. वे अब लगभग सत्ताइस अट्ठाइस के होंगे, बोले- अब यही वर्कशॉप डाल ली है, अल्लाह का करम है चल निकली.
कभी आओ तो मिलना, रूको। मैंने कहा- जीजा जी! कोई बात हो तो रूकूं। वे बोले- बात? मैं- कुछ करें? वे- नहीं, अब शादी हो गर्इ। मैं जाने लगा- अच्छा जीजाजी। वे थोड़ा सोच कर बोले- रूको। फिर दिनेश की ओर देखने लगे.
मैंने कहा- इसकी कोई बात नहीं… यह देखेगा तो ट्रेन्ड हो जाएगा। जीजाजी- नहीं, मेरी वर्क शॉप में रहा तो ट्रेन्ड तो यारों ने कर दिया होगा। जैसी तुम्हारी इच्छा। उनका पैन्ट में से उचक रहा था, दिनेश ध्यान से देख रहा था, दिनेश किवाड़ लगाने लगा तो उन्होंने रोक दिया.
वे मुझे एक कोने में ले गए, वहां एक छोटी सी टेबल पड़ी थी, उन्होंने ही मेरी पैन्ट पेंट खोली, अंडरवियर नीचे किया और टेबल पर झुका दिया.
फिर अपना मशहूर लंड निकाला और दिनेश से कहा- उस ताक से तेल की शीशी ला। वह लाया तो मैंने कहा- दिनेश, तू साहब के लंड पर तेल लगा। दिनेश हल्के हल्के से लगा रहा था, जीजाजी मुस्कराए, तो मैंने कहा- दिनेश भाई! लंड पर तेल कस कर रगड़ कर लगाते हैं, दो तीन सड़का मार। तब उसने उनका लंड रगड़ा, अब वह तन गया था.
अब जीजाजी ने मेरी गांड में लंड पेला, दिनेश लम्बा मोटा लंड जाता आश्चर्य भरी निगाहों से देख रहा था.
वे उसे हैरान देख कर बोले- मेरा थोड़ा बड़ा है पर दूसरे को तकलीफ न हो इसका ख्याल रखता हूं। वे खड़े खड़े ही मेरी मारते रहे, मैं मस्ती से आंख बन्द किये चूतड़ हिलाहिला कर गांड मरवा रहा था। जीजाजी बोले- इस बार तो मजे ले रहे हो, उस बार तो तुम बहुत फड़फड़ाए थे.
मैं- जीजाजी! तब मैं कम उम्र का ही था। आपका जबरदस्त हथियार है, आपने फाड़ कर रख दी थी। फिर उन्होने दिनेश का एक जोरदार चुम्बन ले लिया व उसके चूतड़ सहलाते रहे, मेरी गांड मारते रहे.
वे बीस मिनट में निबटे.
हमने कपड़े पहने और हम कमरे के बाहर खुली जगह में बैठे। तब तक पांच साढ़े पांच बजे होंगे, जीजाजी बोले- अभी टाइम है, आपको नाश्ता मंगाते हैं, अब तो कई गाड़ियां हैं.
इन भैया को जाने दो, मैं स्टेशन भिजवा दूंगा! पर दिनेश मुझे छोड़ना नहीं चाहता था, बोला- भाई साहब, इनका गाना सुन लें, गांव में बहुत गाया और लोग इसरार करने लगे! मैंने गाना गाया, वह एक फ्यूजन सों था जो रैप और हमारी बुंदेली लोक धुन राई को मिला कर बना था.
आप सुनें: मोटा मस्त लंड था भारी वो था खेला खाया खिलाड़ी उसने कई लौंडों की मारी उसकी बातों में अय्यारी उसकी आंखों में मक्कारी उसके दिल में थी बदकारी उसने गांड हमारी मारी उसने गांड हमारी मारी उमर थी कम हमारी अब तक नहीं किसी ने मारी भेाली भाली सूरत प्यारी न कुछ जानें. दुनियादारी कोमल चिकनी गांड कुंवारी उसने गांड हमारी मारी उसने गांड हमारी मारी फिर मैं एकदम जोर से सारा बदन हिलाने लगा, चूतड़ जल्दी जल्दी मटकाने लगा, तड़पने और भारी कष्ट का अभिनय किया और नीचे वाली लाईन गाई.
दिनेश भी मेरे साथ गा रहा था फट गई फट गई फट गई फट गई गांड हमारी उसने जबर लंड से फाड़ी उसने जोर जोर से मारी कस के रगड़ी जम के मारी उसने बड़ी देर तक मारी उसने जबर लंड से फाड़ी उसने जबर लंड से फाड़ी फट गई फट गई फट गई फट गई गांड हमारी हम यह गीत गाते रहे, साथ के वर्कर को अच्छा लगा, वो और साथियों को भी सुनने बुला लाए.
पहले तो केवल मैं और दिनेश ही गा रहे थे, फिर सब सुर मिलाने लगे व साथ में नाचने लगे.
साथी लोग खान साहब की ओर इशारा करके नाच रहे थे, मजा ले रहे थे.
पास की एक वर्कशॉप के नफीस भई भी आए थे, यही कोई पच्चीस छब्बीस के होगे, अच्छे हैन्डसम थे, देखते रहे, फिर वे भी नाचने लगे। दो तीन राउन्ड के बाद मैंने कहा- अब जाना है। हम और दिनेश गाड़ी में बैठे, जीजाजी धीरे से बोले- तुमने तो उस दिन का गाना ही बना डाला, इतना दर्द हुआ था? मैंने कहा- जीजाजी! गाने का मजा लें, बुरा न मानें, इसमें किसी का नाम नहीं है। फिर कितना दर्द हुआ यह तो जिसे दर्द हुआ वही बता सकता है। सुन कर दिनेश मुसकराया, जीजाजी भी हंसने लगे। नफीस भाई पास आए ओर बेबाकी से बोले- भाई आज मैं कह सकता हूं कि अपने जो गाने में कहा, ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ था आपका शुक्रिया। आपने मेरा दर्द समझा, जिसे मैं नहीं कह पाया। वे सबके आगे जोर से बोले, सबने सुन लिया, तब एक और जवान साथी बोले- अरे नफीस भाई, ऐसा तो मेरे साथ भी और मेरे कई दोस्तों के साथ भी हुआ! उन्होंने मुझे बताया। हकीकत बयानी है। मेरी ओर उन्मुख होकर बोले- आपका शुक्रिया। मैं- यह सबकी कहानी है। केवल कही मेरे द्वारा गई है.
पर आाप साहिबान ने सपोर्ट कर मेरा हौसला बढ़ाया, शुक्रिया। जीजाजी भी सुन रहे थे, मैंने उनकी ओर देखा, मुस्करा दिया। हम जीप से स्टेशन पंहुचे, मैं उतरा, दिनेश बोला- भाई साहब! आपके साथ दिन गुजरा याद रहेगा। मैं- दिनेश भाई! मुझे भी आप हमेशा याद रहोगे, आपके साथ बहुत मजा आया.
हम अलग हुए कभी न मिलने के लिए! वह जीप लेकर चला गया, मैं स्टेशन की ओर बढ़ा।
स्रोत:इंटरनेट