. उसकी चुदास से मुझे ऐसा लगने लगा था कि आज मेरी बुरी हालत होने वाली है.
कुछ देर बाद मैंने अमित को अपने से अलग किया, तब जाकर वो हटा.
मैं बोली- सिर्फ यही करते रहोगे क्या? अमित वासना से आंखें भर कर बोला- लगता है तेरा पति तुझे बराबर नहीं चोदता है.
मैं बोली- साले, कभी मधु को मेरे पति के साथ सुला कर देख, फिर पता चल जाएगा.
इस पर अमित बोला- फिर इतनी जल्दी क्यों कर रही है.
मैं बोली- साले अगर तेरी बीवी आ गयी और उसने ये सब देख लिया, तो सोच ले, वो तेरा क्या हाल करेगी.
इतना सुनते ही अमित ने मेरी पजामी पेंटी समेत खींच कर अलग कर दी और मेरी चूत निहारने लगा.
फिर मुझे पलटकर मेरी गांड को सहलाने लगा.
मेरे चूतड़ों को मसलते हुए अमित बोलने लगा- आह … क्या संगमरमरी हुस्न है.
दिल तो कर रहा कि यूं ही मसलता रहूं.
मैं हंस दी और उसने मेरी गांड को चाटना शुरू कर दिया.
मैं तो पहले ही मदहोश थी.
उसकी इस हरकत से मैं और भी गर्म हो गयी.
वो मुझे पलटकर पागलों की तरह मेरी चूत चाटने लगा.
मैंने भी टांगें खोल कर उसके मुँह के सामने चुत खोल दी.
वो मेरी पूरी चूत को अपने मुँह में लेकर अच्छे से चूस रहा था … जिससे से मैं एक अलग ही दुनिया में खो गयी थी.
ऐसा मेरे पति कभी भी नहीं किया था.
तब मुझे इस बात की अहसास हुआ कि कभी कभी दूसरे मर्द का भी टेस्ट ले ही लेना चाहिए.
अपना पति तो सिर्फ चूत या गांड मार कर छोड़ देता है.
लेकिन दूसरे मर्द शरीर के हर पार्ट की अच्छे से इस्तेमाल करता है … जो चरम सुख का आनन्द देता है.
अमित करीब पांच मिनट तक इसी तरीके से मेरी चुत को कभी चाटता, तो कभी चूसता.
मैं इतनी गर्मी बर्दाश्त ना कर सकी और मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.
मधु का पति मेरा सारा रस पी गया.
फिर वो मेरी चूत को जीभ से चोदने लगा … जो मेरे लिए ऐसे परम आनन्द की अनुभूति थी … जिसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती.
चुत को जीभ से चोदते समय बीच बीच में उसका दांतों से चुत की फांकों को काटना, मेरी गर्मी मेरी बेकरारी को और बढ़ा रही थी.
मैं अब तक एकदम गर्म हो गयी थी.
मैं उसकी जीभ को अपनी चुत में बहुत ज्यादा एन्जॉय भी कर रही थी.
मैं तो मानो इस वक्त वासना के दरिया में गोते लगा रही थी.
मैं बिल्कुल खो चुकी थी.
लेकिन समय की कमी के कारण मुझे अपने आप पर कंट्रोल करना पड़ा.
मैंने अमित को जबरदस्ती हटाया और मादक आवाज़ में उससे बोली- मेरे से अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है.
जल्दी से मेरी चूत फाड़ दे.
अमित बोला- रानी, तेरी चुत तो पहले ही तेरे पति ने फाड़ रखी है.
मैं तो तेरी चूत का भोसड़ा बनाऊंगा.
लेकिन शुरुआत तेरी गांड मारने से करूंगा.
मैं थोड़ी गुस्से से बोली- पागल मत बनो … इस समय आग मेरी चूत में लगी है … और साले तू पानी गांड पर डालेगा.
तुम अभी यही हो न … फिर कभी गांड भी मार लेना.
ना चाहते हुए उसे मेरी बात मानना पड़ी.
फिर उसने अपने अंडरवियर को उतारा.
उसका लंड एकदम तना हुआ था.
मैं उसके मोटे लंड को देख कर मस्त हो गई.
मुझे उसके लंड से लगने लगा था कि बिना चिकनाई के इसका लंड लेना मेरे लिए कष्टकारी हो जाएगा.
मैं क्रीम की डिब्बी की तरफ हाथ बढ़ाने लगी.
