. नमस्कार दोस्तो। आप सभी की कोमल अपनी एक और कहानी के साथ आपके सामने पेश है। मेरी पिछली कहानी गेस्ट हाउस की मालकिन को आप सभी ने इतना ज्यादा पसंद किया उसके लिए आप सभी लोगों का दिल से शुक्रिया। पर आप सभी. लोगों से मैं माफी चाहती हूँ कि मैं आप लोगों के मेल का जवाब नहीं दे सकी क्योंकि मुझे हजारों की संख्या में मेल आते हैं जिसका जवाब दे पाना मेरे लिए तो असंभव ही है। फिर भी आप लोगों का इतना प्यार देने के. लिए एक बार फिर से शुक्रिया। जैसा कि मैं हमेशा कहती हूँ कि मैं जब भी कहानी लेकर आऊँगी तो किसी न किसी सच्ची घटना पर ही लाऊँगी ताकि आप लोगों को भी कहानी पढ़ने में मजा आये। बनावटी कहानियों में न आपको अच्छा. लगने वाला है और न मुझे … इसलिए भले ही मैं कम कहानी लिखती हूँ पर किसी न किसी सच्ची घटना पर ही कहानी लिखती हूं। आज की कहानी भी मेरी एक बहुत अच्छी सहेली द्वारा भेजी गई है जो कि उसकी सच्ची कहानी है जिसमें. मैंने अपने हिसाब से बदलाव किए हैं.
उम्मीद करती हूँ कि ये कहानी भी आप लोगों को पसंद आएगी। तो दोस्तो, चलते हैं आज की देसी हॉट गर्ल सेक्स कहानी में! यह कहानी सुनें.
उन लोगों ने दीदी से कुछ बाते की और कुछ समय बाद चले गए। दो दिन बाद उनका फोन आया और उन्होंने बताया- हमें आपकी छोटी बेटी पसंद है मतलब कि मैं! मगर पापा ने उनसे कह दिया- अभी वो काफी छोटी है और अभी उसकी शादी के लिए समय है। और लड़के की उम्र भी. उससे दुगनी है इसलिए ये तो नहीं हो सकता। उन्होंने बाद में बताने का बोला। पापा ने इस बार भी सोच लिया था कि रिश्ता नहीं होगा। कई दिनों बाद उनका फिर से फोन आया और उन्होंने रिश्ते के लिए हा कह दिया। फिर. क्या था कुछ महीनों में ही दीदी की शादी हो गई। शादी के 3 महीने बाद मैं दीदी के ससुराल घूमने के लिए गई। मैं वहाँ 15 दिनों तक रुकी थी, इस दौरान मैं जीजा से काफी घुलमिल गई थी। दीदी तो घर के काम में व्यस्त रहती और मैं और जीजा बाइक से कई जगह घूमने के लिए जाते। जीजा मुझसे काफी मजाक करते थे और मजाक में मुझे आधी घर वाली बोलते थे और कहते थे कि अगर तुम्हारे पापा ने हा कर दी होती तो आज तुम मेरी बीवी होती। वो. जब भी मुझे बाइक पर लेकर जाते तो जानबूझकर ब्रेक मारते जिससे मैं उनकी पीठ पर चिपक जाती और मेरे बड़े बड़े दूध उनकी पीठ पर दब जाते। घर पर भी जब मैं अकेली रहती तो वो मेरे पास आ जाते और कही मेरी बांहों को. सहलाते तो कही अपने पैरों से मेरे पैरों को सहलाते। पता नहीं क्यों … मगर उनका ऐसा करना मुझे अच्छा लगने लगा और मैं भी उनको कुछ नहीं बोलती। धीरे धीरे मैं उनकी तरफ आकर्षित होने लगी थी, मैं इस बात को वो भी समझ चुके थे और वो भी अब मेरे अकेले होने का फायदा उठाने लगे। उन्होंने अब मजाक मजाक मेरे दूध में हाथ लगाना शुरू कर दिया। मेरी तरफ से किसी प्रकार का विरोध न पाकर वो पूरी तरह से निश्चिन्त हो गए थे कि मैं. अब उनका विरोध नहीं करूंगी। जिस दिन मुझे वापस अपने घर जाना था उसके ठीक एक दिन पहले रात में 10 बजे मैं खाना खाने के बाद ऊपर छत पर घूमने के लिए चली गई। दीदी की सास अपने कमरे में सो चुकी थी और दीदी