. ट्रेन में दोनों टाँगे उठाकर दामाद का लंड स्वीकार किया एक दिन मेरे दामाद जी पवन मुझे लेने के लिए लखनऊ ही आ गए की मम्मी जी आपको हमारे साथ रहना ही है ताकि गुंजन की अच्छे से देख रेख. हो सके.
बेटी की देख रेख करने का सवाल था तो मैं भी मना नहीं कर पाई और तैयार हो गयी बेटी दामाद के साथ उनके घर में रहने के लिए.
लखनऊ रेलवे स्टेशन से शाम को सीधी ट्रैन थी दिल्ली के लिए.
शाम को पांच बजे हम दोनों ट्रैन में सवार हो गए दिल्ली के लिए.
फर्स्ट क्लास ऐसी में टिकट था हम दोनों का.
उसमे सिर्फ मैं और मेरा दामाद बस हम दोनों ही थे बाकि पूरा का पूरा कोच खाली पड़ा था.
हम दोनों बात चीत करने लगे तभी पवन बोला माँ जी अभी आपकी उम्र ही क्या है आप इसी उम्र में नानी बनने वाली हो.
आपने भरी जवानी में अपना पति खो दिया था आप को वो सुख नहीं मिल पाया जो एक पत्नी को अपने पति से मिलना चाहिये था इस लिए मैं तो आपको कहता हूँ की आपको अब अपनी जिन्दगी एक नए सिरे से शुरू करनी चाहिये कब तक एक विधवा की तरह रहोगी और अपनी जवानी को जाया करोगी.
अभी आपकी उर बहुत कम है और आपको भी अपना अकेलापन दूर करने के लिए एक जीवन साथी की आवश्यकता है.
मेरा दामाद पवन मुझे समझा रहा था और अपनी चिकनी चुपड़ी बातों में फंसा रहा था क्योकि वो मेरी बेटी के बाद अब मेरी भी चुदाई करना चाहता था.
पर दोस्तों सच तो ये है की मैं भी ऐसी ही ज़िंदगी चाहती हूँ जैसा की पवन कह रहा था.
मैंने कहा हां पवन आप बोल तो सच रहे हो पर समाज भी कुछ चीज होती है.
अगर लोग देखेंगे की मैं फैशन कर रही हूँ.
तो कहेंगे की देखो इसको विधवा होकर फैशन करती है.
मैं भी चाहती हूँ ज़िंदगी को सही से जीने के लिए पर समझ के डर से ही मैं कुछ नहीं कर पाती हूँ.
तो मेरा दामाद पवन बोल उठा सासु माँ आप तो बस मेरी दोस्त बन जाओ फिर देखो आपको खूब मजे कराऊंगा अच्छे अच्छे कपडे दिलवाऊंगा और हिल स्टेशन भी घुमाऊंगा.
सच पूछिए तो मेरा दामाद मेरे ख्वाब को ही बोल रहा था मैं बिलकुल ऐसे ही ख्वाब देखा करी थी मगर पति के मरने के बाद मेरे सभी सपने टूट चुके थे.
मैंने कहा ठीक है दामाद थी तुम जैसा चाहो वैसा ही करते हैं.
तो मुझसे मेरा दामाद पवन बोला प्रॉमिस मैं बोली प्रॉमिस तो पवन बोला ऐसे नहीं और वो खड़ा हो गया.
वो बोला मुझे बाँहों में भरकर प्रॉमिस करो.
मैं भी खड़ी हो गयी.
और गले लगाते हुए प्रॉमिस बोली.
पर उसके इरादे कुछ और थे.
वो मेरे पीठ को सहलाने लगा और ब्रा को मेहसूस करने लगा.
मैं कुछ नहीं बोली और उसके सीने से चिपकी रही.
फिर क्या था दोस्तों वो मुझे छोड़ ही नहीं रहा था.
मेरे कम्पार्टमेंट दो था चार सीट वाला उसमे दो ही थे.
ट्रैन भागी जा रही थी सर्दी का मौसम में सब लोग सो रहे थे.
