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जीजा ने मुझे रंडी बना दिया 2

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जीजा ने मुझे रंडी बना दिया 2 1

. उसके करीब 20 दिन के बाद तुम सतना में अपनी बुआ के घर सिद्धार्थनगर बढैया में मुझे ले गये.
वो हमारा पहला सुहागदिन था.
तुमने मुझे उस सुहागदिन में बहुत चोदा और मैंने भी अपनी चूत जमकर चुदवाई थी.
मगर उसके पहले मैं चित्रकूट गई थी.
घूमने का बहाना था लेकिन मैं तुमसे मिलने के लिए गई थी.
वहां पर एक होटल में रात को जब मैं अपने जीजा के साथ रुकी हुई थी तो रात में तुमसे फोन पर सेक्सी बातें कर रही थी.
उस रात को जीजा ने मेरा और तुम्हारा फोन सेक्स सुन लिया था.
उनका लंड भी हमारी सेक्सी चैट को सुन कर खड़ा हो गया था.
उनसे कंट्रोल नहीं हुआ और उन्होंने मुझे वहीं पर चोदना शुरू कर दिया.
मैं तुमसे फोन पर बात करती रही और वो मुझे चोदते रहे.
वहां पर मैंने जीजा से अपनी चूत चुदवाई थी.
वैसे तो लॉज हमें बाप-बेटी के रूप में मिला था और मेरे जीजा हैं भी मेरे से उम्र में 20 साल बड़े, लेकिन उन्होंने मेरी चूत चोद दी.
फिर चुदाई के बाद लॉज के मैनेजर ने मुझे वहीं बेड पर नंगी देख लिया.
उसने भी मुझे चोदने की बात की क्योंकि हमने मैनेजर को बाप-बेटी का रिश्ता बताया था.
लॉज के मैनेजर ने भी मुझे बहुत चोदा.
वहां पर ऐसी सिचुएशन हो गई कि उसके साथ ही वहां के नौकर ने भी अपना लंड मेरे मुंह में दे दिया था.
उसका लंड भी मुझे चूसना पड़ा नहीं तो मैनेजर हमें रूम से बाहर कर देता.
इसलिए मैंने वो सब किया.
बस मेरे साथ इतना ही हुआ है आज तक.
अब तुम मुझे रंडी समझो या वेश्या समझो … वो तुम देख लो! लेकिन जो भी सच था वो मैंने तुमको बता दिया है.
अब तुम्हें ही देखना है कि क्या करना है.
हां ये बात भी सच है कि मेरे पापा ने एक दो बार मेरी मां को किसी और के साथ रंगे हाथ पकड़ा था.
उसके बाद हमारे घर में बहुत लड़ाई हुई थी.
मेरी मां ने कीटनाशक दवाई भी पीने की कोशिश की और पापा उस दिन बहुत चिल्ला रहे थे तो सारे मौहल्ले को पता लग गया था कि मेरी मां के पास बाहर के मर्द भी आते हैं.
उसके बाद सबको पता लग गया था कि हमारे घर में जो भी मर्द आते हैं वो सेक्स के लिए ही आते हैं.
मेरी बड़ी दीदी भी शायद कुछ वैसी ही रही इसलिए लोग मुझे भी वैसी ही मानने लगे हैं। मेरे बारे में भी वैसा ही सोचते हैं, जैसे मेरी मां और बहन के बारे में सोचते हैं.
यही मेरी सच्चाई है जो मैंने तुम्हें साफ-साफ बता दी। मगर मैं तुम्हें सच्चे दिल से प्यार करती हूं.
मैंने कभी किसी और से प्यार नहीं किया है आशीष.
तुमको ही चाहती हूं.
यह बात बात बताने के बाद आशीष मुझसे कई दिन तक नॉर्मल बातें करता रहा.
फिर एक दिन मेरे बड़े पापा की छोटी बेटी के पति जो रिश्ते में मेरे जीजा लगते हैं वो आये हुए थे.
मैं टीवी देख रही थी.
तभी आशीष का फोन आ रहा था.
मगर जीजा ने मेरा फोन उठा लिया.
उस वक्त टीवी में कुछ अजीब सी आवाजें आ रही थीं.
जैसे सेक्स में आह्ह आह्ह की आवाज होती है वैसी ही आवाज थी वो.
आशीष ने वो आवाज सुन ली.
मगर वो कुछ बोला नहीं.
आशीष ने सोचा कि मेरे जीजा मुझे चोद रहे हैं.