तभी वो मेरे ऊपर सवार हो गया.
तब तक मैंने बेड की दराज से क्रीम निकाल ली थी.
उसने क्रीम की डिब्बी देखी तो मेरी तरफ देखने लगा.
मैं उसे क्रीम दे दी … और लंड पर लगाने के लिए कहा.
वो अपने लंड पर क्रीम लगाने लगा.
उसका लंड मेरे पति के जैसा ही था … मगर मोटा ज्यादा था.
उसने लंड पर क्रीम को लगाया और बिना पूछे मेरी चूत में जबरदस्ती पेलने लगा.
मैं दर्द से चिहुंक गयी और बोली- आह … साले आराम से पेल ना.
लेकिन उसने मेरी एक नहीं सुनी.
अगले ही पल उसने एक जोर का झटका मार दिया और इस बार उसका आधा लंड मेरी चूत की गुफा में प्रवेश कर गया.
मैं उसके मोटे लंड के दर्द से छटपटाने लगी.
इस वक़्त मैं चिल्ला भी नहीं सकती थी.
इतने में उस कमीने ने दूसरा झटका दे मारा और पूरा लंड चुत के अन्दर घुसेड़ दिया.
इस बार मैं दर्द बर्दाश्त नहीं कर सकी और मैं जोर से चिल्लाने लगी.
इतने में अमित मेरे होंठों को अपने होंठों से लॉक करके स्मूच करने लगा.
मैं दर्द से कराह रही थी … उसे ऊपर को धकेल रही थी … लेकिन वो टस से मस नहीं हो रहा था.
वो मेरी चुत में झटके पर झटके दिए जा रहा था और अपने हाथों से मेरी चुचियों को मसल रहा था.
कुछ देर की पीड़ा के बाद अब मुझे भी मज़ा आने लगा था और मैं भी उसका साथ देने लगी थी.
अब वो मेरे रसभरे होंठों को छोड़कर मेरी मदमस्त चुचियों को पीने लगा.
उसने मेरी एक चूची के निप्पल को मुँह में दबाया और मेरी चुत की धज्जियां उड़ाने में लग गया.
तकरीबन 15-20 मिनट तक वो मुझे ऐसे ही तेज गति से चोदता रहा.
मेरे मुँह से भी मादक सिसकारियां निकलने लगी थीं.
अब तो मैं खुद अपनी गांड उठा कर उसके हर झटके का का साथ दे रही थी.
कुछ ही देर में मेरी चूत लंड की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाई.
मेरे मुँह से अपने आप निकलने लगा- आह साले फाड़ दे मेरी चूत को … उफ्फ भोसड़ा बना दे मेरी चुत का … आह अपनी रंडी बना ले मुझे साले … चोद … आह मेरी चुत के छितरे छितरे उड़ा दे.
ये सब बोलने के साथ ही मेरी चुत ने गर्मागर्म पानी छोड़ दिया.
लेकिन अमित अभी भी झटके मार रहा था.
तकरीबन 10 मिनट बाद वो भी झड़ने को आया.
वो अति उत्तेजना में बड़बड़ाने लगा- आह साली ले कुतिया … ले रांड … तेरी तो आज चूत ऐसी की आज चटनी बना दूंगा … आह साली छिनाल कहीं की … आज तेरी सारी गर्मी निकाल दूंगा.
तुझे तो मैं अपनी रखैल बनाऊंगा.. मैं भी उसका साथ देने लगी और इसी के साथ अमित ने मेरी चुत में मानो बम विस्फोट कर दिया.
उसने मेरी चुत को लंड के बारूद से भर दिया और मेरे ऊपर निढाल होकर गिर गया.
हम दोनों वैसे ही तकरीबन 5 मिनट तक लेटे रहे.
फिर हम अलग हुए.
अभी भी मेरी चूत से लंड की मलाई निकल रही थी.
पूरे चादर पर वीर्य फैल चुका था.
फिर हम दोनों उठे और कपड़े पहने.
मैंने झट से बेड ठीक करके चादर को वाशिंग मशीन में डाल दिया.
अमित बाहर चला गया और मैं अपने अपनी बहन मधु के सामने सोफे पर जाकर सो गई.
आप लोगों को मेरे पति के लंड से मेरी दीदी की चुदाई की जीजा साली सेक्स कहानी कैसी लगी, जरूर बताइएगा.
स्रोत:इंटरनेट