पवन ने लाइट बंद कर दी.
अन्धेरा हो गया और वो मेरे होठ पर अपना होठ रख दिया.
फिर धीरे धीरे उसका हाथ मेरी बड़ी बड़ी और टाइट चूचियों पर चला गया और सहलाते सहलाते वो मसलने लगा.
आआह क्या बताऊँ वर्षों हो गए थे किसी मर्द को अपने बड़े बड़े स्तनों से दूध पिलाये हुए.
मैं भी छोड़ दी उससे जो करना है.
पर उसने मुझे कामुक कर दिया.
मेरे तन बदन में आग लग गयी थी.
अपने आप को रोक नहीं पाई और मैं भी लिप लॉक कर ली.
और चूसने लगी उसके होठ को उसके जीभ को.
फिर क्या था दोस्तों उसने मुझे आराम से चलती ट्रेन की सीट पर लिटा दिया और मेरे कामुक जिस्म के साथ अश्लील हरकतें करने के लिए मेरी साडी व पेटीकोट को ऊपर कर दिया.
फिर मेरी साड़ी और पेटीकोट उप्पर उठाने के बाद उसने मेरी पेंटी खींच कर उतार फैंकी.
मेरी पेंटी खोलने के बाद दामाद जी ने मेरे दोनों पैरों को अलग अलग कर के बिच में बैठकर मेरी चूत चाटने व चूसने लगे.
दामाद जी से अपनी चूत चटवाते चटवाते ओह्ह्ह्ह माँ मेरी तो बुर पानी पानी हो गयी तुरंत ही.
मेरी चूत से नमकीन पानीनिकलने लगा और मेरा दामाद पवन से रिस रहे उस नमकीन पानी को अपनी जिब से चाटने लगा.
मैंने उसी दिन अपनी झांट के बाल साफ़ करे थे इस लिए मेरी चूत बिलकुल चिकनी थी.
पति को मरे कई साल हो चुके थे उनके बाद मैंने कभी किसी पराये मर्द के साथ सेक्स नहीं करा जिस वजह से मेरी चूत किसी कुंवारी लड़की की चूत के जैसे बिलकुल टाइट हो चुकी थी.
मेरा दामाद अब मेरे साथ अवैध शारीरिक संबंध बनाने के लिए मेरे ऊपर आया उसकी साँसे तेज तेज चल रही थी और मेरी भी.
उसने पहले मेरे लाल लाल होठों को अपने होठों के बिच दबाकर उन्हें खूब चूसा.
फिर ब्लाउज के हुक खोल दिए और और ब्रा भी निकाल दि.
मेरा खोलने के बाद अब वो मेरे बड़े बड़े स्तनों से किसी छोटे बच्चे की तरह दूध पीने लगा.
मेरा दामाद मेरे बड़े बड़े स्तनों के निप्पल को अपने नुकीले दांतो से काटते हुए मेरे बदन को सहलाने लगा और मैं कामवासना में जलते जलते उमह… आह… आह… करने लगी.
अब मैं पागल हो गयी थी मैंने कहा दे दो लंड अपना.
उसने लंड निकाली और मेरे मुँह में दे दिया.
मैं पवन की लंड चूसने लगी.
मोटा लंबा लंड जैसे ही मैं मुँह में ली मैं और भी कामुक हो गयी मेरी कामुकता भड़क गयी.
मैं होश खो दी और मैं अपने कंठ तक उसके मोटे लंड को ले रही थी.
अब मुझ विधवा महिला को अपने दामाद का मोटा लंड मेरी विधवा चूत में चाहिए था मुझसे अब बिलकुल भी रहा नहीं जा रहा था.
अब मैं सास दामाद के पवित्र रिश्ते की सभी मान मर्यादा को भूल चुकी थी और अब मैं चुदवाने के लिए मैं बिलकुल पागल सी हो गयी थी.