उन्होंने मेरी चूत में लंड डाला हुआ है और मैं उनसे भी अपनी चूत को चुदवाने में लगी हुई हूं.
उस वक्त टीवी की आवाज ही ऐसी हो रही थी.
मुझे तो पता भी नहीं चला कि ये सब कब और कैसे हो गया.
फोन अभी भी चालू था क्योंकि मेरे जीजा ने फोन नहीं काटा था.
आशीष आधे घंटे तक वो सारी आवाजें सुनता रहा.
फिर जब मैंने आशीष को फोन किया तो उसने मुझे बहुत डांटा और मुझे गाली देने लगा.
वो पूछने लगा कि तुम्हारे घर में कौन है अभी तो मैंने बता दिया कि मेरे जीजा हैं.
वो समझा कि मैं अपने जीजा से चुदवा रही हूं.
लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था.
मैंने उसको हर तरह से यकीन दिलाने की कोशिश की लेकिन उसने मेरी बात का यकीन नहीं किया.
उसने कहा कि आज के बाद वो कभी मेरे पास फोन नहीं करेगा.
उसने मेरे साथ रिश्ता खत्म करने की बात कही.
मैं तीन तक आशीष को फोन करती रही लेकिन उसने मेरा फोन नहीं उठाया.
मैं बहुत परेशान रहने लगी थी.
मेरा मन उससे बात करने के लिए करता था लेकिन वो मुझे गलत समझ रहा था.
उसके बाद मैंने एक सुबह 4 बजे के करीब फोन किया तो उसने मेरा फोन उठा लिया.
मैं उससे रोते हुए कहने लगी कि मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं.
मेरे मन में बहुत ग्लानि हो रही थी.
मैंने उसको बोलने का मौका भी नहीं दिया और सारी बात उससे अपनी तरफ से ही कहने लगी.
उसको समझाया कि उस दिन मेरे बड़े पापा के दामाद रूम में बैठे हुए थे लेकिन उसने मेरे साथ कुछ भी गलत नहीं किया.
वो बस बेड पर लेट कर टीवी देख रहे थे और उन्होंने मेरी चूत को छुआ तक नहीं.
हमारे बीच में सेक्स जैसा कुछ भी नहीं हुआ.
जब मेरी सारी बात खत्म हो गई तो वहां से आवाज आई कि मैं आशीष नहीं उसके चाचा का लड़का विजय हूं.
मैं हैरान रह गई.
मैंने सारी बात विजय को बता दी थी ये सोच कर कि आशीष को बता रही हूं.
उसके बाद मुझे ध्यान आया कि आशीष ने कई बार विजय के बारे में बताया था.
वो उसके साथ ही रहता था और वहीं पर दोनों साथ में जॉब करते थे.
विजय कहने लगा कि भाभी मुझे आपके और आशीष के बारे में सब कुछ पता है.
आप मुझ पर भरोसा कर सकती हो.
वो बार-बार मुझे भाभी कह कर बुला रहा था तो मैंने उस पर विश्वास कर लिया.
मुझे अच्छा लग रहा था कि वो मुझे समझने की कोशिश कर रहा है.
उसके बाद मेरी विजय से रोज ही बात होने लगी.
हम लोग फोन पर दो दो घंटे तक बातें करते रहते थे.
मैं दुखी थी और विजय से बात करके मेरा मन हल्का हो जाता था.
ऐसे ही मैं विजय से खुलने लगी.
सारी बात उसको बताने लगी.
वो भी मेरी सारी बात सुनता था और मुझे समझाता था और कहता था कि वो आशीष और मेरे बीच में जो गलत फहमी हो गई है वो भी दूर कर देगा.
उसके बाद उसने मुझसे पूछा कि आशीष के साथ मेरा पहला सेक्स कब हुआ था.
मैंने विजय को सारी बता दी कि कैसे आशीष और मैं बिना कपड़ों के पहली बार पकड़े गये और फिर कैसे आशीष ने सतना में पहली बार मेरी चूत की चुदाई की थी.
मैंने हर एक बात विजय को बतानी शुरू कर दी.
वो भी मेरी बात ध्यान से सुन रहा था.
उसको बता कर मैं भी मन हल्का फील करती थी.
इसलिए मुझे उस पर विश्वास हो गया था.
मैंने अपने सारे राज उसको बताना शुरू कर दिये.
कहानी अगले भाग में जारी रहेगी.
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स्रोत:इंटरनेट