और. जीजा अपने कमरे में चले गए थे। मुझे छत पर टहलते हुए कुछ समय ही हुआ होगा कि जीजा वहाँ पर आ गए। कुछ देर वो मुझसे बात करते हुए आसपास का जायजा लेने लगे और अचानक से मुझे पकड़ कर छत पर ही बने बाथरूम में ले. गए। इस बार भी मेरी तरफ से कुछ खास विरोध न पाकर उनका हौसला बढ़ गया था। उन्होंने मुझे बाथरूम में ले जाकर कहा- शुभी, मैं तुमको पसंद करने लगा हूं। “नहीं जीजा जी, ये गलत है किसी को पता चला तो भारी बदनामी हो जाएगी प्लीज आप ऐसा मत करिए।” “किसी को कुछ पता नहीं चलने वाला … बस तुम मुझ पर भरोसा रखो।” मेरी नजर झुक गई और मुँह से एक भी आवाज नहीं निकली.
जीजा ने मुझे अपनी आगोश में लेते हुए मेरे मुलायम फड़कते होंठों पर अपने होंठ रख दिये। मैं बिना कुछ सोचे समझे अपने आप को उनको सौम्प चुकी थी। वो मेरे होंठों को चूमने के साथ साथ मेरी जीभ को भी अपने होंठों और दांत में दबा दबा के चूस रहे थे। उस वक्त मैं सारी दुनिया को. जैसे भूल गई थी और उस पल का मजा ले रही थी। उनके दोनों हाथ मेरी पीठ को सहलाते हुए धीरे धीरे मेरी गांड तक पहुँच गए और मेरी गांड को सहलाते हुए मुझे अपनी तरफ चिपका लिए। मैंने हाफ लोवर पहना हुआ था और मेरी. पुद्दी उनके लंड से चिपक गई। पहली बार किसी मर्द के लंड का स्पर्श मुझे हुआ था। जीजा ने मेरी टीशर्ट को मेरे गले तक उठा दिया और साथ में मेरी ब्रा को भी ऊपर चढ़ा दिया। मेरे दोनों दूध आजाद होकर उनके सामने आ. गए। मेरे तने हुए दूध को देखकर वो उनपर टूट पड़े और जोर जोर से दबाते हुए मेरे निप्पल को अपने मुँह में भरकर चूसने लगे। “आहह उह आहह उम्म्ह हहह आह जीजाआआ … बससस्स … नहींईईई छोड़ो … ऊऊऊ बसस्स सस!” मुझे उनके. दबाने से बहुत दर्द हो रहा था और मैं तड़प रही थी। जल्द ही मेरे दोनों दूध लाल हो गए। इसके बाद उन्होंने अपना एक हाथ मेरे लोवर के अंदर डाल दिए और मेरी पुद्दी को सहलाते हुए मेरे दूध को चूसते जा रहे थे। धीरे. धीरे उन्होंने अपनी एक उंगली मेरी पुद्दी में उतार दी। मैं एकदम से उछल गई मगर उन्होंने मुझे दूसरे हाथ से थाम लिया और आहिस्ते आहिस्ते उंगली से ही मुझे चोदने लगे। बस कुछ पल में ही मैं झड़ गई और जीजा के ऊपर. टिक कर खड़ी हो गई। वो समझ गए थे कि मैं झड़ चुकी हूं और उन्होंने अपनी उंगली निकाल ली। इसके बाद जीजा मेरे कान के पास आकर बोले- तुम्हारा तो निकल गया अब मैं क्या करूँ? “क्या मतलब?” “मेरा भी निकाल दो तुम!”. “कैसे? “अपने हाथ से हिला दो।” पहले तो मैं मना करती रही फिर उन्होंने लंड बाहर निकाल कर मेरे हाथ में दे दिया। कसम से इतना बड़ा लंड अपने हाथ में पाकर मैं डर गई। अच्छा हुआ उन्होंने मुझे लंड से नहीं चोदा. था। नहीं तो पता नहीं उस वक्त मेरी क्या हालत होती। मैं अपने हाथ से लंड को हल्के हाथों से आगे पीछे करने लगी और जीजा फिर से मेरे होंठों को चूमने लगे। जैसे जैसे वो मेरे होंठों को चूम रहे थे मेरे हाथ भी. तेजी से चल रहे थे। फिर कुछ समय बाद वो बोले- बैठकर हिलाओ। मैं अपने घुटनों पर बैठ गई और जोर जोर से लंड को हिलाने लगी। लंड का बड़ा सा गुलाबी सुपारा बार बार चमड़ी से बाहर निकल रहा था.
