. मौसी हम सबके साथ काफी फ्रेंडली रहती हैं, इसलिए मैं खुल कर बोल पाया.
तो मौसी बोली- हां और डिफिकल्ट भी है … काफी मेहनत लगती है इसमें.
कुछ देर यूं ही उनसे बात करते करते मंजिल आ गई और मैंने मौसी को उस मॉल के पास छोड़ दिया, जहां मम्मी ने बोला था.
मौसी मुझे बाय करके मॉल की सीढ़ियां चढ़ने लगीं.
मैंने जाने के लिए गाड़ी का एक्सीलेरेटर दबाया, फिर रुक गया.
मैंने नजर घुमा कर मौसी को देखा.
मौसी ने पीले रंग की कुर्ती और सफ़ेद रंग की लैगी पहन रखी थी … जो उनके चूतड़ों पर तंग थी.
उनके 32 इंच के चूतड़ देख कर तो मेरा लंड दोबारा मचल उठा.
उनके मुड़ने से पहले मैं वहां से रफूचक्कर हो गया.
घर आते ही मैंने सबसे पहले मुठ मारी.
और खुद को ठंडा किया.
मुठ मारते समय मेरे मोबाइल में दीदी की सेक्सी चूत खुली थी.
लेकिन मेरे ख्यालों में दीदी नहीं, बल्कि मौसी थीं.
ये सोच कर मैं हैरान था.
उनका सेक्सी बदन मेरे दिमाग में घूम रहा था.
कमाल सेक्सी थी मौसी.
अब मैं घर में भी उनके सेक्सी बदन को छुप कर ताड़ने लगा.
सुबह जब वो पैंट में योगा करती थीं.
अलग अलग पॉस्चर में उनके सेक्सी बदन को ताड़ना मुझे बड़ा अच्छा लगता था.
मैं छुप छुप कर उनके बदन को निहारता रहता था.
एक रोज मैं हॉल में बैठे अख़बार पढ़ रहा था.
मौसी रोज की तरह बालकनी में योगा कर रही थीं.
मैं छुप कर उन्हें देख रहा था.
मौसी योगा खत्म करके आने लगीं, तो मैं झट से दोबारा अख़बार पढ़ने लगा.
वो कॉफी लेकर मेरे पास आईं.
मैंने अनजान बनते हुए कॉफी थामी.
मौसी ने मेरे लंड को उठा हुआ देखा और मुस्कुरा कर चली गईं.
मैंने पीछे से हल्की नजर से उनको मुस्कुराते हुए देख लिया था.
उनके मुस्कुराने का कारण जानने के लिए मैंने अपने लंड को तरफ देखा, तो पाया कि वो मेरे बरमूदे के अन्दर तम्बू बन चुके लंड को देख कर स्माइल कर रही थीं.
मुझे बड़ी ही शर्म महसूस हुयी.
मैंने जल्दी से बरमूदे को ठीक करने की कोशिश की, लेकिन लौड़ा कहां मानने वाला था.
ये सुबह का समय था … लड़के समझ सकते हैं कि मैं किस हालात में था.
कुछ देर बाद मैंने दीदी को वीडियो कॉल किया ताकि उन्हें नंगी देख कर लंड हिला लूंगा … लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव ही नहीं किया.
मैं झट से उठा और कमरे में जाने लगा.
बीच रास्ते में मुझे दीदी का कमरा खुला दिखा.
मौसी दीदी के ही कमरे में रुकी हुई थीं.
अभी वो किचन में थीं.
मैं ललचाई नजरों से दीदी की कमरे की तरफ देख रहा था.
काश दीदी होतीं, तो मेरे लौड़े का ये हाल न होता.
उनके रहते मैं मुठ मारना तो भूल ही गया.
था.
चुदाई के लिए वो कभी न नहीं कहती थीं.
जब मेरा मन करता, मैं उनके कमरे में जाकर उनके दोनों छेदों का मजा ले लेता.
कुछ नहीं तो वो मुँह से ही मुझे शांत कर देतीं.
मैं झट से दीदी की कमरे में बाथरूम में घुस गया.
वहां मौसी के पहने हुए कपड़े पड़े थे.
मैंने मौसी की स्पोर्ट्स ब्रा उठायी और नाक के पास ले जा कर सूंघा, उसमें से मौसी के बदन और परफ्यूम की मिश्रित खुशबू आ रही थी.
मैंने उनकी ब्रा और पैंटी ली और अपने कमरे में आ गया.
खुद के कमरे में आकर मैंने कमरा लॉक किया और मौसी के अंडरगारमेंट्स से खेलने लगा.
