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तनहा औरत को परम आनन्द दिया 2

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तनहा औरत को परम आनन्द दिया 2 1

. इस दौरान मैं हाथ के अंगूठे से चूत के दाने को भी हल्के हल्के मसल रहा था ताकि वो दर्द को भूल जाये। और मेरी यह तरकीब काम कर गयी, थोड़ी ही देर में मैं मेरी दोनों उंगलियों को गोल गोल उनकी गांड में घुमाने लगा। लग रहा था कि उनकी गांड का छेद खुल गया है और यह सही समय है लंड डालने का। फिर मैंने एक बार फिर से अपने लंड को लुब्रिकेंट से अच्छे से नहलाया और उनकी दोनों टांगों को एक बार फिर से घुटनों से मोड़ कर. उनके ही हाथों में पकड़ा दिया ताकि उनकी गांड का छेद अच्छे से खुल जाए.
पूर्वी ने भी मेरा पूरा सहयोग दिया.
जैसा मैं चाहता था, पूर्वी ने भी ठीक वैसे ही अपनी टांगों को पकड़ कर अपनी गांड का छेद खोल दिया। उस समय पूर्वी के चेहरे पर होने वाले दर्द का डर साफ झलक रहा था। मैंने ज्यादा देर करना ठीक नहीं समझा और पूर्वी के पुट्ठों को सहलाते हुए गांड के छेद पर अपना लंड रख दिया। मैंने इशारे से ही पूर्वी से आगे बढ़ने. की अनुमति मांगी और पूर्वी ने भी अपनी पलकें झुका कर अपनी मूक सहमति दे दी। मैं धीरे धीरे अपने लंड को आगे बढ़ाने लगा, मेरी पहले की गई मेहनत और लुब्रिकेंट की वजह से लंड का सुपारा आराम में गांड में घुस गया। लंड का सुपारा जाने में पूर्वी को कोई तकलीफ नहीं हुई। इस दौरान मैं उनकी चूत के दाने को भी हल्के से मसल रहा था और कभी कभी उंगली भी चूत में डाल देता था। अब धीरे धीरे मैं लंड को आगे पीछे करने लगा, पीछे तो कम पर आगे करने के टाइम हल्का सा ताकत लगा देता जिससे लंड और अंदर चला जाता। पूर्वी के चेहरे और माथे पर दर्द का अहसास साफ झलक रहा था। फिर भी उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया जिससे लंड बाहर निकल जाए या मुझे कोई. प्रोब्लम हो। आगे पीछे करते हुए धीरे धीरे ही सही मेरे लंड का लगभग आधा हिस्सा उनकी गांड में घुस चुका था। अब मैंने एक बार फिर से अपना लंड पूरा बाहर निकाल लिया मेरे लंड निकालते ही पूर्वी ने एक लंबी और. राहत की सांस ली जैसे उसने कोई बाधा पार कर ली हो। पूर्वी- कितना अंदर गया था? मैं- आधा! पूर्वी- फिर निकाल क्यों लिया? मैं- लंड को और गीला करना ह इसलिए … पूर्वी- ओके.
मैं- आपको ज्यादा दर्द तो नहीं हुआ ना? पूर्वी- दर्द तो हुआ … पर उतना नहीं कि बर्दाश्त न कर सकूँ। मैं- ओके … और आगे बढ़ना है या बस? पूर्वी- अब इतना कर लिया तो पूरा करके देखते हैं कि मज़ा मिलता है या दर्द! मैं- मज़ा ही मिलेगा और मिलता ही है. वरना गे बंदे नहीं होते। पूर्वी- ह्म्म्म … चलो फिर से ट्राय करते हैं। इतना बोलकर वो खुद पहले की पोजीशन में आ गयी जैसा मैंने पहले किया था उन्हें, मतलब खुद ही टांगों को घुटने से मोड़ कर हाथों से पकड़ लिया। मैंने एक बार फिर लुब्रिकेंट अपने लंड और उनकी गांड के छेद पर लगाया और लंड डालने लगा। इस बार लंड का आधा हिस्सा आराम से चला गया पर दर्द की वजह से उनकी टांगें छूट गयी उनके हाथ से और बोली- आराम से करना. यार, दर्द हो रहा है। मैं- आराम से ही करूँगा जैसे अभी तक करता आया हूँ। पूर्वी- ह्म्म्म … बोलते हुए अपनी आंखें बंद कर ली मैडम ने! मुझे ऐसा लगा कि जैसे अब ये हर दर्द सहने को तैयार हैं.
और काफी टाइम भी हो गया था, हमें जल्दी जल्दी काम निपटा कर निकलना भी था तो अब ज्यादा देर करने की गुंजाइश भी नहीं थी। और हमने भी दर्द वाले भाग तो पार ही कर लिया था अब तो बस धक्के लगाना था। मैंने एक बार फिर अपना लंड उनकी गांड में आगे पीछे करना शुरू कर दिया और इस बार 5-7 धक्कों में ही मेरा पूरा लंड उनकी गांड में समा गया, थोड़ी देर इसी पोजीशन में उनकी गांड मारने के बाद मैंने उन्हें कुतिया बनने को बोला और वो तुरंत ही कुतिया बन गयी जैसे मेरे ही कहने की देर थी। इस बार मैंने लुब्रिकेंट सीधे मैडम की गांड के