मैं बहुत चुदासी होते हुए अपने दामाद से बोली की बेटा अब मुझसे और रहा नहीं जा रहा है तुम जल्दी से मेरी इस विधवा चूत को चोद दो.
मेरे दामाद ने भी तुरंत ही मेरे पैरों को अलग अलग कर दिया और बड़े प्यार से मेरी चूत को एक टक निहारने लगा.
फिर उसने बिना समय बर्बाद करे जल्दी से अपना मोटा लंड मेरी विधवा चूत के मुँह पर लगाया और एक ही झटके में जोर से मेरी विधवा चूत में घुसा दिया.
उई माँ… आज तो मजा ही आ गया था दोस्तों अपने दामाद के मोटे लंड को अपनी विधवा चूत में लेकर.
उसने जोर जोर से धक्के देते और मेरी चूचियां मसलता.
मैं भी पुरे जोश में आ गयी थी.
मैं मेरी बेटी के पति को कभी अपनी बाहों में भर्ती तो कभी उसे किसी छोटे बच्चे की तरह अपनी चूचियां से दूध पिलाती.
अपने पति की मौत के बाद आज काफी सालों के बाद मुझे चुदवाने का मौका मिल रहा था मैं बहुत किस्मत वाली थी.
मैंने किसी रंडी की तरह से झट अपनी दोनों टाँगे उप्पर हवा में उठाकर दामाद के लंड को अपनी विधवा चूत में स्वीकार किया और अपनी अन्तर्वासना शांत करने के लिए मैं जोर जोर से चुदवाने लगी.
मेरा नंगा दामाद भी मेरी चूत को अपने मोटे लंड से पुरे जोश के साथ चोदने लगा.
करीब एक घंटे तक मेरी बेटी का पति मेरे उप्पर चड़ा रहा और मैं नंगी उसके निचे अपनी दोनों टाँगे उप्पर उठाकर पड़ी पड़ी चुदवाती रही.
एक घंटे की चुदाई के बाद मेरी बेटी के पति ने अपना वीर्य मेरी बुर में छोड़ दिया और फिर दोनों निढाल हो गए.
फिर हम दोनों नंगे ही चिपककर सो गए चुदाई करने की वजह से हम दोनों को ही काफी थकान हो गयी थी इस लिए झट नींद आ गयी.
मैं एक कंबल साथ लायी थी घर से.
हम सास और दामाद दोनों एक ही कंबल में आ गए.
मेरा नंगा दामाद मेरे कामुक जिस्म को बड़े प्यार से सहलाता रहा चूमता रहा.
थोड़ी थोड़ी देर में वो कभी पीछे से कभी ऊपर से कभी साइड से अपना लंड कभी मेरी विधवा चूत में तो कभी मेरी विधवा गांड में डालकर मुझे चोदता रहा.
पुरे सफर वो मुझे अपनी रंडी बनाकर चोदता ही रहा और मैं भी एक रंडी बनकर पुरे मजे से अपने दामाद के मोटे लंड से चुदवाती रही.
दामाद के साथ किया गया यह सफ़र मेरे जीवन का सबसे यादगार पल था जिसका अहसास हर घरी मेरे साथ रहा है.
अब मैं मेरे के घर उनके साथ रहती हूँ.
मेरा दामाद आब भी मौका पाकर मुझे चोद देता है मगर ये बात मेरी बेटी को नहीं पता है.
मैं एक विधवा महिला थी इस लिए बहक गयी और अपनी बेटी के समद के साथ अवैध शारीरिक सम्बन्ध बना बैठी.
हम सास और दामाद का ये अवैध रिश्ता भले दुनिया और समाज की नजरों में गलत हो मगर इस अवैध सेक्स सम्बन्ध ने मुझे वो ख़ुशी दी है जिसके लिए मैं कई सालों से तरस रही थी.
दोस्तों उम्मीद करती हूँ की आप सभी को मेरी अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी ” चलती ट्रेन में अपनी दोनों टाँगे उठाकर दामाद का लंड स्वीकार किया “ बहुत पसंद आई होगी….
स्रोत:इंटरनेट