मैं उनकी ब्रा सूंघते हुए अपने लौड़े पर हाथ फेरने लगा.
मैंने ब्रा को बेड पर ऐसे बिछा दिया, मानो वो दीदी के ही चुचे हों.
फिर अपने लौड़े पर हाथ फेरते हुए मैंने मौसी की पैंटी को हाथ में ले लिया और सूंघने लगा … चेहरे पर मलने लगा.
मुझे ये सुगंध कुछ जानी पहचानी सी लगी … तो मैंने पैंटी को अच्छे से देखा.
पैंटी पर नीचे की तरफ सफेद दाग था.
मैं इस तरह के दाग से परिचित हूँ.
मैंने सूंघ कर देखा, तो यह चूत रस था.
मौसी की चूत का रस! मतलब मौसी कल पैंटी में झड़ी थीं.
मेरी मौसी तो बड़ी हॉट माल निकलीं.
मैं तो उन्हें सीधा-साधा समझता था.
खैर … उस दिन तो मैंने मौसी की पैंटी सूंघ कर मुठ मारी और सारा माल उनकी स्पोर्ट्स ब्रा पर गिरा दिया.
उस दिन एक बात तो साफ हो गयी थी.
मौसी की चूत भी प्यासी थी.
मैंने डिसाइड किया कि अब तो मैं मौसी की चूत चोद कर ही रहूंगा.
मुझे पता चल चुका था कि मौसी की चूत भी गर्म है.
मैं मौसी को चोदने की योजना बनाने लगा.
एक दिन मैं मौसी के कमरे में गया- मौसी मुझे आपसे कुछ काम था.
मौसी- हां बोल? मैं- मौसी मैंने कॉलेज में डांस कॉम्पिटिशन में हिस्सा लिया है.
और मुझे डांस का ड भी नहीं आता, मैं चाहता हूं … आप मुझे डांस सिखा दो.
मौसी- पर! मैं- पर वर कुछ नहीं … आप बस सिखाओगे तो सिखाओगे.
मौसी- अच्छा ठीक है.
मैंने उन्हें हंस कर देखा, तो उन्होंने मुझसे बोला कि कल दोपहर 12 बजे तैयार रहना.
मैंने ओके कहा और उनके पास से चला आया.
अगले दिन दोपहर 12 बजे मैं मौसी के कमरे में आ गया.
मौसी ने मुझसे पूछा- तेरी डांस पार्टनर कहां है? मैं- मौसी, अभी तो मैं ही हूँ … आप मुझे सिखा दो … मैं उसे सिखा दूंगा.
उन्होंने कहा- ओके … देख तेरे लिए मैंने कुछ सांग सिलेक्ट किए हैं.
इनमें से तू चूज कर ले.
मैं- मौसी ये सब आप ही कर लो … मुझे नहीं आता.
मौसी- हम्म … फिर ये सही रहेगा.
ये कहकर उन्होंने सीडी को म्यूजिक सिस्टम में डाल कर प्ले कर दिया.
गाना बजना शुरू हो गया और वापस आते हुए मौसी ने कमर लचकानी शुरू कर दी.
उन्हें देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया.
स्टेप्स सिखाते हुए जब वो मेरा पास आईं.
उनके बदन को छू कर मैं एकदम से सिहर उठा.
मौसी ने आज टी-शर्ट और लोवर पहन रखा था … जिनेमं उनके तंग मम्मे बड़े ही कामुक लग रहे थे.
मेरा लंड तम्बू बन फिर से खड़ा हो गया था.
डांस के दौरान एक स्टेप आया, जिसमें मौसी को अपने चूतड़ मेरी जांघों पर रगड़ने थे.
मेरे हाथ मौसी के पेट पर थे.
मौसी ने स्टेप करना शुरू किया.
मेरे खड़े लंड का आभास पा कर उन्होंने सिर उठा कर मेरी तरफ आश्चर्य से देखा … शायद मौसी की अन्तर्वासना जागने लगी थी.
लेकिन वो डांस करती रहीं.
मैं मौके का फायदा बखूबी उठा रहा था.
मुझे डांस सीखने के बहाने मौसी के मस्त और कामुक बदन से रगड़न पाकर मस्ती चढ़ने लगी थी.
मौसी की चुदाई की कहानी का रस अभी छलकना शुरू हुआ है.
आप बस लंड हिलाना छोड़ कर पहले मेल करो कि मेरी मौसी सेक्स स्टोरी कैसी लग रही है.
[email protected] मौसी की अन्तर्वासना की कहानी का अगला भाग: तलाकशुदा मौसी की चूत कैसे मिली-2
स्रोत:इंटरनेट