छेद में लगाया और अपना लंड पेल कर धक्के पे धक्के लगाने लगा। इस पोज़िशन में गांड मारना आसान होता है और लंड भी जड़ तक. अंदर जाता है। अभी तक उनकी गांड का छेद खुल भी गया था पर दर्द भरी सिसकारियां उनके मुंह से अभी भी निकल रही थी। तो मैंने अपना लंड उनकी गांड से निकाल कर उनकी चूत में डाल दिया जिससे उनकी मस्ती भरी आह निकल. गया। मैंने भी उनकी कमर कस के पकड़ कर जोर जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिये। और मैडम फिर से कराहने लगी- अईया … ओअह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… मज़ा आ रहा है … ऊह … और करो … और जोर जोर करो … पीछे से उतना मज़ा. नहीं आ रहा था जितना अब आगे से आ रहा है, रुको मत प्लीज करते रहो … पेलते रहो मुझे और जोर जोर से … मेरे पति को तो सिर्फ पैसा दिखता है, साले को ये नहीं दिखता कि उसकी जवान बीवी क्या करेगी अकेली! और पता नहीं क्या क्या बोलती गयी। थोड़ी देर में मेरे लंड पर गीलापन महसूस हुआ और पूर्वी ने पूरी ताकत से बिस्तर की चादर को पकड़ लिया और काँपने लगी, मैं समझ गया कि मैडम का पानी निकल गया है लेकिन अभी भी मेरा नहीं हुआ था। डॉगी स्टाइल में चोदते हुए करीब 20 मिनट हो चुके थे, फिर भी मेरा पानी निकल नहीं रहा था.
फिर मैंने एक बार फिर उनकी गांड में लंड डाल दिया और कमर हिलाने लगा। उसके 10 मिनट तक मैंने कभी उनकी चूत तो कभी गांड में लंड डालकर पेला और आखिर में मेरा भी पानी निकल गया। मैंने कंडोम लगाया था तो बाहर निकालने का टेंशन नहीं था। मैं भी बहुत थक गया था और पूर्वी भी … तो मैं उनके ऊपर ही पड़ा रहा कुछ देर तक! थोड़ी. देर बाद … पूर्वी- घर नहीं जाना क्या हमें? मैं- हाँ … जाना है ना! पूर्वी- टाइम तो देखो 3 घंटे होने वाले हैं, अभी थोड़ी देर में ही होटल वाला आकर दरवाजा ठोकने लगेगा। मैं- हाँ … चलो जल्दी जल्दी कपड़े पहन कर निकलते हैं। पूर्वी- हम्म्म्म … फिर हमने फटाफट कपड़े पहने और फ्रेश होकर निकल गए। रास्ते में मैंने पूछा पूर्वी से- दर्द तो नहीं हो रहा है? पूर्वी- दर्द तो नहीं है पर हल्का हल्का जलन जैसा फील हो रहा है. पीछे! मैं- मज़ा आया आपको? पूर्वी- सच कहूँ तो पीछे उतना मज़ा नहीं आया जितना मज़ा, जब आगे कर रहे थे, तब आया। मैं- पहली बार था न इसलिए अगली बार मज़ा आएगा क्योंकि तब दर्द होने का डर नहीं रहेगा। पूर्वी- ह्म्म्म … देखते हैं। थोड़ी देर में हमने अलग अलग रिक्शा लिया और निकल गए.
उसके 2 दिन बाद पूर्वी ने मुझे फिर से अपने घर पर बुलाया और हमने पूरी रात भर सेक्स किया, जिसमें पूर्वी ने खुद से मुझे उसकी गांड फिर से मारने को बोला.
अंधे को और क्या चाहिए बस दो आंखें … उस रात मैंने 2 बार उनकी गांड मारी और 1 बार चूत! आखिर में वो बोली- अब समझ में आया मुझे कि आजकल गे लड़के क्यों बढ़ते जा रहे हैं.
और यह बोलकर हँसने लगी। मैं समझ गया कि आज मैडम को गांड मराने में भी मज़ा आया। पूर्वी मैडम अभी भी मुझसे मिलती रहती हैं, हम कभी वाइल्ड तो कभी रोमांटिक तो कभी रफ़ सेक्स करते हैं, मतलब अभी तक हर तरह का सेक्स ट्राई कर चुकी हैं पूर्वी मैडम मेरे साथ … और आगे पता नहीं क्या क्या करेंगी! दोस्तो, यह सच्ची कहानी लिखने से पहले मैंने इस कहानी की नायिका पूर्वी से उनकी अनुमति ली और लिखने के बाद सबसे पहले उन्हें ही पढ़ने को दिया, उसके बाद ही आप लोगों तक पहुँचाया। पूर्वी मैडम कहानी पढ़ने के बाद बस इतना बोली- जिस दिन हमारी यह कहानी अन्तर्वासना पर प्रकाशित हो जाएगी, उसी रात मैं आपको पूरी रात के लिए फिर से बुलाऊंगी.
अब आप यह कहानी पढ़ ही चुके हैं तो वो रात आ चुकी होगी। मेरी यह सच्ची कहानी आप लोगो को कैसी लगी? मुझे बताइएगा जरूर। जैसा कि मैंने पहले ही बताया कि यह मेरी पहली कहानी है दो भागों में … अगर आपके पास मेरे लिए कोई सुझाव. या शिकायत हो तो कृपया मुझे [email protected] पर मेल करके मुझे अवगत कराएं। आपके मेल का इंतजार रहेगा.
धन्यवाद.

स्रोत:इंटरनेट