. घर के कामों में दिन गुजर गया और रात हो गयी, मैं बेड पर बैठे जेठ जी का इंतजार कर रही थी.
उतने में जेठ जी आये और मेरे पास बैठ गए- नीतू, कल रात के लिए मुझे माफ़ कर दो.
मैं- जेठ जी, मैंने आपको तो कब का माफ कर दिया है, अब मुझे आपके मूसल लंड से मेरी चुत की कुटाई करवानी है, जल्दी से आ जाओ, अब मुझे मत तरसाओ.
जेठ- नीतू अभी नहीं, आज मैं तुम्हें अच्छे से और बड़े ही प्यार से चोदना चाहता हूं.. जिसमें हम दोनों को मजा आए.
उन्होंने पहले मेरे बालों पर हाथ फेरे, फिर मेरे सिर को अपने हाथों में पकड़ते हुए मेरे होंठों पर किस करने लगे.
धीरे धीरे होंठों को चूमते हुए उन्होंने अपनी जीभ मेरे मुँह के अन्दर डाल दी.
मैंने भी अपनी जीभ को हरकत में लाते हुए उनकी जीभ से खेलने लगी.
हम दोनों पूरे जोश में एक दूसरे के जीभ और होंठों को चूस रहे थे.
उन्होंने मेरे पल्लू को मेरे सीने पर से हटाया और मेरे ब्लाउज के हुक्स खोलने लगे.
मेरा ब्लाउज हाथों से पूरा उतारकर उन्होंने मेरी ब्रा भी उतार दी.
जेठ जी बड़े ही उतावले हो गए थे, मुझसे फोरप्ले करने की बजाए, वह मुझे जल्द से जल्द नंगी करने पर तुले थे.
मैं भी उनका पूरा साथ दे रही थी.
जेठ जी को शायद मेरे गोल गोल गोरे स्तन बहुत पसंद आ गए थे, वह बारी बारी मेरे स्तनों को चूस रहे थे और सहला रहे थे.
उनके मर्दाना हाथों से हो रही मेरे स्तनों की मालिश की वजह से मेरी चुत पूरी गीली हो गई थी.
मैं सिसकारियां लेते हुए बोली- आहहह … जेठजी बहुत अच्छे और जोर से मसलो, बहुत अच्छा लग रहा है! अब वो और भी जोश में मेरे स्तनों को मसलने और चूसने लगे.
इससे मेरी चुत में खलबली मची हुई थी, मैं अपनी जांघों को एक दूसरे पर रगड़ रही थी.
धीरे धीरे जेठजी नीचे की ओर बढ़े, मेरी नाभि पर किस करते हुए अपनी जीभ को नाभि पर गोल गोल घुमाने लगे.
जेठ जी ने अपना एक हाथ नीचे ले जाते हुए मेरी साड़ी खोल दी, फिर पेटीकोट की गांठ खोलते हुए साड़ी और पेटीकोट एक साथ ही नीचे सरका दिया.
जेठ- नीतू, तुम भी बहुत गर्म हो गयी हो, अपनी पैंटी का हाल तो देखो.
मैंने अपना हाथ मेरी पैंटी के ऊपर रखा, तो वह पूरी गीली हो गई थी, जैसे कि मैंने पेशाब कर दी हो.
मैंने जेठ जी की तरफ देखा, तो वह मेरी उस अवस्था पर मुस्कुरा रहे थे, मुझे बहुत शर्म महसूस हो रही थी.
जेठ- गीली पैंटी की वजह से तुम्हारी चुत को सर्दी हो जाएगी.
मैं- जेठ जी, उसे पहले ही सर्दी हो गयी है, उसी वजह से वह बह रही है, इससे पहले की सर्दी और बढ़े, आप मेरी पैंटी उतार दो.
मैंने उन्हें अपनी पैंटी उतारने के लिए आमंत्रित किया.
उनको भी यही चाहिए था, उन्होंने एक ही झटके में मेरी पैंटी उतार दी.
हल्के भूरे बालों में छिपी मेरी गुलाबी चुत उनके सामने आ गयी.
मेरी मुनिया को देख कर वो पागल हो गए.
वैसे तो उन्होंने कल रात को उसकी चुदाई की थी, पर वो आज उसे अच्छे से देख पा रहे थे.
जेठ जी ने मेरी चुत को सहलाना शुरू कर दिया.
मुझे भी उनका मेरी चुत पर हक जताना बहुत अच्छा लगा.
इतने दिन मैं उनका तिरस्कार कर रही थी, इतने दिन मैं उनके बड़े मूसल का फायदा नहीं उठा सकी, इसलिए मैं खुद को कोस रही थी.
जेठ- नीतू मुझे तुम्हारी मुनिया को चाटना है, उसके बाद ही मैं तुम्हें चोदूंगा.
मैं- जेठ जी, आज से मैं आपकी भोग्या पत्नी हूँ, आपको जो करना है, वो करो और वैसे मुझे भी आपका लॉलीपॉप अच्छे से देखना है और चूसना है.
जेठ जी ने अपनी अपनी लुंगी उतारी, कल की तरह आज भी उन्होंने अन्दर कुछ नहीं पहना था.
किसी गुस्सैल नाग की तरह उनका लंड फन निकाले डोल रहा था.
जेठ जी नीचे लेट गए और उन्होंने मुझे उनके मुँह पर बैठने को बोला.
