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तलाकशुदा का प्यार 1

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तलाकशुदा का प्यार 1 1

. निधि से भी तलाक हो चुका था तो काफी साल से मैं सेक्स से दूर था.
एक तरह से मैंने अपने ख्याल से सेक्स जैसे शब्दों को निकाल दिया था.
मुंबई आने के बाद अपने आप को काम में इतना मसरूफ कर लिया था कि सेक्स का ध्यान भी नहीं आता था.
दिनचर्या कुछ ऐसी थी कि सुबह उठना, फ्रेश होकर ऑफिस और वहां से आकर सो जाना! खैर सिल्क को देखने के बाद मेरे मन में सिल्क के साथ सेक्स की इच्छा हुई.
खैर किसी तरह अपने पे कण्ट्रोल करके उसकी खूबसूरती को निहारने लगा.
सिल्क- कहाँ खो गए? मैं- कुछ नहीं … बस आपकी खूबसूरती में खो सा गया था.
सॉरी! न जाने मेरे मुँह से ये सब निकल गया.
इस पर वो थोड़ा सा शरमाई … फिर बोली- मैं इतनी भी खूबसूरत नहीं हूँ … आप झूठी तारीफ कर रहे हो! “अरे नहीं … मैं सच बोल रहा हूँ.
” मैंने कहा.
“अच्छा ठीक है.
” पर मुझे पता है कि मैं इतनी खूबसूरत नहीं हूँ.
आपने कहा है तो मान लेती हूँ.
” “मैं सच कह रहा हूँ … आप सच में खूबसूरत लग रही हैं.
” सिल्क- अब जाने भी दीजिये … मत कीजिये इतनी तारीफ! फिर मैंने पूछा- आप कॉफी लेंगी? और दो कॉफी आर्डर करके मैं उनसे बात करने लगा.
सिल्क एक स्वतंत्र नारी थी.
शादी का अनुभव उसका भी बुरा था कुछ मेरी ही तरह … उसका पति से तलाक हो चुका था और अब वो चंडीगढ़ में रहती थी.
वो एक विदेशी कंपनी में बड़ी अधिकारी थी और काफी समय के बाद मुंबई आई थी.
उस दिन भी वो दमन पिछली कंपनी के काम से गई थी.
कुछ संयोग ऐसा हुआ कि मुझसे मुलाकात हुई और मैंने उनकी मदद कर दी.
सिल्क ने बताया कि उस दिन उसके साथ उसका एक सहकर्मी था.
पर उसके घर में कुछ अनहोनी हो जाने के कारण उसको सिल्क को अकेले छोड़ के जाना पड़ा और उस बुरे दिन में उसकी कार सॉरी टैक्सी भी ख़राब हो गई उसको सुनसान रास्ते में अकेले चलना पड़ा.
और फिर कुछ लोगों ने उसका पर्स और सब कुछ छीन लिया.
खैर ये सब बातें मेरे साथ हुई जिसको मैंने संक्षेप में आपको बताया.
मैंने भी अपनी राम कहानी सिल्क को सुनाई.
आप ऐसा मान लीजिये कि हम दोनों एक ही नाव में सवार थे.
कब 3 घंटे बीत गए पता ही नहीं चला.
बातों बातों में यह भी पता चला कि उसकी वापिसी की फ्लाइट भी थोड़ी देर बाद थी.
वो चंडीगढ़ वापस जा रही थी.
उसने मेरे से मिलने के लिए अपना काम जल्दी ख़त्म कर लिया था.
उसके जाने की बात सुनकर मैं कुछ उदास सा हो गया जिसको सिल्क ने समझा.
उसने अपना नंबर दिया और कहा- हम फ़ोन पे कनेक्ट रहेंगे.
खैर यह छोटी सी मुलाकात मेरे सुने जीवन में कुछ उम्मीद जगा गई क्योंकि मैं जीवन से इतना निराश था कि कई साल से अकेला रहता हुआ मैं अपनी एक अलग ही दुनिया में बस गया था.
खर्चे मेरे थे नहीं … तो सारा पैसा जुड़ जाता था.
किसके लिए जोड़ रहा था, यह मुझे भी नहीं पता था.
परिवार से नाता कब का टूट चुका था.
हाँ माता पिता को मैं हर माह पैसा भेज देता था.
साल में एक बार मिल भी आता था उनसे.
सिल्क से मेरी बात फ़ोन पे तकरीबन रोज़ ही होने लगी.
