं.
तुम अब बड़े हो गए हो.
देखो तुम्हारा लंड कितना बड़ा और लंबा हो गया है.
ये कहकर मां खड़ी हो गईं और मुझसे लिपट गईं.
उन्होंने मुझे अपनी बांहों में कसके जकड़ लिया था.
उनके दोनों कड़क मम्मे मेरे सीने पर दब गए थे.
उनकी गर्दन मेरे कंधे पर थी.
मैं भी अपने आप पर काबू नहीं रख पाया.
मेरे भी हाथ उनकी पीठ और कमर को सहलाने लगे थे.
मेरा लंड भी उनकी जांघों के बीच जाकर चुत से टकरा रहा था.
मां रोने लगी थीं और उनके आंसू बहकर मेरे कंधे को गीला कर रहे थे.
ये महसूस करते ही मैं एकदम से होश मैं आया और अलग हो गया.
मैंने पूछा- मां आप क्यों रो रही हो? मां- नहीं हर्षद, मैंने बरसों से इन आसुँओं को बहुत रोके रखा है … जी भर के रो लेने दे मुझे … मैं बहुत प्यासी हूँ हर्षद.
मैं किसी मेरा दुःख कैसे बताऊं … अगर मेरी मां या बहन होती, तो उन्हें बता सकती थी.
सब कुछ है मेरे पास … लेकिन मेरे जिस्म की प्यास को मैं कैसे बुझाऊं.
दिन तो तुम लोगों के साथ निकाल लेती हूँ.
लेकिन रात जल्दी नहीं कटती.
वो आगे बोली- मैं क्या करूं हर्षद … तुम ही बताओ.
मैं तो पराये मर्द के बारे में सोच भी नहीं सकती.
अपने घर की इज्जत का सवाल है … और मैं अपने घर की इज्जत पर कोई दाग नहीं लगने दूंगी हर्षद.
एक तुम ही मेरी मदद कर सकते हो हर्षद.
मैं बोला- मां अगर तुम यही चाहती हो, तो मैं तैयार हूँ.
मैं तुम्हें हमेशा खुश देखना चाहता हूँ.
ये सुनकर मां मुझे लिपटकर बोलीं- आय लव यू हर्षद.
मैंने भी मां को बांहों में भर लिया और कहा- आय लव यू मां.
मां बोलीं- हर्षद जब हम दोनों अकेले हों, तो तुम मुझे सिर्फ अदिति कहकर ही बुलाओगे.
ये कह कर वो मुझे किस करने लगीं.
मेरा लंड उनकी चुत पर ऊपर से ही रगड़ रहा था.
अब मां बोलीं- चलो अब देर न करो … जल्दी मेरी प्यास बुझा दो.
अब नहीं रहा जाता हर्षद.
मैं भी बहुत जोश में था.
मैंने मां को उनकी कमर के नीचे हाथ डालकर उठाया और उनके बेडरूम में ले गया.
मैंने मां को बेड पर लिटा दिया.
मैं भी अपनी बनियान और लुंगी निकालकर उनके ऊपर चढ़ गया और किस करने लगा.
उन्होंने भी मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगीं.
मां अपनी जीभ मेरे मुँह में डालकर मुझे चूसे रही थीं.
मैं भी अपनी जीभ उनके मुँह में डाल रहा था.
आह क्या बताऊं … ये मेरे लिए अजीब अनुभव था … मुझे बहुत मजा आ रहा था.
फिर मैंने अपने हाथ उनके कड़क मम्मों पर रख दिए और अब मैं मां के मम्मों को मसलने लगा था.
मां मादक सिसकारियां भरने लगी थीं.
कुछ देर की चूमाचाटी के बाद मां बोलीं- आह हर्षद मेरी नाइटी, ब्रा, पैंटी निकाल कर नंगी कर दो मुझे.
मैं भी यही चाहता था.
मैंने उनकी नाइटी निकाल दी.
फिर ब्रा और पैंटी भी उतार दी.
वाह क्या मदमस्त जिस्म था मेरी जवान सौतेली मां का … मैं नशीली निगाहों से उनका मस्त जिस्म देखने लगा.
मां के कड़क उभरे हुए मम्मे, पतली कमर और मुलायम जांघें … और उन दोनों चिकनी टांगों के बीच छुपी हुई गुलाबी चुत एकदम साफ थी.
शायद मां ने सुबह ही अपनी चुत की झांटें साफ की थीं.
मैं तो मां की चुत देख कर अपने होश खो बैठा था और बस देखे जा रहा था.
तभी मां चुत उठाते हुए बोलीं- हर्षद सिर्फ देखते रहोगे क्या? चलो जल्दी से अपना जांघिया निकालो न! मैं बोला- नहीं अदिति … तुम ही उतार दो.
मां उठीं और उन्होंने मेरा जांघिया नीचे खींच दिया.
मेरा आधा सोया हुआ लंड झट से आजाद हो गया और फुदकने लगा.
उन्होंने मेरे लंड को निहारते हुए मेरी जांघिया पैरों से निकाल दी.
अब मैं बिस्तर पर घुटनों के बल बैठा था.
मां ने अपने दोनों हाथों में मेरा लंड ले लिया और उसे सहलाने लगीं.
मेरा पूरा बदन रोमांचित और गरम होने लगा.
मेरा साढ़े सात इंच लम्बा और मोटा लंड लोहे जैसा सख्त हो गया था.
मां लंड हाथ से सहलाते हुए बोलीं- हर्षद तेरा लंड कितना लंबा और मोटा है.
ये तो मेरी तो चुत फाड़ देगा … तेरे पिताजी का तो पांच इंच ही लंबा है और पतला सा है.
हमारी शादी के बाद छह महीने तक ही मुझे चुदाई का मजा मिल सका.
फिर तेरे पिताजी का तो दो मिनट में हो जाने लगा था … और मैं वैसे ही प्यासी सो जाती थी.
अब मेरी प्यास तो ये तुम्हारा ये तगड़ा लंड ही बुझाएगा हर्षद.
ये कहते हुए उन्होंने मेरे लंड के सुपारे पर अपनी जीभ गोल गोल घुमा दी.
इससे मेरे तो पूरे बदन में जैसे करंट सा दौड़ गया था.
मैंने मां को बेड पर लिटाया और 69 की पोजीशन बनाते हुए मैं उनके ऊपर आ गया.
मां की टांगों को फैलाकर मैंने उनकी गुलाबी चुत पर किस किया.
मां के मुँह से एक मीठी आह निकल गयी.
वो भी मेरे लंड पकड़ कर मुँह लेने की कोशिश करने लगीं … मगर बड़ा लंड होने के कारण मां के मुँह में लंड नहीं जा पा रहा था.
मां मेरे लंड का सुपारा चूसने लगीं.
मुझे भी जोश भरने लगा था.
मैंने कोशिश करके अपना लंड उनके मुँह में दे दिया.
अब वो लंड मस्ती से चूसने लगी थीं.
मेरी कामुक मां की चुत चुदने के लिए फड़क रही थी और मैं मां बेटा की चुदाई की कहानी का पूरा रस अगले भाग में लिखूंगा.
आपके मेल मुझे उत्साहित करेंगे.
[email protected] मां बेटा की चुदाई कहानी जारी है.
स्रोत:इंटरनेट