मैं उनके पैरों की तरफ मुँह करके उनके मुँह पर बैठ गयी और उनके सीने पर लेट गई.
उन्होंने मेरी चुत के होंठों को अपनी उंगलियों से अलग किया और मेरी चुत में जीभ घुसा दी.
जेठ जी मेरी चुत के हर कोने को चूस रहे थे.
मेरी चुत अब और भी ज्यादा पानी छोड़ने लगी थी.
जेठ- नीतू, तुम्हारी चुत सच में बहुत स्वादिष्ट है, बहुत मीठा पानी है तेरी चुत का.
उन्होंने एक उंगली मेरी चुत में डाल दी.
उंगली से मेरी चूत को कुरेदते हुए जेठ जी बोले- नीतू रानी, तेरी चूत बहुत टाइट भी है.
क्या तुम्हारा पति तुम्हें चोदता नहीं है? मैं- जेठ जी, जाने दो ना उसे, वो नहीं चोदता तो क्या हुआ.
आप तो हो ना, आज से मेरा दूसरा पति मुझे रोज चोदेगा.
उधर जेठ जी का नाग मेरे सामने फन निकाल कर डोल रहा था, मैंने झट से उसे पकड़ा और उसे मुँह में डाल लिया.
मैं जेठ जी के लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.
उनके प्रीकम का स्वाद बहुत मीठा था.
मेरे पति चुसाई के मामले में बहुत शर्मीले हैं.
ना वो मेरी चुत चूसते हैं और ना ही मुझे अपना लंड चूसने देते हैं.
पर इस मामले में मेरे जेठ जी बहुत ही उत्सुक दिखे.
मैं भी बड़े जोश में जेठ जी के लंड को चूसने लगी.
बहुत देर तक हमारा यह चुसाई का खेल चल रहा था.
उनकी चुत चुसाई से मेरी कामवासना भड़क रही थी और वह सिर्फ चुसाई से शांत नहीं होने वाली थी.
मुझे अब उनका मूसल मेरी मुनिया में चाहिए था.
मैंने जेठ जी के लंड को अपने मुँह से बाहर निकाला और उनसे बोली- बस बहुत हो गयी चुसाई … जेठ जी, अब सहन नहीं होता … अब डाल भी दो आप अपना लंड मेरी चुत में.
उनको भी वही चाहिए था, उन्होंने मुझे पलट कर नीचे लिटाया और मेरी जांघों के बीच में आ गए.
उन्होंने मेरी टांगें ऊपर उठाईं और मेरी चुत पर अपना लंड घिसने लगे.
मैं चुदासी सी बोल उठी- जेठ जी … यार अब मत तड़पाओ, मेरी चुत कब से आप के लंड के लिए तरस रही है.
मैं बोल ही रही थी कि जेठ जी ने एक ही झटके में अपना पूरा लंड मेरी चुत में पेल दिया.
मेरी चुत पूरी चिपचिपी होने के कारण उनके लंड को कोई विरोध नहीं हुआ.
मेरे मुँह से एकदम से आह निकल गई- आह मर गई! जेठ जी ने हंसते हुए धीरे धीरे धक्के देने शुरू कर दिए.
वे मेरी चुत में गोल गोल लंड घुमाते हुए मेरी चुत में धक्के देने लगे.
उनके हर वार से मैं पूरी तरह से हिल जाती.
उनके हर धक्के के साथ कामुक लहरें चुत से होकर पूरे बदन में फैल जाती थीं.
ऐसी चुदाई हो रही थी, जिससे लग रहा था कि ये ऐसे ही चलती रहे, कभी खत्म ही ना हो.
मैं भी नीचे से कमर हिलाते हुए उनके हर धक्के का उत्तर देने लगी.
जेठ जी लगातार मुझे चोदे जा रहे थे.
इसी दौरान मैं एक बार झड़ भी चुकी थी, पर मुझे पूरी संतुष्टि नहीं मिली थी.
फिर आखिरकर वह पल आ ही गया, मैं और जेठ जी एक साथ ही झड़ गए.
हम दोनों ने एक दूसरे की बांहों में कुछ देर आराम किया.
उस रात हम दोनों ने न जाने कितने प्रकार से कामसुख लिया.
एक बार मैंने जेठ जी के ऊपर बैठ कर उन्हें जम कर चोदा, तो जेठ जी ने भी खड़े खड़े मुझे दीवार से सटाकर चोद डाला.
उस वक्त मैंने अपनी टांगों से जेठ जी की कमर पकड़ी हुई थी.
भले ही पहले जेठ जी ने मेरे साथ थोड़ी जबरदस्ती की हो, पर उनकी चुदाई मुझे इतनी पसंद आ गयी कि पति के आने तक मैं उनके नीचे ही लेटी रही.
हालांकि मैं अपने पति को भी पूरा खुश रखती हूँ, पर जब भी मुझे मौका मिलता, मैं जेठ जी को बुला कर उनसे चुत की शांति करवा लेती.
आखिरकार मेरे पति ने ही तो मुझे कहा था कि जेठ जी का ख्याल रखना है.
मेरी मदमस्त चुदाई की कहानी आपको कैसी लगी, प्लीज़ मुझे मेल करके जरूर बता दें.
मेरा मेल आईडी है [email protected].
स्रोत:इंटरनेट