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जीजा के साथ मेरा सुहागदिन 2

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जीजा के साथ मेरा सुहागदिन 2 1

. मुझे ऐसा लगा कि किसी ने मेरी चूत में चाकू घुसा दिया.
मैं दर्द के कारण तड़पने लगी.
जीजा जी वहीं रुक गये और मेरे होंठों को मुँह में लेकर चूसने लगे.
मैंने अपनी योनि में आज से पहले कभी लिंग नहीं लिया था इसलिए दर्द बहुत ही ज्यादा हो रहा था.
दो मिनट तक जीजा जी ऐसे ही पड़े रहे और फिर बोले- बस अब जो दर्द होना था वो हो गया, अब मजे ही मजे होंगे.
मैं भी जीजा की बात से सहमत हो गई थी क्योंकि मेरी योनि का दर्द कम होना शुरू हो गया था.
मैंने धीरे से पूछा- आपने एकदम से क्यों डाल दिया? आपको पता है कि इस तरह कितना दर्द हुआ मुझे.
जीजा जी बोले- झटके से डालने में दर्द कम होता है, नहीं तो पता नहीं कितनी देर तक होता.
अब जीजा जी आराम से थोड़ा-थोड़ा करके हिलने लगे तो उम्म्ह… अहह… हय… याह… मुझे दर्द फिर से होने लगा मगर कुछ ही देर में फिर मैंने अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया.
दो मिनट तक वो ऐसे ही करते रहे और मेरे मुँह को अपने मुँह से बंद करके फिर एक बार जोर का शॉट मारा तो इस बार मैं बेहोश सी हो गई.
मुझे पता नहीं था कि लौड़ा पहले पूरा नहीं गया था.
मैंने सोचा था कि पूरा चला गया मगर पहले शॉट पर केवल दो इंच ही गया था.
दूसरे शॉट में जड़ तक घुस गया था.
मेरी हालत खराब हो गई थी और खून की एक पिचकारी सी मेरे पैरों में से बहने लगी.
नीचे बिछा हुआ कपड़ा खून से भीग कर लाल हो गया.
जीजा जी ने मेरा मुँह अपने मुँह से बंद कर रखा था तो मैं चीख भी नहीं सकती थी.
बस तड़प कर रह गई.
जब मेरी आंखों से आंसू आने लगे तो जीजा जी कहने लगे कि अब पूरा घुस गया है और अब दर्द नहीं होगा.
वो मुझे प्यार से सहलाने लगे और पटाने लगे पर मुझे बहुत ही ज्यादा दर्द हो रहा था.
मैंने सोच लिया था कि आज नहीं करवा पाऊंगी.
जब तक चूत में लिंग नहीं लिया था तो लग रहा था चूत में लिंग जायेगा तो बहुत मजा आयेगा लेकिन मेरे साथ तो उल्टा हो गया था.
मुझे नहीं पता था कि चूत में लिंग जाने पर इतना दर्द भी होता है.
मैं जीजा के मूसल लंड को झेलने में खुद को असमर्थ महसूस करने लगी थी.
मगर अब तो लिंग योनि में घुस चुका था.
उसको मेरी कुंवारी चूत का खून मुंह लग गया था.
अब जीजा जी के लिंग को बाहर निकलवा पाना बहुत ही मुश्किल काम था.
मेरे पास चुदने के सिवाय दूसरा कोई रास्ता नहीं था.
मेरे मन की हालत को देख कर जीजा जी को पता चल गया कि मैं सेक्स के लिए तैयार नहीं हो पा रही हूँ.
इसलिए वो मेरे निप्पल को दबाने लगे.
मैंने कहा कि मुझे जाने दो.
मुझे बहुत दर्द हो रहा है.
वो बोले- बस दो मिनट तक करने दो नहीं तो मैं अधूरा रह जाऊंगा.
जीजा जी अब हिलने लगे.
धीरे-धीरे मैं भी दर्द सहन करने लगी.
कुछ देर बाद मेरी फुद्दी सुन्न सी हो गई और मुझे दर्द कम होने लगा.
जीजा जी ने अब अपनी स्पीड थोड़ी सी बढ़ाई और मेरे चेहरे को देखने लगे.
उनको पता लग गया था कि मेरी चूत में अब दर्द नहीं हो रहा है.
जीजा जी मेरी चूचियों को दोनों हाथों से दबाने लगे.
मुझे राहत तो मिली पर दर्द तो हो ही रहा था.
मैं सहन कर रही थी.
