. मगर मैं फिर भी उनके लंड को आगे-पीछे करती रही यही सोच कर कि जीजा जी अभी शायद स्तनपान में व्यस्त हैं.
फिर उन्होंने अपना लंड मेरे मुंह के पास किया और उसे चूसने के लिए कहा.
मैंने उनके लंड को मुंह में भर लिया.
मैं जोर-जोर से उनके लंड पर अपने होंठ चलाने लगी.
मैं उसको पहले की तरह सख्त और मूसल जैसे आकार में लेकर आना चाहती थी.
मगर तीन-चार मिनट में ही जीजा जी के लंड ने वीर्य मेरे मुंह में छोड़ दिया.
मैंने उनके वीर्य को मुंह के अंदर ही रोक लिया और उठ कर बाथरूम में चली गई.
मैंने मुंह को साफ किया और फिर खुद को भी साफ करके वापस आ गई.
आने के बाद जीजा जी ने फिर से मुझे अपनी गोद में बैठा लिया और मैं नंगी ही उनकी गोद में जाकर बैठ गई.
वो मेरे बदन को चूसने लगे.
कभी गर्दन पर तो कभी मेरे गालों पर मुझे चूमने लगे.
थोड़ी देर के बाद उनके लंड में फिर से तनाव आना शुरू हो गया.
जैसे ही लंड में तनाव आया उन्होंने मुझे नीचे लिटा दिया और मेरी दोनों टांगों को उठाकर ऊपर कर दिया जिससे मेरी चूत पूरी तरह से खुल गई.
जीजा जी ने अपना लंड मेरी चूत पर सेट किया और धक्के देने लगे.
मगर उनका लंड अंदर नहीं जा पा रहा था.
जाने से पहले ही मुड़ कर रह जाता था.
मेरी चूत में आग लगी हुई थी उनके लंड के छूने से.
मैं चाहती थी कि वो मेरी चूत को चोद दें.
बहुत दिनों बाद जीजा जी से पलंग तोड़ चुदाई करवाने के मूड में थी मैं.
जब लंड अंदर नहीं गया तो मैंने गर्दन ऊपर उठाई.
जीजा की तरफ देख कर पूछा- क्या हुआ? शुरू करो न जीजा जी? मैंने जीजा के चेहरे पर कुछ परेशानी सी के भाव देखे और फिर अपनी चूत की फांकों को खुद ही अलग करके उनको लंड डालने के लिए कहा.
मैं उनके लंड के घुसने का फिर से इंतजार करने लगी.
सोच रही थी कि लंड बस अब घुसने ही वाला है मगर वो बार-बार इधर-उधर फिसल जा रहा था.
फिर मैंने अपने हाथ से उनका लंड पकड़ा और अपनी चूत पर लगाया और उसको अंदर लेने की कोशिश करने लगी.
मगर लंड फिर भी नहीं घुस पाया.
परेशान होकर मैंने जीजा जी को अपने ऊपर से उतार दिया.
मैंने उनको नीचे लेटने के लिए कहा.
अब मैं खुद उनके ऊपर चढ़ कर बैठ गई.
मैं एक हाथ से चूत को फैला कर दूसरे हाथ से लंड को चूत में लेने की कोशिश करते हुए बैठने लगी.
मगर फिर भी लंड मुड़ कर बाहर ही रह जाता था.
मेरी चूत टाइट थी मगर जीजा का लंड बासी ककड़ी की तरह यहां वहां चला जाता था.
अंत में मेरे सब्र का बांध टूट गया और मैंने जीजा से कह दिया- क्या बात हो गई? जवानी खत्म हो गई क्या? जीजा मेरी बात सुन कर शर्मिंदा हो गये और चुपचाप एक तरफ जाकर लेट गये.
मगर मैं अभी भी सेक्स की आग में जल रही थी.
जल बिन मछली की तरह मैं अंदर ही अंदर तड़प रही थी.
स्त्री की वासना एक बार यदि जाग जाये तो फिर कुछ किये बिना वो शांत नहीं होती है.
मैंने मन ही मन जीजा जी को हजार गालियां दे डालीं.
समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ? जीजा ने मुझे गर्म तो कर दिया लेकिन अब शांत करने के लायक वो रह नहीं गये थे.
मैंने अपने एक हाथ से खुद ही चूत को मसलना शुरू किया और जीजा की तरफ गुस्से से देखते हुए चूत को सहलाने लगी.
दूसरे हाथ से मैं अपने चूचों को दबा रही थी ताकि मेरी वासना शांत हो सके.
जीजा जी मेरे साथ ही लेटे हुए थे और देखते ही देखते उनके लंड में जो थोड़ी बहुत कसावट थी वो भी चली गई.
उनका लंड बिल्कुल सिकुड़ गया.
अब मैंने सारी उम्मीद छोड़ दी और बिल्कुल निराश हो गई.
मैंने जीजा से कहा- आप अपना इलाज करवाओ.
वरना आप दीदी के सेक्स के अरमानों का भी गला घोंट देंगे.
जीजा बोले- तुम्हारी दीदी की चूत अब बिल्कुल ढीली हो चुकी है.
उसकी चूत के साथ मेरा काम चल जाता है.
हम दोनों की स्थिति एक जैसी ही है लगभग लेकिन तुम्हारी चूत ऐसी है कि अभी ज्यादा चुदी न हो.
इतना कहकर वो चुप हो गये.
मैंने कहा- मेरे पति तो जब भी आते हैं मेरी अच्छे से चुदाई करते हैं.
मगर आपका लंड है कि ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा है.
आप तो मुझे बीच में छोड़ कर चल दिये.
लेकिन अब मैं क्या करूँ? कैसे शांत करूं इसको? जीजा ने मेरी बात का कोई जवाब न दिया.
वो चुप ही रहे.
जब मुझे कुछ भी उपाय न सूझा तो मैं उठ कर जीजा की छाती पर जाकर बैठ गई और अपनी चूत को उनके मुंह पर लगा दिया.
मैंने कहा- चाटो अब इसको.
जीजा जी मेरी चूत को चूसने-चाटने लगे.
वो भी अच्छी तरह से चाट रहे थे क्योंकि उसके अलावा उनसे अब कुछ और नहीं होने वाला था.
काफी देर के बाद मेरा पानी निकला.
जीभ से चाट कर जीजा ने मेरा पानी तो निकाल दिया लेकिन लंड की चुदाई की प्यास तो लंड ही बुझा सकता है.
चूत को चाट कर शांत करवाना तो दूसरा विकल्प है.
मेरे प्यारे दोस्तो, उस दिन मुझे पता चला कि जब मर्द और औरत में से कोई एक भी प्यासा रह जाये तो उसके मन पर क्या गुजरती है.
मेरे साथ हुई ये घटना सत्य है इसलिए मैंने ऐसे शब्दों का प्रयोग किया.
उस दिन मुझे चुदाई वाली संतुष्टि नहीं मिल पाई.
आप लोगों के साथ ये बात शेयर करके मैंने अपने मन को हल्का करने की कोशिश की है.
उम्मीद है कि आप मेरी बात को समझ पायेंगे.
इस कहानी को पढ़ कर आपको कैसा लगा मुझे मेल करके बतायें.
मैं आपके विचारों का स्वागत करती हूँ.
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जल्दी ही मैं अपनी अगली किसी कहानी के साथ फिर वापस आऊंगी.
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स्रोत:इंटरनेट