शायद हम दोनों ही विवाहित जीवन के कष्टमय दौर से गुजर चुके थे तो दोनों एक दूसरे का दर्द जानते थे.
और धीरे धीरे हम करीब भी आने लगे.
पर यौनाकर्षण जैसी कोई बात नहीं थी.
अब सब कुछ ठीक हो चुका था.
कई बार माता पिता शादी के लिए भी कह चुके थे पर हर बार मैं आदर के साथ मना कर देता था.
इस बीच मेरा दिल्ली का एक हफ्ते का प्लान बना जिसे मैंने सिल्क को बताया.
सोमवार को पहुंच कर शुक्रवार को वापस आना था.
जब सिल्क को प्रोग्राम पता चला तो उसने कहा कि मैं संडे को वापस जाऊं और साथ ही ये भी बोला कि वो शुक्रवार को दिल्ली आ जाएगी और वो साथ में दो दिन गुजारेंगे.
पहली बार मुझे लगा कि सिल्क मुझे पसंद करती है.
बहुत साल बाद लण्ड में कुछ हरकत सी महसूस हुई और काफी साल बाद पहली बार सिल्क को सोच कर मुठ मारी, ढेर सारा गाढ़ा वीर्य निकला और निकले भी क्यों नहीं … इतने सालों से इकट्ठा जो हुआ पड़ा था.
सब कुछ योजना के अनुसार हुआ … शुक्रवार आ गया.
आज मैं कुछ बेचैन था और बहुत बेसब्री से सिल्क का इंतज़ार कर रहा था.
मैं कुछ जल्दी ही होटल वापिस आ गया क्योंकि सिल्क कार ड्राइव कर के आ रही थी.
करीब 5 बजे सिल्क ने होटल में कदम रखा और चेक इन किया.
यह एक बढ़िया होटल था कनाट प्लेस के बहुत पास और उसकी बुकिंग मैंने अलग से करवा के रखी थी.
हम दोनों के रूम अलग फ्लोर पर थे.
अपने रूम में पहुंच कर सिल्क ने मुझे कॉल किया.
उसने रूम नंबर पूछा.
थोड़ी देर में मेरे रूम की बेल बजी और जिसका मुझे इंतज़ार था वो मेरे सामने थी.
सफेद जीन्स और लाल टॉप में, गले में स्कार्फ, खुले कर्ली बाल, आँखों में काजल, सुर्ख होंठ, हील वाली सफेद सैंडल, उफ्फ … क़यामत तक समय रूक जाए! रूपसी अप्सरा … वो किसी भी तरह से 30 या 32 साल की नहीं लग रही थी.
वो 24-25 साल से ज्यादा की लग नहीं रही थी.
वो एक चंचल अल्हड़ नवयौवना लग रही थी.
सबसे पहला रिएक्शन मेरे लण्ड ने दिया.
वो अचानक से ठुमकने लगा.
बहुत जिंदादिली से वो मिली.
मेरा मन तो बाँहों में लेने का था पर कण्ट्रोल करके सिर्फ शेक हैंड किया.
पर मुझे लगा कि वो भी मुझे बाँहों में लेने को मचल रही थी.
या यह कहिये कि एक आग थी जो दोनों तरफ लगी थी.
पर पहल कौन करे ये दोनों को समझ में नहीं आ रहा था, फिर शुरू हुआ बातों का सिलसिला … साथ में कॉफी! आठ बजे हम दोनों घूमने के लिए निकले.
कनाट प्लेस में एक खूबसूरत रिस्ट वाच खरीद कर मैंने उसको गिफ्ट की जिसको उसने तुरंत पहन लिया.
साथ ही सिल्क ने भी ठीक वैसी ही घड़ी मेरे लिए ली जिसको मैंने भी तुरंत पहन लिया.
पूरे समय सिल्क मेरा हाथ अपने हाथ में लिये रही.
कोई भी देखकर यही समझता कि हम दोनों पति पत्नी हैं.
उसके बाद वहीं एक अच्छे रेस्तरां में हमने डिनर लिया, साथ में एक एक का वोडका तड़का लगाया और होटल आ गए.
मैं सोच ही रहा था कि उसको कैसे अपने साथ और देर तक रोकूं.
तभी सिल्क ने आग्रह किया- आप मेरे रूम में चलिए ना! कहानी जारी रहेगी.
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स्रोत:इंटरनेट