कुछ देर बाद मुझे अपनी फुद्दी में गीला सा महसूस हुआ और अंदर सनसनी सी महसूस हुई.
मुझे अच्छा भी लगा.
अपनी स्पीड को बढ़ाते हुए जीजा जी ने मेरे गालों को चूमना शुरू कर दिया.
अब मैं भी उनका विरोध नहीं कर रही थी.
मेरे जीजा मेरी चूत को चोदने में लगे हुये थे.
चुदाई करते हुए वो फ्री होने का नाम ही नहीं ले रहे थे.
मेरा पानी एक बार निकल चुका था.
जीजा जी पूरी गति के साथ मेरी चूत में लंड को घुसाने लगे थे.
मैंने अब उनकी गर्दन को बांहों में भर लिया और अब मैं भी गर्म होने लगी.
जीजा जी खुश होकर जोरों से मेरी फुद्दी को चोदने लगे.
जब दूसरी बार मुझे महसूस हुआ कि अब मेरा पानी निकलने ही वाला है तो मैंने जीजा की तरफ अपने होंठों को बढ़ा दिया.
जीजा जी ने मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया और मेरी चूत को चोदते रहे.
जीजा जी इतनी देर से नई सील पैक फुद्दी को ठोक रहे थे तो कितनी देर रह सकते थे.
उनका भी शरीर अब अकड़ने लगा और फुद्दी में पानी की नदी बहा दी.
दोनों ने एक साथ ही पानी छोड़ दिया और मैंने अपनी आंखे बंद कर लीं.
मैं इस चरमोत्कर्ष का आनंद लेने लगी.
जीजा जी मेरे ऊपर निढाल हो कर गिर पड़े.
मैंने जीजा जी को ऊपर से हटा दिया तो वह मेरी बगल में लेट गये.
उसके बाद जब वो सामान्य हो गये तो उठ कर बाथरूम में चले गये.
मेरा बदन मेरा साथ ही नहीं दे रहा था.
मैं वहीं बेड पर पड़ी हुई सोच रही थी कि मेरी फुद्दी का आज उद्घाटन हो गया है.
मजा तो आया मगर अब कुछ बुरा भी लग रहा था.
पता नहीं कैसी भावना थी वो मैं समझ नहीं पाई.
मैं यह सब सोच रही थी कि जीजा जी बाथरूम से बाहर आ गये.
बाहर आकर कहने लगे कि सपना तुम भी अपने आप को बाथरूम में जाकर साफ कर लो.
जब उनकी आवाज मेरे कानों में गई तो मैं अपने ख्यालों से बाहर आ गयी.
मैंने जीजा जी को बताया कि मुझ से उठा नहीं जा रहा है.
उसके बाद जीजा जी ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और खुद ही मुझे बाथरूम में लेकर गये.
मैंने अपने आप को साफ कर लिया और जीजा जी ने फिर से मुझे उठा कर बेड पर लेटा दिया.
उसके बाद जीजा जी ने लाइट ऑन कर दी.
हम दोनों अभी तक नंगे ही थे.
मैंने नीचे गद्दे पर देखा तो पूरे गद्दे पर लाल खून के निशान हो गये थे.
मैं यह सब देख कर डर गई मगर जीजा जी ने मेरे बालों में हाथ फिराना शुरू कर दिया.
उसके बाद जब मैं कपड़े पहनने के लिए उठने लगी तो जीजा जी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरी चूची को दबाते हुए कहने लगे कि एक राउंड और कर लेते हैं.
मैंने उनको साफ मना कर दिया.
मैंने जीजा जी को बोल दिया कि कल दिन में करना.
मैं सच में उस वक्त दोबारा जीजा जी का मूसल लंड अपनी योनि में नहीं लेना चाहती थी.
मेरी चूत में पहले से ही बहुत दर्द हो रहा था.
मैंने जीजा जी को सारी बता दी और जीजा जी मान भी गये.
जीजा जी ने खुद अपने हाथों से मुझे मेरे कपड़े पहना दिये.
उसके बाद उन्होंने मुझे बच्चों वाले कमरे में सुला दिया.
जीजा के साथ मेरा सुहागदिन तो नहीं हो सका मगर चुदाई की शुरूआत हो गई थी.
यह थी मेरी कहानी.
अगर आपको कहानी पसंद आई हो तो मुझे मेल करके जरूर बताना ताकि मैं आगे भी आप लोगों के लिए अपनी और भी कहानियाँ लिख सकूँ.
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स्रोत:इंटरनेट