मुझे उस वक्त पता नहीं अजीब सी कशिश होने लगी और मैं अपना चेहरा लंड के पास ले गई। उसमें से एक अजीब सी गंध आ रही थी जिससे मैं और भी मदहोश हो उठी। मैं अपने होंठों से लंड को चूमने लगी और अचानक से ही लंड के सुपारे को मुँह में. डाल लिया। मैं किसी आईस क्रीम की तरह लंड को चूसने लगी। जीजा के मुँह से आआह आहाह की आवाज आने लगी। उन्होंने दोनों हाथों से मेरा सर पकड़ लिया और लंड पर आगे पीछे करने लगे। पूरा का पूरा लंड मेरे गले तक उतरने. लगा। वो बहुत जोश में आ गए थे। मेरे मुँह से बहुत ही गंदी आवाज निकल रही थी। मुँह से पानी और लार बह रही थी। जीजा अब जोर जोर से मेरे मुँह को ही चोदने लगे। अचानक से उनकी रफ्तार काफी तेज हो गई और उन्होंने. लंड मेरे मुंह के अंदर तक डाल कर मेरे सर को जोर से पकड़ लिया और अपना पूरा वीर्य मेरे मुँह में भर दिया। रुक रुक कर तेज गर्म पिचकारी मेरे मुँह में निकल रही थी। ज्यादातर वीर्य तो मेरे अंदर चला गया और बाकी. का मेरे गालों पर बह रहा था। मेरा मुँह और मेरे गाल उनके चिपचिपे वीर्य से सराबोर हो गया। फिर उन्होंने अपना लंड बाहर निकाल कर अपना लोवर पहना और मैं उठकर अपने मुँह को पानी से साफ करने लगी। मैंने भी अपने. कपड़े ठीक किये और नीचे चली गई। सारी रात मुझे नींद नहीं आई और अचानक हुए किस कांड के बारे में सोच सोच कर मैंने किसी तरह से रात काटी। बार बार मेरे सामने जीजा का वो लंबा सा मोटा लंड आ रहा था। अगली सुबह मैं. जल्दी नहा धोकर तैयार हुई और पापा मुझे लेने के लिए आ गए। मैं वहाँ से अपने घर आ चुकी थी मगर जीजा के साथ फोन पर जुड़ी हुई थी। हर रोज हम लोग फोन पर बाते करते और जीजा फोन पर ही मेरी चड्डी गीली कर देते। जीजा. मुझे चोदने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे थे मगर हम दोनों को ही कोई सही मौका नहीं मिल रहा था। मैं भी चुदने के लिए बेताब हुए जा रही थी रोज उंगली करती और जीजा के मूसल जैसे लंड को याद करती। दोस्तो, कहानी अभी जारी है और आप कहानी के अगले भाग में पढ़ेंगे कि किस तरह से मुझे और जीजा को एक शानदार मौका मिला और जीजा ने मेरी कुँवारी पुद्दी की धज्जियां उड़ा दी। देसी हॉट गर्ल सेक्स कहानी पर अपने विचार मुझे. मेल और कमेंट्स में बताएं.
[email protected] देसी हॉट गर्ल सेक्स कहानी का अगला भाग: जीजाजी ने मेरी जवानी को मसल दिया- 2
स्रोत:इंटरनेट